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  "title": "बीस गांवों को जोड़ने वाली मऊ जिले के चिरैयाकोट क्षेत्र की सड़क पर एक दशक से जलजमाव, रोज हो रहे हादसे",
  "summary": "मऊ जिले के चिरैयाकोट में बीस गांवों को जोड़ने वाली सड़क पर करीब 10 साल से जल जमाव बना हुआ है, गड्ढों की वजह से यहां रोज लोग गिरकर घायल हो रहे हैं।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में चिरैयाकोट क्षेत्र की एक सड़क पिछले करीब 10 साल से इस कदर टूटी हुई है कि उस पर चलना अब हर दिन का खतरा बन गया है। यह सड़क करीब 20 गांवों को आपस में जोड़ती है, लेकिन जगह-जगह जमा पानी और गहरे गड्ढों की वजह से लोग रोज गिरकर चोटिल हो रहे हैं। बार-बार शिकायत के बावजूद अब तक इसकी मरम्मत नहीं हुई है।\n\nजिले का आखिरी गांव, इसलिए नेताओं की नजर नहीं\nग्रामीण मोहम्मद हाशिम बताते हैं कि यह गांव मऊ जिले की मोहम्मदाबाद गोहना विधानसभा का सबसे आखिरी गांव है और यहीं से गाजीपुर और आजमगढ़ जिलों की सीमा शुरू होती है। तीन जिलों को जोड़ने वाली यह सड़क करीब 20 गांवों के लोगों के आने-जाने का मुख्य जरिया है, लेकिन हालत यह है कि हर दिन कोई न कोई इस सड़क पर गिरकर घायल हो जाता है। जिले के आखिरी छोर पर बसा होने की वजह से इस गांव में आमतौर पर कोई नेता या जनप्रतिनिधि झांकने तक नहीं आता।\n\nहाशिम के मुताबिक चुनाव के वक्त तस्वीर बदल जाती है। हर पार्टी के बड़े नेता गांव पहुंचते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं और वोट लेकर लौट जाते हैं, लेकिन इसके बाद गांव के विकास की सुध कोई नहीं लेता। यही वजह है कि साल दर साल सड़क टूटी ही रह जाती है। सिर्फ 2 किलोमीटर का यह रास्ता तय करने में ग्रामीणों को 2 घंटे से ज्यादा वक्त लगता है, और बरसात के मौसम में यही टूटी-फूटी सड़क पानी से लबालब भरकर और खतरनाक हो जाती है।\n\nऊंचा बना नाला और सड़क पर भरता पानी\nसेराज शाह के अनुसार गांव की सबसे बड़ी दिक्कत सड़क और नाले को लेकर है। नाले का पानी सीधे सड़क पर बहता है, जिससे वहां हमेशा जल जमाव बना रहता है। उनका कहना है कि सिर्फ बारिश का पानी ही इस जल जमाव की वजह नहीं है, बल्कि नाला भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है। नाला तो बनवाया गया, लेकिन इतनी ऊंचाई पर बनाया गया कि बरसात का पानी उसमें से निकल ही नहीं पाता और नतीजतन वह पानी सड़क पर ही जमा रह जाता है।\n\nइसी लगातार जल जमाव के चलते सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिनके बीच से होकर ही अब ग्रामीणों को गुजरना पड़ता है। शाह कहते हैं कि इस सड़क पर हर दिन कोई न कोई हादसा हो रहा है, लेकिन कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे। उनका कहना है कि गांव के लिए यह सड़क अब सिरदर्द बन चुकी है और अगर इसकी मरम्मत हो जाए और जल जमाव की समस्या खत्म हो जाए, तो गांव की सबसे बड़ी परेशानी अपने आप दूर हो जाएगी।\n\nनाला पूरी तरह जाम, सफाई कर्मी भी नहीं आते\nइकबाल सुलेमानी बताते हैं कि गांव की असली समस्या नाले और सड़क को लेकर ही है। सड़क पर पानी भरने की मुख्य वजह यह है कि नाला पूरी तरह जाम हो चुका है। उनके मुताबिक गांव में सफाई कर्मी आते ही नहीं, जिसकी वजह से नाले की सफाई कभी हो ही नहीं पाती और उसका गंदा पानी बहकर सड़क पर ही आ जाता है। जैसे ही बारिश होती है, यह समस्या और बढ़ जाती है और पूरी सड़क जल जमाव में तब्दील हो जाती है।\n\nसुलेमानी बताते हैं कि इसी वजह से सड़क पर बने गड्ढों में लोग गिरकर चोटिल हो जाते हैं, क्योंकि पानी भरा होने से यह पता ही नहीं चलता कि कौन सा गड्ढा कितना बड़ा और कितना गहरा है। यही वजह है कि इस सड़क पर हर दिन कोई न कोई दुर्घटना हो रही है।\n\nबीमार पड़ने पर अस्पताल पहुंचना भी मुश्किल\nरामलाल श्रीवास्तव और राज गुप्ता का कहना है कि अगर गांव में किसी की तबीयत अचानक बिगड़ जाए और उसे जल्दी अस्पताल पहुंचाना हो, तो यह सड़क वहां तक वक्त पर पहुंचने ही नहीं देती। हल्की सी बारिश होते ही सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढे पानी से भर जाते हैं और महज 2 किलोमीटर की दूरी तय करने में भी 2 घंटे से ज्यादा वक्त लग जाता है।\n\nउनके मुताबिक इन गहरे गड्ढों में हर दिन गाड़ियां फिसल जाती हैं और लोग गिरकर घायल होते हैं। दोनों ग्रामीणों की मांग है कि इस सड़क की जल्द से जल्द मरम्मत कराई जाए, ताकि ग्रामीणों की सबसे बड़ी मुसीबत खत्म हो सके। गाजीपुर और मऊ जिलों को जोड़ने वाली यह मुख्य सड़क है, जिस पर करीब 20 गांवों के लोग रोज आते-जाते हैं, लेकिन गड्ढों में तब्दील हो चुकी इस सड़क की वजह से उन्हें हर दिन भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।\n\nइसका आप पर असर\nइस सड़क की हालत सीधे तौर पर वहां रहने वाले हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, सेहत और सुरक्षा पर असर डाल रही है।\n\n• भारत में: देश के कई ग्रामीण इलाकों में सड़क और जल निकासी योजनाओं का यही हाल है, जहां निर्माण तो होता है लेकिन तकनीकी खामियों की वजह से समस्या हल होने की बजाय बढ़ जाती है। ऐसे मामलों को स्थानीय प्रशासन तक पहुंचाना और लगातार फॉलोअप करना ही मरम्मत करवाने का सबसे कारगर तरीका है।\n• मऊ और चिरैयाकोट में: गाजीपुर, आजमगढ़ और मऊ जिलों को जोड़ने वाली इस सड़क पर रोज सफर करने वाले करीब 20 गांवों के लोगों को अभी भी गड्ढों और जल जमाव के बीच से गुजरना होगा। बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने में देरी हो सकती है, इसलिए मरम्मत होने तक बारिश के मौसम में इस रास्ते पर धीमी गति और सावधानी बरतना जरूरी है।\n• सुरक्षा पर असर: गड्ढों में पानी भरे होने से गहराई का अंदाजा नहीं लगता, जिससे दोपहिया वाहन फिसलने और गिरने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। रात के समय या तेज बारिश में इस सड़क से गुजरने से बचना ही बेहतर होगा।\n• बच्चों और बुजुर्गों पर असर: स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह सड़क रोज गिरने और चोटिल होने का खतरा बनी रहती है, इसलिए परिवारों को उनके आने-जाने के समय अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nग्रामीणों के मुताबिक इस सड़क की बदहाली की जड़ में दो बातें हैं, एक तकनीकी खामी और दूसरी प्रशासनिक अनदेखी।\n\n• ऊंचाई पर बना नाला: सेराज शाह के अनुसार सड़क किनारे बना नाला जरूरत से ज्यादा ऊंचाई पर बनाया गया, जिससे बारिश का पानी उसमें बह ही नहीं पाता और सड़क पर ही जमा रह जाता है।\n• नाले का पूरी तरह जाम होना: इकबाल सुलेमानी के मुताबिक गांव में सफाई कर्मी नहीं आते, जिससे नाले की सफाई कभी होती ही नहीं और वह पूरी तरह जाम हो चुका है, इसी वजह से उसका पानी सड़क पर बहता रहता है।\n• राजनीतिक उपेक्षा: मोहम्मद हाशिम के मुताबिक यह गांव जिले का आखिरी छोर होने की वजह से आम दिनों में किसी नेता या अधिकारी की नजर में नहीं आता, सिर्फ चुनाव के समय ही नेता यहां पहुंचते हैं।\n• बार-बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं: ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक न सड़क की मरम्मत हुई और न ही नाले की सफाई करवाई गई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यह सड़क कहां स्थित है?\nयह सड़क उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के चिरैयाकोट क्षेत्र में है और गाजीपुर व आजमगढ़ जिलों की सीमा पर स्थित है।\n\n2. यह सड़क कितने गांवों को जोड़ती है?\nयह सड़क करीब 20 गांवों के लोगों के आने-जाने का मुख्य जरिया है।\n\n3. सड़क कब से खराब है?\nग्रामीणों के मुताबिक यह सड़क करीब 10 साल से टूटी हुई है।\n\n4. सड़क पर जल जमाव की मुख्य वजह क्या है?\nसड़क किनारे का नाला जरूरत से ज्यादा ऊंचाई पर बना है और पूरी तरह जाम भी है, जिससे बारिश और नाले का पानी सड़क पर ही जमा रहता है।\n\n5. 2 किलोमीटर का सफर तय करने में कितना समय लगता है?\nग्रामीणों के मुताबिक बारिश के बाद इस सड़क पर 2 किलोमीटर की दूरी तय करने में 2 घंटे से ज्यादा समय लग जाता है।\n\n6. ग्रामीणों की मुख्य मांग क्या है?\nग्रामीण चाहते हैं कि सड़क की जल्द मरम्मत हो और जल जमाव की समस्या स्थायी रूप से खत्म की जाए।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-09-08",
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    "चिरैयाकोट",
    "सड़क दुर्घटना",
    "जल जमाव",
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    "मोहम्मदाबाद गोहना"
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