बारिश के मौसम में धान के तने में घुसकर पौधा चट कर जाता है यह कीट, कैसे पहचानें और बचाएं फसल मॉनसून सीजन में धान की रोपाई के बाद तना छेदक कीट पौधों के तने में घुसकर उन्हें अंदर से खोखला कर देता है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए. के. सिंह के मुताबिक मिट्टी व पौध उपचार, लाइट ट्रैप और नीम के तेल जैसे उपायों से किसान इस कीट से अपनी फसल बचा सकते हैं। मॉनसून के इस मौसम में देश भर के किसान खरीफ की फसल तैयार करने में जुटे हैं और ज्यादातर खेतों में धान की रोपाई पूरी हो चुकी है। लेकिन रोपाई के बाद असली चुनौती शुरू होती है, क्योंकि इसी दौर में धान के पौधों पर कई तरह के कीटों का हमला होता है। किसान खरपतवार को रोकने के लिए भारी मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन कई बार पौधों के अंदर छिपकर हमला करने वाले कीटों पर उनका ध्यान नहीं जाता और नतीजा यह होता है कि तैयार हो रही फसल बर्बाद हो जाती है। धान खरीफ सीजन की सबसे बड़ी फसलों में शामिल है और लाखों किसान परिवारों की कमाई इसी पर टिकी होती है, इसलिए तना छेदक जैसे कीटों से हुआ नुकसान सीधे उनकी जेब पर असर डालता है। इन्हीं में से एक है तना छेदक कीट, जो धान के पौधे को अंदर ही अंदर खोखला कर देता है। तना छेदक कीट कैसे करता है नुकसान कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए. के. सिंह के मुताबिक, धान की फसल पर कई तरह के कीटों का प्रकोप देखने को मिलता है, जिनमें से एक प्रमुख कीट स्टेम बोरर है, जिसे हिंदी में तना छेदक कहा जाता है। यह कीट पौधे के तने के अंदर घुसकर उसे भीतर से खोखला कर देता है, जिससे पौधा धीरे-धीरे सूखने लगता है और उपज पर सीधा असर पड़ता है। डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि तना छेदक के साथ ही धान की पत्तियों में ब्लास्ट डिजीज का खतरा भी बना रहता है, जिसमें पत्तियों में छेद हो जाते हैं और पौधे को नुकसान पहुंचता है। इसलिए किसानों को अपने खेत की लगातार निगरानी करते रहना चाहिए, ताकि शुरुआती लक्षण दिखते ही समय रहते कदम उठाए जा सकें। रोपाई से पहले ही मिट्टी का करें उपचार डॉ. ए. के. सिंह के अनुसार, तना छेदक कीट से बचाव के लिए बाजार में कई तरह के कीटनाशक मौजूद हैं और राहत की बात यह है कि ये कीटनाशक सस्ते दामों में आसानी से मिल जाते हैं। पौधों की जड़ों में छेद करने वाले कीटों को खत्म करने के लिए किसानों को रोपाई से पहले ही 0.05 प्रतिशत क्लोरपाइरीफास से मिट्टी का उपचार कर लेना चाहिए। इसके अलावा रोपाई से पहले धान के पौधों को भी उपचारित करना जरूरी है, ताकि खेत में लगने के बाद कीट का असर शुरू से ही रोका जा सके। यह तरीका शुरुआती स्तर पर ही कीट के प्रकोप को काफी हद तक कम कर देता है। लाइट ट्रैप और नीम के तेल से मिलेगी राहत डॉ. सिंह ने बताया कि तना छेदक कीट पर काबू पाने के लिए किसान लाइट ट्रैप का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें रोशनी की तरफ आकर्षित होकर कीट खुद ही उसमें फंसकर नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा नीम के तेल का छिड़काव भी एक कारगर और सस्ता उपाय है, जिसे किसान आसानी से अपना सकते हैं। इनके साथ ही फेरोमोन ट्रैप और ट्राइको-कार्ड का इस्तेमाल भी तना छेदक के नियंत्रण में काफी असरदार साबित होता है। डॉ. सिंह के मुताबिक इन उपायों को एक साथ अपनाने से किसानों को दोहरा फायदा मिलता है, क्योंकि इससे न सिर्फ कीट का प्रकोप कम होता है, बल्कि धान की फसल को बर्बाद होने से भी बचाया जा सकता है। किसानों के लिए क्या है सबसे कारगर तरीका कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान जैसी अहम खरीफ फसल के लिए तना छेदक कीट की पहचान जितनी जल्दी हो, नुकसान उतना ही कम होता है, इसलिए मिट्टी के उपचार, पौध उपचार और ट्रैप जैसे उपायों को साथ अपनाना सबसे कारगर तरीका माना जाता है। इसका आप पर असर यह खबर सीधे तौर पर धान उगाने वाले किसानों के काम की है। • किसानों के लिए: समय रहते तना छेदक कीट की पहचान कर मिट्टी और पौध का सही उपचार करने से फसल बर्बाद होने से बच सकती है और उपज में होने वाला नुकसान कम किया जा सकता है। • खर्च के लिहाज से: बाजार में सस्ते कीटनाशक और नीम के तेल जैसे उपाय उपलब्ध होने से किसानों पर ज्यादा आर्थिक बोझ नहीं पड़ता। सवाल-जवाब 1. तना छेदक कीट धान की फसल को कैसे नुकसान पहुंचाता है? यह कीट धान के पौधे के तने में घुसकर उसे अंदर से खोखला कर देता है, जिससे पौधा सूखने लगता है और उपज पर असर पड़ता है। 2. तना छेदक कीट से बचाव के लिए मिट्टी का उपचार कैसे करें? रोपाई से पहले खेत की मिट्टी को 0.05 प्रतिशत क्लोरपाइरीफास से उपचारित करना चाहिए, इससे जड़ों में छेद करने वाले कीट खत्म हो जाते हैं। 3. क्या धान के पौधों को भी उपचारित करना जरूरी है? हां, कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए. के. सिंह के अनुसार रोपाई से पहले धान के पौधों को भी उपचारित किया जाना चाहिए। 4. तना छेदक के अलावा धान की फसल पर और कौन-सा खतरा मंडराता है? धान की पत्तियों पर ब्लास्ट डिजीज का भी खतरा रहता है, जिसमें पत्तियों में छेद हो जाते हैं। 5. लाइट ट्रैप कैसे काम करता है? कीट रोशनी की तरफ आकर्षित होकर लाइट ट्रैप में फंस जाते हैं और नष्ट हो जाते हैं। 6. तना छेदक कीट को नियंत्रित करने के और कौन-कौन से उपाय हैं? नीम के तेल का छिड़काव, फेरोमोन ट्रैप और ट्राइको-कार्ड का इस्तेमाल भी असरदार उपाय हैं। https://trendkia.com/national/barisha-ke-mausama-men-dhana-ke-tane-men-ghusakara-paudha-chata-kara-jata-hai-yaha-kita-kaise-pahachanen-aura-bachaen-phasala-12293 TrendKia — Har trend, sabse pehle.