# चित्रकूट में सरयू नदी के पुराने बहाव क्षेत्र से अवैध निर्माण हटाने की तैयारी, यूपी और एमपी प्रशासन ने शुरू किया संयुक्त सीमांकन

> चित्रकूट में हालिया बाढ़ के बाद मंदाकिनी की सहायक सरयू नदी के पुराने प्रवाह क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की संयुक्त टीम सीमांकन कर रही है। नदी के बाढ़ क्षेत्र को पांच, पच्चीस और सौ साल के जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटकर निर्माण पर कड़े नियम लागू किए जाएंगे।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/chitrakoot-men-saryu-nadi-ke-purane-bahava-kshetra-se-avaidha-nirmana-hatane-ki-taiyari-up-aura-mp-prashasana-ne-shuru-kiya-snyukt-36822 · **Language:** Hindi
**Tags:** चित्रकूट, सरयू नदी, मंदाकिनी नदी, बाढ़ नियंत्रण, अतिक्रमण हटाओ, पुलकित गर्ग, उत्तर प्रदेश

चित्रकूट और सीतापुर इलाके में हाल ही में आई बाढ़ के बाद नदियों के प्राकृतिक रास्तों को बहाल करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के स्पष्ट निर्देशों के तहत मंदाकिनी की सहायक सरयू नदी के ऐतिहासिक और पुराने बहाव क्षेत्र की पैमाइश का काम तेजी से शुरू कर दिया गया है। सीमावर्ती इलाका होने की वजह से इस पूरी कवायद में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों के राजस्व व प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम धरातल पर काम कर रही है। सीमांकन के दौरान जहां भी नदी की जमीन पर अवैध कब्जे या पक्के निर्माण सामने आ रहे हैं, वहां संबंधित कब्जाधारकों को समय सीमा के भीतर अपना अतिक्रमण खुद हटाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

## नदी के प्राकृतिक रास्ते से हटेगा अवैध कब्जा
जांच और प्रारंभिक सर्वेक्षण के दौरान सरयू नदी के मुख्य प्रवाह क्षेत्र में कई स्थानों पर अनधिकृत पक्के निर्माण और अवैध कब्जे पाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार प्राकृतिक जलमार्ग में इस तरह के मानवीय हस्तक्षेप और अवरोधों के कारण बारिश और बाढ़ के समय पानी की स्वाभाविक निकासी बाधित हो जाती है। जब पानी को बहने का पर्याप्त रास्ता नहीं मिलता, तो वह किनारों को तोड़कर रिहायशी बस्तियों और आसपास के इलाकों में फैल जाता है, जिससे व्यापक तबाही होती है। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रशासन ने नदी के पुराने जलमार्ग को पूरी तरह चिन्हित करना शुरू किया है। भविष्य में किसी भी तरह के निर्माण पर रोक लगाने के लिए वहां कड़े पहरे और निगरानी की व्यवस्था बनाई जा रही है।

सीमांकन की प्रक्रिया के तहत चिन्हित बिंदुओं पर सीमेंट के स्थायी पिलर लगाए जा रहे हैं, जिससे नदी क्षेत्र की सीमा रेखा जमीन पर पूरी तरह स्पष्ट दिखे। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि वे निर्धारित समयावधि के अंदर अपने कब्जे स्वयं हटा लें। यदि तय समय सीमा बीतने के बाद भी किसी ने अतिक्रमण नहीं हटाया, तो जिला प्रशासन की ओर से बलपूर्वक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी और अवैध निर्माणों पर बुल्डोजर चलाकर जलमार्ग को खाली कराया जाएगा।

## मंदाकिनी की बाढ़ समीक्षा में उजागर हुई अतिक्रमण की हकीकत
चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने मंदाकिनी नदी में आई हालिया बाढ़ की विस्तृत समीक्षा की। इस समीक्षा बैठक के दौरान यह प्रमुख तथ्य सामने आया कि मंदाकिनी में जलस्तर बढ़ने के साथ ही उसकी सहायक सरयू जैसी नदियों के जलमार्ग में हुए अवैध कब्जों ने हालात को और गंभीर बना दिया था। सहायक नदियों का पानी समय पर आगे नहीं निकल सका, जिससे पूरे इलाके में जलभराव बढ़ गया। इसी निष्कर्ष के बाद सरयू क्षेत्र में त्वरित गति से संयुक्त डिमार्केशन शुरू कराया गया।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार कई अवैध निर्माणों की पहचान पहले ही की जा चुकी है और नोटिस मिलने के बाद कुछ लोगों ने स्वेच्छा से अपने निर्माण खुद तोड़ने भी शुरू कर दिए हैं। इसके साथ ही मुख्य मंदाकिनी नदी के पूरे बहाव क्षेत्र के व्यापक सीमांकन के लिए भी एक विस्तृत प्रशासनिक कार्ययोजना तैयार की जा रही है, ताकि पूरी जल प्रणाली को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा सके।

## बाढ़ क्षेत्र का तीन स्तरों पर वर्गीकरण
नदी तटों को सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार की गंगा नदी से जुड़ी आधिकारिक गाइडलाइन के आधार पर बाढ़ संभावित क्षेत्रों को तीन अलग श्रेणियों में विभाजित किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत पांच साल, पच्चीस साल और सौ साल की बाढ़ फ्रीक्वेंसी के संभावित दायरों को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया जाएगा।

इस त्रिस्तरीय व्यवस्था के तहत पहले स्तर यानी पांच साल की बाढ़ वाले क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा, जहां किसी भी प्रकार के स्थायी निर्माण या व्यावसायिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। दूसरे स्तर यानी पच्चीस साल के बाढ़ क्षेत्र में केवल अनिवार्य सार्वजनिक उपयोग से जुड़े आवश्यक प्रोजेक्ट्स को ही विशेष अनुमति दी जाएगी। तीसरे स्तर यानी पच्चीस से सौ साल के बीच के इलाके को वार्निंग जोन घोषित किया जाएगा, जहां रहने वालों को बाढ़ के खतरे के प्रति सतर्क रखा जाएगा। प्रशासन इन तीनों सीमाओं को जमीन पर स्थायी पिलरों के जरिए दर्ज कराने जा रहा है। इसके लिए एक संपूर्ण प्रोजेक्ट प्रस्ताव तैयार करके स्वीकृति हेतु शासन को भेजा गया है, जिसकी वित्तीय व प्रशासनिक मंजूरी मिलते ही जमीनी स्तर पर पिलर लगाने का कार्य पूर्ण कर दिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि अतिक्रमण हटने से नदी का प्रवाह निर्बाध होगा और भविष्य में आने वाली बाढ़ से स्थानीय नागरिकों का जीवन व संपत्ति पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।

## इसका आप पर असर
चित्रकूट और सीतापुर के नदी तटीय इलाकों में रहने वाले नागरिकों और भूस्वामियों के लिए यह प्रशासनिक कदम सीधे तौर पर प्रभावी होगा।

- **स्थानीय निवासियों के लिए:** नदी के प्राकृतिक प्रवाह से अवरोध हटने के बाद भारी बारिश के दौरान कॉलोनियों और मोहल्लों में पानी भरने का खतरा काफी कम हो जाएगा। इससे हर साल बाढ़ के दिनों में होने वाले जान-माल के भारी नुकसान से राहत मिलेगी।
- **तटीय निर्माण कर्ताओं के लिए:** पांच साल के बाढ़ दायरे में आने वाले किसी भी नए निर्माण पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। जिन लोगों ने नदी के बहाव क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण किया है, उन्हें समय रहते अपना निर्माण हटाना होगा, वरना प्रशासनिक बुलडोजर कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
- **सार्वजनिक विकास कार्यों के लिए:** पच्चीस साल के बाढ़ क्षेत्र में केवल अनिवार्य सरकारी व सार्वजनिक प्रोजेक्ट्स को ही अनुमति मिल सकेगी। इससे अनियंत्रित रियल एस्टेट और अवैध प्लॉटिंग पर पूरी तरह लगाम लगेगी।
- **सीमांकन और चेतावनी क्षेत्र के लिए:** जमीन पर स्थायी पिलर लगने से नदी की आधिकारिक सीमा स्पष्ट हो जाएगी। पच्चीस से सौ साल के वार्निंग जोन में रहने वाले नागरिकों को जलस्तर बढ़ने पर समय रहते सतर्क रहने की जानकारी मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
चित्रकूट में हाल ही में आई गंभीर बाढ़ की प्रशासनिक समीक्षा के बाद यह सख्त कदम उठाया गया है। जांच में सामने आया कि मंदाकिनी और उसकी सहायक सरयू नदी के प्राकृतिक जलमार्गों में अवैध निर्माणों ने पानी के बहाव को रोक दिया था।

- **जलमार्ग में अवरोध:** नदी के मुख्य बहाव क्षेत्र में पक्के मकान, दीवारें और व्यावसायिक कब्जे खड़े कर दिए गए थे। जब बाढ़ का पानी आया तो प्राकृतिक रास्ते बंद होने की वजह से पानी तेजी से रिहायशी इलाकों में भर गया।
- **सहायक नदियों की अनदेखी:** मंदाकिनी नदी में जलभराव के कारणों की पड़ताल में पता चला कि उसकी सहायक नदियों, विशेषकर सरयू के पुराने प्रवाह क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचाया गया था। इससे सहायक धाराएं मुख्य नदी तक पानी सुचारू रूप से नहीं पहुंचा सकीं।
- **स्पष्ट सीमाओं का अभाव:** जमीन पर नदी क्षेत्र की स्पष्ट निशानदेही और पिलर न होने के कारण सीमावर्ती इलाकों में वर्षों से अवैध कब्जे होते रहे। अब केंद्र सरकार की गंगा संबंधी गाइडलाइन के आधार पर तीन स्तरों में वैज्ञानिक सीमांकन किया जा रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. चित्रकूट में किन नदियों के प्रवाह क्षेत्र का सीमांकन किया जा रहा है?
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी और उसकी प्रमुख सहायक सरयू नदी के पुराने प्रवाह क्षेत्र का सीमांकन किया जा रहा है।

### 2. सीमांकन का काम कौन कर रहा है?
जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के निर्देश पर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम सीमांकन कर रही है।

### 3. अवैध निर्माण न हटाने पर प्रशासन क्या कार्रवाई करेगा?
तय समय सीमा में अतिक्रमण खुद न हटाने पर जिला प्रशासन बुल्डोजर चलाकर अवैध निर्माण को ध्वस्त करेगा।

### 4. बाढ़ क्षेत्र को किन तीन श्रेणियों में बांटा जा रहा है?
केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार बाढ़ क्षेत्र को पांच साल, पच्चीस साल और सौ साल की संभावित बाढ़ श्रेणियों में बांटा जा रहा है।

### 5. पांच साल के बाढ़ क्षेत्र के लिए क्या नियम तय किए गए हैं?
पांच साल की बाढ़ वाले क्षेत्र में किसी भी तरह के निर्माण और अन्य गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।

### 6. पच्चीस साल वाले बाढ़ क्षेत्र में किस प्रकार के निर्माण को छूट मिलेगी?
पच्चीस साल वाले बाढ़ क्षेत्र में केवल जनहित और सार्वजनिक उपयोग से जुड़ी निर्धारित सरकारी परियोजनाओं को ही अनुमति दी जाएगी।

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