# बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव तटीय इलाकों की तरफ बढ़ा, ओडिशा और आंध्र प्रदेश समेत छह राज्यों में अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट

> बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसमी हलचल गहराते हुए तटीय इलाकों की ओर बढ़ रही है, जिसके चलते ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में मूसलाधार बारिश और तेज आंधी का गंभीर अलर्ट जारी किया गया है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/bay-of-bengal-men-bana-gahara-dabava-tatiya-ilakon-ki-tarapha-barha-odisha-aura-andhra-pradesh-sameta-chhaha-rajyon-men-atyadhika--36350 · **Language:** Hindi
**Tags:** मौसम का पूर्वानुमान, बंगाल की खाड़ी, डीप डिप्रेशन, ओडिशा मौसम, आंध्र प्रदेश बारिश, भारी बारिश अलर्ट, मौसम विभाग

बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण से बना दबाव का क्षेत्र अब और अधिक शक्तिशाली रूप अख्तियार कर रहा है। मौसम प्रणाली के तेजी से मजबूत होने के चलते इसके अगले कुछ घंटों के भीतर गहरे दबाव यानी डीप डिप्रेशन में बदलने की पूरी आशंका बन चुकी है। यह मौसमी तंत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है और इसके प्रभाव से पूर्वी तटीय क्षेत्रों के साथ-साथ मध्य भारत के राज्यों में भारी बारिश, तेज अंधड़ और व्यापक जलभराव का संकट खड़ा होने वाला है। इस वेदर सिस्टम के 23 सितंबर की रात से लेकर 24 सितंबर की तड़के के दौरान उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के तटीय भूभाग को विशाखापत्तनम और गोपालपुर के बीच एक डीप डिप्रेशन के तौर पर पार करने की संभावना जताई गई है।

मंगलवार सुबह 8:30 बजे की स्थिति के अनुसार, यह मौसमी दबाव पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के ऊपर सक्रिय था। उस समय इसका केंद्र ओडिशा के गोपालपुर से लगभग 200 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, पुरी से करीब 210 किलोमीटर दक्षिण, आंध्र प्रदेश के कलिंगपट्टनम से लगभग 200 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व तथा विशाखापत्तनम से लगभग 290 किलोमीटर पूर्व की दूरी पर स्थित था। समुद्र के गर्म पानी और अनुकूल परिस्थितियों के चलते यह प्रणाली लगातार ऊर्जा जुटा रही है, जिससे समुद्र तट से सटे जिलों में मौसम तेजी से बिगड़ने लगा है और प्रशासनिक तंत्र को सतर्क कर दिया गया है।

## ओडिशा के तटीय और आंतरिक जिलों में अत्यंत भारी बारिश का खतरा
मौसम प्रणाली के मार्ग में सीधे आने के कारण ओडिशा में मौसमी गतिविधियां सबसे उग्र रूप ले सकती हैं। राज्य के भीतर 22 सितंबर से 24 सितंबर के दौरान अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी तथा कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश होने की गंभीर चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा 22 सितंबर से 26 सितंबर तक राज्यभर में व्यापक स्तर पर वर्षा और गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने का अनुमान लगाया गया है। 27 और 28 सितंबर को भी राज्य के चुनिंदा हिस्सों में रुक-रुक कर वर्षा का दौर जारी रह सकता है।

मूसलाधार वर्षा के साथ ही ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में 22 सितंबर से 24 सितंबर के दौरान प्रचंड आंधी-तूफान चलने की संभावना है। इस अवधि में हवा की सामान्य रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है, जबकि तूफानी झोंकों की गति 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने के आसार हैं। इस तीव्र हलचल के चलते तटीय बस्तियों, कच्चे मकानों और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंच सकता है। समुद्र में प्रचंड लहरें उठने और स्थितियां बेहद प्रतिकूल होने की वजह से मछुआरों और नौका संचालकों को समुद्र में न जाने और विशेष सावधानी बरतने का कड़ा निर्देश जारी किया गया है।

## आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में तेज हवाएं और जलभराव का अलर्ट
तटीय आंध्र प्रदेश और यनम के भूभाग पर भी इस डीप डिप्रेशन का भीषण प्रभाव देखने को मिलेगा। यहां 22 और 23 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा होने की प्रबल संभावना है। इसके बाद 24 सितंबर को भी कुछ क्षेत्रों में बहुत भारी वर्षा जारी रह सकती है। समग्र रूप से तटीय आंध्र प्रदेश में 22 सितंबर से 25 सितंबर के मध्य व्यापक और निरंतर वर्षा का दौर बना रहेगा।

पड़ोसी राज्य तेलंगाना में 23 और 24 सितंबर को मौसम का सबसे विकराल रूप दिखने की आशंका है, जहां कई स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा हो सकती है। इसके अलावा 22 सितंबर और 25-26 सितंबर को भी राज्य के कुछ भागों में बहुत भारी बारिश का अनुमान व्यक्त किया गया है। तटीय आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 23 और 24 सितंबर के दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज गति से हवाएं चलेंगी, जिनके झोंके 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। तटीय आंध्र प्रदेश और यनम के आसपास 22 सितंबर से ही तूफानी हवाओं का सिलसिला शुरू हो चुका है, जहां 22 सितंबर की शाम तक हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों में 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक रहने का अनुमान है। वहीं 23 सितंबर की सुबह से 24 सितंबर की शाम के बीच यह रफ्तार बढ़कर 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

## बंगाल की खाड़ी में उग्र हुआ समुद्र, 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
इस मौसमी तंत्र के केंद्र में होने के कारण बंगाल की खाड़ी में हालात अत्यधिक अशांत बने हुए हैं। पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के समुद्री क्षेत्र में वर्तमान में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चल रही हैं, जिनकी गति झोंकों के साथ 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक दर्ज की जा रही है। 22 सितंबर की शाम से इस इलाके में हवा की चाल और तेज होकर 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा हो जाएगी, जबकि झोंकों की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच जाएगी।

23 सितंबर से 24 सितंबर की शाम तक यह समुद्री विक्षोभ अपने चरम पर होगा, जब हवा की सतत गति 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों के दौरान 75 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की जा सकती है। इसके साथ ही उत्तर और दक्षिण बंगाल की खाड़ी के आसपास के अन्य समुद्री इलाकों में भी 22 सितंबर की सुबह से ही 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं का प्रवाह बना हुआ है, जो 23 सितंबर को बढ़कर 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में खुले समुद्र में मौजूद जहाजों और नावों के लिए अत्यधिक खतरा पैदा हो चुका है।

## पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में भी सक्रिय रहेगा मानसूनी तंत्र
पूर्वी भारत के अन्य मैदानी और पठारी राज्यों पर भी इस चक्रवाती दबाव का सीधा प्रभाव पड़ेगा। पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में आगामी दिनों में निरंतर वर्षा की गतिविधियां दर्ज की जाएंगी। गंगीय पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 22 सितंबर से 26 सितंबर तक व्यापक वर्षा होने की प्रबल संभावना है। झारखंड में 22 सितंबर से 27 सितंबर तक, जबकि बिहार में 24 सितंबर से 27 सितंबर के बीच व्यापक स्तर पर बारिश होने का अनुमान है।

उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के पर्वतीय अंचलों में 23 सितंबर से 27 सितंबर के दौरान लगातार वर्षा का दौर चलेगा। गंगीय पश्चिम बंगाल में 22, 23 और 25 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है, जबकि 25 सितंबर को पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ क्षेत्रों में बहुत भारी वर्षा होने के आसार हैं। झारखंड में 23 सितंबर तथा 25 और 26 सितंबर को भारी बारिश की संभावना है। इसके साथ ही 22 सितंबर को झारखंड में मध्यम से गंभीर स्तर की आकाशीय बिजली गिरने की स्पष्ट चेतावनी जारी की गई है। बिहार में 23 सितंबर तथा 26 और 27 सितंबर को भारी वर्षा का पूर्वानुमान है, जबकि 24 और 25 सितंबर को राज्य के कुछ इलाकों में बहुत भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है।

## मध्य भारत में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और विदर्भ में बढ़ेगा बारिश का जोर
तटीय सीमा को लांघकर जब यह मौसमी तंत्र जमीन के भीतर प्रवेश करेगा, तब इसका असर मध्य भारत के राज्यों में दिखाई देगा। छत्तीसगढ़ में 23 और 24 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है, जिससे निचले इलाकों में पानी भरने की स्थिति पैदा हो सकती है। वहीं पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ के इलाकों में भी 22 सितंबर से 27 सितंबर के दौरान वर्षा की तीव्रता में तेजी से इजाफा होगा। इस पूरी मौसमी प्रणाली के असर से नदियों और नालों के जलस्तर में अचानक वृद्धि हो सकती है, जिसे देखते हुए नागरिकों से स्थानीय प्रशासन की दिशा-निर्देशों और मौसम विभाग के अद्यतन परामर्श का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।

## इसका आप पर असर
तटीय और मध्य भारतीय राज्यों में अत्यधिक भारी बारिश और तेज अंधड़ से दैनिक जनजीवन, यात्रा और कृषि गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ेगा।

- **भारत में:** पूर्वी और मध्य भारत के छह राज्यों में परिवहन, ट्रेन सेवाओं और हवाई उड़ानों में देरी या रुकावट देखने को मिल सकती है। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को प्रस्थान से पहले संबंधित रेलवे और एयरलाइन के आधिकारिक अपडेट जरूर जांचने चाहिए।
- **ओडिशा और आंध्र प्रदेश में:** तटीय जिलों में निचले रिहायशी इलाकों में गंभीर जलभराव और कच्चे ढांचों को नुकसान पहुंचने का खतरा है। समुद्र तटीय बस्तियों के निवासियों और मछुआरों को 24 सितंबर तक समुद्र किनारे जाने से पूरी तरह बचना होगा और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी चाहिए।
- **सड़क व आवागमन पर:** तेज हवाओं और पानी भरने के कारण राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों पर वाहनों की आवाजाही बाधित हो सकती है। आवश्यक कार्य न होने पर 23 और 24 सितंबर को गैर-जरूरी यात्राएं टालने की सलाह दी गई है।
- **कृषि और फसलों पर:** खेतों में जलभराव और तेज हवाओं से धान तथा अन्य मौसमी फसलों को क्षति पहुंच सकती है। किसान अपने खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी की तुरंत व्यवस्था करें और कटी हुई फसलों को सुरक्षित गोदामों में पहुंचाएं।

## ऐसा क्यों हुआ
बंगाल की खाड़ी में बना यह वेदर सिस्टम मानसूनी कम दबाव के क्षेत्र के गर्म समुद्री जल के संपर्क में आकर लगातार ऊर्जा हासिल करने के कारण विकराल रूप ले रहा है।

- **प्रत्यक्ष कारण:** बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिमी भाग में बना दबाव का क्षेत्र समुद्री वाष्प खींचकर मजबूत हुआ और डीप डिप्रेशन में तब्दील हो रहा है। अनुकूल वायुमंडलीय तापमान और चक्रवाती संचलन ने इस प्रणाली को तेजी से सघन बना दिया।
- **अनुकूल परिस्थितियां:** पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने के दौरान इस वेदर सिस्टम को खुले समुद्र से निरंतर नमी मिलती रही। इस कारण यह जमीन से टकराने से पहले अधिकतम ताकत जुटा चुका है।
- **ऐतिहासिक परिदृश्य:** मानसून की वापसी के समय सितंबर के अंतिम सप्ताह में बंगाल की खाड़ी में ऐसे गहरे दबाव तंत्र नियमित रूप से बनते हैं। पूर्व में भी ऐसे डिप्रेशन तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही और व्यापक वर्षा का कारण बनते रहे हैं।
- **आगे क्या होगा:** 23 सितंबर की रात से 24 सितंबर की सुबह के बीच विशाखापत्तनम और गोपालपुर के तटों को पार करने के बाद यह तंत्र जमीनी घर्षण के कारण कमजोर होगा। हालांकि, मध्य भारत में प्रवेश करते हुए यह छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में मूसलाधार बारिश कराएगा।

## सवाल-जवाब

### 1. बंगाल की खाड़ी में बना डिप्रेशन कब और कहां तट को पार करेगा?
यह सिस्टम 23 सितंबर की रात से 24 सितंबर की सुबह के बीच उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के तटों को विशाखापत्तनम और गोपालपुर के बीच पार करेगा।

### 2. मंगलवार सुबह यह वेदर सिस्टम कहां स्थित था?
मंगलवार सुबह 8:30 बजे यह ओडिशा के गोपालपुर से 200 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, पुरी से 210 किलोमीटर दक्षिण और विशाखापत्तनम से 290 किलोमीटर पूर्व में केंद्रित था।

### 3. ओडिशा में भारी बारिश की चेतावनी किन तारीखों के लिए जारी की गई है?
ओडिशा में 22 से 24 सितंबर के दौरान अत्यधिक भारी बारिश तथा 22 से 26 सितंबर तक व्यापक स्तर पर वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है।

### 4. तटीय क्षेत्रों में हवा की अधिकतम रफ्तार कितनी हो सकती है?
तटीय आंध्र प्रदेश और ओडिशा में हवा की रफ्तार 50 से 65 किलोमीटर प्रति घंटा और तूफानी झोंकों के साथ 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

### 5. क्या मछुआरों के लिए कोई विशेष परामर्श दिया गया है?
हां, समुद्र में अत्यधिक ऊंची लहरें और 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक के झोंके चलने के कारण मछुआरों को समुद्र में न जाने और सुरक्षित रहने की सख्त हिदायत दी गई है।

### 6. किन-किन राज्यों में इस मौसमी तंत्र का असर देखने को मिलेगा?
ओडिशा और आंध्र प्रदेश के अलावा तेलंगाना, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ में व्यापक वर्षा का असर होगा।

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