बारापुला फेज-3 तैयार, मयूर विहार से एम्स का सफर अब मात्र 15 मिनट में सराय काले खां से मयूर विहार फेज-1 के बीच बना 3.5 किलोमीटर लंबा बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर बनकर तैयार हो चुका है, जिससे मयूर विहार से एम्स तक 9 किलोमीटर का पूरा रास्ता सिग्नल फ्री हो जाएगा। पूर्वी दिल्ली और एनसीआर के दैनिक यात्रियों के लिए राजधानी में आवागमन अब पहले से कहीं अधिक सुगम होने जा रहा है। सराय काले खां से मयूर विहार फेज-1 को जोड़ने वाले बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर के तीसरे चरण का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और यह आम जनता के आवागमन के लिए पूरी तरह तैयार है। लोक निर्माण मंत्री परवेश साहिब सिंह वर्मा ने शनिवार को मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्यों और अंतिम तैयारियों का गहन निरीक्षण किया। लगभग 3.5 किलोमीटर लंबे इस नए एलिवेटेड हिस्से के चालू होने के बाद पूर्वी दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद से मध्य तथा दक्षिण दिल्ली आने-जाने वाले वाहनों को एक बेहद सुगम और निर्बाध वैकल्पिक मार्ग मिल जाएगा। इस नए रास्ते के खुलने से सराय काले खां और आसपास की सड़कों पर रोजाना लगने वाले भारी जाम में भारी कमी आएगी। मयूर विहार से एम्स तक 9 किलोमीटर का सिग्नल फ्री सफर इस परियोजना के पूरी तरह संचालित होने के बाद मयूर विहार से सराय काले खां होते हुए एम्स तक का पूरा कॉरिडोर लगभग 9 किलोमीटर लंबा हो जाएगा, जो पूरी तरह सिग्नल-फ्री रहेगा। वर्तमान में इस दूरी को तय करने में व्यस्त समय के दौरान लंबा वक्त लग जाता है, लेकिन अब मयूर विहार से एम्स तक की दूरी मात्र 15 मिनट में तय की जा सकेगी। 29 सितंबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर को जनता को समर्पित करेंगे और उसी दिन से इसे नियमित यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। इस मार्ग के सक्रिय होने से पूर्वी दिल्ली और एनसीआर के बड़े हिस्से से आने वाले वाहनों को दक्षिण दिल्ली तक बिना किसी लाल बत्ती पर रुके पहुंचने की सीधी सुविधा मिलेगी। डीएनडी और अक्षरधाम पर घटेगा वाहनों का दबाव सड़क के उपयोग में आने से राजधानी के कई प्रमुख जंक्शनों पर यातायात का संतुलन बेहतर होगा। परवेश वर्मा ने बताया कि इस कॉरिडोर के शुरू होने के बाद डीएनडी और अक्षरधाम मंदिर के आसपास के इलाकों में वाहनों का दबाव उल्लेखनीय रूप से कम होने की उम्मीद है। गाजियाबाद, नोएडा और साहिबाबाद से दिल्ली में प्रवेश करने वाले दैनिक मुसाफिरों को रोजाना की भागदौड़ और जाम से बड़ी राहत मिलेगी। इसके अलावा, लाल बत्ती और भीषण जाम में वाहनों के बेवजह खड़े रहने का समय घटने से ईंधन की खपत कम होगी, जिससे राजधानी में वाहनों से होने वाले प्रदूषण के स्तर में भी कमी लाने में मदद मिलेगी। अड़चनों को पार कर ₹1,635.03 करोड़ में पूरी हुई परियोजना बारापुला कॉरिडोर के तीसरे चरण को पूरा करने में कई तरह की प्रशासनिक और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसकी वजह से इस परियोजना में काफी लंबा वक्त लगा। शुरुआती दौर में इस प्रोजेक्ट को करीब ₹1,260.63 करोड़ की अनुमानित लागत से प्रशासनिक मंजूरी दी गई थी। हालांकि, समय बीतने और विभिन्न अड़चनों के कारण इसकी संशोधित लागत बढ़कर ₹1,635.03 करोड़ तक पहुंच गई। निर्माण प्रक्रिया में देरी के पीछे जमीन अधिग्रहण से जुड़े पेच, वन विभाग तथा पर्यावरण से संबंधित मंजूरियों की प्रक्रिया और मध्यस्थता यानी आर्बिट्रेशन के मामले प्रमुख कारण रहे। लोक निर्माण मंत्री के अनुसार, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से मंजूरी लेने और कानूनी विवादों के समाधान के बाद अब सभी अड़चनों को पूरी तरह दूर कर लिया गया है, जिसके बाद अब तय कार्यक्रम के अनुसार इसे जनता को सौंपा जा रहा है। साइकिल सवारों और पैदल यात्रियों के लिए विशेष इंतजाम इस एलिवेटेड कॉरिडोर की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसे केवल तेज रफ्तार मोटर वाहनों के लिए ही नहीं, बल्कि गैर-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट के अनुकूल भी तैयार किया गया है। जहां इस पर लक्जरी और सामान्य गाड़ियां बिना रुके फर्राटा भर सकेंगी, वहीं पर्यावरण के अनुकूल आवागमन को बढ़ावा देने के लिए इसमें करीब 2 मीटर चौड़ा अलग साइकिल ट्रैक तैयार किया गया है। इसके साथ ही पैदल चलने वालों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए करीब 1.5 मीटर चौड़ा फुटपाथ भी बनाया गया है। दिल्ली के चुनिंदा एलिवेटेड मार्गों में शामिल होकर यह कॉरिडोर आधुनिक शहरी नियोजन और गैर-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता देने की दिशा में एक नया उदाहरण प्रस्तुत करता है। इसका आप पर असर बारापुला फेज-3 के शुरू होने से दिल्ली और एनसीआर के दैनिक यात्रियों के यात्रा समय और ईंधन खर्च में सीधी बचत होगी। • भारत में: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी से अंतरराज्यीय परिवहन और व्यापारिक आवागमन अधिक सुगम होगा। बड़े शहरी केंद्रों में सिग्नल-फ्री इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से अन्य महानगरों के लिए भी यात्रा समय घटाने का मॉडल तैयार होता है। • दिल्ली और एनसीआर में: मयूर विहार से एम्स के बीच यात्रा का समय घटकर मात्र 15 मिनट रह जाएगा। सराय काले खां, डीएनडी और अक्षरधाम के रूट पर लगने वाले जाम से रोजाना सफर करने वाले लाखों कामकाजी लोगों को सीधी राहत मिलेगी। • सड़क यात्रियों के लिए: 9 किलोमीटर का पूरा रास्ता बिना किसी लाल बत्ती के पार किया जा सकेगा। सिग्नल पर गाड़ियों के न रुकने से ईंधन की बचत होगी और यात्रा का तनाव काफी कम हो जाएगा। • साइकिल चालकों और पैदल यात्रियों के लिए: एलिवेटेड रूट पर 2 मीटर चौड़ा साइकिल ट्रैक और 1.5 मीटर का फुटपाथ सुरक्षित आवागमन देगा। इससे गैर-मोटराइज्ड वाहनों से चलने वाले लोगों को भारी ट्रैफिक के बीच सुरक्षित लेन मिल सकेगी। ऐसा क्यों हुआ बारापुला फेज-3 का निर्माण ईस्ट दिल्ली और एनसीआर से साउथ दिल्ली आने-जाने वाले भारी ट्रैफिक को वैकल्पिक बाईपास देने और जाम से निजात दिलाने के लिए किया गया है। जमीन, वन विभाग और कानूनी विवादों के सुलझने के बाद अब यह मार्ग बनकर तैयार हुआ है। • ट्रैफिक जाम की विकट समस्या: सराय काले खां, डीएनडी और आश्रम मार्ग पर वाहनों का दबाव चरम पर रहता था। इस अत्यधिक लोड को कम करने और दक्षिण दिल्ली के लिए सीधा बाईपास देने के उद्देश्य से इस तीसरे चरण की रूपरेखा बनाई गई थी। • निर्माण में कानूनी और प्रशासनिक बाधाएं: जमीन अधिग्रहण में पेच, वन विभाग की पर्यावरण अनुमतियां और आर्बिट्रेशन मामलों के कारण काम लंबे समय तक अटका रहा। इन सभी मंजूरियों और विवादों का समाधान होने के बाद ही निर्माण को अंतिम रूप दिया जा सका। • लागत में संशोधन की आवश्यकता: कई वर्षों तक काम लटके रहने और परियोजना में देरी के चलते शुरुआती बजट कम पड़ गया। ₹1,260.63 करोड़ के मूल आवंटन को संशोधित कर ₹1,635.03 करोड़ करना पड़ा ताकि परियोजना पूरी हो सके। सवाल-जवाब 1. बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर फेज-3 किन दो इलाकों को जोड़ता है? यह 3.5 किलोमीटर लंबा नया एलिवेटेड हिस्सा सराय काले खां को मयूर विहार फेज-1 से जोड़ता है। 2. इस कॉरिडोर के खुलने के बाद मयूर विहार से एम्स जाने में कितना समय लगेगा? यह पूरा 9 किलोमीटर का रास्ता सिग्नल फ्री हो जाएगा, जिससे यह दूरी मात्र 15 मिनट में तय की जा सकेगी। 3. बारापुला फेज-3 का उद्घाटन कब और किसके द्वारा किया जाएगा? केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 29 सितंबर 2026 को इस एलिवेटेड कॉरिडोर को जनता को समर्पित करेंगे। 4. इस परियोजना की कुल संशोधित लागत कितनी रही? शुरुआती तौर पर इसे ₹1,260.63 करोड़ की मंजूरी मिली थी, जो बाद में बढ़कर ₹1,635.03 करोड़ हो गई। 5. क्या इस एलिवेटेड कॉरिडोर पर गैर-मोटराइज्ड वाहनों के लिए कोई सुविधा है? हां, इस कॉरिडोर पर करीब 2 मीटर चौड़ा साइकिल ट्रैक और लगभग 1.5 मीटर चौड़ा पैदल फुटपाथ बनाया गया है। 6. इस कॉरिडोर के शुरू होने से किन इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा? इससे सराय काले खां, डीएनडी और अक्षरधाम के आसपास वाहनों का दबाव और जाम काफी कम होने की उम्मीद है। https://trendkia.com/national/barapullah-phase-3-taiyara-mayur-vihar-se-aiims-ka-saphara-aba-matra-15-minata-men-33489 TrendKia — Har trend, sabse pehle.