छात्र प्रदर्शनों पर सुप्रीम कोर्ट के CJI सूर्यकांत की सलाह, कहा हिंसा से निपटने के लिए सुरक्षा बल बरतें संयम सुप्रीम कोर्ट में सीजेपी प्रदर्शनों से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि अधिकारियों को छात्र आंदोलनों में संयम बरतना चाहिए और युवाओं की बात सुननी चाहिए। देशभर में हो रहे छात्र आंदोलनों को लेकर उच्चतम न्यायालय ने महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनों से जुड़ी एक याचिका पर विचार करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अधिकारियों को प्रदर्शनकारी युवाओं के प्रति संयम और सावधानी का परिचय देना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसक तरीकों से स्थिति को नियंत्रित करने के बजाय संवाद का मार्ग अपनाना अधिक प्रभावी होता है। याचिका में उठाए गए मुद्दे और मामलों की टैगिंग यह मामला सीजेपी के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और नुकसान से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और देश के विभिन्न राज्यों में इन आंदोलनों के दौरान उपद्रव, पत्थरबाजी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। याचिका में मांग की गई थी कि भीड़ द्वारा किए गए नुकसान की पूरी जवाबदेही आयोजक संगठन पर तय की जाए। इस पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने इस याचिका को दिल्ली और अन्य राज्यों में छात्र आंदोलनों से संबंधित पहले से लंबित याचिकाओं के साथ संबद्ध कर दिया। अब इन सभी याचिकाओं पर अदालत द्वारा एक साथ विचार किया जाएगा। शांतिपूर्ण यात्राओं में संयम और संवाद की आवश्यकता सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि सुरक्षा बलों को शांतिपूर्ण जुलूसों और यात्राओं के दौरान अत्यधिक धैर्य से काम लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को बहुत सोच-समझकर कदम उठाना चाहिए ताकि देश का युवा किसी भी प्रकार की हिंसा में शामिल न हो। पीठ के अनुसार, हिंसक कार्रवाई के जवाब में हिंसक प्रतिक्रिया देने से जमीनी हालात और अधिक गंभीर हो जाते हैं। चीफ जस्टिस ने रेखांकित किया कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत युवाओं की बात को सुनना और उनके विरोध के कारणों को समझना है। पुलिस एजेंसियों के विवेक और केंद्र सरकार के रुख पर ध्यान अदालत ने स्पष्ट किया कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने का काम कानून प्रवर्तन एजेंसियों के विवेक पर छोड़ देना चाहिए। पीठ ने कहा कि मौके की स्थिति से कैसे निपटना है, इसकी बेहतर समझ पुलिस और प्रशासन के पास होती है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को आश्वस्त किया कि उनके तर्कों को दर्ज कर लिया गया है और निर्धारित तिथि पर इस विषय की व्यापक समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही, अदालत ने कहा कि वह इस मामले में केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों के आधिकारिक रुख का भी अवलोकन करेगी। इसका आप पर असर भारत भर में: छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रशासन द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग की संभावना कम होगी, जिससे युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। छात्रों और आम जनता के लिए: लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों में हिंसा रोकने के लिए अधिकारियों द्वारा संवाद और संयम का तरीका अपनाया जाएगा, जिससे सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की आशंका घटेगी। सवाल-जवाब 1. सुप्रीम कोर्ट में किस मामले को लेकर सुनवाई हो रही थी? कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित प्रदर्शनों में हुई हिंसा और संपत्ति के नुकसान से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही थी। 2. CJI सूर्यकांत ने अधिकारियों को क्या सलाह दी? मुख्य न्यायाधीश ने अधिकारियों और सुरक्षा बलों को छात्र प्रदर्शनकारियों के प्रति संयम बरतने, हिंसक प्रतिक्रिया से बचने और उनकी मांगों को सुनने की सलाह दी। 3. क्या सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को अन्य मामलों के साथ जोड़ा है? हां, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को दिल्ली और विभिन्न राज्यों में छात्र आंदोलनों की हिंसा से जुड़ी लंबित याचिकाओं के साथ संबद्ध कर दिया है। 4. पुलिस कार्रवाई को लेकर अदालत का क्या रुख रहा? अदालत ने कहा कि जमीनी स्थिति से निपटने का फैसला कानून प्रवर्तन एजेंसियों की समझ और विवेक पर छोड़ना सबसे उचित है। https://trendkia.com/national/chhatra-pradarshanon-para-suprima-korta-ke-cji-surya-kant-ki-salaha-kaha-hinsa-se-nipatane-ke-lie-suraksha-bala-baraten-snyama-13877 TrendKia — Har trend, sabse pehle.