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  "type": "article",
  "title": "अयोध्या की तय जमीन पर बने मस्जिद, बंगाल में विवाद खड़ा करने की जरूरत नहीं: मौलाना साजिद रशीदी ने हुमायूं कबीर को दी सलाह",
  "summary": "मौलाना साजिद रशीदी ने पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने के हुमायूं कबीर के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा है कि निर्माण अयोध्या में अदालत से मिली जमीन पर होना चाहिए। उन्होंने आजम खान की गिरफ्तारी और प्रयागराज में युवक से मारपीट की घटना पर भी कड़ा विरोध जताया।",
  "content": "पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद के नाम पर नई इबादतगाह तैयार करने की सियासी बयानबाजी पर अब मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कड़ा रुख अपनाया है। मौलाना साजिद रशीदी ने इस पूरे मामले में हुमायूं कबीर की योजना पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जब अदालत के फैसले के बाद सरकार की तरफ से अयोध्या में मस्जिद के लिए बाकायदा जमीन आवंटित की जा चुकी है, तो फिर पश्चिम बंगाल में इस तरह का निर्माण कराने का क्या औचित्य है। मौलाना ने हुमायूं कबीर को सीधे अयोध्या चलने की पेशकश करते हुए भरोसा दिलाया कि वह खुद उनके साथ चलकर वहां मस्जिद की बुनियाद रखने में साथ खड़े होंगे।\n\nअयोध्या में आवंटित जमीन के उपयोग पर जोर\nपश्चिम बंगाल की धरती पर बाबरी मस्जिद बनाने को लेकर पैदा हुए ताजा विवाद पर अपनी राय जाहिर करते हुए मौलाना साजिद रशीदी ने पूछा कि बंगाल में इस नाम से मस्जिद खड़ी करने की आखिर क्या मजबूरी है। रशीदी ने स्पष्ट किया कि हुमायूं कबीर को अदालत के निर्देशानुसार अयोध्या में सरकार द्वारा दी गई निर्धारित जगह का ही इस्तेमाल करना चाहिए। उनका कहना था कि हुमायूं कबीर वहां पहुंचकर निर्माण कार्य की शुरुआत करें। साजिद रशीदी ने साथ देने का प्रस्ताव रखते हुए कहा कि वह खुद उनके साथ उस निर्धारित स्थल तक जाने के लिए तैयार हैं और वहां मस्जिद की नींव रखने में भी उनका पूरा साथ देंगे। उनके अनुसार तयशुदा जमीन का उपयोग करना ही सबसे सही कदम है और बेवजह के विवादों को हवा देने से हर किसी को बचना चाहिए।\n\n6 दिसंबर को राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने की योजना का विरोध\nपश्चिम बंगाल के भीतर 6 दिसंबर की तारीख को एनएच-34 जाम करने की दी गई चेतावनी पर भी मौलाना साजिद रशीदी ने अपनी असहमति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि मस्जिद के निर्माण के लिए जब पहले से जमीन तय की जा चुकी है, तो उसी पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। मौलाना ने इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया कि इस संवेदनशील विषय को लेकर समाज में किसी भी तरह का तनाव या विवाद आगे नहीं बढ़ना चाहिए और न ही आम जनजीवन को प्रभावित करने वाले प्रदर्शन किए जाने चाहिए।\n\nप्रयागराज की घटना और यूजीसी कानून पर कड़ी आपत्ति\nउत्तर प्रदेश के प्रयागराज में यूजीसी कानून से जुड़ा सवाल पूछने वाले एक युवक पर हाथ उठाने की घटना पर मौलाना रशीदी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने सार्वजनिक मंच से सवाल पूछने वाले नौजवान को थप्पड़ मारे जाने को सीधे तौर पर तानाशाही करार दिया। रशीदी का कहना था कि एक लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत हर नागरिक को हुकूमत से सवाल करने और अपनी असहमति दर्ज कराने का पूरा संवैधानिक अधिकार हासिल है। सिर्फ अपनी बात रखने या सवाल उठाने पर किसी नागरिक के खिलाफ हिंसा पर उतर आना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने इस वाकये में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। इसी के साथ उन्होंने राजनीतिक विश्लेषण जोड़ते हुए कहा कि यूजीसी कानून के प्रभाव से भाजपा और सवर्ण हिंदुओं के बीच दूरी बढ़ती दिखाई दे रही है।\n\nआजम खान की कानूनी लड़ाई पर समाजवादी पार्टी को घेरा\nआजम खान को अदालत से जमानत मिलने के तुरंत बाद ईडी द्वारा की गई गिरफ्तारी के मसले पर भी मौलाना साजिद रशीदी ने तीखे सवाल दागे। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर आरोप मढ़ा कि पार्टी ने आजम खान से जुड़े कानूनी मामलों को जरूरी गंभीरता के साथ नहीं लड़ा। रशीदी ने अखिलेश यादव के नेतृत्व की भूमिका पर भी उंगली उठाई और कहा कि उन्हें ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि सपा का शीर्ष नेतृत्व आजम खान को राहत दिलाने या रिहा कराने के लिए पर्याप्त मेहनत कर रहा है। मौलाना ने सरकार के सामने मांग रखी कि आजम खान को फौरन रिहा किया जाए और उन पर दर्ज सभी कानूनी मुकदमे वापस लिए जाएं। उन्होंने कहा कि आजम खान एक कद्दावर नेता हैं और यदि उनकी यूनिवर्सिटी के कामकाज में किसी तरह की खामी या गड़बड़ी पाई गई है, तो उस मसले को आमने-सामने बैठकर बातचीत के जरिए आसानी से सुलझाया जा सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nइस बयानबाजी और घटनाक्रम का मुख्य असर धार्मिक सौहार्द और राजनीतिक लामबंदी पर पड़ता है।\n\n• राष्ट्रीय स्तर पर: अयोध्या में जमीन मिलने के बाद अन्य राज्यों में मस्जिद के नाम पर विवाद खड़ा करने से बचने की सलाह से तनाव घटाने में मदद मिल सकती है। नागरिक स्तर पर कानून के दायरे में सवाल उठाने के संवैधानिक अधिकार पर जोर दिया गया है।\n• पश्चिम बंगाल में: एनएच-34 को 6 दिसंबर को जाम करने के आह्वान का विरोध होने से आम यात्रियों को संभावित यातायात अवरोध से राहत की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर धार्मिक प्रतीकों पर राजनीतिक टकराव धीमा पड़ने के संकेत मिलते हैं।\n• उत्तर प्रदेश में: आजम खान के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी की घेराबंदी से राज्य के मुस्लिम मतदाताओं में राजनीतिक मंथन तेज हो सकता है। प्रयागराज में मारपीट की घटना पर कार्रवाई की मांग से छात्रों और युवाओं के बीच अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बहस बढ़ी है।\n• आम नागरिकों के लिए: लोकतांत्रिक व्यवस्था में सवाल पूछने के अधिकार का समर्थन आम लोगों को निडर होकर अपनी बात रखने का हौसला देता है। इससे सार्वजनिक विमर्श में हिंसा के बजाय कानूनी और बातचीत के रास्तों को प्राथमिकता मिलती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने के प्रस्ताव और उससे जुड़े विरोध प्रदर्शनों की घोषणा के बाद धार्मिक नेतृत्व की ओर से यह प्रतिक्रिया सामने आई। इसके साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों में हालिया कानूनी और राजनीतिक घटनाओं ने इस पूरे विमर्श को जन्म दिया।\n\n• बंगाल में निर्माण की घोषणा: हुमायूं कबीर द्वारा पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद के नाम पर निर्माण शुरू करने और 6 दिसंबर को एनएच-34 जाम करने के ऐलान के कारण यह विवाद खड़ा हुआ। मौलाना साजिद रशीदी ने स्पष्ट किया कि जब अदालत के फैसले से अयोध्या में जमीन मिल चुकी है, तो बंगाल में अलग से विवाद खड़ा करने का कोई औचित्य नहीं है।\n• प्रयागराज में हिंसा की घटना: प्रयागराज में यूजीसी कानून को लेकर सवाल करने पर एक युवक को सरेआम थप्पड़ मारे जाने से नाराजगी भड़क उठी। रशीदी ने इसे नागरिकों के सवाल पूछने के अधिकार पर तानाशाही हमला बताते हुए कड़ा ऐतराज दर्ज कराया।\n• आजम खान की दोबारा गिरफ्तारी: आजम खान को अदालत से जमानत मिलने के तत्काल बाद ईडी द्वारा हिरासत में लिए जाने की घटना ने राजनीतिक हलकों में विवाद पैदा किया। समाजवादी पार्टी द्वारा कानूनी स्तर पर ठोस लड़ाई न लड़ने के आरोपों के चलते मुस्लिम नेतृत्व में असंतोष सामने आया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मौलाना साजिद रशीदी ने हुमायूं कबीर के प्रस्ताव पर क्या सवाल उठाया?\nउन्होंने सवाल किया कि जब अयोध्या में अदालत के आदेश पर मस्जिद के लिए जमीन मिल चुकी है, तो पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने की क्या जरूरत है।\n\n2. मौलाना साजिद रशीदी ने हुमायूं कबीर को क्या पेशकश दी?\nउन्होंने हुमायूं कबीर को अयोध्या चलने का प्रस्ताव दिया और कहा कि वह उनके साथ जाकर मस्जिद की नींव रखने में साथ देने के लिए तैयार हैं।\n\n3. पश्चिम बंगाल में 6 दिसंबर को लेकर क्या विवाद था?\nपश्चिम बंगाल में 6 दिसंबर को एनएच-34 जाम करने की धमकी दी गई थी, जिस पर रशीदी ने विरोध जताते हुए विवाद न बढ़ाने की बात कही।\n\n4. प्रयागराज की घटना पर मौलाना रशीदी ने क्या कहा?\nप्रयागराज में यूजीसी कानून पर सवाल पूछने वाले युवक को थप्पड़ मारे जाने को उन्होंने तानाशाही बताया और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।\n\n5. आजम खान के मामले में मौलाना रशीदी ने समाजवादी पार्टी पर क्या आरोप लगाए?\nउन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने आजम खान के कानूनी मामलों को गंभीरता से नहीं लड़ा और अखिलेश यादव उनकी रिहाई के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहे हैं।\n\n6. आजम खान की यूनिवर्सिटी को लेकर मौलाना रशीदी की क्या राय है?\nउन्होंने कहा कि आजम खान बड़े नेता हैं और यदि उनकी यूनिवर्सिटी में कोई गड़बड़ी हुई है, तो उस मसले को आमने-सामने बैठकर बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है।",
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  "publishedAt": "2026-11-04",
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