{
  "type": "article",
  "title": "बारापुल्ला फेज-3 शुरू होते ही फंसा ट्रैफिक, मयूर विहार से एम्स रूट पर पहले ही दिन रेंगती दिखीं गाड़ियां",
  "summary": "दिल्ली में सिग्नल फ्री बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर शुरू होने के अगले ही दिन भारी जाम लग गया. 40 मिनट की दूरी 15 मिनट में तय कराने का दावा करने वाले इस 9 किलोमीटर लंबे रूट पर जॉइनिंग पॉइंट्स और अचानक बढ़े दबाव ने वाहनों की रफ्तार थाम दी.",
  "content": "देश की राजधानी दिल्ली में यातायात को सुगम बनाने के मकसद से मंगलवार को बारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर की शुरुआत की गई थी. प्रशासन और योजनाकारों की तरफ से दावा किया गया था कि सिग्नल-फ्री होने की वजह से जो सफर पहले 40 मिनट में पूरा होता था, अब वह महज 15 मिनट में सिमट जाएगा. हालांकि, इसके चालू होने के अगले ही दिन यानी 30 सितंबर को इस नए मार्ग पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं. मयूर विहार फेज-1 से एम्स तक फैले लगभग 9 किलोमीटर लंबे इस पूरे गलियारे पर लोगों को तेज रफ्तार मिलने के बजाय भारी जाम और दिक्कतों का सामना करना पड़ा.\n\nपुराना व्यस्त मार्ग और अचानक उमड़ी गाड़ियों की भीड़\nट्रैफिक विशेषज्ञों का मानना है कि बारापुल्ला का यह इलाका हमेशा से ही दिल्ली के सर्वाधिक व्यस्त रास्तों में गिना जाता रहा है. हालांकि इस नए फेज-3 का निर्माण ही इसी इरादे से हुआ था कि पुराने जाम से निजात दिलाई जा सके, लेकिन उद्घाटन के तुरंत बाद स्थिति बिल्कुल उलट नजर आई. पूर्वी दिल्ली के रिहायशी इलाकों जैसे मयूर विहार और लक्ष्मी नगर से रोजाना हजारों वाहन दक्षिणी दिल्ली के एम्स और साउथ एक्सटेंशन की दिशा में आते-जाते हैं. सामान्य दिनों में भी सुबह और शाम के पीक ऑवर्स के दौरान यहां वाहनों का दबाव अत्यधिक रहता है. जैसे ही नया कॉरिडोर खुला, पुराने रास्तों से सफर करने वाले चालकों ने एक साथ नए मार्ग का रुख कर लिया, जिससे अचानक पूरे एलिवेटेड स्ट्रक्चर पर क्षमता से अधिक गाड़ियां पहुंच गईं.\n\nएंट्री-एग्जिट पॉइंट्स पर बॉटलनेक और कई सड़कों का मिलन\nइस मार्ग पर जाम लगने की एक प्रमुख वजह सराय काले खां और आश्रम चौक के निकट मौजूद प्रमुख जॉइनिंग पॉइंट्स हैं. इन जगहों पर शहर की कई महत्वपूर्ण सड़कें आपस में जुड़ती हैं. जब मुख्य मार्ग से गाड़ियां इन एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स की तरफ मुड़ती हैं, तो उनकी गति बेहद धीमी हो जाती है. चौड़ी सड़क से संकरे मोड़ों पर गाड़ियों के मुड़ने के कारण पीछे की तरफ वाहनों की कतार लगनी शुरू हो जाती है. जब एक साथ बड़ी संख्या में वाहन इन मोड़ों पर पहुंचते हैं, तो यह गतिरोध पूरे कॉरिडोर पर पीछे तक फैल जाता है.\n\nलंबे निर्माण के बाद रूट में बदलाव और मिक्स्ड ट्रैफिक\nफेज-3 के निर्माण में लंबे समय तक हुई देरी का असर भी इस स्थिति के पीछे देखा जा रहा है. इतने सालों तक काम अधूरा रहने से आसपास के वैकल्पिक रास्तों पर वाहनों का दबाव बना हुआ था. अब काम पूरा होने के बाद वाहन चालकों ने बिना किसी औपचारिक ट्रैफिक तालमेल के अचानक नए रूट को अपना लिया. इसके अलावा, इस कॉरिडोर पर अलग-अलग गति से चलने वाले वाहनों का मिश्रण भी एक बड़ी चुनौती बना. सड़कों पर जब कार, मोटरसाइकिल और बसों के साथ-साथ कभी-कभार पैदल चलने वाले या साइकिल सवार भी आ जाते हैं, तो वाहनों की औसत गति अचानक गिर जाती है.\n\nरिंग रोड और एनएच-24 का जुड़ाव\nबारापुल्ला कॉरिडोर सीधे तौर पर रिंग रोड और एनएच-24 जैसी प्रमुख और अति-व्यस्त धमनियों से जुड़ा हुआ है. इन बाहरी मुख्य मार्गों पर होने वाली किसी भी छोटी-मोटी रुकावट या धीमेपन का सीधा असर बारापुल्ला के ट्रैफिक प्रवाह पर पड़ता है. ऐसे अंतर-सड़क संपर्कों पर एक भी अड़चन आने से पूरे रूट की रफ्तार थम जाती है. जानकारों का कहना है कि हालांकि नई सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी से आने वाले समय में आवागमन कुछ सुगम होने की उम्मीद बनी हुई है, लेकिन पीक ऑवर्स में चालकों को सावधानी बरतनी होगी और जरूरत पड़ने पर पुराने वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल भी जारी रखना पड़ सकता है.\n\nइसका आप पर असर\nबारापुल्ला फेज-3 पर शुरुआती दिनों में लगने वाला यह जाम पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के बीच सफर करने वाले दैनिक यात्रियों के समय और रूट चयन को सीधे प्रभावित करता है.\n\n• दिल्ली में: मयूर विहार, लक्ष्मी नगर और आसपास के इलाकों से एम्स तथा साउथ एक्सटेंशन जाने वाले यात्रियों को पीक ऑवर्स में अनुमानित 15 मिनट से अधिक का समय लग सकता है. वाहन चालकों को जाम से बचने के लिए फिलहाल सुबह और शाम के व्यस्त समय में वैकल्पिक रास्तों पर भी नजर रखनी होगी.\n• सराय काले खां और आश्रम के पास: इन प्रमुख जंक्शनों से जुड़ने वाले रास्तों पर वाहनों की गति बेहद धीमी रहने से लोकल यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है. कनेक्टिंग सड़कों से आने वाले लोगों को अपनी यात्रा के लिए 15 से 20 मिनट का अतिरिक्त समय लेकर निकलना होगा.\n• दफ्तर जाने वाले यात्रियों के लिए: अचानक बढ़ी भीड़ और एंट्री-एग्जिट बॉटलनेक के कारण ऑफिस टाइमिंग के दौरान अचानक रुकावट आ सकती है. दैनिक यात्रियों को जीपीएस या लाइव ट्रैफिक अपडेट्स देखकर ही नए रूट पर चढ़ने का फैसला लेना चाहिए.\n• सार्वजनिक व मिश्रित परिवहन पर: बसों, कारों और बाइकों के एक साथ चलने से शुरुआती दिनों में गति अनियंत्रित हो सकती है. दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को जंक्शन मोड़ों पर अत्यधिक सावधानी बरतनी होगी ताकि दुर्घटनाओं या अतिरिक्त रुकावट से बचा जा सके.\n\nऐसा क्यों हुआ\nसिग्नल-फ्री होने के बावजूद बारापुल्ला फेज-3 के पहले ही दिन जाम लगने के पीछे भारी ट्रैफिक लोड, अचानक रूट बदलना और एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स पर बुनियादी अड़चनें मुख्य वजह रहीं.\n\n• अचानक बढ़ा वाहनों का दबाव: नए फ्लाईओवर के खुलते ही पूर्वी दिल्ली से दक्षिणी दिल्ली जाने वाले हजारों चालकों ने पुराने रास्तों को छोड़कर एक साथ इस रूट का चुनाव कर लिया. इससे कॉरिडोर पर पीक ऑवर्स में वाहनों की तादाद अचानक क्षमता से कहीं ज्यादा पहुंच गई.\n• जॉइनिंग पॉइंट्स पर संकरापन: सराय काले खां और आश्रम चौक जैसे महत्वपूर्ण मोड़ों पर कई प्रमुख सड़कों का ट्रैफिक आकर मिलता है. इन बिंदुओं पर एंट्री और एग्जिट करते समय गाड़ियों की रफ्तार धीमी होने से पीछे भारी रुकावट पैदा हो गई.\n• रिंग रोड और एनएच-24 का असर: यह पूरा कॉरिडोर रिंग रोड और एनएच-24 जैसी व्यस्ततम सड़कों से गहराई से जुड़ा हुआ है. इन बाहरी सड़कों पर ट्रैफिक का बहाव धीमा होते ही उसका सीधा बैक-इफेक्ट बारापुल्ला पर पड़ा.\n• मिश्रित वाहनों की आवाजाही: तेज रफ्तार कारों के साथ भारी बसों, बाइकों और कभी-कभार साइकिल या पैदल यात्रियों के एक ही मार्ग पर चलने से गति में एकरूपता नहीं रही. गति के इस असंतुलन ने वाहनों के सुचारू प्रवाह को रोक दिया.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बारापुल्ला फेज-3 कॉरिडोर किन दो मुख्य इलाकों को आपस में जोड़ता है?\nयह नया कॉरिडोर पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 को दक्षिणी दिल्ली के एम्स से जोड़ता है.\n\n2. इस नए मार्ग की कुल लंबाई कितनी है?\nबारापुल्ला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 9 किलोमीटर है.\n\n3. इस कॉरिडोर के जरिए यात्रा के समय में कितनी कमी आने का दावा किया गया था?\nदावा किया गया था कि सिग्नल-फ्री होने के बाद 40 मिनट की दूरी घटकर महज 15 मिनट रह जाएगी.\n\n4. उद्घाटन के अगले दिन यानी 30 सितंबर को जाम क्यों लगा?\nपुराने रास्तों से अचानक हजारों गाड़ियों के इस रूट पर आ जाने, जॉइनिंग पॉइंट्स पर भीड़ और रिंग रोड के ट्रैफिक दबाव की वजह से जाम लगा.\n\n5. इस रूट पर कौन से प्रमुख एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स ट्रैफिक के लिए संवेदनशील हैं?\nसराय काले खां और आश्रम चौक के निकट मौजूद जॉइनिंग पॉइंट्स सबसे संवेदनशील हैं जहां कई सड़कें आपस में मिलती हैं.",
  "url": "https://trendkia.com/national/barapullah-phase-3-shuru-hote-hi-phnsa-traiphika-mayur-vihar-se-aiims-ruta-para-pahale-hi-dina-rengati-dikhin-gariyan-41233",
  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-10-01",
  "tags": [
    "बारापुल्ला फ्लाईओवर",
    "दिल्ली ट्रैफिक",
    "मयूर विहार",
    "एम्स दिल्ली",
    "सराय काले खां",
    "आश्रम चौक",
    "एलिवेटेड कॉरिडोर",
    "रिंग रोड"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}