बारिश रुकते ही दिल्ली एनसीआर में बिगड़ी हवा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता हुई बहुत खराब मानसून की बारिश थमने के बाद दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ा है, जहां 21 सितंबर को ग्रेटर नोएडा का एक्यूआई 300 के करीब दर्ज हुआ। मानसून की बारिश का दौर थमते ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आबोहवा एक बार फिर चिंताजनक स्थिति में पहुंच गई है। सितंबर का महीना खत्म होने से पहले ही दिल्ली, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा के वायुमंडल में धूल और धुएं के कण जमा होने लगे हैं, जिसके चलते स्थानीय निवासियों को सांस लेने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आमतौर पर ठंड की शुरुआत के साथ दिखने वाला यह संकट इस बार बारिश रुकते ही सामने आ गया है, जहां राजधानी दिल्ली के मुकाबले पड़ोसी शहर ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम में प्रदूषण का स्तर और भी अधिक गंभीर बना हुआ है। ग्रेटर नोएडा के विभिन्न सेक्टरों में वायु गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में पहुंची सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के रिकॉर्ड के मुताबिक, 21 सितंबर को ग्रेटर नोएडा का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के आंकड़े के करीब दर्ज किया गया। शहर के नॉलेज पार्क-5 इलाके में स्थिति सबसे अधिक नाजुक पाई गई, जहां एक्यूआई 330 तक पहुंच गया। वायु गुणवत्ता के मानकों के तहत 300 से ऊपर का स्तर 'बहुत खराब' श्रेणी में गिना जाता है। इसी शहर के नॉलेज पार्क-3 इलाके में एक्यूआई 209 दर्ज किया गया, जो 'खराब' श्रेणी के अंतर्गत आता है। हवा में फैले इस भारी प्रदूषण के कारण इलाके के बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीजों को भारी घुटन और दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। साफ मौसम और बारिश की कमी से दिल्ली के कई इलाके भी प्रभावित भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के नवीनतम पूर्वानुमान में बताया गया है कि आने वाले कुछ दिनों तक दिल्ली और आसपास का मौसम पूरी तरह शुष्क और साफ बना रहेगा। आसमान साफ रहने और बारिश की कोई संभावना न होने के साथ तापमान में भी किसी बड़े बदलाव के आसार नहीं हैं। हालांकि, बारिश न होने की यही स्थिति हवा की सेहत बिगाड़ने वाली साबित हो रही है। बारिश के अभाव में हवा में तैरने वाले धूलकण नीचे नहीं बैठ पा रहे हैं और वातावरण में एकत्र हो रहे हैं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के आंकड़ों के अनुसार, चांदनी चौक में एक्यूआई 235 दर्ज किया गया है, जबकि आनंद विहार में 208 और बवाना में 203 का स्तर रहा। इसके अतिरिक्त कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 162, बुराड़ी क्रॉसिंग में 159, सीआरआरआई मथुरा रोड में 159 और आया नगर में 127 एक्यूआई दर्ज किया गया है। गाजियाबाद के आवासीय क्षेत्रों में भी बढ़ा प्रदूषण का स्तर गाजियाबाद के विभिन्न इलाकों में भी वायु प्रदूषण का दबाव साफ देखा जा रहा है। यहां लोनी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक 203 के स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा वसुंधरा में 187, इंदिरापुरम में 186, वेद विहार-लोनी में 171, संजय नगर में 164 और गोविंदपुरम में 123 एक्यूआई दर्ज किया गया। एनसीआर में लगातार बने हुए शुष्क मौसम के चलते प्रदूषक तत्वों का फैलाव रुक गया है और वे एक ही जगह वायुमंडल में जमा हो रहे हैं। इसी कारण से दिल्ली के साथ-साथ गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा के विस्तृत क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता मध्यम से गिरकर 'खराब' और कुछ जगहों पर 'बहुत खराब' श्रेणी में प्रवेश कर चुकी है। इसका आप पर असर दिल्ली-एनसीआर में बारिश रुकते ही हवा जहरीली होने से स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य और दैनिक दिनचर्या पर सीधा असर पड़ रहा है। • भारत में: उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बदलते मौसम और घटती नमी से मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। अन्य राज्यों के संवेदनशील नागरिकों को भी बदलते तापमान और शुष्क हवा को लेकर सतर्क रहना चाहिए। • दिल्ली-एनसीआर में: ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली के निवासियों को सांस लेने में भारी घुटन और दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह और शाम के समय बाहरी शारीरिक गतिविधियों से बचने और जरूरत पड़ने पर मास्क लगाने की सलाह दी जाती है। • स्वास्थ्य पर असर: सांस की बीमारी और फेफड़ों के संक्रमण से जूझ रहे मरीजों के लिए यह वायु गुणवत्ता बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती है। ऐसे व्यक्तियों को बिना जरूरी काम के खुले स्थानों पर ज्यादा समय बिताने से परहेज करना चाहिए। • दैनिक आवागमन: सड़क पर धूल और धुएं के जमाव से वाहन चालकों और पैदल यात्रियों की आंखों में जलन बढ़ सकती है। सफर के दौरान चश्मे और फेस कवर का इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा। ऐसा क्यों हुआ मानसून की बारिश बंद होने और वायुमंडल में शुष्कता बढ़ने के कारण दिल्ली-एनसीआर की हवा में अचानक प्रदूषक तत्वों का जमावड़ा शुरू हो गया है। • बारिश का रुकना: बारिश की बूंदें हवा में मौजूद धूल और सूक्ष्म प्रदूषक कणों को धोकर जमीन पर बैठा देती हैं। जैसे ही बारिश थमी, वातावरण में तैर रहे धूल और धुएं के कण दोबारा जमा होने लगे। • शुष्क और स्थिर मौसम: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार आसमान साफ रहने और हवा की गति धीमी होने से प्रदूषण का फैलाव नहीं हो पा रहा है। तापमान में ठहराव की वजह से भी स्थानीय स्तर पर उत्सर्जित होने वाला धुआं ऊपर नहीं उठ पा रहा है। • वाहन और निर्माण जनित उत्सर्जन: दिल्ली, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा जैसे सघन शहरी केंद्रों में वाहनों और निर्माण गतिविधियों से निकलने वाले कण बारिश बंद होते ही सीधे वायु गुणवत्ता को बिगाड़ने लगे हैं। जब तक तेज हवा या दोबारा बारिश नहीं होती, यह प्रदूषण स्तर नीचे आने की संभावना कम रहती है। सवाल-जवाब 1. 21 सितंबर को ग्रेटर नोएडा में प्रदूषण का स्तर कितना दर्ज किया गया? 21 सितंबर को ग्रेटर नोएडा का एक्यूआई 300 के करीब दर्ज किया गया, जिसमें नॉलेज पार्क-5 का स्तर 330 तक पहुंच गया। 2. दिल्ली के किन इलाकों में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंची है? दिल्ली के चांदनी चौक में एक्यूआई 235, आनंद विहार में 208 और बवाना में 203 दर्ज किया गया है। 3. गाजियाबाद के किन क्षेत्रों में एक्यूआई 200 के पार या उसके करीब है? गाजियाबाद के लोनी में एक्यूआई 203, वसुंधरा में 187 और इंदिरापुरम में 186 दर्ज किया गया है। 4. मौसम विभाग ने दिल्ली के मौसम को लेकर क्या पूर्वानुमान दिया है? मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा, बारिश नहीं होगी और तापमान में बड़ा बदलाव नहीं होगा। https://trendkia.com/national/barisha-rukate-hi-delhi-ncr-men-bigari-hava-greater-noida-aura-gurugram-men-vayu-gunavatta-hui-bahuta-kharaba-36271 TrendKia — Har trend, sabse pehle.