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  "title": "ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के रात्रिभोज में शाकाहारी भोजन पर घमासान, कांग्रेस के विरोध पर किरेन रिजिजू का करारा जवाब",
  "summary": "ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आधिकारिक रात्रिभोज में केवल शाकाहारी भोजन परोसे जाने पर कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाए, जिस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी आपत्ति जताई है।",
  "content": "भारत में आयोजित हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान विदेशी मेहमानों के लिए तैयार किए गए भोजन के मेन्यू को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। संसदीय कार्य मंत्री और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पार्टी पर इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के भोजन पर राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस आधिकारिक रात्रिभोज में केवल शाकाहारी भोजन परोसे जाने को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों के बाद यह विवाद गरमाया है।\n\nदरअसल, इस सियासी घमासान की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस से जुड़े कुछ नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस बात को लेकर आपत्ति जताई कि ब्रिक्स देशों के राष्ट्रध्यक्षों के सम्मान में आयोजित आधिकारिक भोज में केवल शाकाहारी व्यंजन ही क्यों शामिल किए गए। विपक्ष के इन नेताओं ने सवाल उठाया कि वैश्विक नेताओं की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखे बिना केवल एक ही तरह का भोजन परोसा जाना कितना सही है।\n\nकांग्रेस के सवालों पर किरेन रिजिजू का तीखा पलटवार\nविपक्ष के इन सवालों पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने देश के मेहमानों के सत्कार से जुड़े इस विषय पर राजनीति किए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए लिखा, \"मुझे यकीन नहीं हो रहा कि कांग्रेस पार्टी ब्रिक्स देशों के नेताओं को परोसे गए खाने के मेन्यू पर भी राजनीति कर रही है।\" उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी भोजन का पूरा आनंद लिया, जो अपने स्वाद और पोषण के लिए प्रसिद्ध है।\n\nकेंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय शाकाहारी भोजन में अद्भुत विविधता होती है और यह भारत की समृद्ध संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। उन्होंने बताया कि इस विशेष रात्रिभोज में परोसे गए व्यंजनों में देश के अलग-अलग क्षेत्रों की पाक कला और परंपराओं को शामिल किया गया था, जिसे अंतरराष्ट्रीय मेहमानों ने खूब सराहा। भोजन को लेकर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए उन्होंने इसे भारतीय आतिथ्य सत्कार का अपमान बताया।\n\nप्रधानमंत्री के नेतृत्व में ब्रिक्स 2026 की मेजबानी\nभारत इस साल इस प्रतिष्ठित वैश्विक मंच की मेजबानी कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के अवसर पर विदेशी अति-विशिष्ट अतिथियों के सम्मान में इस विशेष भोज का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए थे, जहां सभी ने शुद्ध भारतीय आतिथ्य का जीवंत अनुभव किया।\n\nरिजिजू ने अपने पोस्ट में गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी करने का शानदार अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन पूरी दुनिया के सामने भारत की विविधता और मेहमाननवाजी को प्रदर्शित करने का एक बेहतरीन जरिया है। सरकार का प्रयास था कि देश के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक शाकाहारी पकवानों के माध्यम से भारतीय खान-पान की विविधता को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया जा सके, लेकिन इस पर भी अब घरेलू राजनीति शुरू हो गई है।\n\nइसका आप पर असर\nइस विवाद से आम पाठकों और नागरिकों को देश की राजनीतिक संस्कृति और वैश्विक प्रतिनिधित्व के तरीकों को समझने का अवसर मिलता है।\n\n• सांस्कृतिक पहचान का प्रदर्शन: सरकारी स्तर पर पारंपरिक शाकाहारी भोजन को बढ़ावा देने से वैश्विक मंचों पर भारत की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी। इससे भारतीय जीवनशैली और शाकाहारी खान-पान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक स्वीकार्यता मिलेगी।\n• आतिथ्य और पर्यटन क्षेत्र पर प्रभाव: भारतीय व्यंजनों के इस प्रकार के वैश्विक प्रदर्शन से देश के खाद्य पर्यटन (फूड टूरिज्म) को नया बढ़ावा मिल सकता है। इससे पारंपरिक आतिथ्य उद्योग, स्थानीय रसोइयों और इस व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए भविष्य में नए अवसर पैदा होंगे।\n• कृषि उपज की मांग: शाकाहारी भोजन के प्रचार-प्रसार से देश के जैविक कृषि उत्पादों और मोटे अनाजों (मिलेट्स) के उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके परिणामस्वरूप ग्रामीण उत्पादकों और किसानों की फसलों की मांग और बाजार मूल्य में वृद्धि हो सकती है।\n• राजनीतिक ध्रुवीकरण की समझ: यह विवाद यह दर्शाता है कि कैसे हर छोटी-बड़ी चीज को राजनीतिक नजरिए से देखा जाता है। आम जनता के लिए यह समझने का मौका है कि किस तरह देश की छवि से जुड़े मुद्दों पर भी राजनीतिक मतभेद सामने आते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह विवाद मुख्य रूप से राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक मतभेदों और वैश्विक मंच पर भारत की छवि को प्रस्तुत करने की अलग-अलग सोच के कारण शुरू हुआ है।\n\n• मेन्यू चयन पर मतभेद: कांग्रेस से जुड़े कुछ नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय नेताओं के लिए केवल शाकाहारी भोजन परोसे जाने को एक सीमित सोच के रूप में देखा। उनका मानना था कि विदेशी मेहमानों की विविध प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर गैर-शाकाहारी विकल्प भी होने चाहिए थे।\n• सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का प्रतिनिधित्व: सत्तारूढ़ दल के लिए यह भोजन केवल एक मेन्यू नहीं, बल्कि भारत की विविध क्षेत्रीय विरासत और समृद्ध शाकाहारी संस्कृति को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का माध्यम था। सरकार ने इसे भारतीय आतिथ्य के एक गौरवशाली प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया।\n• आतिथ्य परंपरा की रक्षा: किरेन रिजिजू और सरकार के समर्थकों ने विपक्ष के इन सवालों को देश के मेहमाननवाजी के प्राचीन उसूलों पर प्रहार माना। उनका तर्क था कि ऐसे राष्ट्रीय और कूटनीतिक अवसरों पर घरेलू राजनीति से बचना चाहिए।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के रात्रिभोज को लेकर क्या विवाद हुआ?\nप्रधानमंत्री मोदी द्वारा ब्रिक्स नेताओं के लिए आयोजित विशेष रात्रिभोज में केवल शाकाहारी भोजन परोसा गया था, जिसे लेकर कांग्रेस से जुड़े कुछ नेताओं ने आपत्ति जताई और सोशल मीडिया पर सवाल खड़े किए।\n\n2. कांग्रेस के सवालों पर किरेन रिजिजू ने क्या प्रतिक्रिया दी?\nकेंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर खाने के मेन्यू पर ओछी राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि विदेशी मेहमानों ने स्वादिष्ट और पौष्टिक शाकाहारी भोजन का भरपूर आनंद लिया।\n\n3. इस रात्रिभोज में किस तरह का खाना परोसा गया था?\nरात्रिभोज में भारत के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक शाकाहारी पकवान परोसे गए थे, ताकि देश के खान-पान की विविधता और प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया जा सके।\n\n4. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के रात्रिभोज में कौन-कौन शामिल हुए थे?\nइस आधिकारिक रात्रिभोज में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुए थे।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-09-13",
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