भारतीय सेना की कॉर्प्स ऑफ सिग्नल ने माउंट किआगर री पर लहराया तिरंगा, कारगिल के वीरों को समर्पित ड्रीम्स ऑफ वेलोर अभियान की पहली बड़ी सफलता भारतीय सेना की कॉर्प्स ऑफ सिग्नल ने 'ड्रीम्स ऑफ वेलोर' अभियान के तहत 6,100 मीटर ऊंचे माउंट किआगर री पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया है। कारगिल युद्ध के वीर शहीदों की स्मृति को समर्पित इस तीन-चोटी अभियान का यह पहला सफल पड़ाव है। भारतीय सेना की कॉर्प्स ऑफ सिग्नल के जांबाज सैनिकों ने अपनी उच्च पर्वतारोहण क्षमता और अदम्य साहस का परिचय देते हुए 6,100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माउंट किआगर री चोटी को सफलतापूर्वक फतह कर लिया है। कठिन और दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में स्थित इस चोटी के शिखर पर भारतीय तिरंगा लहराकर सेना ने अपने विशेष अभियान 'ड्रीम्स ऑफ वेलोर – थ्री पीक्स, वन मिशन, इनफिनिट रिजॉल्व' के पहले चरण को पूरा कर लिया है। यह पर्वतारोहण अभियान केवल एक शारीरिक उपलब्धि या साहसिक खेल नहीं है, बल्कि कारगिल युद्ध में देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर शहीदों और उनके अदम्य शौर्य को दी गई एक भावपूर्ण सैन्य श्रद्धांजलि है। 6,100 मीटर की ऊंचाई पर प्राकृतिक चुनौतियों से मुकाबला समुद्र तल से लगभग 6,100 मीटर यानी करीब 20,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर पर्वतारोहण करना किसी भी सैनिक के लिए बेहद जटिल माना जाता है। माउंट किआगर री के आसपास का भूभाग अत्यधिक कठिन, पथरीला और बर्फीला है। इतनी ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर काफी गिर जाता है, जिससे सांस लेने में भारी तकलीफ होती है। इसके अलावा अचानक बदलता मौसम, शून्य से नीचे गिरता तापमान और बेहद तेज बर्फीली हवाएं पर्वतारोहियों के शारीरिक स्टेमिना और मानसिक धैर्य की कड़ी परीक्षा लेती हैं। सैन्य पर्वतारोहियों के इस दल ने महीनों के कठिन अभ्यास, अनुकूलन सत्रों और अनुशासित रणनीति के बल पर इन विपरीत परिस्थितियों पर विजय प्राप्त की। इस चढ़ाई के दौरान सैनिकों ने न केवल अपनी शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन किया, बल्कि उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में सैन्य दल के उत्कृष्ट समन्वय और टीम वर्क की मिसाल भी कायम की। कारगिल के अमर बलिदानियों की स्मृति में समर्पित मिशन 'ड्रीम्स ऑफ वेलोर' अभियान का सबसे भावुक और प्रेरणादायक पहलू इसका कारगिल युद्ध के इतिहास से जुड़ा होना है। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सेना ने दुनिया की सबसे कठिन और खतरनाक चोटियों पर दुश्मन के खिलाफ ऐतिहासिक विजय हासिल की थी। उस समय भारतीय जवानों ने प्रतिकूल परिस्थितियों में द्रास, बटालिक और कारगिल के अन्य क्षेत्रों में रणनीतिक ऊंचाइयों को वापस हासिल कर राष्ट्र के सम्मान की रक्षा की थी। उसी महान सैन्य परंपरा और देशभक्ति की भावना को जीवंत रखने के लिए इस तीन-चोटी अभियान की शुरुआत की गई है। माउंट किआगर री के शिखर पर फहराता तिरंगा इस बात का प्रतीक है कि भारतीय सेना अपने अमर शहीदों के बलिदान को कभी नहीं भूलती और उनका त्याग आज भी हर सैनिक को कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। तकनीक और शारीरिक क्षमता का अद्भुत मेल: कॉर्प्स ऑफ सिग्नल भारतीय सेना में कॉर्प्स ऑफ सिग्नल की भूमिका मुख्य रूप से युद्धक्षेत्र में सुरक्षित और अबाध संचार व्यवस्था, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और सूचना नेटवर्क स्थापित करने की होती है। आधुनिक सैन्य अभियानों में संचार नेटवर्क को रीढ़ की हड्डी माना जाता है। हालांकि, इस पर्वतारोहण सफलता ने यह साबित कर दिया है कि सिग्नल कोर के जवान केवल अत्याधुनिक तकनीकी उपकरणों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे विषम से विषम परिस्थितियों में कठिन से कठिन शारीरिक अभियानों को अंजाम देने में भी पूरी तरह सक्षम हैं। इस अभियान के माध्यम से सैनिकों के नेतृत्व कौशल, निर्णय लेने की त्वरित क्षमता और चरम शारीरिक परिस्थितियों में सहनशक्ति का परीक्षण हुआ है। तकनीकी विशेषज्ञता के साथ-साथ उच्च स्तर की पर्वतारोहण दक्षता यह दर्शाती है कि भारतीय सेना का हर अंग हर तरह की चुनौती के लिए सदैव तैयार रहता है। तीन चोटियों का लक्ष्य: अगले पड़ाव की ओर बढ़ते कदम माउंट किआगर री पर मिली विजय इस 'थ्री पीक्स, वन मिशन' अभियान की केवल शुरुआत है। इस तीन-चोटी मिशन का पहला महत्वपूर्ण पड़ाव सफलतापूर्वक पार कर लिया गया है, लेकिन अभियान दल की नजरें अब बाकी दो चुनौतीपूर्ण चोटियों को फतह करने पर टिकी हैं। अभियान का संदेश बहुत स्पष्ट है: लक्ष्य चाहे कितना भी कठिन हो और राह में कितनी भी प्राकृतिक बाधाएं आएं, भारतीय सैनिक अपने संकल्प से पीछे नहीं हटते। आने वाले दिनों में टीम अगले चरणों की चढ़ाई शुरू करेगी, जहां अनुशासन, संकल्प और साहस के साथ तिरंगे को एक बार फिर नई ऊंचाइयों पर फहराने का प्रयास किया जाएगा। इसका आप पर असर भारत में: यह सफलता भारतीय सेना के उच्च पर्वतारोहण प्रशिक्षण, कठिन परिस्थितियों में परिचालन तैयारियों और देश की सीमाओं की सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है। साहसिक खेल और रक्षा क्षेत्र में: यह उपलब्धि युवाओं को सैन्य सेवा, पर्वतारोहण तथा उच्च पर्वतीय साहसिक गतिविधियों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। सवाल-जवाब 1. माउंट किआगर री की ऊंचाई कितनी है? माउंट किआगर री लगभग 6,100 मीटर यानी करीब 20,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित एक कठिन हिमालयी चोटी है। 2. इस अभियान का नाम क्या है और यह किस उद्देश्य से चलाया जा रहा है? इस अभियान का नाम 'ड्रीम्स ऑफ वेलोर – थ्री पीक्स, वन मिशन, इनफिनिट रिजॉल्व' है, जिसका उद्देश्य तीन चोटियों को फतह करना और कारगिल युद्ध के शहीदों को सम्मानित करना है। 3. भारतीय सेना की किस शाखा ने इस पर्वतारोहण अभियान का आयोजन किया है? यह अभियान भारतीय सेना की कॉर्प्स ऑफ सिग्नल की ओर से आयोजित किया जा रहा है। 4. ड्रीम्स ऑफ वेलोर अभियान में कुल कितनी चोटियों को फतह करने का लक्ष्य रखा गया है? इस अभियान के तहत कुल तीन उच्च हिमालयी चोटियों पर चढ़ाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें माउंट किआगर री पहली चोटी है। प्रेरणा और सबक प्रेरणादायक संदेश और सीख: • प्रतिकूल परिस्थितियों में अटूट संकल्प: कम ऑक्सीजन और अत्यधिक ठंड जैसी कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ इच्छाशक्ति से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। • मजबूत टीम वर्क की ताकत: विशाल और जोखिम भरे अभियानों में व्यक्तिगत क्षमता से ज्यादा आपसी तालमेल और अनुशासन मायने रखता है। • तकनीक और शारीरिक क्षमता का संतुलन: मानसिक और तकनीकी दक्षता के साथ-साथ शारीरिक फिटनेस सफलता की कुंजी है। • विरासत से प्रेरणा: पूर्वजों और वीर बलिदानियों के आदर्शों को याद रखकर कार्य करने से असीम ऊर्जा और प्रेरणा मिलती है। https://trendkia.com/national/bharatiya-sena-ki-corps-of-signals-ne-mt-kiagar-ri-para-laharaya-tirnga-karagila-ke-viron-ko-samarpita-dreams-of-valour-abhiyana-k-17624 TrendKia — Har trend, sabse pehle.