बोइंग 737 मैक्स 8 के कॉकपिट दरवाजे का सुरक्षा तंत्र और पायलट के सामने आने वाली तकनीकी चुनौतियां फ्लाईदुबई उड़ान में 174 यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी घटना के बाद कॉकपिट डोर अनलॉक बटन की स्थिति और सुरक्षा प्रोटोकॉल चर्चा में हैं। विमान में बाहर से कोड डालने पर भी दरवाजा बिना पायलट की अनुमति के नहीं खुल सकता। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में सवार 174 यात्रियों को सुरक्षित बचाए जाने के बाद विमानन सुरक्षा और कॉकपिट नियंत्रण प्रणाली को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर के त्वरित निर्णय और साहस से यह विमान किसी गंभीर अनहोनी से बच सका। इस घटनाक्रम के तीन दिन बाद भी विमानन विशेषज्ञों और आम लोगों के बीच कॉकपिट दरवाजे के संचालन, सुरक्षा तालों और आपात स्थिति में पायलट की पहुंच से जुड़े तकनीकी पहलुओं को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा रही है। विशेषकर यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है कि बोइंग 737 मैक्स 8 जैसे आधुनिक विमानों में दरवाजा अनलॉक करने का स्विच वास्तव में कहां स्थित होता है और संकट के समय उस तक पहुंचना कितना जटिल साबित हो सकता है। कॉकपिट में नियंत्रण प्रणालियों की स्थिति और डुअल मोड व्यवस्था बोइंग 737 मैक्स 8 अथवा समकालीन वाणिज्यिक विमानों के कॉकपिट की बनावट सुरक्षा और सहूलियत के कड़े मानकों पर आधारित होती है। कॉकपिट के भीतर मौजूद लगभग सभी महत्वपूर्ण प्रणालियां डुअल मोड पर काम करती हैं। इस व्यवस्था का सीधा अर्थ यह है कि विमान के प्राथमिक नियंत्रक उपकरणों को मुख्य कैप्टन और को-पायलट दोनों अपनी-अपनी सीटों से समान रूप से संचालित कर सकते हैं। विमानन मानकों के अनुसार, यदि कोई विशिष्ट स्विच, नॉब या बटन डुअल स्वरूप में नहीं बनाया गया है, तो उसे कॉकपिट में बिल्कुल केंद्रीय स्थान पर लगाया जाता है ताकि आपातकाल में दोनों में से कोई भी पायलट उस तक बिना किसी रुकावट के पहुंच सके। जहां तक कॉकपिट के मुख्य प्रवेश द्वार को खोलने या बंद करने वाले स्विच की बात है, तो बोइंग 737 मैक्स 8 विमान में यह बटन सेंट्रल कंट्रोल पैनल पर स्थित होता है। यह थ्रस्ट लीवर के ठीक पास और को-पायलट की दिशा की ओर लगा होता है। इस विशेष स्थिति के कारण को-पायलट इसे बहुत आसानी से नियंत्रित कर सकता है, जबकि जरूरत पड़ने पर मुख्य कैप्टन भी अपने स्थान से हाथ बढ़ाकर इस बटन का इस्तेमाल कर सकते हैं। कंट्रोल पैनल पर मौजूद तीन प्रमुख सुरक्षा बटन और उनका कार्य बोइंग 737 मैक्स 8 सहित अन्य आधुनिक विमानों के सेंट्रल कंट्रोल पैनल में कॉकपिट सुरक्षा द्वार के नियमन के लिए मुख्य रूप से तीन अलग-अलग बटन दिए जाते हैं। पहला बटन लॉक करने के लिए, दूसरा बटन अनलॉक करने के लिए और तीसरा विकल्प डिनाइड का होता है। इन तीनों विकल्पों का काम पूरी तरह से पूर्व-निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार बंटा हुआ है • लॉक बटन: सामान्य परिस्थितियों में इस बटन का उपयोग कॉकपिट के दरवाजे को सुरक्षित और बंद स्थिति में रखने के लिए किया जाता है। • अनलॉक बटन: जब केबिन क्रू का कोई सदस्य अंदर आने का अनुरोध करता है और पायलट संतुष्ट होते हैं, तब इस बटन को दबाकर दरवाजा खोला जाता है। • डिनाइड बटन: यदि कॉकपिट के बाहर से कोई दरवाजा खोलने का प्रयास करता है और पायलट को किसी भी प्रकार के खतरे या अनाधिकृत प्रवेश की आशंका होती है, तो वे तुरंत डिनाइड का बटन दबा देते हैं। इस विकल्प को सक्रिय करते ही दरवाजा पूरी तरह ब्लॉक हो जाता है, जिसके बाद कोई भी व्यक्ति न तो अंदर से और न ही बाहर से उसे खोल सकता है। यह तीनों सुरक्षा बटन सेंट्रल कंट्रोल पैनल में ऐसी जगह पर स्थापित रहते हैं जहां दोनों पायलटों की पहुंच एक समान बनी रहती है। केबिन की तरफ मौजूद एक्सेस पैनल और बाहरी कोड की सीमाएं यात्री केबिन की तरफ कॉकपिट प्रवेश द्वार के बाहर एक विशेष कॉकपिट डोर एक्सेस कंट्रोल पैनल लगा होता है। अक्सर यह माना जाता है कि आपात स्थिति में कोई भी व्यक्ति बाहर से गुप्त कोड डालकर सीधे कॉकपिट में दाखिल हो सकता है, लेकिन तकनीकी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। बाहर से सिर्फ कोड दर्ज कर देने भर से कॉकपिट का दरवाजा स्वतः नहीं खुलता। निर्धारित प्रक्रिया के तहत, जब भी उड़ान के दौरान किसी अधिकृत क्रू सदस्य को कॉकपिट के भीतर प्रवेश करना होता है, तो वह बाहर लगे पैनल पर सुरक्षा कोड दर्ज करता है। कोड के सही दर्ज होते ही कॉकपिट के भीतर पायलटों के सामने एक चेतावनी अलार्म बजता है। यह अलार्म पायलटों को सचेत करता है कि केबिन की तरफ से कोई अंदर आने का अनुरोध कर रहा है। सीसीटीवी कैमरे, इंटरकॉम और अंतिम निर्णय का अधिकार अलार्म बजने के बाद पायलट कॉकपिट के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरों की स्क्रीन पर देखते हैं कि दरवाजे के बाहर वास्तव में कौन खड़ा है। दृश्य सत्यापन के साथ-साथ पायलट इंटरकॉम प्रणाली के जरिए बाहर मौजूद व्यक्ति से सीधे बात भी कर सकते हैं। बातचीत और पहचान की पुष्टि होने के बाद ही पायलट आगे की कार्रवाई तय करते हैं। यदि पायलट को पूरा भरोसा हो जाता है कि बाहर खड़ा व्यक्ति अधिकृत क्रू सदस्य ही है, तो वे सेंट्रल पैनल पर मौजूद अनलॉक बटन दबाते हैं, जिससे दरवाजा खुल जाता है। इसके विपरीत, यदि किसी भी प्रकार का संदेह हो या बाहर खड़ा व्यक्ति अनाधिकृत प्रतीत हो, तो पायलट तुरंत डिनाइड बटन दबा देते हैं। डिनाइड का चयन होते ही दरवाजा पूरी तरह अभेद्य लॉक स्थिति में बना रहता है और बाहरी प्रयास निष्फल हो जाते हैं। दोनों पायलटों के पास साझा नियंत्रण की व्यवस्था इस पूरे सुरक्षा तंत्र से यह स्पष्ट होता है कि विमान के कॉकपिट दरवाजे को खोलने या बंद रखने का अंतिम और पूर्ण नियंत्रण केवल और केवल पायलटों के हाथ में होता है। यह व्यवस्था किसी एक पायलट के एकाधिकार में नहीं होती, बल्कि कैप्टन और को-पायलट दोनों को समान नियंत्रण अधिकार प्रदान करती है। संकट के पलों में दोनों पायलट स्थिति का आकलन करके पूरी सहूलियत के साथ इस प्रणाली का संचालन कर सकते हैं, जिससे उड़ान और उसमें बैठे यात्रियों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाती है। इसका आप पर असर वाणिज्यिक उड़ानों में कॉकपिट सुरक्षा प्रणालियों की तकनीकी समझ यात्रियों को हवाई यात्रा के दौरान मिलने वाली बहुस्तरीय सुरक्षा का ठोस भरोसा देती है। • हवाई सुरक्षा का स्तर: किसी भी स्थिति में अनाधिकृत व्यक्ति गुप्त कोड चुराकर भी कॉकपिट में दाखिल नहीं हो सकता। इससे अपहरण या अनपेक्षित घुसपैठ की आशंका पूरी तरह समाप्त हो जाती है। • यात्रियों के लिए भरोसा: जब तक अंदर बैठे दोनों पायलट पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते, दरवाजा नहीं खुलता। यह व्यवस्था यात्रा के दौरान प्रत्येक यात्री की व्यक्तिगत सुरक्षा को मजबूत करती है। • क्रू की भूमिका: आपात स्थिति में केबिन क्रू केवल इंटरकॉम और कोड द्वारा संपर्क साध सकता है। अंतिम नियंत्रण हमेशा कॉकपिट में मौजूद प्रशिक्षित पायलटों के हाथ में ही रहता है। • आपातकालीन प्रक्रिया: यदि कोई अनहोनी होती है, तो पायलट एक बटन से दरवाजे को पूरी तरह ब्लॉक कर सकते हैं। बाहरी दबाव या जबरदस्ती से इसे खोलना असंभव बना दिया गया है। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में उपजी अप्रत्याशित परिस्थिति के बाद सामने आया, जहां कैप्टन स्मित मच्छर के त्वरित हस्तक्षेप से 174 यात्रियों की जान बचाई जा सकी। इसके बाद लोगों के मन में यह सवाल उठा कि संकट के समय कॉकपिट का दरवाजा कैसे और कहां से संचालित होता है। • कठोर विमानन मानक: वैश्विक विमानन नियमों के तहत कॉकपिट दरवाजे को पूरी तरह अभेद्य और दोनों पायलटों के साझा नियंत्रण में बनाया जाता है। इसी कारण स्विच को केंद्रीय कंसोल पर रखा जाता है। • बाहरी घुसपैठ से बचाव: 9/11 की घटनाओं के बाद दुनिया भर के वाणिज्यिक विमानों में बाहरी कोड से सीधे खुलने वाले दरवाजों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसी वजह से केवल कोड डालने से दरवाजा नहीं खुलता। • पायलटों की दोहरी सुरक्षा: आपात स्थिति में यदि एक पायलट असमर्थ हो जाए, तो दूसरा पायलट सेंट्रल पैनल से नियंत्रण कर सके, इसलिए स्विच की स्थिति थ्रस्ट लीवर के पास रखी जाती है। सवाल-जवाब 1. बोइंग 737 मैक्स 8 में कॉकपिट दरवाजा अनलॉक करने का बटन कहां लगा होता है? यह बटन कॉकपिट के सेंट्रल कंट्रोल पैनल में थ्रस्ट लीवर के पास को-पायलट की तरफ स्थित होता है, जिसे दोनों पायलट इस्तेमाल कर सकते हैं। 2. कॉकपिट दरवाजे के लिए कंट्रोल पैनल में कौन से तीन मुख्य बटन होते हैं? कंट्रोल पैनल में लॉक, अनलॉक और डिनाइड नाम के तीन सुरक्षा बटन मौजूद होते हैं। 3. क्या केबिन क्रू बाहर लगे पैनल पर कोड डालकर सीधे दरवाजा खोल सकता है? नहीं, बाहर से कोड डालने पर केवल कॉकपिट के भीतर अलार्म बजता है, दरवाजा पायलट द्वारा अनलॉक बटन दबाने पर ही खुलता है। 4. पायलट बाहर खड़े व्यक्ति की पहचान कैसे सुनिश्चित करते हैं? पायलट कॉकपिट में लगी सीसीटीवी स्क्रीन पर बाहर का दृश्य देखकर और इंटरकॉम से बात करके पहचान सत्यापित करते हैं। 5. डिनाइड बटन दबाने पर क्या होता है? डिनाइड बटन दबाते ही कॉकपिट का दरवाजा पूरी तरह लॉक हो जाता है और उसे अंदर या बाहर किसी भी तरफ से नहीं खोला जा सकता। 6. फ्लाईदुबई की इस उड़ान में कितने यात्री सवार थे? फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में कुल 174 यात्री सवार थे। https://trendkia.com/national/boeing-737-max-8-ke-kokapita-daravaje-ka-suraksha-tntra-aura-payalata-ke-samane-ane-vali-takaniki-chunautiyan-42783 TrendKia — Har trend, sabse pehle.