छत्तीसगढ़ में पुलिस हिरासत में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, दो साल बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया छत्तीसगढ़ में 2024 में हुई श्रवण की हिरासत में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं. एफआईआर दर्ज करने में दो साल की देरी पर अदालत ने राज्य पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए. छत्तीसगढ़ में पुलिस हिरासत के दौरान हुई एक संदिग्ध मौत के मामले में देश की शीर्ष अदालत ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है. वर्ष 2024 में पुलिस कस्टडी में हुई श्रवण नाम के व्यक्ति की मौत की जांच अब राज्य पुलिस के बजाय केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) करेगी. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की दो सदस्यीय पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र जांच का आदेश जारी किया है. यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हिरासत में हुई मौत के लगभग दो साल बाद तक स्थानीय पुलिस ने इस मामले में नियमानुसार प्राथमिक दर्ज नहीं की थी, जिसके बाद मामला अदालत के समक्ष पहुंचा था. हिरासत में मौत और दो साल तक एफआईआर दर्ज न होने का मामला यह पूरा घटनाक्रम साल 2024 का है, जब स्थानीय पुलिस ने श्रवण नामक व्यक्ति को अपनी हिरासत में लिया था. हिरासत में आने के केवल तीन दिनों के भीतर ही संदिग्ध परिस्थितियों में श्रवण की मौत हो गई थी. इस घटना के तुरंत बाद मृतक के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले में निष्पक्ष जांच की पुरजोर मांग की थी. परिजनों का आरोप था कि हिरासत के दौरान श्रवण के साथ अमानवीय व्यवहार हुआ, जिसके कारण उसकी जान चली गई. हालांकि, इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आया. हिरासत में किसी व्यक्ति की मौत होने पर कानूनन तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए, लेकिन छत्तीसगढ़ पुलिस ने लगभग दो साल तक इस संबंध में एफआईआर दर्ज ही नहीं की. इतने लंबे समय तक मामले को दबाए रखने और आपराधिक प्रक्रिया का पालन न करने के कारण पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए. सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख और सीबीआई को दिए गए निर्देश मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने पुलिस की इस लापरवाही और ढिलाई को बेहद संजीदगी से लिया. शीर्ष अदालत ने पाया कि हिरासत में मौत जैसी गंभीर घटना में दो साल तक प्राथमिकी दर्ज न होना किसी बड़ी गड़बड़ी का संकेत देता है. अदालत ने स्पष्ट माना कि ऐसे माहौल में राज्य पुलिस से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती. अदालत के नए आदेश के अनुसार, अब सीबीआई इस पूरे मामले की नए सिरे से गहन जांच करेगी. केंद्रीय एजेंसी श्रवण की शुरुआती गिरफ्तारी, पुलिस कस्टडी की अवधि, हिरासत के दौरान घटी घटनाओं और मौत के सटीक कारणों की पड़ताल करेगी. इसके साथ ही, सीबीआई इस पहलू की भी विशेष रूप से जांच करेगी कि आखिर किन कारणों और किन अधिकारियों के दबाव में दो साल तक एफआईआर दर्ज करने में देरी की गई. जाँच एजेंसी से निष्पक्ष न्याय की उम्मीद सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब सभी की निगाहें सीबीआई की आगामी जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं. पीड़ित परिवार, जो लंबे समय से न्याय के लिए भटक रहा था, को अब सच सामने आने की उम्मीद जगी है. केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा जुटाए जाने वाले साक्ष्य और तथ्य ही यह तय करेंगे कि श्रवण की मौत के लिए कौन से पुलिसकर्मी दोषी हैं और एफआईआर रोकने के पीछे क्या साजिश थी. इसका आप पर असर भारत में: यह फैसला पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों और एफआईआर दर्ज करने में देरी पर प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिहाज से एक महत्वपूर्ण संदेश है. छत्तीसगढ़ में: दो साल के लंबे इंतजार के बाद पीड़ित परिवार के लिए अब किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी के माध्यम से निष्पक्ष न्याय पाने का रास्ता साफ हुआ है. सवाल-जवाब 1. श्रवण केस में सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया है? सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ पुलिस से जांच छीनकर मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का निर्देश दिया है. 2. इस मामले की सुनवाई किस बेंच ने की? जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की दो सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई की. 3. श्रवण की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई थी? साल 2024 में पुलिस हिरासत में लिए जाने के महज तीन दिन बाद ही श्रवण की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. 4. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य पुलिस की भूमिका पर सवाल क्यों उठाए? कस्टोडियल डेथ जैसी गंभीर घटना के बावजूद छत्तीसगढ़ पुलिस ने दो साल तक एफआईआर दर्ज नहीं की थी, जिससे उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठे. 5. सीबीआई अब इस मामले में किन पहलुओं की पड़ताल करेगी? सीबीआई श्रवण की हिरासत, मौत के कारणों, पुलिसकर्मियों की भूमिका और एफआईआर दर्ज करने में हुई दो साल की देरी की जांच करेगी. https://trendkia.com/national/chhattisgarh-men-pulisa-hirasata-men-mauta-ke-mamale-men-supreme-court-sakhta-do-sala-bada-mamala-cbi-ko-saunpa-gaya-16076 TrendKia — Har trend, sabse pehle.