भारत की सामरिक और परमाणु घेराबंदी से पाकिस्तान में क्यों बढ़ी बेचैनी, समझें पूरा गणित भारत अपनी रक्षा और ऊर्जा जरूरतों को मजबूत करने के लिए रक्षा विनिर्माण, लंबी दूरी के परीक्षण और वैश्विक यूरेनियम आपूर्ति पर तेजी से काम कर रहा है। इन रणनीतिक कदमों से पाकिस्तान के हुक्मनामाें में चिंता बढ़ गई है। भारत की रक्षा रणनीति अब केवल हथियारों की खरीद और सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं रही है, बल्कि देश रक्षा विनिर्माण, परीक्षण और रणनीतिक संसाधनों के मामले में अपनी ताकत को लगातार बढ़ा रहा है। एक तरफ जहाँ पश्चिमी राजस्थान का आसमान सत्रह दिनों के लिए सील कर दिया गया है और वायुसेना ने एक सौ चालीस किलोमीटर दूर से मार करने वाले ग्लाइड बम का परीक्षण किया है, वहीं दूसरी ओर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने अपने इंजन का पूरा जोर लगाकर परीक्षण पूरा कर लिया है। इन तमाम गतिविधियों के बीच पाकिस्तान में उच्च स्तर की बैठकों का दौर शुरू हो गया है और वहाँ के नीति निर्माताओं की नींद उड़ी हुई है। यूरोप के साथ रक्षा समझौते और स्वदेशी निर्माण हाल ही में भारत और बेल्जियम के बीच रॉकेट और गोला-बारूद के सह-उत्पादन को लेकर महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की मुलाकात के दौरान रक्षा आशय पत्र पर सहमति बनी, जिसके तहत करीब दस समझौते तय किए गए। इनमें भारत के भीतर ही रॉकेट, गोला-बारूद, नौसैनिक समुद्री रोबोटिक्स और टैंक उपकरणों का निर्माण किया जाना शामिल है। थेल्स और कल्याणी ग्रुप मिलकर सत्तर मिलीमीटर रॉकेट का उत्पादन भारत में ही करेंगे, जिसका विनिर्माण वर्ष 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है। इसके अलावा गोला-बारूद की उत्पादन लाइन को लेकर भी सहमति बनी है, जिसकी वार्षिक क्षमता करीब दस करोड़ राउंड तक आंकी जा रही है। समुद्री सुरक्षा के लिहाज से माइन वेसल्स के क्षेत्र में हुआ समझौता भारतीय नौसेना के लिए एक बड़ा कदम है, साथ ही जोरावर लाइट टैंक के टर्रेट को लेकर भी करार किए गए हैं। परमाणु ऊर्जा और यूरेनियम की वैश्विक कूटनीति हथियारों की इस दौड़ के समांतर भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी बहुत तेजी से कदम बढ़ा रहा है। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में केंद्र सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक परमाणु बिजली उत्पादन को एक सौ गीगावॉट तक पहुँचाने का है। सरकार अच्छी तरह जानती है कि बिना पर्याप्त यूरेनियम के कोई भी परमाणु रिएक्टर महज लोहे का ढांचा बनकर रह जाता है। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए भारत ने पिछले कुछ महीनों में कनाडा, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ कूटनीतिक और व्यावसायिक संवाद तेज किया है। सरकार का यह कदम भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए एक पुख्ता बीमा पॉलिसी की तरह है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि देश के परमाणु संयंत्रों को कभी ईंधन की कमी का सामना न करना पड़े。 निजी क्षेत्र की भागीदारी और भविष्य के लक्ष्य वर्ष 2014 में देश की परमाणु क्षमता का आधार रखा गया था, तब उत्पादन चार दशमलव आठ आठ गीगावॉट था, जो वर्ष 2026 में बढ़कर आठ दशमलव सात आठ गीगावॉट हो गया। इसके बाद वर्ष 2031-32 तक बाईस दशमलव तीन आठ गीगावॉट और वर्ष 2047 तक एक सौ गीगावॉट बिजली उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। इस विशाल लक्ष्य को अकेले सरकारी मशीनरी पूरा नहीं कर सकती, इसलिए शांति अधिनियम के माध्यम से निजी क्षेत्र के लिए रास्ते खोल दिए गए हैं। अब निजी कंपनियाँ भी खुद परमाणु प्लांट स्थापित कर सकेंगी। योजना के मुताबिक सरकारी संस्थाओं के जरिए बावन से चौवन गीगावॉट बिजली आएगी, जबकि शेष पैंतालीस से छियालीस गीगावॉट बिजली का जिम्मा राज्यों, संयुक्त उपक्रमों और निजी घरानों को सौंपा जाएगा। इस दिशा में अडानी, रिलायंस, टाटा, जिंदल और बजाज जैसे बड़े औद्योगिक समूहों ने गहरी रुचि दिखाई है, जिससे देश की आर्थिक और सामरिक स्थिति आने वाले समय में और अधिक मजबूत होगी। इसका आप पर असर भारत की बढ़ती रक्षा क्षमताओं और परमाणु ऊर्जा विस्तार का सीधा असर देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास पर पड़ेगा। • भारत में: देशवासियों को भविष्य में अधिक स्थिर और स्वच्छ ऊर्जा मिलने की संभावना है, साथ ही घरेलू स्तर पर रक्षा विनिर्माण बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। • आर्थिक मोर्चे पर: निजी कंपनियों के प्रवेश से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, जिससे बड़े औद्योगिक घरानों और ऊर्जा निगमों की गतिविधियों में तेजी आएगी। सवाल-जवाब 1. भारत का वर्ष 2047 तक परमाणु बिजली उत्पादन का क्या लक्ष्य है? सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक परमाणु बिजली उत्पादन को एक सौ गीगावॉट तक पहुँचाने का है। 2. भारत ने हाल ही में किस देश के साथ रक्षा सहयोग समझौते किए हैं? भारत ने बेल्जियम के साथ रॉकेट, गोला-बारूद और टैंक उपकरणों के सह-उत्पादन को लेकर समझौते किए हैं। 3. परमाणु ऊर्जा सेक्टर में किन निजी समूहों ने रुचि दिखाई है? इस प्रोजेक्ट में अडानी, रिलायंस, टाटा, जिंदल और बजाज जैसे बड़े समूहों ने दिलचस्पी दिखाई है। 4. भारतीय वायुसेना ने हाल ही में किस हथियार का परीक्षण किया है? वायुसेना ने एक सौ चालीस किलोमीटर दूर से दागे जाने वाले ग्लाइड बम का परीक्षण किया है। 5. भारत यूरेनियम के लिए किन देशों से संपर्क साध रहा है? भारत इस वर्ष कनाडा, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के साथ यूरेनियम आपूर्ति के लिए संवाद कर रहा है। https://trendkia.com/national/bharata-ki-samarika-aura-paramanu-gherabndi-se-pakistana-men-kyon-barhi-bechaini-samajhen-pura-ganita-28702 TrendKia — Har trend, sabse pehle.