# असम में विकराल बाढ़ से 95 लोगों की मौत, 1.6 लाख से अधिक नागरिक प्रभावित और 14 जिलों में संकट गहराया

> असम में मानसून की भारी तबाही के कारण अब तक 95 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 14 जिलों के 563 गांवों में 1.6 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। तटबंध टूटने, फसलें डूबने और हजारों पशुओं के बह जाने से ग्रामीण और शहरी इलाकों में स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-08-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/assam-men-vikarala-barha-se-95-logon-ki-mauta-1-6-lakha-se-adhika-nagarika-prabhavita-aura-14-jilon-men-snkata-gaharaya-14263 · **Language:** Hindi
**Tags:** असम बाढ़, असम समाचार, मानसून 2026, शिवसागर, गुवाहाटी जलभराव, आपदा प्रबंधन, असम बाढ़ अलर्ट

असम में पूर्वोत्तर मानसून की मूसलाधार बारिश ने विनाशकारी रूप ले लिया है, जिससे राज्य के बड़े हिस्से जलमग्न हो गए हैं। बाढ़ और लगातार हो रही बारिश की वजह से राज्य में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है और मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार, इस मानसूनी सीजन में बाढ़ और बारिश से जुड़ी आपदाओं के कारण जान गंवाने वाले लोगों की कुल संख्या बढ़कर 95 हो गई है। हाल ही में छह और व्यक्तियों की मृत्यु दर्ज की गई है, जिससे स्थिति की विभीषिका का पता चलता है। राज्य के 14 जिलों में वर्तमान में खतरा लगातार बना हुआ है और करीब 1.6 लाख लोग बाढ़ के सीधे प्रभाव में आ चुके हैं। सैकड़ों गांव पूरी तरह से जलमग्न हैं और प्रभावित परिवार सरकारी राहत शिविरों में दिन काटने को विवश हैं। इन बेघर हुए लोगों के सामने अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि नदियों का जलस्तर कब सामान्य होगा और वे अपने तबाह हुए आशियानों में कब लौट पाएंगे।

## मानसून की भारी तबाही से मौतों का आंकड़ा 95 तक पहुंचा
राज्य प्रशासनिक तंत्र द्वारा जारी अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, असम के 563 गांवों में 1,60,000 से अधिक आबादी इस समय प्राकृतिक आपदा का सामना कर रही है। पिछले 24 घंटों की अवधि में छह अतिरिक्त लोगों की जान चली गई। इन छह दुखद मौतों में से पांच लोगों की मृत्यु ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य बाढ़ के पानी में डूबने की वजह से हुई है। वहीं दूसरी ओर, मोरीगांव जिले के मायोंग क्षेत्र में शहरी जलभराव और बाढ़ के चलते एक व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी। इसके अलावा, उदलगुड़ी जिले से एक नागरिक के लापता होने की आधिकारिक सूचना प्राप्त हुई है, जिसकी तलाश में राहत दल जुटे हुए हैं। ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि बाढ़ का पानी केवल सड़कों और खुले मैदानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने आम लोगों के घरों और जीवन पर सीधा हमला बोला है।

## शिवसागर जिला सबसे ज्यादा प्रभावित, 14 जिलों में रेड अलर्ट जैसे हालात
बाढ़ के वर्तमान संकट में जिलों के अनुसार स्थिति का विश्लेषण किया जाए तो शिवसागर जिला सबसे अधिक विस्थापितों और नुकसान का सामना कर रहा है। शिवसागर में 57 हजार से अधिक निवासी जलप्रलय के कारण बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और वहां दैनिक जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है। शिवसागर के पश्चात गोलाघाट और जोरहाट जिलों की स्थिति भी अत्यधिक चिंताजनक बनी हुई है, जहां हजारों लोग जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। राज्य के जिन 14 जिलों में प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतनी पड़ रही है, उनमें निम्नलिखित जिले शामिल हैं

- **गोलाघाट** और **लखीमपुर**, जहां निचले इलाके जलमग्न हैं।
- **चराइदेव** और **शिवसागर**, जहां भारी तबाही हुई है।
- **बिश्वनाथ** और **धेमाजी**, जहां नदियां उफान पर हैं।
- **कामरूप मेट्रो** और **जोरहाट**, जहां शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्र प्रभावित हैं।
- **सोनितपुर**, **तिनसुकिया** और **नगांव**, जहां प्रशासनिक निगरानी बढ़ाई गई है।
- **दरांग**, **कार्बी आंगलोंग** और **उदलगुड़ी**, जहां बुनियादी ढांचे को क्षति पहुंची है।

## नदियों का बढ़ता जलस्तर और ध्वस्त होते तटबंध
असम में बाढ़ का खतरा लगातार इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। नुमालीगढ़ क्षेत्र में धनसिरी दक्षिण नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है, जिससे आसपास के रिहायशी इलाकों में पानी घुसने का जोखिम और गहरा गया है। मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार, यदि नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला इसी प्रकार जारी रहा, तो आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है। जलस्तर में हो रही प्रत्येक सेंटीमीटर की वृद्धि स्थानीय निवासियों और जिला प्रशासन की धड़कनें बढ़ा रही है।

आपदा प्रबंधन से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ के प्रचंड बहाव के कारण राज्य में सात बड़े तटबंध पूरी तरह से टूट चुके हैं। इन क्षतिग्रस्त तटबंधों में बिश्वनाथ जिले के ब्रह्माजन इलाके में टूटे पांच तटबंध और दरांग जिले के मंगलदोई क्षेत्र में ध्वस्त हुए दो तटबंध शामिल हैं। तटबंधों के टूटने से आसपास के दर्जनों गांवों में अचानक पानी का तेज बहाव घुस गया। इसके अतिरिक्त, बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान हुआ है। चराइदेव जिले के चोलापाथर इलाके में स्थित एक महत्वपूर्ण स्टील ब्रिज बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो गया है। इसी प्रकार उदलगुड़ी जिले के टांगला क्षेत्र में बना एक पैदल पुल (फुटब्रिज) भी जलभराव की वजह से प्रभावित हुआ है, जिससे कई गांवों का आपस में संपर्क कट गया है।

## खेती किसानी और पशुधन पर मंडराया आर्थिक संकट
इस भीषण आपदा का सबसे गंभीर असर राज्य के कृषि क्षेत्र पर पड़ा है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 16,951 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि पूरी तरह से जलमग्न हो चुकी है। असम के ग्रामीण परिवारों के लिए यह जमीन केवल मिट्टी का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनकी आने वाली फसलों, दैनिक आजीविका और भोजन का मुख्य स्रोत है। खड़ी फसलों के नष्ट होने से किसानों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है, जिसकी भरपाई करने में लंबा समय लगेगा।

मानवीय क्षति के साथ-साथ पशुधन को भी बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया है। जारी आंकड़ों के मुताबिक, 35 हजार से अधिक पशु बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जबकि लगभग 8,500 मवेशी पानी के तेज बहाव में बह गए हैं। पशुओं के बह जाने का सबसे ज्यादा नुकसान शिवसागर जिले में दर्ज किया गया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुधन दूध, खेती के कामों और अतिरिक्त आमदनी का प्रमुख जरिया होता है। हजारों मवेशियों के नुकसान से ग्रामीण परिवारों की कमर टूट गई है। बाढ़ का पानी घटने के बाद भी इन परिवारों को अपने घरों, खेतों और मवेशियों को नए सिरे से व्यवस्थित करने के लिए भारी संघर्ष करना पड़ेगा।

## गुवाहाटी समेत शहरी इलाकों में जलभराव और बचाव अभियान
बाढ़ की यह विभीषिका केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के प्रमुख शहरी केंद्रों को भी अपनी चपेट में ले चुकी है। असम की राजधानी गुवाहाटी सहित कई शहरी क्षेत्रों में जलभराव ने सामान्य आवाजाही पर ब्रेक लगा दिया है। आंकड़ों के अनुसार, कामरूप, कामरूप मेट्रो, मोरीगांव और जोरहाट जिलों के शहरी क्षेत्रों में लगभग 734 नागरिक जलभराव से सीधे प्रभावित हुए हैं।

कामरूप मेट्रो जिले के सातगांव और हातिगांव जैसे घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों में पानी भर जाने के बाद आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो गई। स्थिति को संभालते हुए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और जिला आपदा प्रतिक्रिया बल (DDRF) की टीमों ने तुरंत मोर्चा संभाला। इन टीमों ने नावों की मदद से सातगांव और हातिगांव से 80 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। इसके अलावा गुवाहाटी शहर के ज्यूरिपार और अनिल नगर जैसे इलाकों में भी कई फीट पानी भरा हुआ है, जिससे सड़कों पर वाहनों का आवागमन ठप हो गया है और दैनिक जीवन की बुनियादी आपूर्ति बाधित हो गई है।

## राहत शिविरों में शरणार्थी बने हजारों परिवार
जिन परिवारों के मकान बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं या बह गए हैं, उनके लिए वर्तमान में प्रशासनिक राहत शिविर ही एकमात्र सहारा बने हुए हैं। राज्य भर में स्थापित 45 राहत शिविरों में इस समय 12,356 विस्थापित लोगों ने शरण ले रखी है। इसके साथ ही, प्रभावित आबादी तक सहायता सामग्री पहुंचाने के लिए 59 राहत वितरण केंद्र क्रियान्वित किए गए हैं, जिनके माध्यम से 32 हजार से अधिक जरूरतमंदों तक आवश्यक सामग्री वितरित की जा रही है।

आपदा प्रबंधन तंत्र द्वारा प्रभावित जिलों में चावल, दाल, नमक और पीने के पानी के साथ-साथ पशुओं के लिए हरे और सूखे चारे की आपूर्ति की जा रही है। प्रशासन के समक्ष केवल बाढ़ प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना ही चुनौती नहीं है, बल्कि शिविरों में रह रहे लोगों के लिए स्वच्छ पेयजल, दवाइयां, भोजन और मवेशियों के चारे का निरंतर प्रबंध करना भी एक कठिन कार्य है। राहत और बचाव दल नदियों के जलस्तर की पल-पल की रिपोर्ट पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि बारिश बढ़ने की सूरत में त्वरित कदम उठाए जा सकें। फिलहाल पूरा राज्य जलस्तर घटने और जीवन के पटरी पर लौटने की प्रतीक्षा कर रहा है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** असम में बुनियादी ढांचे और कृषि की भारी क्षति से पूर्वोत्तर राज्यों में खाद्य आपूर्ति और अंतरराज्यीय परिवहन पर असर पड़ सकता है।

**असम में:** बाढ़ से प्रभावित 14 जिलों और गुवाहाटी के निवासियों को जलभराव, संक्रामक बीमारियों और क्षतिग्रस्त फसलों व मवेशियों के नुकसान से निपटने के लिए लंबी सहायता और पुनर्वास की आवश्यकता होगी।

## सवाल-जवाब

### 1. असम में बाढ़ और बारिश से अब तक कितने लोगों की जान जा चुकी है?
असम में इस मानसून सीजन के दौरान बाढ़ और भारी बारिश के कारण अब तक कुल 95 लोगों की मौत हो चुकी है।

### 2. बाढ़ से असम के कितने जिले और लोग प्रभावित हैं?
बाढ़ से राज्य के 14 जिलों के 563 गांवों में 1.6 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 57 हजार प्रभावित शिवसागर जिले में हैं।

### 3. क्या गुवाहाटी जैसे शहरों में भी बाढ़ का असर देखा जा रहा है?
हाँ, गुवाहाटी के कामरूप मेट्रो सहित कई शहरों में जलभराव हुआ है, जहाँ सातगांव और हातिगांव जैसे इलाकों से SDRF और DDRF ने नावों की मदद से 80 लोगों को निकाला है।

### 4. बाढ़ राहत के लिए प्रशासन क्या कदम उठा रहा है?
प्रशासन ने 45 राहत शिविरों में 12,356 लोगों को शरण दी है और 59 वितरण केंद्रों के जरिए 32 हजार से अधिक लोगों तक चावल, दाल, नमक और पशु चारा पहुँचाया जा रहा है।

### 5. खेती और पशुधन को बाढ़ से कितना नुकसान पहुँचा है?
बाढ़ के कारण 16,951 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है और 35 हजार से अधिक पशु प्रभावित हुए हैं, जिनमें से लगभग 8,500 मवेशी बह गए हैं।

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