बंगाल की खाड़ी में चक्रवात मुरसु का खतरा गहराया, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में अलर्ट के बाद निकासी शुरू बंगाल की खाड़ी में नया मौसमी सिस्टम तेज होकर चक्रवाती तूफान मुरसु का रूप ले रहा है, जिसके 2 नवंबर की शाम तक आंध्र प्रदेश तट के करीब पहुंचने की आशंका है। ओडिशा सरकार ने पहाड़ी तलहटी वाले संवेदनशील क्षेत्रों से नागरिकों को निकालने की योजना बनाई है। पूर्वी समुद्र तट पर चक्रवात अर्नब के असर से उबरने की जद्दोजहद के बीच बंगाल की खाड़ी में एक और शक्तिशाली मौसमी विक्षोभ तेजी से सक्रिय हो रहा है। इस नए चक्रवाती तंत्र को मुरसु नाम दिया जाएगा। मौसम विज्ञान विभाग के आकलन के अनुसार यह वेदर सिस्टम रविवार यानी 1 नवंबर तक चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकता है। इसके बाद सोमवार 2 नवंबर की शाम तक इसके पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी से होते हुए आंध्र प्रदेश के तट के पास पहुंचने की आशंका जताई गई है। इस संभावित प्राकृतिक आपदा को देखते हुए ओडिशा सरकार पूरी तरह चौकन्नी हो गई है और प्रशासन ने तटीय तथा संवेदनशील इलाकों में व्यापक बचाव तैयारियों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। पहाड़ी तलहटी वाले गांवों से सुरक्षित स्थानों पर भेजे जाएंगे ग्रामीण संभावित चक्रवात मुरसु के प्रभाव से भारी बारिश और तेज हवाओं के चलते दक्षिणी ओडिशा के भूभाग पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि प्रशासन किसी भी आपात स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है। मौसम विभाग के ट्रैकिंग मॉडल यह दर्शाते हैं कि चक्रवाती तंत्र सीधे आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर पड़ोसी दक्षिणी ओडिशा के सीमावर्ती जिलों पर भी पड़ेगा। आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि चक्रवात के चलते कई स्थानों पर जमीन धंसने का अंदेशा है। उन्होंने जानकारी दी कि पहाड़ियों की तलहटी में आबाद बस्तियों और कमजोर ढांचों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की कवायद तत्काल शुरू की जाएगी। प्रशासन ने जोखिम भरे इलाकों के निवासियों से अपील की है कि वे सरकारी आश्रय स्थलों में चले जाएं। इसके साथ ही सरकार ने भरोसा दिलाया है कि विस्थापन के दौरान नागरिकों के खाली घरों की रखवाली और सुरक्षा का दायित्व स्थानीय पुलिस प्रशासन संभालेगा। अंडमान सागर से उठा कम दबाव का क्षेत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर अग्रसर मौसम विज्ञानियों के मुताबिक दक्षिण अंडमान सागर और उससे सटे दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर उत्पन्न हुआ निम्न दबाव का क्षेत्र निरंतर ऊर्जा सोखकर एक सुस्पष्ट यानी वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया में बदल चुका है। वातावरण में मौजूद अनुकूल समुद्री तापमान और आद्रता के चलते यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे खिसक रहा है। चक्रवाती विकास चक्र के तहत यह प्रणाली सबसे पहले डिप्रेशन बनेगी और फिर गहरे विक्षोभ से होते हुए पूर्ण चक्रवाती तूफान का रूप धारण करेगी। पूर्वानुमानों के मुताबिक 2 नवंबर की शाम तक यह चक्रवाती तूफान आंध्र प्रदेश के तटीय हिस्से के बेहद निकट पहुंच सकता है। हालांकि चक्रवात की अंतिम लैंडफॉल स्थिति, सटीक प्रक्षेपवक्र और वास्तविक गति पर मौसम वैज्ञानिक उपग्रह चित्रों तथा रडार के जरिए लगातार नजर रख रहे हैं। तटीय आंध्र प्रदेश और यनम के समुद्र तट पर रहने वाली आबादी को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। ओडिशा, आंध्र प्रदेश और यनम में भारी वर्षा की चेतावनी मौसम विभाग ने 1 नवंबर को ओडिशा तथा तटीय आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में मूसलाधार बारिश होने की चेतावनी जारी की है। केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के अंतर्गत आने वाले यनम क्षेत्र में भी तेज बारिश और तूफानी हवाओं का व्यापक असर देखा जा सकता है। जैसे-जैसे यह मौसमी तंत्र तट के नजदीक आएगा, पूर्वी समुद्री किनारे पर मानसूनी गतिविधियों और वर्षा की तीव्रता में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। ओडिशा के दक्षिणी जिलों में अगले कुछ दिनों के दौरान मौसम अत्यंत प्रतिकूल रहने का अंदेशा है। प्रशासन ने मछुआरों को समुद्र में न जाने और तटीय इलाकों के लोगों को आपदा नियंत्रण कक्ष से प्रसारित होने वाले निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का परामर्श दिया है। जलभराव, नदियों के उफान और निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका के मद्देनजर राहत टीमें साजो-सामान के साथ तैनात की जा रही हैं। दक्षिण भारत के कई अन्य राज्यों में भी दिखेगा तूफानी असर चक्रवात मुरसु का दायरा केवल आंध्र प्रदेश या ओडिशा तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रसार प्रायद्वीपीय भारत के कई अन्य राज्यों तक पहुंचेगा। मौसम विभाग के बुलेटिन में स्पष्ट किया गया है कि आगामी सप्ताह के शुरुआती दिनों में तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में बादलों के गरजने के साथ भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही पश्चिमी तट पर केरल और माहे में भी तेज वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है। मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप के कई आंतरिक हिस्सों में बिजली कड़कने, आंधी चलने और हवा के झोंकों की गति अचानक तेज होने की चेतावनी दी गई है। इस मौसमी उथल-पुथल के कारण कई राज्यों में सामान्य जनजीवन और फसलों पर असर पड़ने की संभावना है। चक्रवात अर्नब के फौरन बाद दूसरे सिस्टम से तटीय सुरक्षा एजेंसियां चौकस पूर्वी तट अभी कुछ ही दिन पहले 28 अक्टूबर को आए भीषण चक्रवाती तूफान अर्नब की विभीषिका से गुजरा था, जिसने आंध्र प्रदेश और यनम के तटीय इलाकों में तेज आंधी और भारी वर्षा के जरिए तबाही मचाई थी। अर्नब बाद में आंतरिक भूभाग की ओर बढ़ते हुए कमजोर पड़ा और मध्य भारत के ऊपर एक साधारण निम्न दबाव वाले क्षेत्र में तब्दील होकर शांत हुआ था। अर्नब के शांत होते ही दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में नए तंत्र का जन्म होना तटीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए दोहरी चुनौती बन गया है। मौसम विज्ञान विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये दोनों पूरी तरह स्वतंत्र और अलग-अलग मौसमी प्रणालियां हैं। यद्यपि कुछ हलकों में नए तूफान को अर्नब की तुलना में अधिक विकराल बताया जा रहा था, लेकिन आधिकारिक मौसम वैज्ञानिकों की तरफ से दोनों की तीव्रता की तुलना को लेकर ऐसा कोई आधिकारिक तुलनात्मक पूर्वानुमान जारी नहीं किया गया है। वर्तमान में विशेषज्ञ केवल मुरसु के ताजा आंकड़ों और बदलती दिशा पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दे रहे हैं। उत्तर-पश्चिम भारत में रहेगा शुष्क मौसम का दौर एक तरफ जहां पूर्वी और दक्षिणी भारत चक्रवाती तूफान और भारी बारिश के साए में आ चुके हैं, वहीं देश के उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में मौसम पूरी तरह स्थिर बना रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक 1 नवंबर को उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश इलाकों में मौसम शुष्क रहेगा। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में किसी भी व्यापक बारिश की कोई संभावना नहीं है। इसका तात्पर्य यह है कि इस मौसमी विक्षोभ का संपूर्ण प्रभाव फिलहाल बंगाल की खाड़ी से जुड़े तटीय और प्रायद्वीपीय राज्यों तक ही सीमित रहने वाला है। इसका आप पर असर बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवात मुरसु के कारण तटीय और प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में जनजीवन, आवागमन और कृषि गतिविधियों पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है। • भारत में: पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में तेज बारिश तथा आंधी के चलते रेल, सड़क और हवाई यातायात में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है। प्रायद्वीपीय भारत की यात्रा करने वाले नागरिकों को प्रस्थान से पहले संबंधित एयरलाइंस और रेलवे के आधिकारिक अपडेट अवश्य जांच लेने चाहिए। • ओडिशा में: दक्षिणी जिलों के पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बना हुआ है। तलहटी में रहने वाले परिवारों को प्रशासन द्वारा बनाए गए राहत शिविरों में तुरंत शरण लेनी होगी, जबकि पुलिस खाली घरों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। • आंध्र प्रदेश और यनम में: 2 नवंबर की शाम तक तटीय इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को 1 और 2 नवंबर को अनावश्यक यात्रा से बचने और मछुआरों को समुद्र में न जाने के सख्त निर्देश हैं। • तमिलनाडु और केरल में: आगामी सप्ताह की शुरुआत में मूसलाधार बारिश और गरज-चमक के कारण सामान्य कामकाज प्रभावित हो सकता है। निचले इलाकों में रहने वाले लोग जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखें और जरूरी आपातकालीन सामान सुरक्षित रख लें। ऐसा क्यों हुआ दक्षिण अंडमान सागर और उससे सटे दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर अनुकूल समुद्री दशाओं और वायुमंडलीय परिस्थितियों के संयोजन से एक नया मौसमी चक्रवात सक्रिय हुआ है। • निम्न दबाव का क्रमिक विकास: दक्षिण अंडमान सागर के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र प्रचुर समुद्री नमी प्राप्त कर एक सुस्पष्ट कम दबाव वाले क्षेत्र में परिवर्तित हो गया। अनुकूल हवा और समुद्री तापमान के कारण यह प्रणाली तेजी से डिप्रेशन और फिर चक्रवाती तूफान का रूप ले रही है। • अनुकूल ट्रजेक्टरी और वायुमंडलीय परिस्थितियां: यह वेदर सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे इसे बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य हिस्से में निरंतर ताकत जुटाने का पर्याप्त समय और समुद्री क्षेत्र मिल रहा है। यह खिंचाव इसे 2 नवंबर की शाम तक आंध्र तट के समीप धकेल रहा है। • लगातार दो प्रणालियों का बनना: 28 अक्टूबर को चक्रवात अर्नब के तट पार करने और कमजोर पड़ने के तुरंत बाद यह नई प्रणाली उभरी है। मौसम विज्ञान विभाग ने पुष्टि की है कि ये दोनों स्वतंत्र प्रणालियां हैं, जो बंगाल की खाड़ी में शरद ऋतु के उत्तरार्ध में होने वाली नियमित मौसमी चक्रवाती गतिविधियों का हिस्सा हैं। सवाल-जवाब 1. बंगाल की खाड़ी में बन रहे नए चक्रवात का क्या नाम रखा गया है? इस नए चक्रवाती तूफान का नाम 'मुरसु' रखा जाएगा। 2. चक्रवात मुरसु के किस तारीख तक तूफान में बदलने और तट के पास पहुंचने का अनुमान है? यह सिस्टम 1 नवंबर तक चक्रवाती तूफान में बदल सकता है और 2 नवंबर की शाम तक आंध्र प्रदेश के तट के पास पहुंच सकता है। 3. ओडिशा सरकार ने किस खतरे को देखते हुए लोगों को निकालने की योजना बनाई है? पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए तलहटी और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। 4. विस्थापन के दौरान ओडिशा में खाली पड़े घरों की सुरक्षा कौन करेगा? ओडिशा के आपदा प्रबंधन मंत्री के अनुसार नागरिकों के बाहर रहने के दौरान उनके घरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस की होगी। 5. किन-किन राज्यों में चक्रवात मुरसु के कारण भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है? ओडिशा, आंध्र प्रदेश, यनम, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल और माहे में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। 6. क्या चक्रवात मुरसु पिछले तूफान अर्नब से ज्यादा खतरनाक साबित होगा? मौसम विज्ञान विभाग की ओर से मुरसु की तीव्रता को अर्नब से अधिक बताने वाला कोई आधिकारिक तुलनात्मक पूर्वानुमान जारी नहीं किया गया है। 7. क्या इस चक्रवाती तूफान का असर उत्तर भारत के मौसम पर भी पड़ेगा? नहीं, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब सहित उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में 1 नवंबर को मौसम शुष्क रहेगा। https://trendkia.com/national/bay-of-bengal-men-chakravata-murasu-ka-khatara-gaharaya-odisha-aura-andhra-pradesh-men-alarta-ke-bada-nikasi-shuru-54183 TrendKia — Har trend, sabse pehle.