# उत्तर प्रदेश के भदोही में सजा 50वां इंटरनेशनल कारपेट एक्सपो, 65 देशों के खरीदारों ने दिखाई कश्मीरी सिल्क और मिर्जापुर दरी में दिलचस्पी

> भदोही के कारपेट एक्सपो मार्ट में आयोजित एशिया के सबसे बड़े 50वें इंटरनेशनल कारपेट एक्सपो में 65 देशों के 450 से ज्यादा विदेशी खरीदार पहुंचे हैं, जहां कश्मीरी सिल्क और मिर्जापुर की दरी की भारी मांग देखी जा रही है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/bhadohi-men-eshiya-ke-sabase-bare-50ven-international-carpet-expo-ka-ayojana-65-deshon-ke-kharidaron-ne-dikhai-kashmiri-silk-aura--44251 · **Language:** Hindi
**Tags:** भदोही कारपेट एक्सपो, हैंडमेड कालीन, मिर्जापुर दरी, कश्मीरी सिल्क, कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल, ब्रिक्स खरीदार

हाथ से बने कालीनों के सबसे बड़े केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले उत्तर प्रदेश के भदोही शहर में 50वें इंटरनेशनल कारपेट एक्सपो की शुरुआत हो चुकी है। भदोही स्थित कारपेट एक्सपो मार्ट में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले का मुख्य उद्देश्य हस्तनिर्मित कालीनों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना है। मिर्जापुर और भदोही क्षेत्र दुनिया भर में सबसे अधिक हस्तनिर्मित कालीन तैयार करने के लिए जाने जाते हैं। इस भव्य आयोजन में दुनिया के करीब 65 देशों से 450 से अधिक विदेशी खरीदार हिस्सा लेने पहुंचे हैं, जिससे स्थानीय उद्योगपतियों और निर्यातकों में व्यापार वृद्धि को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।

## विदेशी खरीदारों की पहली पसंद बनी कश्मीरी सिल्क और मिर्जापुर दरी
इस चार दिवसीय प्रदर्शनी में देश भर के प्रमुख कालीन उत्पादक केंद्रों से बेहतरीन उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। आयोजन स्थल पर कश्मीरी सिल्क कालीन और मिर्जापुर की पारंपरिक दरी विदेशी आयातकों के बीच मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। श्रीनगर, दिल्ली, पानीपत, जयपुर, आगरा तथा मिर्जापुर-भदोही के निर्माता और निर्यातक अपने विशिष्ट गलीचे और कालीन लेकर यहां पहुंचे हैं। अलग-अलग राज्यों से आए विविध डिजाइनों और पारंपरिक बुनाई शैलियों को देखकर अंतरराष्ट्रीय खरीदार बड़े पैमाने पर ऑर्डर देने में रुचि दिखा रहे हैं।

## एशिया का सबसे बड़ा हस्तनिर्मित कालीन मेला और ब्रिक्स देशों की भागीदारी
कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के वाइस प्रेसिडेंट असलम महबूब के अनुसार, यह आयोजन केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशिया में हस्तनिर्मित कालीन का सबसे बड़ा व्यापारिक मेला है। उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर भी हैंडमेड श्रेणी में इससे बड़ा एक्सपो कहीं आयोजित नहीं होता। इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि इसका आयोजन सीधे उस उत्पादन केंद्र में हो रहा है जहां ये कालीन बुने जाते हैं। इस ऐतिहासिक 50वें संस्करण के लिए 65 देशों से 400 से 450 विदेशी खरीदारों ने पंजीकरण कराया था। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी किए जाने के उपलक्ष्य में विशेष प्रबंध किए गए हैं, जिसके तहत ब्रिक्स समूह से जुड़े 106 खरीदारों ने पंजीकरण कराया है।

## कारोबारी चक्र और व्यापारिक प्रक्रिया की समझ
कालीन कारोबार के संचालन चक्र पर प्रकाश डालते हुए असलम महबूब ने बताया कि इस उद्योग का व्यावसायिक चक्र सामान्यतः छह से नौ महीने की अवधि का होता है। मेले के दौरान आने वाले विदेशी आयातक नमूनों का चयन करते हैं और सैंपलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले दो से पांच महीनों में वास्तविक सौदे धरातल पर उतरते हैं। मेले के चौथे दिन इसके औपचारिक समापन के अवसर पर सभी प्रतिभागियों और खरीदारों को फीडबैक फॉर्म वितरित किए जाते हैं। इन्हीं प्रपत्रों से संकलित आंकड़ों के आधार पर कुल व्यापारिक सौदों और कारोबार की अंतिम गणना की जाती है। देश भर के गलीचा उत्पादक केंद्रों जैसे पानीपत, जयपुर, कश्मीर और दिल्ली से आए निर्यातकों के साथ विदेशी आयातकों की यह बैठक दीर्घकालिक निर्यात समझौतों की नींव रखती है।

## वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच एक्सपो का सफल आयोजन
वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार कई तरह की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। असलम महबूब ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय टैरिफ, युद्ध के प्रभाव, कच्चे माल की बढ़ती लागत तथा परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याओं ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित किया है। दुनिया भर में जारी इस तरह के संकटपूर्ण माहौल के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय मेले का सफल संचालन करना आयोजकों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य था। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि इन सभी बाधाओं को आसानी से पार कर लिया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि कालीन उद्योग के सामने आ रही इन व्यावहारिक दिक्कतों और चुनौतियों के समाधान के लिए भारत सरकार निरंतर आवश्यक कदम उठाएगी।

## इसका आप पर असर
इस अंतरराष्ट्रीय कालीन एक्सपो से भदोही और देश भर के कालीन बुनकरों और निर्यातकों के लिए नए वैश्विक निर्यात ऑर्डर मिलने के रास्ते खुलेंगे।

- **उत्तर प्रदेश और भदोही में:** भदोही और मिर्जापुर के हजारों स्थानीय कारीगरों और हथकरघा बुनकरों को आने वाले 6 से 9 महीनों के लिए नया काम और नियमित आजीविका मिलेगी। मेले में आए 450 विदेशी खरीदारों के सौदे फाइनल होने से स्थानीय कारखानों में उत्पादन की रफ्तार तेज होगी।
- **देश भर के निर्यातकों के लिए:** कश्मीर, पानीपत, जयपुर और आगरा के कालीन निर्माताओं को सीधे विदेशी खरीदारों से जुड़ने का मौका मिला है। मध्यस्थों के बिना सीधे व्यापार होने से निर्यातकों का मुनाफा बढ़ेगा और नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खुलेंगे।
- **हस्तशिल्प और निर्यात अर्थव्यवस्था पर:** वैश्विक स्तर पर कच्चे माल और परिवहन की बढ़ती लागत के बीच यह आयोजन भारत के हस्तनिर्मित कालीन क्षेत्र को मजबूत सहारा देगा। ब्रिक्स देशों के 106 नए खरीदारों के आने से गैर-पारंपरिक बाजारों में भारतीय उत्पादों की पैठ बढ़ेगी।
- **रोजगार और बुनाई उद्योग पर:** आने वाले 2 से 5 महीनों में जब सैंपलिंग से वास्तविक ऑर्डर निकलेंगे, तो ग्रामीण क्षेत्रों में कुशल बुनकरों की मांग बढ़ेगी। इससे युवा कारीगरों को अपने पारंपरिक पारिवारिक हुनर से जुड़े रहने का आर्थिक प्रोत्साहन मिलेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह अंतरराष्ट्रीय एक्सपो भारत के पारंपरिक हस्तनिर्मित कालीन उद्योग को वैश्विक मंच देने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया है।

- **उत्पादन केंद्र में सीधा आयोजन:** भदोही और मिर्जापुर दुनिया भर में हस्तनिर्मित कालीन उत्पादन के सबसे बड़े केंद्र हैं, इसलिए विदेशी खरीदारों को सीधे उत्पादन स्थल पर लाने के लिए इस एक्सपो का आयोजन भदोही के कारपेट एक्सपो मार्ट में किया गया।
- **वैश्विक आर्थिक दबावों का मुकाबला:** अंतरराष्ट्रीय टैरिफ, युद्ध से उपजे व्यवधान, महंगे कच्चे माल और ढुलाई खर्च के कारण पैदा हुए संकट से निपटने के लिए निर्माताओं को नए बाजार उपलब्ध कराना आवश्यक था।
- **ब्रिक्स साझेदारी का लाभ:** भारत सरकार द्वारा ब्रिक्स की मेजबानी किए जाने के अवसर को भुनाते हुए आयोजकों ने विशेष व्यवस्था की, जिससे ब्रिक्स समूह के 106 खरीदारों ने पंजीकरण कराया।
- **दीर्घकालिक ऑर्डर चक्र की शुरुआत:** कालीन उद्योग का कारोबारी चक्र 6 से 9 महीने का होता है, इसलिए आगामी निर्यात सीजन के लिए सैंपलिंग और प्राथमिक बातचीत शुरू करने हेतु इस समय एक्सपो आयोजित किया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. भदोही में आयोजित यह कारपेट एक्सपो कौन सा संस्करण है?
यह भदोही में आयोजित होने वाला 50वां इंटरनेशनल कारपेट एक्सपो है।

### 2. इस एक्सपो में कितने देशों और कितने खरीदारों ने हिस्सा लिया?
इस आयोजन में 65 देशों से 450 से अधिक खरीदारों ने आने के लिए पंजीकरण कराया और भाग लिया।

### 3. विदेशी खरीदारों के बीच कौन से उत्पादों की सबसे ज्यादा मांग देखी गई?
मेले में कश्मीरी सिल्क कालीन और मिर्जापुर की प्रसिद्ध दरी विदेशी खरीदारों को सबसे ज्यादा पसंद आ रही हैं।

### 4. ब्रिक्स देशों से कितने खरीदारों ने इस मेले में पंजीकरण कराया?
भारत सरकार द्वारा ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी के चलते विशेष व्यवस्था की गई थी, जिसमें ब्रिक्स के 106 खरीदारों ने पंजीकरण कराया।

### 5. कालीन उद्योग में ऑर्डर पूरा होने का चक्र कितने समय का होता है?
कालीन का व्यापार चक्र छह से नौ महीने का होता है, जहां सैंपलिंग के बाद अगले दो से पांच महीनों में ऑर्डर तैयार होते हैं।

### 6. इस एक्सपो के आयोजन में मुख्य रूप से कौन सी वैश्विक चुनौतियां सामने थीं?
अंतरराष्ट्रीय टैरिफ, युद्ध के असर, कच्चे माल की बढ़ती लागत और परिवहन की समस्याएं प्रमुख चुनौतियां थीं।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._