बंगाल की खाड़ी में गहराएगा कम दबाव का क्षेत्र, उत्तर भारत से लेकर तटीय राज्यों तक 15 अक्टूबर तक बारिश का अलर्ट थाईलैंड की खाड़ी से उठे मौसमी चक्रवात और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के चलते देश के उत्तर-पश्चिम और पूर्वी राज्यों में अगले 6 दिनों तक तेज हवाओं के साथ बारिश के आसार बने हुए हैं। देश के कई हिस्सों में मौसमी गतिविधियों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। विदेशी समुद्री क्षेत्र से आगे बढ़ रही एक नई चक्रवातीय प्रणाली और उत्तर भारत में पहले से डेरा डाले पश्चिमी विक्षोभ के संयुक्त प्रभाव से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल सकता है। थाईलैंड की खाड़ी में बने चक्रवातीय परिसंचरण का असर अब भारतीय समुद्री सीमा की ओर बढ़ रहा है, जिसके चलते बंगाल की खाड़ी में एक नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की परिस्थितियां तैयार हो रही हैं। इसके साथ ही देश के उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में बारिश और आंधी का दौर अगले छह दिनों तक जारी रहने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 10 से 15 अक्टूबर के दौरान कई राज्यों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जबकि हवा के झोंकों की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। थाईलैंड की खाड़ी से उठा मौसमी तंत्र और बंगाल की खाड़ी पर असर मौसम विज्ञान विभाग के ताजा आकलन के अनुसार थाईलैंड की खाड़ी में एक सुस्पष्ट चक्रवातीय परिसंचरण सक्रिय बना हुआ है। इस तंत्र के प्रभाव से अंडमान सागर में 11 अक्टूबर 2026 तक मौसमी हलचल काफी तेज होने के आसार हैं। यह मौसमी प्रणाली समुद्री सतह से ऊर्जा लेते हुए लगातार उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगी। इसके प्रभाव से बंगाल की खाड़ी में 13 अक्टूबर तक कम दबाव का क्षेत्र बनने की प्रबल संभावना जताई गई है। समुद्री क्षेत्र में इस मौसमी बदलाव का सीधा प्रभाव पूर्वी और तटीय भारतीय राज्यों पर पड़ेगा। पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों के अलावा बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में तेज झोंकेदार हवाओं के साथ बादलों की आवाजाही और वर्षा का असर देखने को मिलेगा। उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और छह दिवसीय पूर्वानुमान एक तरफ जहां पूर्वी समुद्र में चक्रवातीय परिस्थितियां आकार ले रही हैं, वहीं देश के उत्तरी हिस्से में एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ अपना प्रभाव दिखा रहा है। इसके साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश, दक्षिण हरियाणा और पूर्वोत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों में भी चक्रवाती हवाओं के छोटे परिसंचरण बने हुए हैं। इन प्रणालियों के आपस में जुड़ने से उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से लेकर मध्य, पूर्वी और दक्षिणी राज्यों तक बारिश का दायरा फैलने का अनुमान है। 10 से 15 अक्टूबर के बीच उत्तर-पश्चिम भारत के विभिन्न राज्यों में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश, आकाशीय बिजली चमकने और आंधी की गतिविधियां दर्ज की जा सकती हैं। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हाल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के एनसीआर क्षेत्र में 10 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहेगा। इस अवधि में आसमान में बादलों की आवाजाही रहने और छिटपुट बारिश होने की संभावना है। इस दौरान सतह पर चलने वाली हवाओं की रफ्तार सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रहेगी। हालांकि इस क्षेत्र के लिए किसी विशेष मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया गया है, लेकिन कुछ दिनों में गरज-चमक के साथ अचानक तेज हवाएं चलने और हल्की बौछारें पड़ने के आसार हैं। नागरिकों को मौसम के स्थानीय बदलावों पर नजर रखने का सुझाव दिया गया है। हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में हवाओं का जोर हरियाणा और चंडीगढ़ के इलाकों में 10 से 15 अक्टूबर के बीच रुक-रुक कर बारिश देखने को मिल सकती है। विशेष रूप से 10 से 12 अक्टूबर के दौरान कुछ स्थानों पर आकाशीय बिजली कड़कने, बादलों की तेज गर्जना और झोंकेदार हवाओं का असर रहेगा। यहां हवा की सामान्य गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है, जो झोंकों के समय 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। पड़ोसी राज्य पंजाब में भी 10 से 15 अक्टूबर तक छिटपुट वर्षा के संकेत हैं। पंजाब में 10 से 12 अक्टूबर के बीच गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, जिनके झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटे की सीमा छू सकते हैं। पहाड़ी राज्यों में मौसम का मिजाज: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश पर्वतीय राज्यों में मौसम का प्रभाव अधिक स्पष्ट दिख सकता है। उत्तराखंड में 10 से 15 अक्टूबर के दौरान कई क्षेत्रों में बारिश का अपेक्षाकृत व्यापक असर रहने का अनुमान है। विशेषकर 10 अक्टूबर को राज्य में कई जगह गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की आशंका है, जिसके झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। इसके अलावा कुछ स्थानों पर 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाएं चल सकती हैं। वहीं हिमाचल प्रदेश में 10 से 15 अक्टूबर के बीच अलग-अलग स्थानों पर वर्षा हो सकती है, जिसमें 10 और 13 अक्टूबर को आकाशीय बिजली चमकने और सामान्य से अधिक तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तर प्रदेश में स्थिति ऊंचाई वाले इलाकों जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद में 10 और 13 अक्टूबर को कई स्थानों पर वर्षा होने की संभावना जताई गई है, जबकि 11 और 14-15 अक्टूबर को छिटपुट बारिश देखने को मिल सकती है। इस दौरान 10 अक्टूबर तथा 13-14 अक्टूबर को गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की घटनाएं सामने आ सकती हैं। मैदानी क्षेत्र उत्तर प्रदेश में पश्चिमी हिस्से में 10 से 11 अक्टूबर के दौरान और पूर्वी हिस्से में 10 अक्टूबर को छिटपुट इलाकों में बारिश और बादलों की गर्जना देखने को मिल सकती है। इसका आप पर असर देश के कई राज्यों में 10 से 15 अक्टूबर के बीच तेज आंधी और बारिश से दैनिक जीवन और आवागमन प्रभावित हो सकता है। • दैनिक यात्रियों और यातायात पर: दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में अचानक तेज हवाओं और बारिश के चलते सड़कों पर जाम लग सकता है। घर से निकलते समय मौसम की ताजा स्थिति जांच लें और सुरक्षित गति से वाहन चलाएं। • किसानों और फसलों पर: उत्तर भारत और पूर्वी राज्यों में खुले खेतों में कटी या खड़ी फसलों को तेज हवाओं और पानी से नुकसान हो सकता है। मंडियों में रखे अनाज को तिरपाल से ढककर रखें और जलभराव से बचाने की तैयारी करें। • पहाड़ी मार्गों पर पर्यटकों के लिए: उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और कश्मीर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बिजली गिरने और 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंके चलने का खतरा है। इस दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सतर्कता बरतें। • तटीय और पूर्वी राज्यों के निवासियों पर: बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के कारण 13 अक्टूबर के आसपास पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में समुद्र अशांत रहेगा। मछुआरे गहरे समुद्र में जाने से बचें और स्थानीय चेतावनियों का पालन करें। ऐसा क्यों हुआ यह मौसमी उथल-पुथल दो स्वतंत्र मौसमी तंत्रों के एक साथ सक्रिय होने और समुद्री हवाओं के संघनन के कारण पैदा हुई है। • विदेशी समुद्री चक्रवात: थाईलैंड की खाड़ी में बने चक्रवातीय परिसंचरण के आगे बढ़ने से अंडमान सागर में 11 अक्टूबर से मौसमी हलचल बढ़ रही है। यही प्रणाली 13 अक्टूबर तक बंगाल की खाड़ी में पहुंचकर कम दबाव के क्षेत्र में तब्दील हो जाएगी। • सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ: भूमध्य सागर की ओर से आने वाली नमी युक्त हवाओं का तंत्र यानी पश्चिमी विक्षोभ इस समय उत्तर भारत के ऊपरी वायुमंडल में सक्रिय है। यह पहाड़ी और मैदानी राज्यों में बादलों की गर्जना और तेज हवाएं पैदा कर रहा है। • स्थानीय चक्रवाती परिसंचरण: पूर्वी उत्तर प्रदेश और दक्षिण हरियाणा में बने निचले स्तर के छोटे चक्रवाती तंत्र स्थानीय स्तर पर नमी खींच रहे हैं। इन सभी प्रणालियों के मेल से देश के बड़े हिस्से में 15 अक्टूबर तक मौसमी अस्थिरता बनी रहेगी। सवाल-जवाब 1. बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र कब बनने की संभावना है? मौसम विज्ञानियों के अनुसार थाईलैंड की खाड़ी से आगे बढ़ रहे तंत्र के असर से 13 अक्टूबर 2026 तक बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है। 2. दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मौसम कब तक खराब रह सकता है? दिल्ली-एनसीआर में 10 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच बादलों की आवाजाही, सामान्य से तेज हवाएं और छिटपुट बारिश होने की संभावना है। 3. इस मौसमी तंत्र के दौरान हवाओं की अधिकतम रफ्तार कितनी हो सकती है? इस दौरान सामान्य हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रहने और झोंकों की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। 4. पहाड़ी राज्यों में मौसम को लेकर क्या चेतावनी जारी की गई है? उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में 10 से 15 अक्टूबर के दौरान बारिश, आकाशीय बिजली चमकने और 40 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अलर्ट है। https://trendkia.com/national/bay-of-bengal-men-gaharaega-kama-dabava-ka-kshetra-delhi-up-se-lekara-tatiya-rajyon-taka-15-aktubara-taka-barisha-ka-alarta-45718 TrendKia — Har trend, sabse pehle.