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  "type": "article",
  "title": "चंडीगढ़ में भाजपा के 1984 सम्मेलन में कांग्रेस पर बरसे रविशंकर प्रसाद, नशा और नरसंहार को बताया पंजाब के गहरे जख्म",
  "summary": "चंडीगढ़ में आयोजित 'जख्म 84 दे' सम्मेलन में रविशंकर प्रसाद ने 1984 सिख विरोधी नरसंहार और नशे की समस्या को पंजाब के लिए दो बड़े नासूर बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से माफी की मांग की।",
  "content": "पंजाब के ऐतिहासिक और सामाजिक परिवेश में न्याय की मांग को लेकर चंडीगढ़ में 4 नवबंर को एक दिवसीय 'जख्म 84 दे' सम्मेलन का आयोजन किया गया। भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में 1984 के सिख विरोधी नरसंहार के पीड़ितों और उनके परिवारों ने बड़ी संख्या में शिरकत की। पूरे सभागार में उस समय एक भावुक और गंभीर वातावरण बन गया जब नरसंहार में अपनी जान गंवाने वाले हजारों निर्दोष लोगों की आत्मिक शांति और न्याय की निरंतर जारी लड़ाई की सफलता के लिए सामूहिक रूप से विशेष अरदास की गई।\n\nदर्दनाक इतिहास को बयां करती श्वेत-श्याम तस्वीरों की प्रदर्शनी\nसम्मेलन के औपचारिक विमर्श की शुरुआत से पहले आयोजन स्थल पर नवंबर 1984 की दिल दहला देने वाली घटनाओं पर केंद्रित एक विशेष चित्र प्रदर्शनी लगाई गई। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन पटना साहिब से सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता रविशंकर प्रसाद ने किया। इस दौरान पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों और प्रदेश प्रभारी सतीश पूनिया भी मुख्य रूप से मौजूद रहे।\n\nप्रदर्शनी में उस दौर की बर्बरता को दर्शाने वाले कई दुर्लभ और मार्मिक दृश्य शामिल थे। इनमें दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में आग के हवाले किए गए मकान, कनॉट प्लेस में पूरी तरह तबाह कर दिए गए व्यापारिक प्रतिष्ठान, अपने बचे-खुचे सामान के मलबे के साथ बेघर हुए असहाय परिवार और चलती बसों से जबरन नीचे खींचे जाने वाले सिखों की घटनाएं प्रमुखता से प्रदर्शित की गई थीं। इन ऐतिहासिक श्वेत-श्याम तस्वीरों ने वहां मौजूद सभी लोगों के जेहन में 1984 के खौफनाक मंजर की यादें पूरी तरह ताजा कर दीं।\n\nरविशंकर प्रसाद का कांग्रेस नेतृत्व पर सीधा हमला\nसम्मेलन के उद्घाटन सत्र में पीड़ित परिवारों के साथ मंच साझा करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आज पंजाब की आत्मा पर दो गहरे दाग हैं, जिनमें 1984 के जख्म और चिट्टे की पीड़ा शामिल है, और बिना निष्पक्ष तथा ठोस न्याय के ये जख्म कभी नहीं भर सकते। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पंजाब दौरों और उनकी पार्टी के राजनीतिक आयोजनों के समय पर कड़े सवाल खड़े किए।\n\nप्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस ने एक नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली की और आज पंजाब में राजनीतिक कार्यक्रम कर रही है, जो इन पुराने जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। उन्होंने 19 नवंबर 1984 को दिए गए राजीव गांधी के उस बहुचर्चित बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। प्रसाद के अनुसार, यह बयान हजारों निर्दोष सिखों की योजनाबद्ध हत्याओं को सही ठहराने की एक खुली राजनीतिक कोशिश थी।\n\nपूर्व मंत्री ने यह भी साझा किया कि जब वे अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री के पद पर कार्यरत थे, तब उन्होंने राजीव गांधी के उस भाषण के वीडियो साक्ष्य को सरकारी और सार्वजनिक अभिलेखों में दोबारा दर्ज कराया था, क्योंकि उस महत्वपूर्ण फुटेज को सार्वजनिक रिकॉर्ड से गायब करवा दिया गया था। प्रसाद ने सीधे राहुल गांधी से सवाल किया कि वे अपने पिता के उस ऐतिहासिक बयान पर क्या राय रखते हैं और गांधी परिवार ने इस भयानक नरसंहार के लिए देशवासियों से अब तक बिना शर्त और ईमानदारी से माफी क्यों नहीं मांगी है।\n\nचार दशकों की कानूनी अनदेखी और मौजूदा कार्रवाई\nकांग्रेस पार्टी पर पिछले चार दशकों से इस पूरे मामले को दबाने और भटकाने का आरोप लगाते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पुरानी सरकारों की कार्यशैली केवल मामलों को लटकाने, अटकाने और भटकाने की रही थी। उनके मुताबिक उस दौर में एक के बाद एक कई जांच आयोग तो बना दिए गए, लेकिन अपराधियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजने के लिए कभी भी राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई गई। यहां तक कि डॉ. मनमोहन सिंह के दस साल के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान भी प्रमुख अभियुक्तों को सजा दिलाने में विफलता ही हाथ लगी।\n\nप्रसाद ने आगे आरोप लगाया कि उस समय की सत्ता को 3,500 निर्दोष नागरिकों की नृशंस हत्या की तनिक भी परवाह नहीं थी, बल्कि पूरा सरकारी तंत्र अपनी ही पार्टी के तीन-चार प्रमुख नेताओं को कानूनी कार्रवाई से बचाने में लगा रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के पश्चात एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया और न्यायमूर्ति ढींगरा आयोग की सिफारिशों को कड़ाई से लागू किया गया। इन्हीं ठोस कदमों के चलते सज्जन कुमार जैसे रसूखदार आरोपियों को उम्रकैद और सख्त सजाएं मिल सकीं। इस संदर्भ में उन्होंने पीड़ितों की लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फूलका के अथक प्रयासों और योगदान की भी मुक्तकंठ से सराहना की।\n\nकेवल सिंह ढिल्लों और आर.पी. सिंह के विचार\nकार्यक्रम के दौरान पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने उपस्थित पीड़ित परिवारों के प्रति अपना गहरा सम्मान प्रकट किया। उन्होंने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि 1984 में राजीव गांधी द्वारा दिया गया बयान 42 साल बाद भी हर संवेदनशील इंसान को अंदर तक झकझोर देता है। ढिल्लों ने दो टूक शब्दों में कहा कि जो समुदाय अपना इतिहास भूल जाता है, वह अपने भविष्य को भी सुरक्षित नहीं रख पाता। पार्टी ने 1984 के अत्याचारों को न तो भुलाया है और न ही आने वाली पीढ़ियों को इसे भूलने देगी।\n\nढिल्लों ने राहुल गांधी की संगरूर रैलियों में न्याय की बात करने पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पंजाब की जागरूक जनता यह भली-भांति जानती है कि जिन लोगों ने इतने गहरे घाव दिए हैं, उनसे इंसाफ की उम्मीद करना बेमानी है। उन्होंने संकल्प दोहराया कि जब तक 1984 के इस नरसंहार से जुड़े आखिरी दोषी को कानून की चौखट तक नहीं पहुंचा दिया जाता, तब तक भाजपा चैन से नहीं बैठेगी।\n\nसम्मेलन का संचालन कर रहे भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने भी इस बात पर जोर दिया कि दशकों लंबे चले कानूनी संघर्ष के बाद अब जाकर अपराधियों को जवाबदेह ठहराने की ठोस दिशा में वास्तविक प्रगति हुई है। उन्होंने उपस्थित परिवारों को आश्वस्त किया कि जब तक प्रत्येक पीड़ित को संपूर्ण और संतोषजनक न्याय नहीं मिल जाता, तब तक संगठन पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ा रहेगा।\n\nइसका आप पर असर\nयह राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रम 1984 के पीड़ितों के लिए लंबे समय से अटके न्याय की प्रक्रिया और पंजाब की सामाजिक समस्याओं पर केंद्रित है।\n\n• भारत में: ऐतिहासिक दंगों और बड़े नरसंहारों के मामलों में विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्रवाई पुराने मामलों में कानूनी मिसाल तय करती है। इससे देश के किसी भी हिस्से में लंबे समय से लंबित न्यायिक मामलों में पीड़ितों के लिए दोबारा सुनवाई और दोषियों को सजा दिलाने का रास्ता खुलता है।\n• पंजाब में: राज्य में 1984 नरसंहार के कानूनी इंसाफ और नशे (चिट्टा) की गंभीर समस्या को लेकर राजनीतिक बहस तेज होगी। स्थानीय जनता और पीड़ित परिवारों को अदालती फैसलों और सरकारी नीतियों के जरिए वास्तविक राहत मिलने की अपेक्षाएं बढ़ेंगी।\n• पीड़ित परिवारों के लिए: दशकों पुराने मुकदमों में सजा और दोबारा जांच की दिशा में हो रही प्रगति से प्रभावित परिवारों को कानूनी सहारा मिलता है। इससे अन्य बचे हुए मामलों में भी साक्ष्यों के आधार पर अदालत में न्याय की उम्मीद मजबूत होती है।\n• राजनीतिक विमर्श में: आगामी दिनों में पंजाब और राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी रैलियों के दौरान अतीत की नीतियों और बयानों पर जवाबदेही की मांग बढ़ेगी। राजनीतिक दलों के रुख से मतदाताओं को उनके पिछले रिकॉर्ड का आकलन करने का अवसर मिलेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह सम्मेलन 1984 के सिख विरोधी नरसंहार के चार दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी पीड़ितों को पूर्ण न्याय न मिलने और पंजाब के मौजूदा सामाजिक मुद्दों को उठाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।\n\n• दशकों पुराना कानूनी संघर्ष: 1984 की घटनाओं में 3,500 से अधिक लोगों की जान गई थी, लेकिन दशकों तक कई जांच आयोगों के गठन के बावजूद प्रमुख अभियुक्तों पर ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी। कानूनी प्रक्रिया में देरी और राजनीतिक संरक्षण के आरोपों ने इस मामले को लगातार चर्चा में बनाए रखा।\n• एसआईटी और नई जांच रिपोर्ट: केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद गठित विशेष जांच दल और न्यायमूर्ति ढींगरा की सिफारिशों के अमल में आने से कई पुराने मामले दोबारा खुले। इन्हीं कानूनी कदमों के बाद सज्जन कुमार जैसे बड़े नामों को सजा मिलना संभव हुआ।\n• समकालीन राजनीतिक बयानबाजी: दिल्ली में 1 नवंबर को कांग्रेस की रैली और पंजाब में राहुल गांधी के आयोजनों के समय पर सवाल उठाते हुए भाजपा ने राजीव गांधी के 1984 के ऐतिहासिक बयान और कांग्रेस के पिछले रुख को जनता के सामने लाने के लिए यह मंच तैयार किया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. चंडीगढ़ में 4 नवंबर को किस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था?\nचंडीगढ़ में भाजपा द्वारा 1984 के सिख विरोधी नरसंहार के पीड़ितों के समर्थन में 'जख्म 84 दे' नाम से एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया था।\n\n2. सम्मेलन में लगाई गई प्रदर्शनी का उद्घाटन किसने किया?\nप्रदर्शनी का उद्घाटन पटना साहिब से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने किया।\n\n3. प्रदर्शनी में किस प्रकार की तस्वीरें दिखाई गईं?\nप्रदर्शनी में त्रिलोकपुरी के जले मकान, कनॉट प्लेस की तबाह दुकानें, बेघर परिवार और बसों से खींचे गए सिखों की ऐतिहासिक श्वेत-श्याम तस्वीरें प्रदर्शित की गईं।\n\n4. रविशंकर प्रसाद ने पंजाब की आत्मा पर कौन से दो गहरे दाग बताए?\nप्रसाद ने 1984 के नरसंहार के जख्म और चिट्टे (ड्रग्स) की समस्या को पंजाब की आत्मा पर दो गहरे दाग बताया।\n\n5. राजीव गांधी का कौन सा विवादित बयान चर्चा में रहा?\n19 नवंबर 1984 को दिया गया राजीव गांधी का वह बयान चर्चा में रहा जिसमें उन्होंने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है।\n\n6. रविशंकर प्रसाद के अनुसार सज्जन कुमार को सजा कैसे संभव हो सकी?\nनरेंद्र मोदी सरकार द्वारा बनाई गई एसआईटी और न्यायमूर्ति ढींगरा की सिफारिशों को लागू करने के बाद ही सज्जन कुमार को सजा मिल सकी।\n\n7. पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने क्या संकल्प जताया?\nकेवल सिंह ढिल्लों ने संकल्प जताया कि जब तक नरसंहार के अंतिम दोषी को भी कानून के कटघरे में नहीं लाया जाता, तब तक पार्टी चैन से नहीं बैठेगी।",
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  "publishedAt": "2026-11-04",
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