बहराइच में बेमौसम आंधी और बारिश ने तबाह की फसलें, अब गूगल फॉर्म के जरिए भी दर्ज होगा नुकसान बहराइच में तेज आंधी और बारिश से फसलों को भारी नुकसान हुआ है, जिसके बाद प्रशासन ने बिना बीमा वाले और बीमित किसानों के लिए मुआवजे की प्रक्रिया शुरू करते हुए गूगल फॉर्म का विकल्प भी दिया है. बहराइच में अचानक बदले मौसम के मिजाज, तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने खेती-किसानी को गहरा आघात पहुंचाया है. तूफानी हवाओं के चलते जिले के कई हिस्सों में बिजली के खंभे उखड़ गए और विशाल पेड़ धराशायी हो गए, वहीं खेतों में पककर तैयार खड़ी फसलें जमीन पर बिछ गईं. इस गंभीर स्थिति को देखते हुए शासन ने त्वरित संज्ञान लिया है. प्रशासन के आदेश पर राजस्व विभाग और कृषि विभाग के अधिकारियों ने क्षति के सटीक मूल्यांकन और राहत राशि वितरण की व्यवस्था को तेज गति से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है. फलदार और बहुवर्षीय फसलों को सबसे ज्यादा आघात जिले के ग्रामीण अंचलों में केला, धान समेत कई फसलों को भारी क्षति पहुंची है. बहराइच के मिर्जापुर गांव के किसान त्रिलोकी जैसे कई काश्तकारों की तैयार फसल इस प्राकृतिक मार की भेंट चढ़ गई. कई एकड़ में फैली केले की उपज, जिसकी कटाई महज 15 से 20 दिनों के भीतर शुरू होने वाली थी, तेज हवाओं और जलजमाव के कारण 90 प्रतिशत तक नष्ट हो चुकी है. कई किसानों ने निजी जरूरतों और खेती की लागत निकालने के लिए बैंकों से कर्ज या क्रेडिट ले रखा था. अब पूरी फसल बर्बाद होने और पानी में डूब जाने से ग्रामीण परिवारों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. आपदा राहत कोष से मिलने वाले मुआवजे की दरें शासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने साफ किया है कि जिन किसानों ने औपचारिक बीमा नहीं करवाया है, उन्हें भी बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा. ऐसे किसानों को आपदा राहत कोष के जरिए सीधी आर्थिक मदद मुहैया कराई जाएगी, बशर्ते लेखपाल की आधिकारिक सर्वे रिपोर्ट में फसल की क्षति न्यूनतम 33 प्रतिशत या उससे अधिक दर्ज हो. तय किए गए नियमों के अनुसार प्रति हेक्टेयर मुआवजे की दरें इस प्रकार रखी गई हैं • असिंचित क्षेत्र: एकवर्षीय फसलों के नुकसान के लिए ₹8,500 प्रति हेक्टेयर की दर निर्धारित की गई है. • सिंचित क्षेत्र: सिंचित भूमि पर खड़ी एकवर्षीय फसलों की क्षति होने पर ₹17,000 प्रति हेक्टेयर का मुआवजा मिलेगा. • बहुवर्षीय फसलें: केला, आम, पपीता या एक साल से अधिक अवधि वाली बागवानी फसलों के बर्बाद होने पर ₹22,500 प्रति हेक्टेयर की सहायता राशि दी जाएगी. बीमित किसानों के लिए 72 घंटे में सूचना देना जरूरी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के दायरे में आने वाले किसानों के लिए प्रक्रिया को अलग रखा गया है. योजना के तहत नामांकित किसानों को आपदा आने के 72 घंटे के भीतर टोल-फ्री नंबर 14447 पर कॉल करके अपनी शिकायत अनिवार्य रूप से दर्ज करानी होगी. जैसे ही किसान की सूचना दर्ज होगी, उप निदेशक कृषि (DD Agriculture) के दिशानिर्देश में गठित विशेष जांच टीम सीधे मौके पर जाकर नुकसान का भौतिक सत्यापन करेगी. सर्वे से वंचित किसानों को गूगल फॉर्म का नया विकल्प यदि किसी वजह से क्षेत्रीय लेखपाल या कृषि विभाग का सर्वे दल किसी खेत तक समय पर नहीं पहुंच पाता है, तो किसानों की सुविधा के लिए प्रशासन ने एक विशेष गूगल फॉर्म का प्रबंध किया है. इस डिजिटल माध्यम का उपयोग करके किसान खुद अपने खसरा और खतौनी के विवरण के साथ बर्बाद हुई फसल की तस्वीरें अपलोड कर सकते हैं. फॉर्म में दर्ज संपर्क नंबर के आधार पर ही सत्यापन टीम सीधे किसान से संपर्क साधेगी और मौके की जांच करेगी. पूरी प्रक्रिया की निगरानी अपर जिलाधिकारी (ADM)/नोडल अधिकारी कर रहे हैं. अधिकारियों के अनुसार अगले 2 से 3 दिनों के भीतर जिले का व्यापक क्षति आंकड़ा तैयार कर लिया जाएगा, जिसके बाद पात्र लाभार्थियों के खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से राहत राशि भेज दी जाएगी. इसका आप पर असर बहराइच के किसानों के लिए फसल क्षति का मुआवजा पाने और त्वरित राहत हासिल करने के स्पष्ट नियम तय किए गए हैं. • भारत में: आपदा राहत कोष और पीएमएफबीवाई के तहत तय मुआवजे की श्रेणियां देश भर में प्राकृतिक मार झेल रहे किसानों के लिए आधिकारिक सहायता तंत्र का खाका स्पष्ट करती हैं. इससे विभिन्न राज्यों में फसलों के बीमा और सरकारी क्षतिपूर्ति के नियमों की जानकारी मिलती है. • बहराइच में: स्थानीय किसानों को बिना बीमा वाली फसलों पर 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर ₹8,500 से लेकर ₹22,500 प्रति हेक्टेयर तक की सहायता मिलेगी. बीमित किसान नुकसान के 72 घंटे के भीतर 14447 पर कॉल करें या सर्वे छूटने पर गूगल फॉर्म में खसरा-खतौनी की जानकारी दर्ज कराएं. • दस्तावेजी प्रक्रिया: काश्तकारों को अपने खसरा, खतौनी और क्षतिग्रस्त फसलों की तस्वीरें तैयार रखनी होंगी ताकि जांच दल को सही साक्ष्य मिल सकें. अगले 2 से 3 दिनों में तैयार होने वाली अंतिम रिपोर्ट के आधार पर सहायता राशि सीधे बैंक खाते में डीबीटी से पहुंचेगी. • कर्जदार किसानों के लिए: बैंक लोन या केसीसी लेकर खेती करने वाले किसानों को सत्यापन में प्राथमिकता मिलेगी जिससे उनकी आर्थिक देनदारी में राहत मिल सके. सत्यापन प्रक्रिया पूरी होते ही बैंक खातों में राशि का अंतरण शुरू कर दिया जाएगा. ऐसा क्यों हुआ जिले में अचानक आए तेज अंधड़ और बेमौसम बारिश की वजह से तैयार फसलों को भारी भौतिक क्षति पहुंची है. • मौसम का मिजाज: तीव्र गति की आंधी और अचानक हुई भारी बारिश ने खड़े पेड़ों और बिजली के खंभों को गिराने के साथ तैयार पौधों को पूरी तरह धराशायी कर दिया. जलभराव और तेज हवा के दबाव से खेतों में पानी भर गया. • कटाई के मुहाने पर फसल: केले और धान जैसी फसलें परिपक्वता के अंतिम दौर में थीं और कटाई में केवल 15 से 20 दिन शेष थे. भारी वजन वाले फलदार पौधे तेज आंधी का दबाव सहन नहीं कर सके और टूटकर गिर गए. • प्रशासनिक राहत की जरूरत: किसानों ने बैंक ऋण और निजी पूंजी लगाकर फसलें तैयार की थीं, जो अचानक आपदा में 90 प्रतिशत तक नष्ट हो गईं. इस व्यापक नुकसान की भरपाई और संकट को टालने के लिए प्रशासन को विशेष राहत योजना लागू करनी पड़ी. सवाल-जवाब 1. बहराइच में बिना बीमा वाली फसलों पर कितना मुआवजा मिलेगा? असिंचित जमीन पर ₹8,500 प्रति हेक्टेयर, सिंचित भूमि पर ₹17,000 प्रति हेक्टेयर तथा बहुवर्षीय फसलों के लिए ₹22,500 प्रति हेक्टेयर तय किया गया है. 2. आपदा राहत कोष से मुआवजा पाने के लिए नुकसान की न्यूनतम सीमा क्या है? लेखपाल की आधिकारिक सर्वे रिपोर्ट में फसल की क्षति कम से कम 33 प्रतिशत या उससे अधिक दर्ज होनी चाहिए. 3. बीमित किसानों को नुकसान की सूचना कितने समय में देनी होगी? प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत नामांकित किसानों को आपदा के 72 घंटे के भीतर टोल-फ्री नंबर 14447 पर शिकायत दर्ज करानी होगी. 4. सर्वे टीम के खेत तक न पहुंचने पर किसान क्या कर सकते हैं? किसान प्रशासन द्वारा जारी विशेष गूगल फॉर्म में अपने खसरा-खतौनी के विवरण और फसल के नुकसान की तस्वीरें अपलोड कर सकते हैं. 5. मुआवजा राशि किसानों को किस माध्यम से दी जाएगी? विस्तृत रिपोर्ट तैयार होने के बाद राहत राशि पात्र किसानों के बैंक खातों में सीधे डीबीटी के जरिए भेजी जाएगी. https://trendkia.com/national/bahraich-men-bemausama-andhi-aura-barisha-ne-tabaha-ki-phasalen-aba-google-forms-ke-jarie-bhi-darja-hoga-nukasana-43332 TrendKia — Har trend, sabse pehle.