असम में बाढ़ का तांडव: 11 जिलों में 6.53 लाख लोग जलमग्न, शिवसागर और जोरहाट में सेना का बचाव अभियान तेज असम में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है, जिससे 11 जिलों के छह लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। पिछले 24 घंटों में 10 नई मौतों के साथ कुल आंकड़ा 41 तक पहुंच गया है, जबकि भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन जल राहत' के तहत मोर्चा संभाल लिया है। असम में बाढ़ का संकट बुधवार को एक बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। राज्य भर में लगातार हो रही बारिश और नदियों के उफान ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौजूदा समय में राज्य के 11 जिले पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं, जिससे 6.53 लाख से अधिक नागरिक गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। जलस्तर बढ़ने के साथ ही जानमाल का नुकसान भी तेजी से बढ़ रहा है और प्रशासन के लिए स्थिति को संभालना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस साल बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसने पूरे क्षेत्र में शोक और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। 24 घंटे में 10 लोगों की मौत, कुल आंकड़ा 41 पहुंचा बाढ़ की विनाशकारी प्रकृति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले केवल 24 घंटों के भीतर ही 10 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। इसके साथ ही इस वर्ष राज्य में बाढ़ से होने वाली मौतों की कुल संख्या बढ़कर 41 हो गई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, यह नई मौतें कई अलग-अलग जिलों में दर्ज की गई हैं। शिवसागर और जोरहाट जिलों में स्थिति सबसे अधिक भयावह रही, जहां तीन-तीन व्यक्तियों की मौत हुई है। इसके अलावा, चराइदेव जिले में दो लोगों की जान चली गई, जबकि कार्बी आंगलोंग और धेमाजी जिलों में एक-एक व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी। यह आंकड़े बताते हैं कि पानी का बहाव कितना तेज और जानलेवा साबित हो रहा है। मौसम विभाग का अलर्ट और 11 प्रभावित जिले हालात में फिलहाल किसी भी तरह के सुधार की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बुधवार के लिए विशेष रूप से 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है, जो भारी बारिश और खराब मौसम की गंभीर चेतावनी है। विभाग ने सभी नागरिकों से अत्यधिक सतर्क रहने की अपील की है। इसके साथ ही, अगले चार दिनों के लिए एक 'येलो अलर्ट' भी जारी किया गया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस दौरान राज्य के कई हिस्सों में तेज गरज और चमक के साथ भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। एएसडीएमए की विस्तृत दैनिक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में शिवसागर, चराइदेव, धेमाजी, डिब्रूगढ़, गोलाघाट, होजाई, जोरहाट, कामरूप, कामरूप महानगर, कार्बी आंगलोंग और नगांव जिले बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इन 11 जिलों में 6.53 लाख से अधिक लोग पानी से घिरे हुए हैं और उन्हें तत्काल मदद की दरकार है। मुख्य सचिव रवि कोटा ने की उच्च स्तरीय समीक्षा इस गंभीर प्राकृतिक आपदा को देखते हुए, असम के मुख्य सचिव रवि कोटा ने बुधवार को राज्य भर में बाढ़ की स्थिति की एक उच्च स्तरीय समीक्षा की। इस महत्वपूर्ण बैठक में उन्होंने सभी संबंधित सरकारी विभागों को राहत और बचाव कार्यों में तत्काल तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए हैं। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया है कि इस समीक्षा बैठक का मुख्य ध्यान राज्य के उन चार जिलों पर केंद्रित रहा जो बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इनमें चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट शामिल हैं। मुख्य सचिव ने इन क्षेत्रों में विभिन्न विभागों की तैयारियों का बारीकी से आकलन किया। बैठक के दौरान, मुख्य सचिव रवि कोटा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में टूटे हुए बुनियादी ढांचे की मरम्मत और बहाली का कार्य बिना किसी देरी के तेज किया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि स्थापित किए गए राहत शिविरों और पानी में घिरे हुए इलाकों में आवश्यक खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य जरूरी सेवाओं की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रहे ताकि प्रभावित लोगों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। भारतीय सेना का 'ऑपरेशन जल राहत' नागरिक प्रशासन के प्रयासों को मजबूती देने के लिए भारतीय सेना ने भी मोर्चे पर उतरकर असम के बाढ़ प्रभावित इलाकों में अपना राहत और बचाव अभियान काफी तेज कर दिया है। सेना ने इस बड़े पैमाने के मिशन को 'ऑपरेशन जल राहत' नाम दिया है। सैन्य टुकड़ियां राज्य प्रशासन और अन्य नागरिक बचाव एजेंसियों के साथ पूरी तरह से समन्वय स्थापित करके शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जिलों में लोगों को बचाने, उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाने और चिकित्सा सहायता प्रदान करने का अहम कार्य कर रही हैं। सेना के अधिकारियों की ओर से 22 जुलाई को शाम 4 बजे तक साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन क्षेत्रों में चार विशेष राहत दल तैनात किए गए हैं। यह दल बाढ़ के पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और जरूरी राहत सामग्री बांटने का काम युद्ध स्तर पर कर रहे हैं। इन दलों की त्वरित कार्रवाई से कई लोगों की जान बचाई जा सकी है। शिवसागर में बचाव कार्य और मेडिकल कैंप शिवसागर जिले में सेना का अभियान विशेष रूप से केंद्रित रहा है। गड़गांव कॉलेज से संचालित की जा रही सेना की टुकड़ियों ने कई जलमग्न इलाकों में प्रवेश किया। इन टीमों ने बैलुंग गांव और ओएनजीसी कॉलोनी सहित कई गंभीर रूप से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर बचाव अभियान चलाया और फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला। बचाव कार्यों के अलावा स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया। नजीरा तहसील के केंदुगुड़ी और बैलुंग गांव में सेना द्वारा विशेष मेडिकल कैम्प स्थापित किए गए। इन शिविरों में सेना की मेडिकल टीमों ने 84 बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों को तत्काल प्राथमिक उपचार और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कीं। चिकित्सा सहायता प्राप्त करने वाले इन लोगों में 32 पुरुष, 34 महिलाएं और 18 बच्चे शामिल हैं, जो बाढ़ के कारण बीमार पड़ गए थे या जिन्हें चोटें आई थीं। चराइदेव में दिसांग नदी का उफान और सेना का संकल्प चराइदेव जिले में स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। यहां भारतीय सेना की तीन अलग-अलग राहत टुकड़ियां एक साथ सोनारी, पटसाकू और डी.के. गांव के क्षेत्रों में बचाव अभियान चला रही हैं। हाल ही में दिसांग नदी के उफान के कारण पटसाकू क्षेत्र में अचानक पानी भर गया और वहां ताजा बाढ़ आ गई। इस नई चुनौती और तेज बहाव के बावजूद, सेना के जवानों ने हार नहीं मानी और राहत तथा बचाव कार्य बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रखा। आंकड़ों की बात करें तो भारतीय सेना ने 22 जुलाई शाम 4 बजे तक 'ऑपरेशन जल राहत' के तहत कुल 990 पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को बाढ़ के पानी से सुरक्षित बाहर निकाला है। इसके साथ ही, प्रभावित परिवारों को 460 से अधिक खाद्य पैकेट और 5,000 से अधिक पानी की बोतलें उपलब्ध कराई गई हैं। फील्ड मेडिकल टीमों और लगाए गए चिकित्सा शिविरों के माध्यम से अब तक 400 से अधिक लोगों को जीवन रक्षक चिकित्सा सहायता दी जा चुकी है। भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि वह इस संकट की घड़ी में असम के नागरिकों को हरसंभव सहायता देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। बचाव अभियान 24 घंटे लगातार जारी है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त सैन्य संसाधनों को भी तत्काल तैनाती के लिए तैयार रखा गया है। इसका आप पर असर • भारत में: यह आपदा मानसून के दौरान पूर्वोत्तर राज्यों के बुनियादी ढांचे की संवेदनशीलता और आपातकालीन तैयारियों की आवश्यकता को एक बार फिर से उजागर करती है। • असम में: शिवसागर, जोरहाट और 9 अन्य जिलों में रहने वाले 6.53 लाख से अधिक लोगों के लिए आजीविका, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पूरी तरह से बाधित हो गई है, जिससे उन्हें तत्काल सरकारी सहायता पर निर्भर होना पड़ा है। सवाल-जवाब 1. असम में मौजूदा बाढ़ से कितने लोग और जिले प्रभावित हैं? असम में वर्तमान बाढ़ से 11 जिलों के 6.53 लाख से अधिक लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। 2. बाढ़ के कारण इस वर्ष अब तक कितनी मौतें हुई हैं? इस वर्ष बाढ़ के कारण अब तक कुल 41 मौतें हो चुकी हैं, जिनमें से 10 मौतें हाल ही के 24 घंटों में दर्ज की गई हैं। 3. भारतीय सेना के राहत अभियान का क्या नाम है? भारतीय सेना द्वारा असम में चलाए जा रहे राहत और बचाव अभियान का नाम 'ऑपरेशन जल राहत' है। 4. मौसम विभाग ने कौन सा अलर्ट जारी किया है? भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बुधवार के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' और अगले चार दिनों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया है। 5. बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित जिले कौन से हैं? मुख्य सचिव की समीक्षा के अनुसार, चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिले हैं। https://trendkia.com/national/assam-men-barha-ka-tandava-11-jilon-ke-6-53-lakha-loga-jalamagna-sivasagar-aura-jorhat-men-sena-ka-bachava-abhiyana-teja-10028 TrendKia — Har trend, sabse pehle.