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  "type": "article",
  "title": "भारत मंडपम में सजेगा वैश्विक मंच: शी जिनपिंग और पुतिन समेत दिग्गजों की मौजूदगी में शुरू होगा ब्रिक्स सम्मेलन",
  "summary": "नई दिल्ली का भारत मंडपम 12 और 13 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए तैयार है, जिसमें शी जिनपिंग, व्लादिमीर पुतिन और एंटोनियो गुटेरेस सहित दुनिया भर के शीर्ष नेता और दिग्गज कारोबारी हिस्सा लेंगे।",
  "content": "नई दिल्ली 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए पूरी तरह तैयार है, जहाँ दुनिया भर के प्रमुख राजनीतिक नेता, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और कॉर्पोरेट जगत के दिग्गज जुटने जा रहे हैं। यह उच्च स्तरीय और भव्य आयोजन राजधानी के अत्याधुनिक भारत मंडपम परिसर में होगा, जिसमें नए और विस्तारित आर्थिक समूह के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। ऐसे समय में जब प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं और विकासशील देश व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक संस्थागत सुधारों में रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना चाहते हैं, यह सम्मेलन बहुपक्षीय संवाद, आर्थिक सहयोग और दीर्घकालिक रणनीतिक योजना का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है।\n\n \n\nशिखर सम्मेलन में शामिल होंगे शीर्ष राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि\n\n12 सितंबर को आयोजित होने वाले मुख्य नेता कार्यक्रम में ब्रिक्स के 11 पूर्ण सदस्य देशों के सरकार प्रमुख, राष्ट्राध्यक्ष और वरिष्ठ राजनयिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। भारत मंडपम में जुटने वाले प्रमुख अंतरराष्ट्रीय नेताओं में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा शामिल हैं। इन नेताओं की भौतिक उपस्थिति ब्रिक्स समूह की तीन सबसे बड़ी संस्थापक अर्थव्यवस्थाओं को आगामी चर्चाओं के केंद्र में रखती है, क्योंकि यह समूह आपसी व्यापार, निवेश तंत्र, संयुक्त परियोजनाओं और वैश्विक आर्थिक शासन संरचना को पुनर्गठित करने की दिशा में काम कर रहा है।\n\n पूर्ण सदस्य देशों के विस्तारित समूह में शामिल अन्य प्रमुख नेताओं में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल-सिसी, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो शामिल हैं। संयुक्त अरब अमीरात का प्रतिनिधित्व अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान करेंगे, जबकि ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा अपने देश का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतिनिधियों में शामिल हैं। इस गठबंधन के 11 पूर्ण सदस्यों में संस्थापक सदस्य भारत, ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ विस्तारित सदस्य मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। ये सभी देश मिलकर वैश्विक आबादी, औद्योगिक उत्पादन, प्राकृतिक संसाधनों और उभरते बाजार की संभावनाओं के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे यह सम्मेलन आर्थिक संवाद का एक अनिवार्य केंद्र बन जाता है।\n\n \n\nपार्टनर देश और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की उपस्थिति\n\nपूर्ण सदस्य देशों के अलावा, नई दिल्ली सम्मेलन में पार्टनर और आउटरीच देशों के नेताओं तथा उच्च अधिकारियों की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिलेगी, जो इस समूह की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक पहुंच और सहयोगी रुख को दर्शाती है। राजधानी में पहुंचने वाले प्रमुख नेताओं में बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव, मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और थाई प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल शामिल हैं। इन नेताओं की भागीदारी यूरोशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया की प्रमुख क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं के साथ ब्रिक्स के बढ़ते रणनीतिक तालमेल को उजागर करती है।\n\n आउटरीच देशों के मेहमानों की सूची में क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कानेल, नाइजीरियाई राष्ट्रपति बोला अहमद टीनूबू और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव भी शामिल हैं। युगांडा का प्रतिनिधित्व उपाध्यक्ष जेसिका अलुपो करेंगी। एशिया, अफ्रीका, यूरोप और लैटिन अमेरिका के देशों के राष्ट्राध्यक्षों की यह भागीदारी ब्रिक्स मंच की व्यापक भौगोलिक पहुंच और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण संरचनात्मक आर्थिक मुद्दों पर इसके केंद्रित ध्यान को रेखांकित करती है। इसके अतिरिक्त, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के भी सम्मेलन में भाग लेने की उम्मीद है, जिससे भारत मंडपम में आयोजित होने वाली उच्च स्तरीय बैठकों का अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक और संस्थागत महत्व और अधिक बढ़ जाता है।\n\n \n\nब्रिक्स बिजनेस फोरम और मंत्री स्तरीय संबोधन\n\nमुख्य नेताओं के शिखर सम्मेलन की शुरुआत से पहले ही विस्तृत आर्थिक गतिविधियों का दौर शुरू हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करेंगे, जो मुख्य राष्ट्राध्यक्षों के सम्मेलन से ठीक एक दिन पहले व्यावसायिक एजेंडा तय करेगा। बिजनेस फोरम सरकारी नीति निर्माताओं और भाग लेने वाले देशों के निजी क्षेत्र तथा सार्वजनिक उद्यमों के प्रमुखों के बीच एक मुख्य संस्थागत पुल के रूप में कार्य करता है ताकि वास्तविक व्यापार वृद्धि को गति दी जा सके।\n\n वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा विदेश मंत्री एस जयशंकर भी बिजनेस फोरम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे। फोरम के दौरान आयोजित होने वाले पैनल सत्रों और गोलमेज वार्ताओं में कृषि व्यापार, निवेश प्रवाह, सीमा पार व्यापार नीतियां, आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन और डिजिटल वाणिज्य बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्रों पर गहराई से चर्चा की जाएगी। इन व्यावसायिक वार्ताओं का उद्देश्य सरकारी कूटनीतिक उद्देश्यों के साथ-साथ व्यावहारिक व्यापारिक अवसरों, निजी क्षेत्र की साझेदारियों और टिकाऊ आर्थिक समझौतों को बढ़ावा देना है।\n\n \n\nवैश्विक उद्योगपति और कॉर्पोरेट प्रतिनिधिमंडल\n\nराजनीतिक बैठकों के साथ-साथ इस सम्मेलन में कॉर्पोरेट जगत की भी एक बड़ी उपस्थिति रहेगी, जिसकी मुख्य विशेषता चीन से नई दिल्ली पहुंचने वाला एक विशाल व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल है। चीन के सबसे बड़े राज्य के स्वामित्व वाले औद्योगिक उद्यमों, प्रमुख वित्तीय संस्थानों और प्रौद्योगिकी कंपनियों के वरिष्ठ कार्यकारी सम्मेलन से जुड़े व्यावसायिक सत्रों में हिस्सा लेंगे। इन बैठकों के लिए सूचीबद्ध प्रमुख चीनी व्यावसायिक अधिकारियों में चीन नेशनल पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (CNPC) के चेयरमैन हुआंग दाई, इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना (ICBC) के चेयरमैन लिन लियाओ और चीन कोस्को शिपिंग कॉर्पोरेशन के चेयरमैन मिन वान शामिल हैं।\n\n इसके अलावा हुआवेई टेक्नोलॉजीज और अलीबाबा ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारी भी व्यावसायिक वार्ताओं में सक्रिय रूप से भाग लेंगे। उनकी उपस्थिति यह स्पष्ट संकेत देती है कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, डिजिटल कॉमर्स प्लेटफॉर्म, वित्तीय सेवाएं और समुद्री शिपिंग लॉजिस्टिक्स मुख्य आकर्षण वाले क्षेत्र होंगे। यह व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल केवल चीन तक सीमित नहीं है, क्योंकि अन्य ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं के भी कई प्रमुख कॉर्पोरेट नेता इसमें भाग ले रहे हैं। इनमें एम्ब्रेयर के फ्रांसिस्को गोम्स नेतो, वेल के गुस्तावो पिमेंटा, नेस्पर्स की फुथी महान्येले-दाबेंगवा, रशियन रेलवे के ओलेग बेलोझेरोव और स्बरबैंक के अलेक्जेंडर वेद्याखिन शामिल हैं। उनकी सक्रिय उपस्थिति सीमा पार वाणिज्यिक उपक्रमों, औद्योगिक साझेदारियों और निजी क्षेत्र के आर्थिक सहयोग को बढ़ाने की ब्रिक्स की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।\n\nइसका आप पर असर\nनई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन भारत और स्थानीय नागरिकों के लिए व्यापार, अर्थव्यवस्था और दैनिक आवाजाही के लिहाज से बड़ा असर डालेगा।\n\n• भारत में: सम्मेलन के दौरान होने वाले व्यापारिक समझौते देश में डिजिटल कॉमर्स, ऊर्जा सुरक्षा और निर्माण क्षेत्र को नई गति देंगे। इससे आने वाले वर्षों में भारतीय कारोबारियों के लिए वैश्विक बाजार में नए अवसर खुलेंगे।\n• भारत में: उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ मजबूत होते संबंधों से सीमा पार वित्तीय लेन-देन और व्यापार में आसानी होगी। भारतीय निर्यातकों और कृषि उत्पादकों को सदस्य देशों में बड़ा बाजार मिल सकेगा।\n• नई दिल्ली में: भारत मंडपम और वीआईपी रूटों के आसपास 11 से 13 सितंबर के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक डायवर्जन रहेगा। इससे स्थानीय निवासियों और यात्रियों की दैनिक आवाजाही प्रभावित होगी और उन्हें वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ेगा।\n• नई दिल्ली में: विदेशी राजनयिकों, राष्ट्राध्यक्षों और वैश्विक उद्योगपतियों के आगमन से राजधानी के होटल, पर्यटन और परिवहन क्षेत्र में कारोबारी गतिविधियों में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nभारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक एकीकरण, व्यापारिक सहयोग और वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।\n\n• आर्थिक विस्तार: नए पूर्ण सदस्यों के शामिल होने से ब्रिक्स का वैश्विक आर्थिक प्रभाव बढ़ा है, जिससे व्यापार और निवेश पर संरचित चर्चा जरूरी हो गई है। वैश्विक नेता ऊर्जा, डिजिटल कॉमर्स और आपूर्ति श्रृंखला पर साझा रणनीति बनाने के लिए जुट रहे हैं।\n• कारोबारी साझेदारी: मुख्य सम्मेलन से पहले ब्रिक्स बिजनेस फोरम का आयोजन कूटनीतिक संबंधों को ठोस व्यावसायिक समझौतों में बदलने का अवसर देता है। बड़े औद्योगिक और वित्तीय संस्थान सीधे व्यापारिक संबंध स्थापित करना चाहते हैं।\n• भौगोलिक प्रतिनिधित्व: एशिया, अफ्रीका, यूरोप और लैटिन अमेरिका के नेताओं का यह जुटान विकासशील देशों के मुद्दों पर बढ़ते ध्यान को दर्शाता है। इसमें पार्टनर देशों की भागीदारी ब्रिक्स के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कब और कहाँ आयोजित किया जा रहा है?\nयह शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा।\n\n2. नई दिल्ली सम्मेलन में कौन-कौन से प्रमुख वैश्विक नेता भाग ले रहे हैं?\nसम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस शामिल हो रहे हैं।\n\n3. ब्रिक्स बिजनेस फोरम का आयोजन कब निर्धारित किया गया है?\nमुख्य शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले 11 सितंबर को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करेंगे।\n\n4. ब्राजील और संयुक्त अरब अमीरात का प्रतिनिधित्व कौन कर रहा है?\nब्राजील का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री मौरो विएरा कर रहे हैं, जबकि संयुक्त अरब अमीरात का प्रतिनिधित्व अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान कर रहे हैं।\n\n5. बिजनेस फोरम के दौरान किन प्रमुख विषयों पर चर्चा होगी?\nबिजनेस फोरम में कृषि, निवेश, व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, तकनीक, डिजिटल कॉमर्स, वित्तीय सेवाओं और लॉजिस्टिक्स पर चर्चा की जाएगी।",
  "url": "https://trendkia.com/national/bharat-mandapam-men-sajega-vaishvika-mncha-xi-jinping-aura-putin-sameta-diggajon-ki-maujudagi-men-shuru-hoga-briksa-sammelana-31095",
  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-09-10",
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    "ब्रिक्स सम्मेलन 2026",
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