भारत कब बनेगा विश्व गुरु? मोहन भागवत बोले, जब देश के हर वंचित को मिलेगा अधिकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत को सही मायने में विश्व गुरु बनाने के लिए घुमंतू और आदिवासी समुदायों का विकास करना अनिवार्य है। देश को वैश्विक स्तर पर सिरमौर बनाने के लिए समाज के हर आखिरी छोर पर खड़े व्यक्ति को विकास से जोड़ना अनिवार्य है। यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कही है। उनका कहना है कि जब तक देश के घुमंतू, विमुक्त और आदिवासी समुदायों को शिक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के समान अवसर नहीं मिलते, तब तक राष्ट्र की उन्नति का सपना अधूरा रहेगा। खामगांव के आश्रम स्कूल में पहुंचे संघ प्रमुख शनिवार को विदर्भ के खामगांव स्थित परधी आदिवासी बच्चों के आश्रम स्कूल में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे डॉ. मोहन भागवत ने संस्थान में तैयार की गई आधुनिक सुविधाओं का लोकार्पण किया। इसके साथ ही उन्होंने तीन नए खेल परिसरों का भी उद्घाटन किया। इन तमाम सुविधाओं को खड़ा करने में ‘श्री सद्गुरु धार्मिक एवं चैरिटेबल ट्रस्ट’ और पुणे के ‘अमानोरा YES फाउंडेशन’ की साझा पहल शामिल रही है। घुमंतू जातियों के योगदान और इतिहास पर चर्चा सभा को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने भारतीय संस्कृति में इन समुदायों के ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने बताया कि ये घुमंतू और विमुक्त जातियां अतीत में एक जगह से दूसरी जगह घूमकर ज्ञान और तजुर्बे का आदान-प्रदान करती थीं। हालांकि, वक्त के साथ इन्हें सामाजिक तिरस्कार का सामना करना पड़ा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब इस उपेक्षा के भाव को पूरी तरह खत्म करके इन्हें रोजगार और शिक्षा के मुख्य प्रवाह में लाना बेहद जरूरी है। ब्रिटिश काल के अन्याय का किया जिक्र अंग्रेजी हुकूमत के दौर को याद करते हुए डॉ. भागवत ने बताया कि आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की वजह से अंग्रेजों ने परधी समेत कई अन्य समुदायों को ‘अपराधी जनजाति’ करार दे दिया था। इस ऐतिहासिक अन्याय ने इन वर्गों के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को बुरी तरह प्रभावित किया। उन्होंने आगे कहा कि विदेशी आक्रमणों और लंबी गुलामी ने समाज को भले ही कमजोर और खंडित किया, लेकिन तमाम जातियों ने कभी भी पराधीनता को मानसिक रूप से स्वीकार नहीं किया और आजादी के लिए संघर्ष जारी रखा। सुविधाओं का निरीक्षण और सम्मान समारोह कार्यक्रम के दौरान संघ प्रमुख ने स्कूल परिसर का दौरा किया। उन्होंने खेल मैदानों, छात्रवास परिसरों, भोजनालय और बच्चों द्वारा खुद तैयार किए गए किचन गार्डन का बारीकी से मुआयना किया। इस अवसर पर उन्होंने परधी समुदाय की 16 मेधावी बालिकाओं को 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता के चेक बांटे। साथ ही, स्कूल के उन पूर्व विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया जिन्होंने अपने जीवन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। सरकार और संस्थाओं के साझा प्रयास इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के जनजातीय विकास मंत्री डॉ. अशोक उइके ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि प्रशासन इन आदिवासी और परधी समुदायों की बेहतरी के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रहा है। कार्यक्रम में श्रम मंत्री आकाश फुंडकर के अलावा ‘अमानोरा YES फाउंडेशन’ के प्रबंध निदेशक अनिरुद्ध देशपांडे भी मौजूद रहे। उन्होंने इन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और आधुनिक शिक्षा के प्रसार के लिए किए जा रहे संयुक्त प्रयासों की जमकर सराहना की। इसका आप पर असर • भारत में: देश के वंचित और आदिवासी समुदायों के उत्थान और मुख्यधारा में जोड़ने की दिशा में चल रहे प्रयासों को बल मिलेगा। • विदर्भ में: खामगांव और आसपास के क्षेत्रीय आदिवासी बच्चों के लिए आधुनिक शिक्षा और खेल सुविधाओं के नए अवसर खुलेंगे। सवाल-जवाब 1. डॉ. मोहन भागवत ने हाल ही में किस कार्यक्रम को संबोधित किया? उन्होंने विदर्भ के खामगांव में परधी आदिवासी बच्चों के आश्रम स्कूल में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। 2. इस कार्यक्रम में किन संस्थाओं की पहल से सुविधाएं विकसित की गईं? इन सुविधाओं का निर्माण ‘श्री सद्गुरु धार्मिक एवं चैरिटेबल ट्रस्ट’ और पुणे स्थित ‘अमानोरा YES फाउंडेशन’ की पहल से किया गया है। 3. अंग्रेजों ने परधी समुदाय को क्या कहकर चिह्नित किया था? स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी के कारण अंग्रेजों ने परधी समुदाय को ‘अपराधी जनजाति’ के रूप में चिह्नित किया था। 4. कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं को कितनी आर्थिक सहायता दी गई? संघ प्रमुख ने 16 परधी आदिवासी बालिकाओं को 10-10 हजार रुपये के चेक प्रदान किए। 5. कार्यक्रम में महाराष्ट्र के कौन से मंत्री शामिल हुए? महाराष्ट्र के जनजातीय विकास मंत्री डॉ. अशोक उइके और श्रम मंत्री आकाश फुंडकर इस कार्यक्रम में शामिल हुए। प्रेरणा और सबक • वंचितों का विकास: समाज के सबसे पिछड़े और उपेक्षित वर्गों को मुख्यधारा में लाए बिना समग्र प्रगति संभव नहीं है। • सहयोग की ताकत: सामाजिक संगठनों और ट्रस्टों के मिलकर काम करने से जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। • युवाओं को प्रोत्साहन: आर्थिक सहायता और छात्र सम्मान से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होते हैं। https://trendkia.com/national/bharata-kaba-banega-vishva-guru-mohan-bhagwat-bole-jaba-desha-ke-hara-vnchita-ko-milega-adhikara-15244 TrendKia — Har trend, sabse pehle.