असम के शिवसागर में बाढ़ का कहर, घर लौटीं नसीमन जमां का टूटा दिल असम के शिवसागर में बाढ़ के 20 दिन बाद अपने घर लौटीं नसीमन जमां को सब कुछ तबाह मिला। उन्होंने अपनी बर्बाद हो चुकी यादों और दोबारा ऐसी आपदा आने के डर को बयां किया। असम के शिवसागर कस्बे में रहने वाली नसीमन जमां जब भीषण बाढ़ के बीस दिन बीत जाने के बाद रविवार को अपने घर वापस लौटीं, तो वहां का मंजर देखकर उनका दिल टूट गया। उनके घर में शादी की खराब हो चुकी एलबम, उनकी दिवंगत मां की निशानी डिनर सेट के बिखरे हुए टुकड़े और बेटियों की पढ़ाई की उलटी पड़ी मेजें बिखरी पड़ी थीं। बाढ़ के इस भयंकर तांडव ने उनकी जिंदगी भर की कमाई और यादों को तहस-नहस कर दिया था, जिससे वह बेहद भावुक हो गईं। जमां अपनी दो बेटियों के साथ आपदा से ठीक बीस दिन पहले ही घर छोड़कर किसी सुरक्षित स्थान पर चली गई थीं। वर्तमान में उनके मकान के अंदर टखनों तक पानी अभी भी भरा हुआ है। उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे लोग इस घर में दोबारा रहने के लिए कब लौट पाएंगे, लेकिन उससे भी ज्यादा डरावनी बात यह है कि भविष्य में जब दोबारा तेज बारिश होगी, तो उन्हें इस बात का भरोसा कौन देगा कि ऐसी तबाही दोबारा नहीं आएगी। उनके मन में लगातार सुरक्षा और अनिश्चितता का भाव बना हुआ है, क्योंकि इस क्षेत्र में पहले कभी ऐसा जलभराव नहीं देखा गया था। नसीमन जमां ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि उनका यह आशियाना उनके पति के परिवार की पुश्तैनी जमीन पर बना हुआ है। उनके घर के ठीक बगल में उनके देवर का मकान है और उसके आगे उनके चचेरे भाई का घर स्थित है। बाढ़ के पानी ने इनमें से किसी को भी नहीं छोड़ा और सभी घरों में भारी जलभराव हो गया। हालांकि उनका यह भी मानना है कि इलाके में कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनकी स्थिति उनसे कहीं अधिक दयनीय और खराब है। वह भयानक शाम भी उनके जेहन में ताजा है जब उन्होंने मजबूरी में अपना घर छोड़ा था। इक्कीस जुलाई को शाम के करीब छह बजे जब वह अपनी दो नाबालिग बेटियों के साथ घर से बाहर निकली थीं, तब उनके दो मंजिला मकान के भूतल पर चार फुट तक पानी भर चुका था। दिन के समय उन्होंने चार मजदूरों की मदद ली थी और किसी तरह कुछ जरूरी सामान को निर्माणाधीन ऊपरी मंजिल पर रखवाने में सफल रही थीं, ताकि वह पानी से सुरक्षित रह सके। उस डरावने समय को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उनके पति एक सरकारी कर्मचारी हैं और उस दौरान वह आधिकारिक काम के सिलसिले में गुवाहाटी गए हुए थे। दोपहर के वक्त अचानक घर के अंदर पानी घुसना शुरू हुआ और महज छह घंटे के भीतर पानी उनके सीने तक पहुंच गया। शाम ढलने लगी थी और सुरक्षा के मद्देनजर बिजली भी काट दी गई थी, जिसके बाद वे लोग किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से निकल पाने में कामयाब रहे। घटना के बाद से ही उनका पूरा परिवार शहर के दूसरे हिस्से में स्थित उनकी ननद के घर में शरण लिए हुए है। केवल उनका ही नहीं, बल्कि उनके देवर का परिवार भी उसी एक घर में रहने को मजबूर है। आपदा के उस संकट काल में वह अपने साथ कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, थोड़े से कपड़े, गहने और कुछ अत्यंत आवश्यक दस्तावेज ही बचा पाईं। बाकी उनका सारा घर का सामान जैसे सोफा सेट, बिस्तर, अलमारी और रसोई के बर्तन पानी में डूबकर पूरी तरह खराब हो चुके हैं। नसीमन जमां इस बात को अच्छी तरह समझती हैं कि शून्य से शुरुआत करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा। उन्होंने अपनी इस स्थिति पर बात करते हुए कहा कि वे सभी सुरक्षित हैं, यही उनके लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद है। उनकी बेटियां भी धीरे-धीरे इस भारी नुकसान को स्वीकार कर लेंगी और वे सब मिलकर अपने इस घर को एक बार फिर से बसा लेंगे। लेकिन उनकी सबसे बड़ी मांग यही है कि उन्हें प्रशासन की ओर से यह पुख्ता भरोसा मिलना चाहिए कि भविष्य में ऐसी तबाही उनके इलाके में दोबारा नहीं दोहराई जाएगी। उन्होंने अपनी पीड़ा साझा करते हुए आगे कहा कि घटना के बीस दिन बीत जाने के बाद भी उनके पूरे इलाके में पानी जमा हुआ है, जबकि हैरानी की बात यह है कि इस भौगोलिक क्षेत्र में पहले कभी बाढ़ नहीं आती थी। आज स्थिति यह हो गई है कि वे न तो अपने पुश्तैनी घरों को हमेशा के लिए छोड़ सकते हैं और न ही वहां वर्तमान हालात में सुरक्षित तरीके से रह सकते हैं। अब जमां, उनका पूरा परिवार और आसपास के तमाम निवासी प्रशासनिक अधिकारियों से यही उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उन्हें सुरक्षा और समस्या का कोई स्थायी समाधान मिलेगा, ताकि वे अपनी बिखरी हुई जिंदगी को फिर से पटरी पर ला सकें। इसका आप पर असर असम के शिवसागर क्षेत्र में आई बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए जनजीवन पटरी पर लाना और मकानों की मरम्मत कराना एक बड़ी आर्थिक चुनौती बन गया है। • भारत में: पूर्वोत्तर और देश के अन्य बाढ़ प्रभावित हिस्सों में रहने वाले नागरिकों को जलवायु परिवर्तन और जल निकासी व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। • शिवसागर में: स्थानीय निवासियों के घरों में हुए भारी नुकसान के बाद उन्हें अपनी आजीविका और आवास को दोबारा व्यवस्थित करने के लिए प्रशासन की मदद की आवश्यकता है। सवाल-जवाब 1. नसीमन जमां अपने घर से कब बाहर निकली थीं? नसीमन जमां अपनी दो नाबालिग बेटियों के साथ 21 जुलाई को शाम करीब 6 बजे अपने घर से निकली थीं। 2. बाढ़ के समय नसीमन जमां के पति कहां थे? उनके पति सरकारी काम के सिलसिले में गुवाहाटी गए हुए थे। 3. नसीमन जमां वर्तमान में कहां रह रही हैं? वह शहर के दूसरे हिस्से में स्थित अपनी ननद के घर में अपने परिवार के साथ रह रही हैं। 4. घर लौटने पर नसीमन जमां को क्या स्थिति मिली? घर लौटने पर उन्हें अपनी खराब हो चुकी शादी की एलबम, मां का टूटा हुआ डिनर सेट और बेटियों की उलटी पड़ी मेजें मिलीं। 5. बाढ़ के कितने दिन बाद नसीमन अपने घर वापस लौटीं? भीषण बाढ़ के 20 दिन बाद वह रविवार को अपने घर वापस लौटीं। https://trendkia.com/national/assam-floods-nasiman-zaman-returns-to-ruined-sivasagar-home-after-20-days-15520 TrendKia — Har trend, sabse pehle.