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  "type": "article",
  "title": "भारत में तैयार होगी 350 की रफ्तार वाली बुलेट ट्रेन, दिल्ली से पटना का सफर महज तीन घंटे",
  "summary": "रेलवे मंत्रालय ने देश में ही 350 किमी प्रति घंटे की डिजाइन रफ्तार वाली अत्याधुनिक B35 ट्रेन तैयार करने का खाका खींचा है। इस घरेलू तकनीक से दिल्ली से पटना और मुंबई से अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय बेहद घट जाएगा।",
  "content": "देश के रेलवे नेटवर्क को रफ्तार के एक नए युग में ले जाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भारत अब केवल आयातित तकनीक के सहारे रहने के बजाय घरेलू स्तर पर ही 350 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड वाली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेनें विकसित करने की तैयारी कर रहा है। इन सुपरफास्ट ट्रेनों के पटरी पर उतरने के बाद अंतरराज्यीय यात्रा के समय में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। योजना के धरातल पर उतरने के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से पटना तक का लंबा सफर तीन घंटे से भी कम समय में पूरा किया जा सकेगा। इसी तरह अहमदाबाद और मुंबई के बीच की दूरी तय करने में डेढ़ घंटे से भी कम वक्त लगेगा। भविष्य के नेटवर्क विस्तार में दिल्ली-वाराणसी और पटना से होते हुए दिल्ली-हावड़ा जैसे प्रमुख रेल मार्गों पर भी ऐसे ही हाई-स्पीड ट्रैक बिछाने की योजनाएं शामिल हैं।\n\nस्वदेशी B35 मॉडल और जापान के साथ तालमेल\nरेलवे मंत्रालय ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से जुड़े संशोधित वित्तीय प्रस्ताव में घरेलू सुपरफास्ट ट्रेन परियोजना की पूरी रूपरेखा पेश की है। देश में तैयार होने वाले इस नए ट्रेन मॉडल को B35 नाम दिया गया है, जिसे 2030 तक पटरी पर लाने की तैयारी है। इसकी क्षमता और डिजाइन स्पीड जापानी रेलवे की अगली पीढ़ी वाली E10 सीरीज के बराबर रखी जाएगी। दरअसल, जापानी पक्ष ने दिसंबर 2024 में स्पष्ट किया था कि वह अपनी पुरानी E5 सीरीज का उत्पादन समाप्त कर रहा है और नई E10 सीरीज का निर्माण कार्य 2030 में शुरू करेगा, जिनका परिचालन 2034 के आसपास संभव हो सकेगा। इस समयावधि को देखते हुए भारत ने जापानी निर्भरता के समानांतर अपनी खुद की उच्च गति वाली तकनीक खड़ी करने का फैसला लिया। हालांकि, बाद के वर्षों में जब जापान की E10 ट्रेनें उपलब्ध होंगी, तब उन्हें भी कॉरिडोर पर संचालित करने के विकल्पों पर विचार खुला रखा जाएगा।\n\nबीईएमएल को मिला शुरुआती निर्माण का जिम्मा\nपूरी तरह 350 की रफ्तार वाली B35 परियोजना से पहले भारत ने मध्यम स्तर की B28 हाई-स्पीड ट्रेनों का निर्माण आरंभ कर दिया है। इन ट्रेनों की डिजाइन क्षमता 280 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है, जबकि मुंबई-अहमदाबाद मार्ग पर इन्हें अधिकतम 250 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ाया जाएगा। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बीईएमएल को कुल 32 ऐसी B28 ट्रेनों के निर्माण का कार्य सौंपा गया है। निर्माण कार्यक्रम के तहत पहली दो प्रोटोटाइप ट्रेनें वर्ष 2027 की पहली तिमाही में व्यापक परीक्षण के लिए तैयार होने की उम्मीद जताई गई है। इसके अलावा कंपनी ने बीएसई को औपचारिक रूप से सूचित किया है कि उसे 15 अतिरिक्त B28 ट्रेनों के उत्पादन के लिए 5,400 करोड़ रुपये का एक अलग अनुबंध भी हासिल हुआ है। पश्चिमी गलियारे के पहले सेक्शन पर 2027 के दौरान ही ट्रेन सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।\n\nस्वदेशी सिग्नलिंग और नियंत्रण ढांचा\nट्रेनों की बेतहाशा गति को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने के लिए एक अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली भी तैयार की जा रही है। इसके तहत भारत ट्रेन कंट्रोल सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जो चीन के सीटीसीएस नेटवर्क की कार्यप्रणाली के अनुरूप काम करेगा। यह तकनीकी कवच ट्रेनों के बीच सुरक्षित फासला बनाए रखने, रफ्तार की वास्तविक निगरानी करने और किसी भी आपात स्थिति में मानवीय चूक को रोकने का दायित्व निभाएगा। सुरक्षा और सिग्नलिंग के क्षेत्र में यह कदम भारतीय रेलवे को आत्मनिर्भर बनाने के व्यापक अभियान का हिस्सा है।\n\nबजट में दोगुना इजाफा और रूट का अंतिम लक्ष्य\nमुंबई से अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर लंबे इस पूरे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को दिसंबर 2030 तक पूरी तरह क्रियान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। बुनियादी ढांचे के विकास, सिग्नलिंग और जमीन अधिग्रहण के खर्च में आई भारी वृद्धि के कारण कैबिनेट ने परियोजना की लागत को संशोधित कर 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक करने की हरी झंडी दी है। वर्ष 2015 में इस मार्ग के लिए करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये का शुरुआती आकलन किया गया था, जिसके मुकाबले अब प्रति किलोमीटर निर्माण लागत लगभग 399 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। व्यय में इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण जमीन अधिग्रहण पर आने वाले खर्च का तीन गुना से अधिक बढ़कर लगभग 19,700 करोड़ रुपये हो जाना है। इसके साथ ही सिविल निर्माण कार्यों की लागत 50 प्रतिशत उछलकर 1 लाख करोड़ रुपये पार कर गई है, जबकि रोलिंग स्टॉक और सिग्नल तंत्र के खर्च में भी शत-प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।\n\nइसका आप पर असर\nहाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार और स्वदेशी बुलेट ट्रेनों के निर्माण से देश के विभिन्न शहरों के बीच यात्रा का समय नाटकीय रूप से घट जाएगा।\n\n• राष्ट्रीय स्तर पर: अंतरराज्यीय आवागमन में लगने वाले घंटों की बचत होगी और लंबी दूरी के सफर बेहद आसान हो जाएंगे। दिल्ली, पटना, वाराणसी और हावड़ा जैसे महानगरों के बीच व्यापार और पर्यटन को तेज रफ्तार मिलेगी।\n• मुंबई और अहमदाबाद रूट पर: दोनों वित्तीय केंद्रों के बीच यात्रा का समय घटकर डेढ़ घंटे से भी कम रह जाएगा। दैनिक व्यापारिक यात्रियों और पेशेवरों को एक ही दिन में दोनों शहरों के बीच बिना किसी परेशानी के आने-जाने की सुविधा मिलेगी।\n• घरेलू विनिर्माण और रोजगार: बीईएमएल जैसी भारतीय कंपनियों को हजारों करोड़ रुपये के ऑर्डर मिलने से स्थानीय स्तर पर इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर बनेंगे। देश में हाई-स्पीड तकनीक का अपना पारिस्थितिकी तंत्र तैयार होगा।\n• सार्वजनिक खजाने पर असर: प्रोजेक्ट की लागत बढ़कर दो लाख करोड़ रुपये से अधिक होने से रेलवे के बुनियादी ढांचे पर बड़ा निवेश हो रहा है। यात्रियों के लिए शुरूआती टिकट दरें पारंपरिक ट्रेनों के मुकाबले प्रीमियम श्रेणी में रहने की संभावना बनेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nजापान की पुरानी रोलिंग स्टॉक सीरीज के बंद होने और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय लागतों के बीच भारत ने आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए स्वदेशी हाई-स्पीड निर्माण का रास्ता चुना है।\n\n• जापानी ट्रेनों का उत्पादन चक्र: जापान ने दिसंबर 2024 में वर्तमान E5 सीरीज का निर्माण बंद करने की घोषणा की थी और उसकी अगली E10 सीरीज 2034 से पहले तैयार नहीं हो सकेगी। इसी आपूर्ति अंतर को भरने के लिए भारत ने अपनी B35 और B28 ट्रेनों के विकास की शुरुआत की।\n• परियोजना की लागत में भारी उछाल: 2015 के 1.1 लाख करोड़ रुपये के शुरुआती बजट के मुकाबले भूमि अधिग्रहण की लागत तीन गुना बढ़कर 19,700 करोड़ रुपये हो गई। इसके अलावा बुनियादी ढांचे पर खर्च 50 फीसदी और रोलिंग स्टॉक व सिग्नलिंग खर्च 100 फीसदी बढ़ गया, जिसके चलते कुल बजट 2 लाख करोड़ रुपये पार कर गया।\n• तकनीकी नियंत्रण और सुरक्षा: विदेशी निर्भरता घटाने के लिए भारत ट्रेन कंट्रोल सिस्टम का निर्माण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य रेलगाड़ियों की ट्रैकिंग और परिचालन सुरक्षा का पूरा नियंत्रण घरेलू हाथों में सुरक्षित रखना है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. स्वदेशी B35 बुलेट ट्रेन की अधिकतम डिजाइन स्पीड क्या होगी?\nB35 बुलेट ट्रेन को 350 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के लिए तैयार किया जा रहा है, जिसे 2030 तक विकसित करने का लक्ष्य है।\n\n2. दिल्ली से पटना की यात्रा में कितना समय लगने का अनुमान है?\nइस हाई-स्पीड रेल परियोजना के अमल में आने के बाद दिल्ली से पटना का सफर तीन घंटे से भी कम समय में तय किया जा सकेगा।\n\n3. B28 ट्रेन के निर्माण का ठेका किस कंपनी को मिला है?\nबीईएमएल को 32 B28 ट्रेनों के निर्माण का कार्य सौंपा गया है, साथ ही कंपनी को 15 अतिरिक्त ट्रेनों के लिए 5,400 करोड़ रुपये का अलग अनुबंध मिला है।\n\n4. मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की संशोधित लागत कितनी तय की गई है?\nकेंद्रीय कैबिनेट ने इस 508 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट की संशोधित लागत को 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक करने की मंजूरी दी है।\n\n5. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन मार्ग कब तक पूरा करने का लक्ष्य है?\nइस पूरे कॉरिडोर को दिसंबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि एक सेक्शन पर 2027 में संचालन शुरू होने की उम्मीद है।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-09-20",
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    "बुलेट ट्रेन",
    "भारतीय रेलवे",
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