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  "type": "article",
  "title": "बारिश के मौसम में पशुओं के चारे की किल्लत दूर करेगी थाईलैंड की नेपियर घास, सुलतानपुर में किसानों को मिल रहा फायदा",
  "summary": "सुलतानपुर में बारिश के दौरान पशुओं के हरे चारे की समस्या से निपटने के लिए किसान थाईलैंड की नेपियर घास उगा रहे हैं, जिससे दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल रही है।",
  "content": "मानसून की बारिश शुरू होते ही उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पशुपालकों के सामने हरे चारे का बड़ा संकट खड़ा हो जाता है। जलभराव के कारण खेत पानी में डूब जाते हैं या फिर अनुपयोगी घास-फूस से भर जाते हैं। ऐसी स्थिति में अक्सर मवेशियों को केवल सूखा भूसा खाकर ही गुजारा करना पड़ता है, जिससे दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन पर बहुत बुरा असर पड़ता है। इस समस्या से निपटने के लिए अब क्षेत्र के किसान आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाते हुए थाईलैंड की मूल प्रजाति नेपियर घास की खेती की तरफ रुख कर रहे हैं।\n\nनेपियर घास की विशेषताएं और पशुओं के लिए लाभ\nनेपियर घास, जिसे बोलचाल की भाषा में 'हाथी घास' भी कहा जाता है, मूल रूप से थाईलैंड में उगाई जाने वाली एक विदेशी किस्म है। दिखने में यह घास काफी हद तक गन्ने की फसल की तरह होती है और इसकी ऊंचाई भी गन्ने जैसी ही बड़ी होती है। कृषि विज्ञान केंद्र सुलतानपुर में कार्यरत पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डॉक्टर दिवाकर के अनुसार, बारिश के दिनों में यह घास दुधारू पशुओं के लिए एक सर्वोत्तम पोषण विकल्प साबित होती है। केवल सूखा भूसा देने के बजाय नेपियर चारा खिलाने से मवेशियों का दूध उत्पादन काफी बढ़ जाता है, जो किसानों के लिए आर्थिक रूप से बेहद लाभदायक रहता है।\n\nबुवाई का सही समय और तकनीक\nवैज्ञानिक डॉक्टर दिवाकर के अनुसार, नेपियर घास की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय मार्च का महीना माना जाता है। हालांकि, किसान इसकी बुवाई मानसून के दौरान यानी जुलाई और अगस्त के महीनों में भी सफलतापूर्वक कर सकते हैं। अत्यधिक गर्मी और कड़ाके की ठंड का मौसम इसकी बुवाई के लिए सही नहीं माना जाता, क्योंकि उन परिस्थितियों में नए पौधे ठीक से जड़ नहीं जमा पाते। इसकी खेती करने का तरीका गन्ने की बुवाई से काफी मिलता-जुलता है। इसे हमेशा खेत में सीधी पंक्तियों और मेड़ों पर ही बोया जाना चाहिए। यदि बुवाई के समय नेपियर घास के टुकड़े बड़े हों, तो उनकी पत्तियों को काट देना चाहिए ताकि पौधे आसानी से लग सकें।\n\nहर 50 दिन में कटाई और लंबे समय तक उत्पादन\nनेपियर घास की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक सदाबहार चारा है। एक बार खेत में लगा दिए जाने के बाद इसकी पहली और बाद की फसलें महज 50-50 दिनों के अंतराल पर कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती हैं। यह चक्र लगातार कई वर्षों तक बिना रुके चलता रहता है। इसके कारण किसानों को हर मौसम में बार-बार बीज खरीदने और दोबारा बुवाई करने की झंझट या अतिरिक्त खर्च से पूरी तरह मुक्ति मिल जाती है। यही कारण है कि बारिश के संकटपूर्ण दिनों में भी पशुपालक अपने मवेशियों के लिए पौष्टिक चारे का निरंतर प्रबंध कर पा रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: बारिश के मौसम में हरे चारे की कमी झेल रहे पशुपालक नेपियर घास अपनाकर दूध उत्पादन बढ़ा सकते हैं और बार-बार बुवाई के खर्च से बच सकते हैं।\n• सुलतानपुर में: जिले के किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र के मार्गदर्शन में 50 दिनों में तैयार होने वाला सदाबहार चारा विकल्प मिल रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. नेपियर घास मूल रूप से किस देश की प्रजाति है?\nनेपियर घास मूल रूप से थाईलैंड में उगने वाली एक विदेशी प्रजाति है, जिसे 'हाथी घास' भी कहा जाता है।\n\n2. नेपियर घास कितने दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है?\nबुवाई के बाद नेपियर घास हर 50 दिन में कटाई के लिए तैयार हो जाती है और सालों-साल पैदावार देती रहती है।\n\n3. नेपियर घास बोने का सबसे उपयुक्त समय कौन सा है?\nइसे बोने का सबसे अच्छा समय मार्च का महीना है, हालांकि इसकी बुवाई जुलाई-अगस्त में भी की जा सकती है।\n\n4. नेपियर घास की बुवाई किस तरीके से की जाती है?\nइसकी बुवाई गन्ने की तरह लाइनों और मेड़ों पर की जाती है। यदि टुकड़े बड़े हों तो पत्तियों को काटकर बोया जाता है।",
  "url": "https://trendkia.com/national/barisha-ke-mausama-men-pashuon-ke-chare-ki-killata-dura-karegi-thailand-ki-nepiyara-ghasa-sultanpur-men-kisanon-ko-mila-raha-phaya-15374",
  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-08-09",
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    "नेपियर घास",
    "सुलतानपुर",
    "पशुचारा",
    "कृषि विज्ञान केंद्र",
    "दूध उत्पादन",
    "डेयरी फार्मिंग"
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  "site": "TrendKia"
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