भारत में बनने वाले राफेल विमानों को मिलेगा 40 साल का साथ, डसॉल्ट ने दिया भरोसा राफेल बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने भारत में तैयार होने वाले हर राफेल विमान को रोलआउट की तारीख से 40 साल तक स्पेयर पार्ट्स, मेंटेनेंस और तकनीकी सहयोग देने का भरोसा दिया है। इससे भारतीय वायुसेना का राफेल बेड़ा करीब 2070 के दशक तक बिना रुकावट उड़ान भर सकेगा। फ्रांस से खरीदे जा रहे राफेल फाइटर जेट को लेकर भारतीय वायुसेना के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राफेल बनाने वाली कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने भारत में तैयार होने वाले हर राफेल विमान को 40 साल तक तकनीकी सहयोग देने का भरोसा दिया है। यानी मेड इन इंडिया राफेल बेड़े को स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस को लेकर आने वाले चार दशकों तक कोई परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी और यह भरोसा भारतीय वायुसेना की लंबी अवधि की योजना के लिए भी बड़ी राहत की तरह देखा जा रहा है। यह पूरा मामला उस वक्त अहम हो जाता है जब चीन के पास पहले से ही करीब 500 स्टील्थ फाइटर जेट का बड़ा बेड़ा मौजूद है और पाकिस्तान के अपने करीबी दोस्त चीन से पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट खरीदने की चर्चा भी तेज है। कहा जा रहा है कि इस डील पर जल्द मुहर लग सकती है। दूसरी तरफ भारतीय वायुसेना अभी भी मुख्य रूप से चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर निर्भर है। इस तकनीकी अंतर को पाटने के लिए भारत ने एएमसीए प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसके तहत आगे चलकर पांचवीं और छठी पीढ़ी के फाइटर जेट देश में ही तैयार किए जाएंगे। यह प्रोजेक्ट अभी तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन तब तक भारतीय वायुसेना के आक्रामक मोर्चे की जिम्मेदारी सुखोई-30 एमकेआई और राफेल जैसे विमानों पर ही टिकी हुई है। फ्रांस के साथ हुई अब तक की सबसे बड़ी डिफेंस डील भारत ने फ्रांस के साथ 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने का करार किया है और इसमें से अधिकांश विमान भारत में ही तैयार किए जाएंगे। इस पूरे सौदे की कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये आंकी जा रही है, जिसे भारत के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी डिफेंस डील बताया जा रहा है। अब इसी बड़ी डील से जुड़ी एक और अहम जानकारी सामने आई है, जिसमें डसॉल्ट एविएशन ने मेड इन इंडिया राफेल विमानों के लिए लंबी अवधि का मैन्युफैक्चरर्स सपोर्ट देने पर सहमति जताई है। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी ने भारत में बनने वाले हर राफेल के रोलआउट या डिलीवरी की तारीख से अगले 40 वर्षों तक ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर यानी ओईएम सपोर्ट देने का कमिटमेंट किया है। 2030 में पहला विमान, 2070 तक साथ निभाएगा डसॉल्ट अगर उत्पादन तय समयसीमा के मुताबिक चलता है तो पहला मेड इन इंडिया राफेल करीब साल 2030 में रोलआउट हो सकता है, जबकि आखिरी विमान 2036-37 तक भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल किया जा सकता है। इसका मतलब है कि इस पूरे बेड़े को 2070 के दशक तक स्पेयर पार्ट्स, मेंटेनेंस और तकनीकी मदद का फायदा मिलता रहेगा। इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस लंबी अवधि वाले सपोर्ट पैकेज में स्पेयर पार्ट्स की निरंतर उपलब्धता, नियमित रखरखाव, तकनीकी सहायता और जरूरत के हिसाब से समय-समय पर होने वाले अपग्रेड शामिल किए गए हैं। यह पूरी व्यवस्था राफेल के मौजूदा F4 मानक के साथ-साथ आगे आने वाले F5 कॉन्फिगरेशन तक के अपग्रेड को भी ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है, ताकि भारतीय वायुसेना पूरे सर्विस लाइफ के दौरान विमान की ऑपरेशनल क्षमता बनाए रख सके। अब भारत में ही बनेंगे राफेल के पुर्जे इस पूरे समझौते की सबसे बड़ी खासियत स्वदेशीकरण यानी इंडिजिनाइजेशन पर दिया गया जोर है। योजना के मुताबिक राफेल के स्पेयर पार्ट्स, कई अहम कंपोनेंट्स और महत्वपूर्ण सिस्टम अब भारत में ही तैयार किए जाएंगे। इसके लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ-साथ कई अन्य भारतीय कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ाई जाएगी। साथ ही देश के भीतर ही मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल यानी एमआरओ हब भी विकसित किए जाएंगे। इंजन से जुड़े कुछ क्षेत्रों में फ्रांसीसी कंपनी सैफ्रान के साथ भी सहयोग की संभावना जताई जा रही है। इससे फ्रांसीसी सप्लाई चेन पर भारत की निर्भरता कम होगी, रखरखाव पर आने वाला खर्च घटेगा और साथ ही भारतीय एयरोस्पेस इंडस्ट्री को भी नई ताकत मिलेगी। मिराज-2000 के अनुभव से मिला बड़ा सबक यह पूरा मॉडल दरअसल भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 बेड़े से मिले अनुभवों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। मिराज-2000 का उत्पादन बंद होने के बाद इसके स्पेयर पार्ट्स जुटाना लगातार एक बड़ी चुनौती बनता गया था। कई बार तो पुराने विमानों से ही पुर्जे निकालकर काम चलाना पड़ा और इसके अपग्रेड कार्यक्रम भी शुरुआती अनुमान से कहीं ज्यादा महंगे साबित हुए। इसी वजह से नई राफेल परियोजना में शुरुआत से ही लंबी अवधि का सपोर्ट और भारत में ही स्थानीय उत्पादन दोनों को शामिल किया गया है, ताकि आगे चलकर वैसी दिक्कतों से बचा जा सके। वायुसेना को मिलेगी अतिरिक्त ताकत क्षमता के लिहाज से देखें तो राफेल के मौजूदा F4 और आने वाले F5 वर्जन भारतीय वायुसेना को नई ताकत देंगे। इनमें अत्याधुनिक सेंसर, नेटवर्क सेंट्रिक वॉर की एडवांस क्षमता, आधुनिक हथियारों का इंटीग्रेशन और आगे चलकर मानवरहित विमानों के साथ मिलकर काम करने यानी मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग जैसी क्षमताएं भी शामिल होंगी। इसके अलावा भारतीय मूल की अस्त्र और रुद्रम जैसी मिसाइलों को भी राफेल में इंटीग्रेट करने की योजना है, जिससे स्वदेशी हथियारों का इस्तेमाल और बढ़ेगा। साल 2070 तक ओईएम सपोर्ट की यह गारंटी भारतीय वायुसेना को ऑपरेशनल स्तर पर ज्यादा भरोसा देगी और लंबी अवधि की वित्तीय योजना बनाने में भी मदद करेगी। ऐसे समय में जब वायुसेना अपने स्क्वाड्रन की संख्या बढ़ाने में जुटी है और दूसरी तरफ तेजस एमके2 और एएमसीए जैसे स्वदेशी फाइटर जेट प्रोग्राम अभी डेवलपमेंट के चरण में ही हैं, राफेल का यह बेड़ा भारतीय वायुसेना के लिए एक अहम अंतरिम क्षमता का काम करेगा। इसका आप पर असर यह डील सीधे तौर पर देश की सुरक्षा तैयारियों और डिफेंस इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को प्रभावित करेगी। • राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर: राफेल बेड़े को 40 साल तक स्पेयर पार्ट्स और तकनीकी सहयोग मिलने से भारतीय वायुसेना बिना रुकावट अपनी ऑपरेशनल तैयारी बनाए रख पाएगी। • रोजगार के मौके: टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स समेत अन्य भारतीय कंपनियों में पुर्जों के निर्माण और एमआरओ हब बनने से एयरोस्पेस सेक्टर में नए रोजगार के अवसर बनेंगे। • टैक्सपेयर के पैसे पर असर: 3.25 लाख करोड़ रुपये की इस डील में लंबी अवधि का सपोर्ट शामिल होने से आगे चलकर मेंटेनेंस पर होने वाला अतिरिक्त खर्च कम होगा। सवाल-जवाब 1. डसॉल्ट एविएशन राफेल के लिए कितने साल तक सपोर्ट देगा? डसॉल्ट एविएशन भारत में बने हर राफेल के रोलआउट या डिलीवरी की तारीख से 40 साल तक ओईएम सपोर्ट देने का कमिटमेंट कर चुका है। 2. पहला मेड इन इंडिया राफेल कब रोलआउट होगा? अगर उत्पादन तय समयसीमा के मुताबिक चला तो पहला मेड इन इंडिया राफेल करीब साल 2030 में रोलआउट हो सकता है। 3. आखिरी राफेल विमान भारतीय वायुसेना को कब मिलेगा? आखिरी विमान 2036-37 तक भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल किए जाने की उम्मीद है। 4. राफेल डील कितने रुपये की है? भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल फाइटर जेट के लिए करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की डील हुई है। 5. इस सपोर्ट डील में कौन सी भारतीय कंपनियां शामिल होंगी? टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स समेत कई अन्य भारतीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। 6. इंजन को लेकर किस कंपनी से सहयोग की संभावना है? फ्रांसीसी कंपनी सैफ्रान के साथ इंजन से जुड़े कुछ क्षेत्रों में सहयोग की संभावना जताई जा रही है। 7. मिराज-2000 के अनुभव से क्या सबक लिया गया? मिराज-2000 का उत्पादन बंद होने के बाद स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता चुनौती बन गई थी, इसी वजह से राफेल में शुरुआत से ही लंबी अवधि का सपोर्ट शामिल किया गया। 8. राफेल के किन वर्जन का जिक्र किया गया है? मौजूदा F4 मानक के साथ-साथ भविष्य के F5 कॉन्फिगरेशन तक के अपग्रेड का भी जिक्र है। https://trendkia.com/national/bharata-men-banane-vale-rafale-vimanon-ko-milega-40-sala-ka-satha-dassault-ne-diya-bharosa-8619 TrendKia — Har trend, sabse pehle.