# ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: बिहार का सत्तू-मखाना, ओडिशा की कोरापुट कॉफी और गुजरात के हस्तशिल्प से महकेगा दिल्ली का भारत मंडपम

> नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में विदेशी पत्रकारों को दिए जाने वाले मीडिया किट में बिहार के सत्तू और मखाने, ओडिशा की कोरापुट कॉफी और गुजरात के ब्लॉक-प्रिंटेड स्टोल को शामिल किया गया है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/brics-shikhara-sammelana-2026-bihar-ka-sattu-makhana-odisha-ki-koraput-kophi-aura-gujarat-ke-hastashilpa-se-mahakega-delhi-ka-bhar-31374 · **Language:** Hindi
**Tags:** ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026, भारत मंडपम, बिहार सत्तू, बिहार मखाना, कोरापुट कॉफी, गुजरात हस्तशिल्प, सांस्कृतिक कूटनीति

नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में 12 सितंबर 2026 से बहुप्रतीक्षित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन शुरू होने जा रहा है। इस भव्य अंतरराष्ट्रीय आयोजन में दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के शीर्ष नेता वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने और समावेशी व सतत आर्थिक विकास के मुद्दों पर गंभीर चर्चा करने के लिए एकजुट हो रहे हैं। लेकिन इस उच्च-स्तरीय कूटनीतिक संवाद और नीतिगत बैठकों के बीच, यह वैश्विक सम्मेलन भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध क्षेत्रीय व्यंजनों को प्रदर्शित करने का एक शानदार मंच भी बन रहा है। सम्मेलन में शामिल होने वाले देश-विदेश के पत्रकारों को दिए जाने वाले विशेष मीडिया किट को इस तरह तैयार किया गया है जो भारत के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक खान-पान, पेय पदार्थों और बेहतरीन हस्तशिल्प की एक अनूठी कहानी बयां करता है।

## संगम की अनूठी अवधारणा से जुड़ा वैश्विक भाईचारा
इस सम्मेलन में विविधता में एकता और सहयोग की भावना को उजागर करने के लिए विशेष कलाकृतियों का सहारा लिया गया है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस अवसर के लिए तैयार की गई कलाकृतियां भारतीय अवधारणा 'संगम' से प्रेरित हैं, जहां अलग-अलग दिशाओं से आने वाली नदियां एक साथ मिलकर बहती हैं। रणधीर जायसवाल ने कहा, "यह कलाकृति ब्रिक्स देशों के कलाकारों और संस्कृतियों को दोस्ती और विविधता में एकता के उत्सव में एक साथ लाती है।" यह रचनात्मक पहल वर्ष 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के मुख्य विषयों को दर्शाती है, जिनमें लचीलापन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता शामिल हैं। इस कलाकृति के माध्यम से भारत का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच साझेदारी की भावना को और मजबूत करना है, जिससे यह दिखाया जा सके कि कैसे अलग-अलग रास्ते एक साझा वैश्विक लक्ष्य की ओर बढ़ सकते हैं।

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## वैश्विक मंच पर चमकेगा बिहार का पारंपरिक सत्तू और मखाना
इस स्वागत किट के सबसे प्रमुख आकर्षणों में बिहार के पारंपरिक खाद्य उत्पाद शामिल हैं, जो लंबे समय से अपनी पौष्टिकता और क्षेत्रीय पहचान के लिए जाने जाते हैं। ब्रिक्स सम्मेलन को कवर करने आ रहे देश-विदेश के पत्रकारों को मिलने वाले वेलकम किट में बिहार का प्रसिद्ध सत्तू और मखाना शामिल किया गया है। सत्तू एक अत्यधिक पौष्टिक और प्रोटीन से भरपूर आटा है, जिसे भुने हुए चने, जौ या विभिन्न अनाजों और दालों को मिलाकर पत्थर की चक्की पर पीसकर तैयार किया जाता है। बिहार के खान-पान में सत्तू का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है, जिसे रोजमर्रा के भोजन के साथ-साथ विशेष उत्सवों पर भी बड़े चाव से खाया जाता है। इसके साथ ही, इस किट में मखाना भी शामिल है, जिसे फॉक्स नट्स या कमल के बीज भी कहा जाता है। मखाने के उत्पादन में बिहार का दुनिया भर में दबदबा है, क्योंकि दुनिया के कुल मखाना उत्पादन का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा अकेले बिहार से आता है।

बिहार के इन पारंपरिक व्यंजनों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर जगह मिलने से राज्य के नेताओं में भारी उत्साह है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने 'लोकल टू ग्लोबल' के संकल्प को जमीन पर उतारा है। सम्राट चौधरी ने कहा, "दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की स्वागत किट में शामिल सत्तू और मखाना हमारे स्वाद, परंपरा और उद्यमशीलता के प्रतीक हैं।" उन्होंने कहा कि यह नए बिहार की एक नई पहचान है और अब बिहार के अनोखे स्वाद दुनिया के सामने आ रहे हैं। इसके साथ ही, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद संजय कुमार झा ने भी इस कदम की सराहना की। संजय कुमार झा ने कहा, "दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन में पत्रकारों के लिए उपहार हैम्पर्स में हमारे सुपरफूड सत्तू के साथ बिहार के मखाने को देखना सुखद है।" उन्होंने इसे किसानों के प्रति एक बेहतरीन सम्मान बताते हुए कहा कि बिहार के खेतों से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुंचे सत्तू और मखाने हमारे राज्य की समृद्ध विरासत को दुनिया के सामने पेश कर रहे हैं।

## ओडिशा की प्रीमियम कोरापुट कॉफी की खुशबू
खान-पान के पारंपरिक सामानों के अलावा, मीडिया किट में देश के पूर्वी हिस्से से आने वाले एक बेहतरीन पेय पदार्थ को भी स्थान दिया गया है। सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले पत्रकारों को ओडिशा के कोरापुट क्षेत्र की प्रामाणिक और खुशबूदार कॉफी का स्वाद लेने का अवसर मिलेगा। यह प्रीमियम कॉफी पाउडर पूर्वी घाट की खूबसूरत पहाड़ियों में 3,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर उगाया जाता है। इसे स्थानीय आदिवासी किसानों द्वारा पूरी तरह से छाया में उगाए गए 100 प्रतिशत अरेबिका बीन्स से तैयार किया जाता है। कॉफी की शुद्धता बनाए रखने के लिए इन बीन्स को हल्के से मध्यम स्तर तक भूना जाता है और इसे बिना किसी चिकोरी के फिल्टर-रेडी स्वरूप में तैयार किया जाता है। इस बेहतरीन सिंगल-ओरिजिन कॉफी की महक को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए विदेश मंत्रालय ने ओडिशा सरकार के साथ साझेदारी की है, जिससे कोरापुट क्षेत्र के कॉफी उद्योग को एक बड़ी पहचान मिल सके।

## गुजरात के पारंपरिक हस्तशिल्प और ब्लॉक-प्रिंटेड दुपट्टे
इस मीडिया किट में केवल खाद्य सामग्री ही नहीं, बल्कि भारतीय शिल्प कौशल की बेहतरीन झलक भी देखने को मिलेगी। पत्रकारों को उपहार के रूप में गुजरात का प्रसिद्ध ब्लॉक-प्रिंटेड दुपट्टा दिया जाएगा। यह दुपट्टा गुजरात के स्थानीय शिल्पकारों की अद्भुत कलात्मकता और मेहनत को दर्शाता है, जो लकड़ी के हाथ से नक्काशीदार ब्लॉकों का उपयोग करके कपड़ों पर खूबसूरत डिजाइन बनाते हैं। विदेश मंत्रालय के जनसंपर्क विभाग के ओएसडी वासुदेव रवि ने इस सांस्कृतिक पहल की सराहना की। वासुदेव रवि ने कहा, "यह हमारे लिए भारत की कहानी को प्रदर्शित करने और मीडिया के अपने सहयोगियों के सामने पहलुओं को उजागर करने का अवसर है।" उन्होंने बताया कि इसके लिए विदेश मंत्रालय ने तीन राज्यों की सरकारों के साथ साझेदारी की है, ताकि पारंपरिक खान-पान और स्थानीय कला को बढ़ावा दिया जा सके। वासुदेव रवि ने कहा कि गुजरात के समृद्ध हस्तशिल्प को ध्यान में रखते हुए ही इस खूबसूरत दुपट्टे को किट में शामिल करने का निर्णय लिया गया, ताकि विदेशी मेहमान भारत की कला का एक शानदार नमूना अपने साथ यादगार के तौर पर ले जा सकें।

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## 'लोकल टू ग्लोबल' दृष्टिकोण को बढ़ावा देने का कूटनीतिक प्रयास
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के मीडिया किट में देश के इन चुनिंदा क्षेत्रीय उत्पादों को शामिल करना भारत सरकार की उस दूरदर्शी सोच का हिस्सा है, जिसके तहत स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहचान दिलानी है। सत्तू, मखाना, कोरापुट कॉफी और गुजराती दुपट्टे जैसे उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखकर सरकार ग्रामीण किसानों, आदिवासी उत्पादकों और पारंपरिक कारीगरों को एक बड़ा बाजार देना चाहती है। इस तरह की सांस्कृतिक कूटनीति यह सुनिश्चित करती है कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन का लाभ केवल राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिले। इससे विदेशी पत्रकारों को सीधे भारत की कृषि और कलात्मक विविधता का अनुभव करने का अवसर मिलेगा, जो भविष्य में इन उत्पादों के निर्यात और अंतरराष्ट्रीय मांग को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।

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## इसका आप पर असर
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के मीडिया किट में क्षेत्रीय भारतीय उत्पादों का चयन सीधे तौर पर स्थानीय सूक्ष्म अर्थव्यवस्थाओं और पारंपरिक आजीविका की वैश्विक क्षमता को उजागर करता है।

- **देश भर में:** ग्रामीण किसानों और कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिलेगी। इससे स्वदेशी भारतीय उत्पादों के लिए नए निर्यात मार्ग खुलेंगे और बाजार में उनकी मांग बढ़ेगी।
- **बिहार में:** मखाना और सत्तू की खेती करने वाले स्थानीय किसानों को अपने कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलेगा। यह पहचान राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता के नए अवसरों को बढ़ावा देगी।
- **ओडिशा में:** कोरापुट क्षेत्र के आदिवासी कॉफी उत्पादकों को अपनी उच्च पर्वतीय अरेबिका कॉफी प्रदर्शित करने का एक प्रतिष्ठित मंच मिला है। इससे क्षेत्र के कॉफी उद्योग में निवेश बढ़ेगा और स्थानीय किसानों की आय में सुधार होगा।
- **गुजरात में:** हथकरघा बुनकरों और ब्लॉक-प्रिंटिंग कारीगरों को वैश्विक दर्शकों के सामने अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिला है। इससे पारंपरिक शिल्प कलाओं का संरक्षण होगा और हस्तशिल्प दुपट्टों की मांग बढ़ेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
इन क्षेत्रीय विशिष्टताओं को शामिल करना भारत सरकार द्वारा अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों को घरेलू आर्थिक लक्ष्यों के साथ जोड़ने का एक सोचा-समझा सांस्कृतिक कूटनीतिक प्रयास है।

- **रणनीतिक साझेदारी:** विदेश मंत्रालय ने बिहार, ओडिशा और गुजरात की राज्य सरकारों के साथ मिलकर भारत की खान-पान और शिल्प कौशल की विविधता का प्रतिनिधित्व करने वाले उत्पादों को चुना। यह दृष्टिकोण राजनीतिक शिखर सम्मेलन को क्षेत्रीय उपलब्धियों के प्रचार मंच में बदल देता है।
- **लोकल टू ग्लोबल को बढ़ावा:** यह चयन स्थानीय भारतीय सुपरफूड्स और अद्वितीय हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ले जाने के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है। इससे उन उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलती है जो आमतौर पर घरेलू खरीदारों पर निर्भर रहते हैं।
- **सतत प्रथाओं को उजागर करना:** आदिवासी किसानों द्वारा उगाए गए कोरापुट कॉफी और हाथ से बने गुजराती दुपट्टे जैसे उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल, समुदाय-संचालित और सतत उत्पादन के प्रति भारत के समर्पण को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 कब और कहां आयोजित किया जा रहा है?
यह शिखर सम्मेलन 12 सितंबर 2026 से नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है।

### 2. इस सम्मेलन में पत्रकारों को मिलने वाले मीडिया किट में किन राज्यों के उत्पादों को जगह मिली है?
इस मीडिया किट में बिहार के पारंपरिक व्यंजन, ओडिशा की प्रसिद्ध कॉफी और गुजरात के पारंपरिक हस्तशिल्प को शामिल किया गया है।

### 3. बिहार के कौन से विशेष उत्पाद स्वागत किट का हिस्सा हैं?
स्वागत किट में बिहार का पारंपरिक प्रोटीन युक्त सत्तू और प्रसिद्ध मखाना (कमल के बीज) शामिल हैं।

### 4. ओडिशा की कोरापुट कॉफी की क्या विशेषताएं हैं?
यह कॉफी 100 प्रतिशत छाया में उगाई जाने वाली अरेबिका बीन्स से बनी है, जिसे पूर्वी घाट में 3,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर आदिवासी किसानों द्वारा काटा जाता है। इसमें कोई चिकोरी नहीं मिलाई गई है।

### 5. गुजरात के हस्तशिल्प के रूप में मीडिया किट में क्या उपहार दिया गया है?
पत्रकारों को उपहार के रूप में गुजरात का पारंपरिक और विशिष्ट ब्लॉक-प्रिंटेड दुपट्टा (स्टोल) दिया गया है।

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