{
  "type": "article",
  "title": "भोजपुर के किसानों के लिए राहत की खबर: देर से मानसून में भी इन पांच धान किस्मों से मिलेगी भरपूर उपज",
  "summary": "भोजपुर में मानसून की देरी से परेशान किसानों के लिए कृषि विशेषज्ञों ने राजेन्द्र श्वेता, स्वर्ण श्रेया, स्वर्ण समृद्धि, बी.पी.टी. 5204 और सम्पूर्णा जैसी मध्यम अवधि की धान किस्में सुझाई हैं, जिनकी नर्सरी सिर्फ 70 से 75 दिनों में तैयार हो जाती है।",
  "content": "भोजपुर में इस बार मानसून के देर से सक्रिय होने ने धान की खेती करने वाले किसानों को चिंता में डाल दिया है, लेकिन कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि सही समय पर सही किस्म का चुनाव करने से यह मुश्किल आसानी से टल सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बारिश की देरी के बावजूद किसान बंपर उत्पादन हासिल कर सकते हैं, बशर्ते वे अभी से नर्सरी और बुवाई की योजना बदल लें।\n\nमानसून लेट है तो बदलनी होगी बुवाई की रणनीति\nआमतौर पर मानसून के तय समय पर आने की उम्मीद में किसान लंबी अवधि वाली धान की किस्में बोते हैं, लेकिन बारिश देर से आने पर यही किस्में रोपाई में देरी की वजह बन जाती हैं और आगे चलकर उत्पादन पर असर डालती हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी परिस्थिति में किसानों के लिए मध्यम अवधि वाली धान की किस्में कहीं ज्यादा भरोसेमंद विकल्प हैं, क्योंकि ये कम समय में तैयार होकर देर से शुरू हुए मानसून के साथ भी तालमेल बिठा लेती हैं।\n\nराजेन्द्र श्वेता से लेकर सम्पूर्णा तक, ये पांच किस्में आएंगी काम\nकृषि विशेषज्ञों ने जिन किस्मों को सबसे उपयुक्त बताया है, उनमें राजेन्द्र श्वेता, स्वर्ण श्रेया, स्वर्ण समृद्धि, बी.पी.टी. 5204 और सम्पूर्णा शामिल हैं। किसान इन्हीं पांच किस्मों की नर्सरी तैयार रख सकते हैं, ताकि बारिश शुरू होते ही बिना देर किए रोपाई का काम शुरू किया जा सके। इससे मानसून की अनिश्चितता के बावजूद खेत खाली नहीं रहेंगे और बुवाई का पूरा कार्यक्रम पटरी पर बना रहेगा।\n\nमहज 70 से 75 दिन में तैयार हो जाती है नर्सरी\nइन किस्मों की सबसे बड़ी खूबी यही है कि इनकी नर्सरी करीब 70 से 75 दिनों में ही तैयार हो जाती है। यानी अगर मानसून सामान्य से कुछ हफ्ते देर से भी दस्तक दे, तब भी किसान समय का गणित बिगड़ने नहीं देंगे और उत्पादन पर पड़ने वाला असर काफी हद तक कम हो जाएगा। कम अवधि में नर्सरी तैयार होने से किसानों को रोपाई की तारीख तय करने में लचीलापन मिलता है, जो अनियमित बारिश के इस दौर में बेहद जरूरी माना जा रहा है।\n\nनर्सरी में बीज उपचार और सिंचाई का रखें खास ख्याल\nविशेषज्ञों की सलाह है कि नर्सरी तैयार करते वक्त बीज उपचार जरूर करें, खाद और उर्वरक का इस्तेमाल संतुलित मात्रा में करें, और समय-समय पर सिंचाई के साथ खरपतवार नियंत्रण पर भी ध्यान दें। इन बातों का पालन करने से पौधे शुरू से ही स्वस्थ और मजबूत बनते हैं, जिसका फायदा रोपाई के बाद पूरे खेत में दिखता है और पौधों की बढ़वार बेहतर होती है।\n\nबीज खरीदने से पहले कृषि विज्ञान केंद्र से जरूर करें बात\nकृषि विशेषज्ञ किसानों को सुझाव दे रहे हैं कि वे अपने क्षेत्र की मिट्टी और मौसम के हिसाब से नजदीकी कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र के जानकारों से सलाह लेकर ही बीज का चुनाव करें। प्रमाणित बीज खरीदने से फसल की गुणवत्ता और पैदावार, दोनों में सुधार होता है। समय पर खेत तैयार करने, पानी का सही प्रबंधन करने और खेती के वैज्ञानिक तरीके अपनाने से किसान मानसून की देरी के असर को काफी हद तक झेल पाएंगे और अच्छी उपज हासिल कर सकेंगे।\n\nइसका आप पर असर\nअगर आप भी धान की खेती करते हैं तो यह जानकारी आपके काम आ सकती है।\n\n• भारत में: देश के अन्य हिस्सों में भी जहां मानसून देर से पहुंचा है, वहां के किसान इन्हीं मध्यम अवधि की किस्मों को अपनाकर उत्पादन में होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं।\n• भोजपुर में: यहां के किसानों को अभी से राजेन्द्र श्वेता, स्वर्ण श्रेया, स्वर्ण समृद्धि, बी.पी.टी. 5204 और सम्पूर्णा की नर्सरी तैयार करनी चाहिए ताकि बारिश आते ही रोपाई शुरू की जा सके।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मानसून में देरी होने पर धान की कौन सी किस्में बोनी चाहिए?\nकृषि विशेषज्ञ राजेन्द्र श्वेता, स्वर्ण श्रेया, स्वर्ण समृद्धि, बी.पी.टी. 5204 और सम्पूर्णा जैसी मध्यम अवधि की किस्मों की सलाह दे रहे हैं।\n\n2. इन किस्मों की नर्सरी तैयार होने में कितना समय लगता है?\nइन किस्मों की नर्सरी करीब 70 से 75 दिनों में तैयार हो जाती है।\n\n3. नर्सरी तैयार करते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?\nबीज उपचार, संतुलित उर्वरक का इस्तेमाल, समय पर सिंचाई और खरपतवार प्रबंधन का ध्यान रखना चाहिए।\n\n4. बीज खरीदने से पहले किससे सलाह लेनी चाहिए?\nअपने क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु के हिसाब से नजदीकी कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए।\n\n5. प्रमाणित बीज इस्तेमाल करने का क्या फायदा है?\nप्रमाणित बीज इस्तेमाल करने से फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों बेहतर होती हैं।\n\n6. यह सलाह किस जिले के किसानों को दी गई है?\nयह सलाह भोजपुर के किसानों को दी गई है।",
  "url": "https://trendkia.com/national/bhojpur-ke-kisanon-ke-lie-rahata-ki-khabara-dera-se-manasuna-men-bhi-ina-pancha-dhana-kismon-se-milegi-bharapura-upaja-5002",
  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-07-05",
  "tags": [
    "धान की खेती",
    "मानसून की देरी",
    "कृषि विशेषज्ञ",
    "धान की किस्में",
    "नर्सरी प्रबंधन",
    "भोजपुर किसान",
    "खरीफ फसल"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}