बिहार के राजकीय पक्षी को समर्पित पटना का अनूठा पंडाल, 1000 कृत्रिम गौरैया और घोंसलों के बीच होगा मां दुर्गा का पूजन पटना के भीखना पहाड़ी में कचहरी गली के पूजा पंडाल को विशाल घोंसले का रूप दिया गया है, जहां पर्यावरण और गौरैया संरक्षण का संदेश देने के लिए 1000 कृत्रिम चिड़िया और घोंसले लगाए गए हैं। बिहार की राजधानी पटना में इस बार दुर्गा पूजा के मौके पर श्रद्धालुओं को भक्ति के साथ पर्यावरण चेतना का एक अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। शहर के भीखना पहाड़ी इलाके की कचहरी गली में एक ऐसा पूजा पंडाल तैयार किया गया है, जो पहली नजर में किसी विशाल प्राकृतिक घोंसले की तरह दिखाई देता है। संकरी गली में स्थित होने के बावजूद अपनी अद्भुत सजावट और कल्पनाशीलता के कारण यह पंडाल राजधानी के बड़े और भव्य पंडालों को कड़ी टक्कर दे रहा है। इस वर्ष समिति ने अपनी पूरी सजावट बिहार के राजकीय पक्षी गौरैया के संरक्षण पर केंद्रित रखी है, ताकि दर्शन करने आने वाले लोग पर्यावरण के प्रति जागरूक हो सकें। 1000 घोंसले और कृत्रिम गौरैया से संवारी गई प्राकृतिक छटा इस पंडाल का मुख्य आकर्षण इसकी प्राकृतिक और जीवंत बनावट है। कारीगरों ने बाहरी आवरण से लेकर गर्भगृह के अंदरूनी हिस्से तक ऐसी नक्काशी और संरचना तैयार की है कि पूरा परिसर एक विशाल प्राकृतिक घोंसले जैसा प्रतीत होता है। इस विशेष माहौल को बनाने के लिए लगभग 1000 कृत्रिम घोंसले और 1000 कृत्रिम गौरैया तैयार कर पूरे परिसर में स्थापित की गई हैं। हरी पत्तियों, टहनियों और शाखाओं के सुंदर संयोजन से पंडाल को एक घने बगीचे का स्वरूप दिया गया है। लटके हुए घोंसलों और गौरैया की मूर्तियों में की गई आकर्षक लाइटिंग रात के समय इस पूरे दृश्य को बेहद मनमोहक बना देती है। घरों के आंगन से गायब होती गौरैया को बचाने का संकल्प पूजा आयोजकों के अनुसार, गौरैया थीम चुनने के पीछे एक गहरा सामाजिक और पर्यावरणीय मकसद छिपा है। एक समय था जब यह नन्हीं चिड़िया हर घर, आंगन, बरामदे और छत पर आम तौर पर फुदकती नजर आती थी। बदलते पर्यावरण, शहरीकरण और विभिन्न मानवीय कारणों से अब कई शहरी और ग्रामीण इलाकों में गौरैया की तादाद काफी कम हो गई है। लोगों का ध्यान इस लुप्तप्राय स्थिति की तरफ खींचने के लिए समिति ने इसे मुख्य विषय बनाया, ताकि श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन के साथ प्रकृति और पक्षी संरक्षण का संकल्प लेकर लौटें। 1985 से जारी है बच्चों की समिति का यह रचनात्मक सफर भीखना पहाड़ी की इस जगह पर दुर्गा पूजा का आयोजन कोई नया नहीं है, बल्कि यहां वर्ष 1985 से लगातार पूजनोत्सव हो रहा है। करीब चार दशकों से यह स्थान स्थानीय निवासियों की आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है। इस पूरे आयोजन की सबसे रोचक बात यह है कि इसका प्रबंधन श्री श्री भारत माता पूजा समिति की बाल मंडली संस्था करती है, जिसमें मुख्य रूप से बच्चे और किशोर जुड़े हुए हैं। बाल मंडली के सदस्य आरव राज ने इस अनूठे प्रयास की जानकारी देते हुए बताया कि उनकी समिति हर साल एक नई और अलग थीम के जरिए श्रद्धालुओं के सामने कुछ नया पेश करने की कोशिश करती है। रिंग लाइट से लेकर पत्तों और जंगल की पुरानी थीम इस पूजा स्थल की परंपरा हमेशा से लीक से हटकर सोचने की रही है। पिछले वर्षों के आयोजनों पर नजर डालें तो बीते साल यहां आधुनिक रिंग लाइट पर आधारित भव्य थीम रखी गई थी। उससे पिछले साल प्राकृतिक पत्तों की कलाकारी से पंडाल को सजाया गया था, जबकि उससे पूर्व जंगल की थीम पर आधारित संरचना तैयार की गई थी। इस बार गौरैया को केंद्र में रखकर बनाई गई यह कलाकृति श्रद्धालुओं को अपनी पुरानी यादों से जोड़ने के साथ साथ प्रकृति के प्रति संवेदनशील भी बना रही है। जो भी श्रद्धालु इस अनूठे पंडाल को देखना चाहते हैं, वे भीखना पहाड़ी की कचहरी गली पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन और इस पर्यावरण संदेश के साक्षी बन सकते हैं। इसका आप पर असर यह अनोखा पंडाल त्योहार की रौनक के साथ नागरिकों को घटते पक्षियों के प्रति संवेदनशील बनाने और उनके संरक्षण के लिए प्रेरित करता है। • पटना में: भीखना पहाड़ी स्थित कचहरी गली में आने वाले श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन के साथ इस विशेष घोंसला पंडाल की कलाकृति देख सकते हैं। संकरी गली में होने के कारण शाम और रात के समय भीड़ को देखते हुए पहले से योजना बनाकर जाएं। • बिहार में: राज्य के राजकीय पक्षी गौरैया की घटती आबादी की तरफ लोगों का ध्यान खींचकर यह संदेश दिया गया है कि लोग अपने घरों के आसपास दाना-पानी रखें। इससे नागरिकों में पक्षियों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने की प्रेरणा मिलती है। • त्योहार के खर्च और कला: बच्चों की इस मंडली ने महंगे और भारी निर्माण के बजाय पर्यावरण अनुकूल थीम और स्थानीय कला का इस्तेमाल करके पंडाल तैयार किया है। यह अन्य पूजा समितियों के लिए भी रचनात्मकता और कम लागत का एक अच्छा उदाहरण है। • पर्यावरण जागरूकता: पंडाल में पत्तियों, टहनियों और कृत्रिम पक्षियों का प्रयोग यह सिखाता है कि उत्सव के जरिए भी सामाजिक संदेश दिया जा सकता है। आने वाली पीढ़ी को घरेलू पक्षियों के पारिस्थितिकी महत्व के बारे में जानने का अवसर मिलता है। ऐसा क्यों हुआ इस अनूठी सजावट का फैसला शहरी परिवेश से तेजी से लुप्त हो रही गौरैया की घटती संख्या को उजागर करने के लिए लिया गया है। • गौरैया थीम चुनने का मुख्य कारण: आधुनिक पक्के मकानों, घटती हरियाली और बदलते पर्यावरण के कारण घरों के आंगनों में फुदकने वाली गौरैया कई मोहल्लों से गायब हो चुकी है। आयोजक चाहते थे कि त्योहार के बड़े मंच के जरिए लोग इस पक्षी के संरक्षण के बारे में गंभीरता से सोचें। • बाल मंडली की रचनात्मक सोच: पूजा का जिम्मा संभालने वाली बाल मंडली हर साल एक नए विषय पर काम करती है ताकि स्थानीय लोगों को नया अनुभव मिले। इस बार उन्होंने तकनीकी या बनावटी चमक-दमक के बजाय प्राकृतिक स्वरूप और राजकीय पक्षी को केंद्र में रखा। • वर्षों से चली आ रही परंपरा: 1985 से आयोजित हो रही इस पूजा में पहले भी पत्तों, जंगल और आधुनिक रिंग लाइट जैसी अलग-अलग थीम अपनाई जा चुकी हैं। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस साल 1000 कृत्रिम घोंसलों और चिड़ियों के जरिए यह नवाचार किया गया। सवाल-जवाब 1. पटना में यह घोंसला नुमा अनोखा पंडाल कहां स्थित है? यह पंडाल पटना के भीखना पहाड़ी स्थित कचहरी गली में तैयार किया गया है। 2. इस पंडाल को सजाने के लिए किन चीजों का इस्तेमाल किया गया है? पंडाल को सजाने के लिए लगभग 1000 कृत्रिम घोंसले, 1000 कृत्रिम गौरैया, पत्तियां और टहनियां लगाई गई हैं। 3. इस वर्ष पंडाल की थीम किस पक्षी पर आधारित है? इस वर्ष पंडाल की थीम बिहार के राजकीय पक्षी गौरैया के संरक्षण पर आधारित है। 4. इस पूजा पंडाल का आयोजन कौन सी समिति करती है? इसका आयोजन श्री श्री भारत माता पूजा समिति की बाल मंडली संस्था द्वारा किया जाता है। 5. भीखना पहाड़ी में इस दुर्गा पूजा का आयोजन किस वर्ष से हो रहा है? यहां वर्ष 1985 से लगातार दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। 6. पिछले वर्षों में इस पंडाल की कौन-कौन सी थीम रही हैं? पिछले वर्ष रिंग लाइट थीम थी, जबकि उससे पहले पत्तों से और उससे भी पहले जंगल की थीम पर पंडाल सजाया गया था। https://trendkia.com/national/bihar-ke-rajakiya-pakshi-ko-samarpita-patna-ka-anutha-pndala-1000-kritrima-gauraiya-aura-ghonsalon-ke-bicha-hoga-man-durga-ka-puja-47705 TrendKia — Har trend, sabse pehle.