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  "title": "बकरियों को रोजाना खुले में चराने से बढ़ता है वजन और प्रजनन दर, पशु विशेषज्ञ ने बताए बड़े फायदे",
  "summary": "जहानाबाद किसान मेले में कृषि विज्ञान केंद्र के पशु विशेषज्ञ ने सलाह दी है कि बकरियों को रोजाना आठ घंटे खुले में चराने से उनका विकास तेजी से होता है और मीट की गुणवत्ता सुधरती है।",
  "content": "ग्रामीण इलाकों में पशुपालन आजीविका का एक बड़ा जरिया रहा है, जहां गोपालन के साथ-साथ बकरी पालन को भी आय का मुख्य साधन माना जाता है। पहले के समय में बकरियों को खुले में भरपूर हरा चारा मिल जाता था, जबकि सूखे चारे या खनिजों का इस्तेमाल काफी कम होता था। वक्त के साथ यह काम केवल पारंपरिक तौर-तरीकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बड़े संगठित व्यवसाय का रूप ले चुका है। आज गांव-देहात ही नहीं, बल्कि कस्बों और शहरों के नजदीकी क्षेत्रों में भी लोग व्यावसायिक स्तर पर गोट फार्मिंग कर रहे हैं। हालांकि तेजी से बढ़ती आबादी और जमीन की कमी की वजह से जानवरों को खुले में चराना यानी ओपन ग्रेजिंग कराना पशुपालकों के लिए कठिन चुनौती बनता जा रहा है, लेकिन पशु वैज्ञानिकों का स्पष्ट कहना है कि बेहतर मुनाफे और सेहतमंद पशुओं के लिए उन्हें खुले में चराना बेहद आवश्यक है।\n\nजहानाबाद किसान मेले में पशु वैज्ञानिक की सलाह\nजहानाबाद में आयोजित किसान प्रदर्शनी मेले के मंच पर कई कृषि एवं पशुपालन विशेषज्ञों ने किसानों से संवाद किया। इसी मेले में जहानाबाद स्थित गंधार कृषि विज्ञान केंद्र के पशु एक्सपर्ट डॉक्टर दिनेश महतो भी शामिल हुए। उन्होंने पशुपालकों को समझाते हुए कहा कि पशु खरीदकर अपने पास रख लेना आसान काम है, लेकिन उनकी वैज्ञानिक तरीके से उचित देखभाल करना ही सबसे बड़ी चुनौती होता है। अगर कोई किसान अपने पशुओं से मनमुताबिक शारीरिक विकास और बेहतर उत्पादन चाहता है, तो उसे उनकी दैनिक देखभाल से लेकर संतुलित खान-पान तक हर पहलू पर पूरा ध्यान देना होगा।\n\nरोजाना आठ घंटे खुले में चराना क्यों है जरूरी\nबकरियों को खुले मैदानों में चराने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए डॉक्टर दिनेश महतो ने बताया कि इन्हें प्रतिदिन ओपन ग्रेजिंग कराना जरूरी है। पशुपालकों को हर दिन कम से कम 8 घंटे तक बकरियों को खुले खेतों और मैदानों में हरी घास खिलाने के लिए ले जाना चाहिए। नियमित रूप से इतने समय तक खुले में घूमने से बकरियों का समुचित शारीरिक व्यायाम होता है। जब जानवर खुले में घूम-फिरकर चरते हैं, तो उनकी शारीरिक कसरत होती है, जिससे उनकी पाचन क्रिया और मेटाबोलिक गतिविधियां तेज हो जाती हैं। इससे पशुओं की भूख खुलती है और वे भरपूर चारा खाने लगते हैं। इसके अलावा जब बकरियों के शरीर पर प्राकृतिक धूप पड़ती है, तो उनके मीट की गुणवत्ता में भी जबरदस्त सुधार आता है।\n\nहरे चारे से मिलता है पोषण और बढ़ती है प्रजनन क्षमता\nपशु विशेषज्ञ ने विस्तार से जानकारी दी कि खुले मैदानों में मिलने वाले ताजे हरे चारे से बकरियों के शरीर को विटामिन ए, विटामिन ई और विटामिन सी जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। इन आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति से बकरियों में होने वाली कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं खुद-ब-खुद दूर हो जाती हैं। विशेष रूप से विटामिन ए और विटामिन ई पशुओं की प्रजनन क्षमता को मजबूत बनाते हैं, जिससे बकरियों में गर्भधारण करने और स्वस्थ बच्चे देने की क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा होता है। इसी वजह से विशेषज्ञों ने बकरी पालकों से आग्रह किया है कि वे अपने व्यस्त समय में से वक्त निकालकर हर दिन बकरियों को खुले में चरने का अवसर जरूर दें।\n\nइसका आप पर असर\nबकरी पालकों के लिए यह वैज्ञानिक सलाह पशुओं के बेहतर विकास और मुनाफे को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।\n\n• भारत में: व्यावसायिक स्तर पर गोट फार्मिंग करने वाले किसानों को अब बंद बाड़ों के बजाय दैनिक ओपन ग्रेजिंग पर ध्यान देना होगा। इससे बकरियों की खुराक, वजन और प्रजनन क्षमता में बढ़ोतरी होने से किसानों की शुद्ध आय में इजाफा होगा।\n• जहानाबाद में: जहानाबाद और आसपास के पशुपालकों को अपने जानवरों को गंधार कृषि विज्ञान केंद्र के परामर्श के अनुरूप खुले में चराना चाहिए। ऐसा करने से स्थानीय स्तर पर मीट की गुणवत्ता सुधरेगी और बकरियों के बच्चों की संख्या बढ़ेगी।\n• पशु स्वास्थ्य पर: रोजाना 8 घंटे हरी घास पर चरने से पशुओं को भरपूर धूप और प्राकृतिक कसरत मिलती है। इससे बकरियों की मेटाबोलिक दर तेज होती है और वे अधिक चारा खाने लगती हैं।\n• लागत में कमी: खुले मैदानों में चराने से कृत्रिम सप्लीमेंट्स और महंगे सूखे चारे पर निर्भरता कम होती है। किसान प्राकृतिक हरे चारे के जरिए विटामिन ए, सी और ई की पर्याप्त आपूर्ति कर सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nबकरी पालन अब घरेलू स्तर से निकलकर एक व्यावसायिक रूप ले चुका है, लेकिन जगह की कमी के चलते पशुपालक उन्हें खुले में चराने से बचते हैं। जहानाबाद किसान मेले में विशेषज्ञ ने इस बदलाव के दुष्परिणामों और खुले में चराने की जैविक जरूरतों को स्पष्ट किया।\n\n• शहरीकरण और स्थान की कमी: बढ़ती आबादी के कारण कस्बों और गांवों के पास चरागाहों की जमीन घटती जा रही है। इसी वजह से कई गोट फार्मर्स बकरियों को केवल बाड़ों में बंद रखकर सूखा चारा खिलाने लगे हैं।\n• व्यायाम और मेटाबॉलिज्म की जरूरत: बंद बाड़ों में रहने से बकरियों का शारीरिक व्यायाम नहीं हो पाता, जिससे उनकी भूख कम हो जाती है। खुले में घूमने से उनका पाचन तंत्र सक्रिय होता है और शरीर का विकास तेज होता है।\n• पोषण और धूप का महत्व: खुले मैदान में मिलने वाली सीधी धूप मीट की गुणवत्ता सुधारती है। साथ ही हरे चारे में मौजूद विटामिन ए, सी और ई प्रजनन अंगों को मजबूत बनाते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बकरियों को रोजाना कितने घंटे खुले में चराना चाहिए?\nपशु विशेषज्ञ डॉक्टर दिनेश महतो के अनुसार बकरियों को हर दिन कम से कम 8 घंटे तक खुले में चराना चाहिए।\n\n2. ओपन ग्रेजिंग से बकरियों के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?\nखुले में घूमने से बकरियों का व्यायाम होता है, मेटाबोलिक एक्टिविटी तेज होती है और उनकी खाने की रुचि बढ़ जाती है।\n\n3. धूप में चरने से मीट की गुणवत्ता पर क्या प्रभाव पड़ता है?\nजब बकरियों के शरीर पर प्राकृतिक सूर्य की रोशनी पड़ती है, तो उनके मीट की गुणवत्ता बहुत अच्छी हो जाती है।\n\n4. हरे चारे से बकरियों को कौन-से विटामिन मिलते हैं?\nहरे चारे से बकरियों को विटामिन ए, विटामिन ई और विटामिन सी जैसे जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं।\n\n5. बकरियों में प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए क्या जरूरी है?\nहरे चारे से मिलने वाले विटामिन ए और ई बकरियों की प्रजनन शक्ति और बच्चा देने की क्षमता को बढ़ाते हैं।\n\n6. यह सलाह किस विशेषज्ञ ने और कहां दी?\nयह सलाह जहानाबाद के गंधार कृषि विज्ञान केंद्र के पशु विशेषज्ञ डॉक्टर दिनेश महतो ने जहानाबाद किसान प्रदर्शनी मेले में दी।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-10-11",
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