# बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पद और नियम 4(3) पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने दिए स्पष्ट संकेत

> सुप्रीम कोर्ट में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के लंबे कार्यकाल को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अदालत व्यक्तिगत मुद्दों के बजाय कानून के प्रावधानों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/bara-kaunsila-pha-indiya-ke-adhyaksha-pada-aura-niyama-4-3-para-suprima-korta-men-sunavai-chipha-jastisa-surya-kant-ne-die-spashta-26308 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुप्रीम कोर्ट, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, मनन कुमार मिश्रा, सीजेआई सूर्यकांत, एडवोकेट्स एक्ट, कानूनी सुनवाई

उच्चतम न्यायालय में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के लंबे समय से जारी कार्यकाल और संस्थागत चुनावी प्रक्रिया को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई हुई। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की गहन समीक्षा की, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। शीर्ष अदालत ने बीसीआई चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन के सेवा काल से जुड़े नियमों, विभिन्न समय पर जारी अधिसूचनाओं और कानूनी प्रावधानों को लेकर याचिकाकर्ताओं तथा प्रतिवादियों के वकीलों से कई तीखे सवाल पूछे। अदालत ने सुनवाई के दौरान साफ किया कि बहस व्यक्तिगत टिप्पणियों के बजाय पूरी तरह से एडवोकेट्स एक्ट और संबंधित कानूनी ढांचे पर केंद्रित रहनी चाहिए।

## कार्यालयी प्रस्ताव और कार्यकाल विस्तार का कानूनी विवाद
सुनवाई की शुरुआत में सीजेआई सूर्यकांत ने 9 जनवरी के पूर्व आदेश को पढ़ने का निर्देश दिया। वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने अदालत को बताया कि मूल प्रस्ताव मुख्य रूप से सचिव की नियुक्ति से संबंधित था। हालांकि, उस दस्तावेज के अंतिम पैराग्राफ में चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन के कार्यकाल को 3 साल से बढ़ाकर 5 साल करने का निर्णय जोड़ दिया गया था। इस पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इसे भी एक प्रस्ताव के रूप में देखा जाना चाहिए। वहीं, वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने अदालत का ध्यान वर्ष 2020 में जारी एक अन्य अधिसूचना की ओर आकृष्ट किया, जिसमें 3 साल के कार्यकाल का स्पष्ट उल्लेख किया गया था। पीठ ने इन दोनों दस्तावेजों के परस्पर विरोधी प्रावधानों और उनके कानूनी आधार पर विचार-विमर्श किया।

## धारा 4(3) का प्रयोग और चुनावी प्रक्रिया में देरी के आरोप
वरिष्ठ वकील दीवान ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि इन नियमों का इस्तेमाल लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने और समय पर चुनाव न कराने के लिए किया जा रहा है। इस पर जस्टिस बागची ने पूछा कि क्या नियमों में मौजूद धारा 4(3), जो कार्यकाल तय करने का एक स्वतंत्र प्रावधान प्रदान करती है, का उपयोग पद पर बने रहने की अवधि को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने हेतु किया जा सकता है। वकील दीवान ने जवाब दिया कि जब यह प्रावधान मूल रूप से लाया गया था, तब इसका उद्देश्य सकारात्मक रहा होगा, लेकिन समय के साथ इसका व्यावहारिक उपयोग बदल गया है।

जब सीजेआई ने विशिष्ट प्रावधान के बारे में पूछा, तो दीवान ने एडवोकेट्स एक्ट के तहत सेक्शन 4(3) का हवाला दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीसीआई सदस्य का कार्यकाल चुनाव की तिथि से दो वर्ष का होता है या तब तक रहता है जब तक वह बीसीआई का सदस्य बना रहता है। इस व्यवस्था के अनुसार, प्रत्येक सदस्य तब तक अपने पद पर बना रहता है जब तक कि उसका नया उत्तराधिकारी चुन नहीं लिया जाता। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि इसी अंतरिम व्यवस्था का फायदा उठाकर चुनावों को अनिश्चितकाल के लिए टाला जा रहा है। दीवान ने यह भी बताया कि मतदाता सूची के सत्यापन की प्रक्रिया को भी मामले को लंबा खींचने का जरिया बनाया गया, जबकि 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सत्यापन प्रक्रिया चुनाव टालने का लाइसेंस नहीं हो सकती।

## राज्य बार काउंसिल चुनाव और सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि संबंधित अधिसूचनाएं वर्ष 2025 की हैं और उन्होंने पूछा कि 2026 के चुनावों के बाद स्थिति में क्या बदलाव आया है। वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने आग्रह किया कि बीसीआई निकाय के पुनर्गठन की अनुमति दी जानी चाहिए। वकील सीयू सिंह ने कहा कि यह प्रक्रिया अक्सर निर्विरोध संपन्न होती है और अदालत को इस पहलू की जांच करनी चाहिए। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि अदालत फिलहाल उस विषय पर विचार नहीं कर रही है और पक्षकारों को व्यक्तिगत मुद्दों से दूर रहना चाहिए क्योंकि अदालत कानून के सिद्धांतों पर चर्चा कर रही है।

सीजेआई ने आगे कहा कि राज्य बार काउंसिल के चुनाव संपन्न हो चुके हैं और अब वे अपने प्रतिनिधि चुनेंगे, जो आगे बीसीआई के लिए मतदान करेंगे। जब शोभा गुप्ता ने यह आशंका जताई कि बीसीआई अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे, तो सीजेआई ने स्पष्ट किया कि नए चुनाव होने के बाद अब स्थिति बदल चुकी है। वकील दीवान ने कहा कि वर्तमान में कोई भी आधिकारिक रूप से पद पर नहीं है। सीजेआई ने आश्वासन दिया कि इस प्रावधान को लेकर अत्यधिक चिंता की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह केवल एक अंतरिम व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि राज्य स्तर पर प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुने हुए सदस्यों की जिम्मेदारी होगी कि वे सेक्शन 4(1)(सी) के तहत बीसीआई के लिए अपना प्रतिनिधि और अध्यक्ष चुनें।

## गजट अधिसूचना 2025 और 2030 तक का कार्यकाल
वरिष्ठ वकील दीवान ने मार्च में आयोजित बीसीआई बैठक के विवरण को देखने का अनुरोध किया, जिस पर सीजेआई ने टिप्पणी की कि दाखिल दस्तावेजों में कोई उपयोगी कागजात संलग्न नहीं हैं, जो जल्दबाजी में किए गए काम का नतीजा है। इसके बाद दीवान ने 21 अप्रैल 2025 के गजट नोटिफिकेशन का संदर्भ दिया, जिसमें चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन के चुनाव परिणामों की घोषणा की गई थी। उन्होंने बताया कि सुरेश चंद्र की अध्यक्षता में हुई बैठक में मनन मिश्रा को 17 अप्रैल 2025 से वर्ष 2030 तक के लिए सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया था।

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने नियमों के तहत बीसीआई चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन के अधिकतम कार्यकाल की कानूनी सीमा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि नियमावली का सख्ती से पालन किया जाए तो यह कार्यकाल 2027 से आगे नहीं बढ़ सकता। जस्टिस बागची ने यह महत्वपूर्ण सिद्धांत रेखांकित किया कि कोई भी प्रशासनिक अधिसूचना या कार्यकारी आदेश मूल अधिनियम (स्टैच्यूट) का उल्लंघन नहीं कर सकता और न ही किसी संस्था को वैधानिक सीमा से अधिक कार्यकाल प्रदान कर सकता है। इसके अतिरिक्त, सुनवाई के दौरान पूर्व न्यायाधीश को जांच सौंपने की मांग का भी संदर्भ आया।

## इसका आप पर असर
इस कानूनी सुनवाई का सीधा असर देश भर के वकीलों और बार काउंसिलों की लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली पर पड़ेगा।

- **भारत में:** सुप्रीम कोर्ट द्वारा एडवोकेट्स एक्ट की धारा 4(3) के पारदर्शी क्रियान्वयन से सभी राज्यों के अधिवक्ताओं को समय पर प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलेगा। इससे बार काउंसिल की संस्थागत व्यवस्था में पारदर्शिता और लोकतंत्र मजबूत होगा।
- **नई दिल्ली में:** बीसीआई के पुनर्गठन और चुनाव प्रक्रिया के पटरी पर आने से राष्ट्रीय राजधानी में वकीलों के शीर्ष निकाय के प्रशासनिक फैसलों को कानूनी स्थिरता मिलेगी।

## सवाल-जवाब

### 1. सुप्रीम कोर्ट में किस मामले पर सुनवाई हो रही थी?
सुप्रीम कोर्ट बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल और लंबे समय से पद पर बने रहने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।

### 2. सुनवाई किस जज की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही थी?
सुनवाई प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ कर रही थी।

### 3. एडवोकेट्स एक्ट की किस धारा पर मुख्य बहस हुई?
मुख्य बहस एडवोकेट्स एक्ट की धारा 4(3) और धारा 4(1)(सी) के प्रावधानों और उनके व्यावहारिक इस्तेमाल पर हुई।

### 4. सीजेआई सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान क्या मुख्य बात कही?
सीजेआई ने कहा कि अदालत व्यक्तिगत विवादों के बजाय कानून के प्रावधानों पर ध्यान केंद्रित कर रही है और नए चुनावों के बाद स्थितियां बदली हैं।

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