बंगाल की खाड़ी में गहराते दबाव से कई राज्यों में मूसलाधार बारिश का संकट, प्रशांत में अल-नीनो ने बढ़ाई चिंता बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र तेजी से डिप्रेशन और डीप डिप्रेशन में बदलने की ओर अग्रसर है, जिससे ओडिशा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं और भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं प्रशांत महासागर में अल-नीनो की स्थिति से सूखे और मौसमी असंतुलन का जोखिम भी बना हुआ है। देश के मौसम में एक साथ दो बड़े मौसमी बदलाव देखने को मिल रहे हैं, जिनका सीधा प्रभाव कई राज्यों के जनजीवन पर पड़ने वाला है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों जैसे दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धूप के तेवर नरम पड़ने के बीच समंदर के ऊपर मौसमी हलचल लगातार तेज हो रही है। इस समय भारत के सामने दोहरी मौसमी चुनौतियां उभर रही हैं, जिसमें एक तरफ प्रशांत महासागर में ऐतिहासिक रूप से सक्रिय अल-नीनो का संभावित असर है, तो दूसरी तरफ बंगाल की खाड़ी के ऊपर तेजी से आकार ले रहा निम्न दबाव का क्षेत्र है। यदि यह चक्रवाती परिसंचरण आगे चलकर गहरे दबाव यानी डीप डिप्रेशन और बाद में चक्रवाती तूफान का रूप लेता है, तो बांग्लादेश द्वारा सुझाए गए नाम 'अर्नब' के तहत तटीय इलाके प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि इस तंत्र के चक्रवात में बदलने को लेकर अभी निश्चित आकलन बाकी है, लेकिन भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी ने संबंधित राज्यों में 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से आंधी और भारी वर्षा की चेतावनी जारी कर दी है। निम्न दबाव प्रणाली की स्थिति और इसके आगे बढ़ने की दिशा मौसम विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उत्तर अंडमान सागर और उसके नजदीकी इलाके में मध्य क्षोभमंडल स्तर पर 19 सितंबर को सुबह 8:30 बजे एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ था, जिसके प्रभाव से उसी दिन शाम 5:30 बजे एक निम्न दबाव क्षेत्र तैयार हुआ। इसके बाद 20 सितंबर की सुबह 8:30 बजे यह सिस्टम पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तर अंडमान सागर के ऊपर सक्रिय दर्ज किया गया। यह मौसमी तंत्र अब पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर आगे बढ़ रहा है और धीरे-धीरे अधिक ताकतवर बन रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह मौसमी प्रणाली 21 सितंबर को डिप्रेशन में तब्दील हो जाएगी और 22 सितंबर तक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन का रूप ले लेगी। इसके बाद अपनी दिशा बनाए रखते हुए यह प्रणाली 23 सितंबर की सुबह के आसपास उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के समुद्र तटों के निकट, पश्चिम-मध्य तथा उससे सटी उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तक पहुंचेगी। इस चक्रवाती सिस्टम के चलते देश के विभिन्न हिस्सों में अगले 5 से 6 दिनों तक लगातार बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में सबसे व्यापक असर इस मौसमी प्रणाली का सबसे तीव्र असर ओडिशा और आंध्र प्रदेश के समुद्र तटीय इलाकों में देखने को मिलेगा। दक्षिण ओडिशा और उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि यहां 23 और 24 सितंबर को कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा और कुछ हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका है। इसके अतिरिक्त उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश में 22 से 24 सितंबर और दक्षिण ओडिशा में 22 से 25 सितंबर तक लगातार वर्षा का दौर बना रहेगा। बारिश के साथ-साथ तेज हवाओं का प्रकोप भी तटवर्ती इलाकों में जनजीवन को प्रभावित कर सकता है। ओडिशा के तटीय भागों में 23 और 24 सितंबर के दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की निरंतर रफ्तार से हवाएं चलने और तेज झोंकों के साथ इनकी गति 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। इसी तरह 23 सितंबर को दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों के निकट समुद्री हवाओं की गति 55 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। दक्षिण आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के समुद्री तटों पर भी 23 से 24 सितंबर के दौरान तेज सतही हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है, जिससे समुद्र में ऊंची लहरें उठने की आशंका है। छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मध्य भारत में भारी बारिश का अलर्ट बंगाल की खाड़ी से उठने वाली इस मौसमी प्रणाली का दायरा केवल तटीय राज्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मध्य भारत के कई अंचलों में भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा। छत्तीसगढ़ में 26 सितंबर तक गरज-चमक के साथ बारिश की स्थिति बनी रहने का अनुमान है। राज्य में विशेष रूप से 23 से 25 सितंबर के दौरान बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि दक्षिण छत्तीसगढ़ के इलाकों में 24 सितंबर को अत्यंत भारी वर्षा होने की चेतावनी दी गई है। तेलंगाना राज्य में 21 सितंबर से 26 सितंबर के दौरान अधिकांश स्थानों पर वर्षा दर्ज होने का पूर्वानुमान है। तेलंगाना में 23 से 25 सितंबर के मध्य बहुत भारी बारिश होने और गरज-चमक के साथ तेज अंधड़ चलने के आसार हैं। इस समयावधि में मौसम विभाग ने 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने और 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक के झोंके आने की चेतावनी दी है। इसके अलावा महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में 21 से 26 सितंबर के बीच व्यापक पैमाने पर बारिश होगी, जहां 24 और 25 सितंबर को बहुत भारी वर्षा का अनुमान लगाया गया है। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में भी 23 से 26 सितंबर तक बादलों का डेरा रहेगा और रुक-रुक कर बारिश होगी, जबकि 25 और 26 सितंबर को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। 20 सितंबर की सुबह 8:30 बजे तक बीते 24 घंटों में भी तेलंगाना, रायलसीमा और तमिलनाडु के कई हिस्सों में झमाझम बारिश दर्ज की जा चुकी है। अल-नीनो की पृष्ठभूमि और सूखे की संभावित आशंका मौजूदा मानसूनी हलचलों के बीच जलवायु स्तर पर प्रशांत महासागर में अल-नीनो की असाधारण सक्रियता वैज्ञानिकों के लिए गहरी चिंता का विषय बनी हुई है। प्रशांत महासागर की सतह का असामान्य रूप से गर्म होना वैश्विक और भारतीय मानसून प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव डालने के लिए जाना जाता है। मौसम वैज्ञानिकों ने पहले ही प्रशांत क्षेत्र में अल-नीनो के ऐतिहासिक रूप से मजबूत होने को लेकर आगाह किया है, जिसके कारण देश के कुछ हिस्सों में दीर्घावधि में वर्षा की कमी, सूखा और अकाल जैसी विषम परिस्थितियां उत्पन्न होने का खतरा बना हुआ है। एक तरफ जहां स्थानीय स्तर पर बंगाल की खाड़ी का निम्न दबाव मूसलाधार बारिश और 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली तूफानी हवाओं का तात्कालिक संकट पैदा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अल-नीनो की वैश्विक चुनौती मानसूनी संतुलन पर दीर्घकालिक दबाव डाल रही है। इसका आप पर असर बंगाल की खाड़ी में बनने वाले दबाव और तेज हवाओं से तटीय व मध्य भारत के राज्यों में जनजीवन, खेती और आवागमन सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। • तटीय सुरक्षा: दक्षिण ओडिशा और उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश के मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। तेज लहरों और 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाले झोंकों के कारण 23 और 24 सितंबर को तटीय बस्तियों में जलभराव व पेड़ गिरने की आशंका रहेगी। • कृषि पर असर: छत्तीसगढ़, तेलंगाना और विदर्भ में 23 से 25 सितंबर के बीच मूसलाधार बारिश से खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है। किसान जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करें ताकि निचले खेतों में पानी जमा न हो। • सड़क व रेल यात्रा: ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के आंतरिक इलाकों में भारी बारिश से दृश्यता कम हो सकती है और जलभराव के चलते यातायात बाधित हो सकता है। यात्रा करने वाले यात्रियों को मौसम विभाग के ताजा अलर्ट देखकर ही निकलने की सलाह है। • मौसम में ठंडक: दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धूप नरम पड़ने से तापमान में मामूली गिरावट दर्ज होगी। हालांकि उमस से राहत और मौसम का रुख पूरी तरह पूर्वी हवाओं पर निर्भर करेगा। ऐसा क्यों हुआ बंगाल की खाड़ी में अंडमान सागर से उठे ऊपरी चक्रवाती परिसंचरण और मानसूनी हवाओं के मेल से यह निम्न दबाव तंत्र लगातार ऊर्जा प्राप्त कर रहा है, जबकि वैश्विक स्तर पर प्रशांत महासागर का असामान्य तापमान अल-नीनो को बढ़ावा दे रहा है। • चक्रवाती परिसंचरण का निर्माण: उत्तर अंडमान सागर के ऊपर मध्य क्षोभमंडल में 19 सितंबर को बने ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण ने समुद्री नमी को खींचकर 19 सितंबर की शाम 5:30 बजे निम्न दबाव क्षेत्र का रूप दे दिया। यह गर्म समुद्री सतह से लगातार नमी पाकर शक्तिशाली हो रहा है। • अनुकूल समुद्री स्थितियां: बंगाल की खाड़ी के ऊपर समुद्री सतह का तापमान और अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियां इसे 21 सितंबर को डिप्रेशन और 22 सितंबर को डीप डिप्रेशन में बदलने के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान कर रही हैं। • अल-नीनो का वैश्विक प्रभाव: भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के पानी का असामान्य रूप से गर्म होना मानसूनी हवाओं के चक्र को बाधित करता है। ऐतिहासिक रूप से मजबूत अल-नीनो लंबे समय तक वर्षा की कमी और सूखे की परिस्थितियों को जन्म देने का मुख्य कारण बनता है। सवाल-जवाब 1. बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव क्षेत्र कब डिप्रेशन में बदलेगा? मौसम विभाग के अनुसार यह प्रणाली 21 सितंबर को डिप्रेशन और 22 सितंबर को पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन में बदल सकती है। 2. यह मौसमी तंत्र किस दिशा में बढ़ रहा है और तट से कब टकराएगा? यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है और 23 सितंबर की सुबह उत्तर आंध्र प्रदेश व दक्षिण ओडिशा तटों के पास पहुंच सकता है। 3. किन राज्यों में सबसे भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट है? दक्षिण ओडिशा और उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश में 23 और 24 सितंबर को अत्यंत भारी बारिश तथा 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी है। 4. क्या इस वेदर सिस्टम को चक्रवात 'अर्नब' कहा जा रहा है? यदि यह डीप डिप्रेशन चक्रवाती तूफान का रूप लेता है तो इसे बांग्लादेश द्वारा सुझाया गया नाम 'अर्नब' दिया जा सकता है, हालांकि अभी इसके चक्रवात बनने पर अंतिम पुष्टि होना बाकी है। 5. मध्य भारत के किन इलाकों में भारी बारिश की संभावना है? छत्तीसगढ़ में 23 से 25 सितंबर, दक्षिण छत्तीसगढ़ में 24 सितंबर, तेलंगाना में 23 से 25 सितंबर और विदर्भ में 24 व 25 सितंबर को बहुत भारी बारिश का अनुमान है। 6. प्रशांत महासागर में सक्रिय अल-नीनो का क्या खतरा बताया गया है? मौसम विज्ञानियों ने अल-नीनो के ऐतिहासिक रूप से मजबूत होने की चेतावनी दी है, जिससे भारत में दीर्घावधि में सूखा और अकाल जैसी स्थितियां बनने की आशंका रहती है। https://trendkia.com/national/bay-of-bengal-men-gaharate-dabava-se-kai-rajyon-men-musaladhara-barisha-ka-snkata-pacific-men-el-nino-ne-barhai-chinta-35431 TrendKia — Har trend, sabse pehle.