अवैध दवा सिंडिकेट पर शिकंजा: 20 करोड़ से अधिक की 25 अचल संपत्तियों पर कानूनी ताला अंतरराज्यीय फार्मास्यूटिकल सिंडिकेट की वित्तीय कमर तोड़ते हुए 25 संपत्तियों के जब्ती आदेश की पुष्टि हुई है। सात राज्यों में फैले इस गिरोह के खिलाफ बड़े पैमाने पर नशीली गोलियां व सिरप बरामद किए जा चुके हैं। फार्मास्यूटिकल दवाओं को नशे के अवैध बाजार में खपाने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह की वित्तीय कमर तोड़ने की दिशा में बड़ा कानूनी कदम उठाया गया है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा पहले जारी किए गए फ्रीजिंग निर्देश को कानूनी मंजूरी मिल चुकी है, जिसके दायरे में लगभग 20.10 करोड़ रुपये की 25 अचल संपत्तियां आई हैं। एनडीपीएस (NDPS) कानून के सेक्शन 68F(2) के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी ने 30 अक्टूबर 2026 को उस आदेश पर मुहर लगाई, जो मूल रूप से 2 अक्टूबर को लागू किया गया था। इन कुर्क की गई संपत्तियों में मुख्य रूप से रेजिडेंशियल फ्लैट, दुकानें, कॉरपोरेट ऑफिस, कमर्शियल यूनिट्स और बड़े औद्योगिक प्लॉट शामिल हैं। मोहाली में स्थित संपत्तियां और अवैध कमाई का खेल वित्तीय पड़ताल में यह तथ्य उजागर हुआ कि नशीली तथा साइकोट्रॉपिक औषधियों की गैर-कानूनी बिक्री से जुटाया गया काला धन कई संदिग्ध कारोबारी खातों में घुमाया गया था। मुख्य संदिग्धों ने यह दौलत अपने तथा पारिवारिक सदस्यों के नाम पर अचल संपत्तियां खरीदने में खपाई। पूछताछ और जांच के दौरान संबंधित पक्ष इन संपत्तियों की खरीद के लिए कोई भी वैध वित्तीय स्रोत प्रस्तुत नहीं कर सके। कानूनी घेरे में आईं ये संपत्तियां पंजाब के मोहाली में प्रमुखता से फैली हैं, जिनमें गिल्को इंडस्ट्रियल पार्क, जनता इंडस्ट्रियल एस्टेट, मोहाली सिटी सेंटर-3, मोहाली सिटी सेंटर वॉक, गैलेक्सी हाइट्स-2 और क्वीनस्टाउन जैसे पॉश इलाके शामिल हैं। अमृतसर की जब्ती से खुली थी फर्जी कंपनियों की पोल इस पूरे अंतरराज्यीय रैकेट का खुलासा सबसे पहले 7 फरवरी 2025 को हुआ था, जब पंजाब के अमृतसर शहर में 5 हजार ट्रामाडोल गोलियों की खेप पकड़ी गई थी। उस बरामदगी के दौरान गोलियों के डिब्बों पर उत्पादनकर्ता के तौर पर हरिद्वार स्थित मैसर्स जे आर फार्मास्यूटिकल्स और विपणन एजेंसी के तौर पर देहरादून स्थित मैसर्स तिवारी मेडिकल एजेंसीज का नाम छपा पाया गया। जब अधिकारियों ने गहराई से पड़ताल की, तो पता चला कि देहरादून की मार्केटिंग फर्म धरातल पर मौजूद ही नहीं थी और केवल कागजों पर फर्जीवाड़ा चल रहा था। फर्जीवाड़े की गंभीरता को देखते हुए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया, जिसने आपूर्ति श्रृंखला के हर बिंदु की बारीकी से पड़ताल शुरू की। इस विस्तृत जांच से उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश की सीमा में सक्रिय उन संदिग्ध विनिर्माताओं का पर्दाफाश हुआ, जो कागजी और गैर-मौजूद फर्मों के पते पर प्रतिबंधित औषधियों का अवैध कारोबार चला रहे थे। सात राज्यों में फैला संजाल और भारी मात्रा में जब्ती यह संगठित नेटवर्क देश के सात राज्यों में अपनी जड़ें जमा चुका था, जिनमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। ऑपरेशन के दौरान कानून प्रवर्तन टीमों ने अब तक कुल 17 आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचाया है। इसके अलावा जांच अभियान में भारी मात्रा में नशीली सामग्री जब्त की गई है, जिसमें तैयार दवाओं के साथ-साथ रॉ मैटेरियल भी शामिल है • लगभग 34 लाख साइकोट्रॉपिक गोलियां • कोडीन युक्त कफ सिरप की 10.57 लाख बोतलें • 50 हजार ट्रामाडोल के एम्प्यूल • 5 हजार मिडाजोलम वायल • करीब 2,200 किलोग्राम नशीला साइकोट्रॉपिक पाउडर फरार मुख्य आरोपी और सर्वोच्च अदालत का रुख जांच की कड़ियों को जोड़ते हुए जांच दल ने हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र काला अंब स्थित मैसर्स डिजिटल विजन और मैसर्स वेलिंगटन हेल्थकेयर के परिसरों में छापेमारी कर भारी मात्रा में साइकोट्रॉपिक दवाएं और उनका कच्चा माल पकड़ा था। इस पूरे खेल के मुख्य कर्ताधर्ता अंबाला कैंट के रहने वाले हैं। इनमें परशोत्तम लाल गोयल और उनके दो बेटे कोनिक गोयल तथा मैनिक गोयल शामिल हैं, जो लगातार फरार चल रहे हैं। तीनों आरोपियों के खिलाफ कई समन और गैर-जमानती वारंट जारी किए जा चुके हैं, फिर भी वे हाजिर नहीं हुए। उनकी अग्रिम जमानत की अर्जियां देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी खारिज की जा चुकी हैं। केंद्रीय एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि उसका मकसद महज खेप पकड़ना नहीं, बल्कि पूरे आर्थिक तंत्र को ध्वस्त करना है। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि तस्करी संबंधी कोई भी गुप्त सूचना राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन नंबर 1933 (मानस) पर साझा करें, जहां सूचनादाता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। इसका आप पर असर अवैध फार्मा दवाओं की तस्करी करने वाले गिरोहों की संपत्तियां सीज होने से दवा आपूर्ति व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा पर सीधा असर पड़ेगा। • भारत में: मेडिकल स्टोरों और फार्मा कंपनियों पर कड़े ऑडिट और सत्यापन नियम लागू होने से नकली बिलिंग पर रोक लगेगी। आम नागरिकों को डॉक्टर के पर्चे के बिना शेड्यूल्ड दवाएं मिलना और भी कठिन हो जाएगा ताकि दुरुपयोग रुके। • पंजाब और हरियाणा में: मोहाली और अंबाला जैसे केंद्रों में संपत्तियां सील होने से अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क कमजोर होगा। सीमावर्ती और नजदीकी क्षेत्रों में कफ सिरप व दर्द निवारक गोलियों की अवैध बिक्री पर भारी कमी आएगी। • नागरिकों के लिए: आम जनता अब हेल्पलाइन नंबर 1933 पर नशा तस्करी की गोपनीय सूचना दे सकती है। इस नंबर पर सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह सुरक्षित रखी जाती है। • फार्मा डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए: दवा वितरकों को अपनी आपूर्ति श्रृंखला में खरीदारों का भौतिक सत्यापन अनिवार्य रूप से करना होगा। फर्जी या कागजी पते पर माल भेजने वाली कंपनियों के खिलाफ सीधे आपराधिक कार्रवाई होगी। ऐसा क्यों हुआ यह कठोर कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि मेडिकल दवाओं का निर्माण वैध लाइसेंस की आड़ में कर उन्हें नशे के अवैध बाजार में खपाया जा रहा था। • सीधा कारण: अमृतसर में 5,000 अवैध ट्रामाडोल गोलियां पकड़े जाने के बाद जब जांच हुई, तो उन पर छपी मार्केटिंग कंपनी फर्जी पाई गई। जांच में साबित हुआ कि कागजी फर्मों के जरिए भारी मात्रा में नशीली दवाएं खुले बाजार में डायवर्ट की जा रही थीं। • सिंडिकेट की वित्तीय कार्यप्रणाली: प्रतिबंधित दवाएं बेचकर कमाया गया काला धन कई बैंक खातों में घुमाकर मोहाली में संपत्तियों की खरीद में लगाया गया। आरोपी इन 25 संपत्तियों के लिए वैध आय का कोई भी कानूनी प्रमाण नहीं दे सके। • पूर्व में हुई जब्ती: जांच आगे बढ़ने पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के प्लांट्स से 34 लाख टैबलेट और 10 लाख से अधिक सिरप की बोतलें बरामद हुईं। इससे साफ हो गया कि यह एक सुनियोजित और अंतरराज्यीय स्तर का संगठित अपराध था। • कानूनी कार्रवाई की वजह: मुख्य आरोपियों द्वारा बार-बार समन की अनदेखी करने और सर्वोच्च अदालत से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद एनडीपीएस कानून के तहत संपत्ति कुर्की की पुष्टि की गई। सवाल-जवाब 1. कुल कितनी संपत्तियां और कितने मूल्य की संपत्ति फ्रीज की गई है? जांच एजेंसी ने लगभग 20.10 करोड़ रुपये की 25 अचल संपत्तियों के फ्रीजिंग आदेश की पुष्टि कराई है। 2. यह अवैध नेटवर्क किन-किन राज्यों में सक्रिय था? यह नेटवर्क पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल समेत सात राज्यों में फैला था। 3. इस पूरे मामले का खुलासा सबसे पहले कब और कैसे हुआ था? इसकी शुरुआत 7 फरवरी 2025 को अमृतसर में 5 हजार ट्रामाडोल टैबलेट पकड़े जाने और उस पर दर्ज कंपनी के फर्जी पाए जाने के बाद हुई थी। 4. अब तक कुल कितनी दवाइयां और सामग्री जब्त की जा चुकी है? लगभग 34 लाख गोलियां, 10.57 लाख कफ सिरप की बोतलें, 50 हजार एम्प्यूल, 5 हजार वायल और 2,200 किलो पाउडर जब्त किया गया है। 5. मामले में मुख्य फरार आरोपी कौन हैं? अंबाला कैंट के परशोत्तम लाल गोयल और उनके बेटे कोनिक गोयल तथा मैनिक गोयल फरार हैं, जिनकी जमानत सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुकी है। 6. नशीली दवाओं की गुप्त सूचना देने के लिए कौन सा नंबर जारी किया गया है? नागरिक राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन नंबर 1933 (मानस) पर पूरी गोपनीयता के साथ सूचना दे सकते हैं। https://trendkia.com/national/avaidha-dava-sindiketa-para-shiknja-20-karora-se-adhika-ki-25-achala-snpattiyon-para-kanuni-tala-54547 TrendKia — Har trend, sabse pehle.