छात्र प्रदर्शन केस में सुप्रीम कोर्ट की राहत, राज्यों को FIR वापस लेने की छूट और पैलेट गन इस्तेमाल पर सख्ती सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकारें प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मामूली मामलों की FIR वापस ले सकती हैं। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने आंदोलन के दौरान पैलेट गन के उपयोग पर भी नियम तय करने का निर्णय लिया है। आंदोलनकारी छात्रों को बड़ी राहत देते हुए शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकारें प्रदर्शनों के दौरान दर्ज मुकदमों को नियमानुसार वापस लेने या बंद करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूर्व आदेश पर स्थिति साफ करते हुए कहा कि केवल गंभीर अपराधों में शामिल आरोपियों को यह छूट नहीं मिलेगी, जबकि सामान्य मामलों का सामना कर रहे छात्रों पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही अदालत ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग और पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर भी अपना रुख सख्त किया है। आपराधिक पृष्ठभूमि का अर्थ और दायरा अदालत ने अपने पिछले आदेश में प्रयुक्त आपराधिक पृष्ठभूमि शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका तात्पर्य केवल गंभीर और जघन्य अपराधों से है। इसमें हत्या, दुष्कर्म, आतंकवाद या समाज को खतरे में डालने वाले बड़े अपराध शामिल हैं। मामूली धाराओं में दर्ज मुकदमों का सामना कर रहे छात्रों को गंभीर अपराधी नहीं माना जाएगा, जिससे उनका करियर और भविष्य प्रभावित न हो। पैलेट गन के उपयोग पर तय होंगे कड़े नियम छात्र आंदोलनों में सुरक्षा बलों द्वारा वाटर कैनन, आंसू गैस और पैलेट गन के प्रयोग को लेकर उठ रहे सवालों पर भी शीर्ष अदालत ने संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका खुद यह तय करेगी कि भीड़ नियंत्रण के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल कब और किस स्थिति में किया जा सकता है। केंद्र सरकार से इस मामले में जवाब तलब करते हुए अदालत ने इसके लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। कार्रवाई और जवाबदेही की मांग दिल्ली में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान पैलेट गन चलाए जाने के आरोपों के बाद केंद्रीय बल और सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी हैं। विरोध प्रदर्शनों में तय सीमा से अधिक बल प्रयोग किए जाने को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी सवाल उठाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से अब यह स्पष्ट होगा कि बिना उच्च स्तर की अनुमति के घातक या अत्यधिक बल का प्रयोग नहीं किया जा सकता। इसका आप पर असर • भारत में: विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामूली केस वापस लेने की छूट से युवाओं के करियर और पासपोर्ट/नौकरी सत्यापन में आ रही बाधाएं दूर होंगी। • दिल्ली-एनसीआर में: दिल्ली में हुए छात्र आंदोलनों के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल की जांच से सुरक्षा बलों के लिए सख्त दिशा-निर्देश तय होंगे। सवाल-जवाब 1. क्या राज्य सरकारें छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर वापस ले सकती हैं? राज्य सरकारें मामूली और सामान्य प्रदर्शन से जुड़े मामलों को कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस ले सकती हैं, लेकिन हत्या, बलात्कार या आतंकवाद जैसे गंभीर अपराधों में राहत नहीं मिलेगी। 2. सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक पृष्ठभूमि शब्द पर क्या स्पष्टीकरण दिया? अदालत ने स्पष्ट किया कि इस शब्द का अर्थ केवल जघन्य और गंभीर अपराधों से है, प्रदर्शनों के दौरान दर्ज सामान्य केसों से नहीं। 3. पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर शीर्ष अदालत ने क्या कहा? मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट खुद यह तय करेगा कि प्रदर्शनों के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किन नियमों और शर्तों के तहत हो सकता है। 4. क्या दिल्ली में छात्रों पर पैलेट गन चलाए जाने की जांच हो रही है? हां, दिल्ली में छात्र प्रदर्शनों के दौरान नियमों के उल्लंघन और पैलेट गन के प्रयोग को लेकर जांच जारी है। https://trendkia.com/national/chhatra-pradarshana-kesa-men-supreme-court-ki-rahata-rajyon-ko-fir-vapasa-lene-ki-chhuta-aura-paileta-gana-istemala-para-sakhti-13169 TrendKia — Har trend, sabse pehle.