चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस का राष्ट्रव्यापी आंदोलन, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR रद्द करने की मांग कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को वापस लेने और बैलट पेपर की बहाली को लेकर अक्टूबर से नवंबर तक राष्ट्रव्यापी विरोध का पूरा खाका तैयार किया है. मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ व्यापक आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है. दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद पार्टी ने आंदोलन का चरणबद्ध रोडमैप पेश किया. पार्टी का स्पष्ट कहना है कि यह सियासी टकराव अब केवल राष्ट्रीय राजधानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समूचे देश में संगठन स्तर पर और INDIA गठबंधन के सहयोगियों के साथ मिलकर एक जन-आंदोलन की शक्ल लेगा. कांग्रेस ने अपने इस देशव्यापी अभियान को ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ का नाम दिया है. नई दिल्ली में संसद भवन से निर्वाचन आयोग तक प्रस्तावित मार्च और घेराव के जरिए इस संघर्ष की शुरुआत हो रही है, जो आगामी हफ्तों तक विभिन्न चरणों में जारी रहेगा. इस अभियान का मकसद आम मतदाताओं तक पहुंचकर चुनावी प्रक्रिया और वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज बुलंद करना है. आंदोलन को निर्णायक मोड़ तक ले जाने का संकल्प उच्चस्तरीय बैठक के दौरान राहुल गांधी ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि इस लड़ाई को उसके तार्किक अंजाम तक पहुंचाना अनिवार्य है. उनका कहना था कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा. राहुल गांधी ने आह्वान किया कि संगठन के कार्यकर्ता देश के कोने-कोने में हर नागरिक के पास जाएं और उन्हें समझाएं कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के जरिए किस तरह मतदाताओं का जनादेश प्रभावित किया जा रहा है. राहुल गांधी ने निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए दावा किया कि फॉर्म-6 में गैरकानूनी और एकतरफा फेरबदल किए गए हैं. उनका कहना था कि यह कदम सत्ताधारी दल बीजेपी को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के मकसद से पद का घोर दुरुपयोग दर्शाता है. पार्टी नेताओं का मानना है कि मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए जनता के बीच जाकर जागरूकता फैलाना ही एकमात्र रास्ता बचा है. प्रदर्शनों का पहला चरण: जिला मुख्यालयों पर मार्च और घेराव पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बैठक के उपरांत जानकारी दी कि 2 से 8 अक्टूबर के बीच देश के सभी जिलों में व्यापक प्रदर्शन और विरोध मार्च आयोजित किए जा रहे हैं. सभी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ मिलकर इन कार्यक्रमों को जमीन पर उतारें. इसी सिलसिले में 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के घेराव का ऐलान किया गया है. कांग्रेस नेताओं ने तय किया है कि वे संसद भवन से चुनाव आयोग के दफ्तर तक शांतिपूर्ण मार्च निकालेंगे. इस मार्च के शांतिपूर्ण संचालन के लिए पार्टी ने दिल्ली पुलिस से औपचारिक रूप से अनुमति मांगी है ताकि संसद परिसर से आयोग मुख्यालय तक लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी जा सके. साइकिल मार्च, पदयात्राएं और पुतला दहन का दूसरा चरण कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और चुनावी पारदर्शिता पर गंभीर सवालिया निशान लग चुके हैं. इसी को आधार बनाकर 10 से 20 अक्टूबर के बीच आंदोलन का दूसरा चरण लागू किया जाएगा. इस दौरान ब्लॉक स्तर पर पार्टी कार्यकर्ता साइकिल रैलियां और पदयात्राएं निकालेंगे. इस दस दिवसीय अभियान के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नीतियों के खिलाफ जगह-जगह विरोध दर्ज कराया जाएगा और उनके पुतले भी जलाए जाएंगे. पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्य व जिला इकाइयों को स्पष्ट कर दिया है कि इसे एक आक्रामक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बनाया जाए ताकि शासन स्तर पर चुनावी शुचिता का संदेश जाए. गांवों में 'वोट रक्षक' चौपाल और 1 नवंबर की महारैली तीसरे चरण के तहत 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक कांग्रेस ग्रामीण भारत में सीधा संवाद स्थापित करेगी. इस अभियान को ‘वोट रक्षक’ नाम दिया गया है, जिसके तहत गांवों में चौपालें लगाई जाएंगी. इन चौपालों के जरिए ग्रामीणों को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, हटाने और SIR की बारीकियों के प्रति सजग किया जाएगा ताकि कथित रूप से हटाए गए नामों की जानकारी लोगों तक पहुंचे. इस पूरे जन-आंदोलन का मुख्य शक्ति प्रदर्शन 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में होगा, जहां एक विशाल महारैली का आयोजन किया जाएगा. पार्टी का दावा है कि यह इस अभियान की अब तक की सबसे बड़ी रैली साबित होगी. इसके उपरांत 26 नवंबर को ‘चलो दिल्ली’ अभियान के तहत देश के छह अलग-अलग कोनों से छह विशेष यात्राएं निकाली जाएंगी जो दिल्ली पहुंचेंगी. इस तरह पूरे अक्टूबर और नवंबर महीने में धरने, चौपाल और मार्च का विस्तृत ढांचा तैयार किया गया है. तीन प्रमुख शर्तों पर अड़ी कांग्रेस, शीर्ष नेतृत्व के तीखे तेवर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आंदोलन की दिशा तय करते हुए तीन प्रमुख मांगें रखी हैं. इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का तुरंत इस्तीफा, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को फौरन रद्द करना और आगामी सभी चुनावों में ईवीएम की जगह पारंपरिक बैलट पेपर व्यवस्था की वापसी शामिल है. खरगे ने सार्वजनिक संदेश में कहा कि इन्हीं मुद्दों को लेकर कांग्रेस और गठबंधन के साथी सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं. वहीं कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने विधिक मर्यादाओं का उल्लंघन किया है. उनका दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर संवैधानिक मूल्यों के साथ विश्वासघात किया गया है. पार्टी का कहना है कि जब तक निर्वाचन आयोग अपनी निष्पक्षता साबित नहीं करता, यह विरोध अनवरत जारी रहेगा. इसका आप पर असर इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन और विरोध प्रदर्शनों से आम मतदाताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर सीधा असर पड़ेगा. • मतदाता सूची सत्यापन: कांग्रेस के इस अभियान से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में वोटर लिस्ट की जांच तेज होगी. मतदाता अपने नाम, पते और फॉर्म-6 के जरिए जुड़े या कटे विवरण की पुनः जांच कर सकते हैं. • सार्वजनिक आवागमन: 6 अक्टूबर को संसद से चुनाव आयोग मार्च और 1 नवंबर को रामलीला मैदान महारैली के दौरान दिल्ली के प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हो सकता है. यात्रियों को प्रदर्शन तिथियों पर मध्य दिल्ली और नई दिल्ली के मार्गों पर डायवर्जन का सामना करना पड़ सकता है. • जिला एवं ब्लॉक स्तर पर असर: 2 से 8 अक्टूबर तक जिला मार्च और 10 से 20 अक्टूबर के बीच साइकिल रैलियों से देश भर के कस्बों में स्थानीय गतिविधियां तेज रहेंगी. आम जनता को प्रशासनिक दफ्तरों और कलेक्ट्रेट परिसरों के आसपास भीड़ देखने को मिल सकती है. • सियासी विमर्श: चुनाव प्रक्रिया में बैलट पेपर की वापसी और SIR की प्रक्रिया पर सार्वजनिक बहस तेज होगी. नागरिक चुनावी पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों को लेकर अधिक जागरूक होंगे. ऐसा क्यों हुआ कांग्रेस द्वारा घोषित यह व्यापक आंदोलन मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया में कथित विसंगतियों और प्रशासनिक फैसलों के खिलाफ उपजे असंतोष का परिणाम है. • विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विवाद: पार्टी का आरोप है कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत लाखों मतदाताओं के नाम बिना उचित पारदर्शिता के हटाए जा रहे हैं. विपक्ष का दावा है कि इस व्यवस्था से वास्तविक मतदाताओं के अधिकार छीने जा रहे हैं. • फॉर्म-6 में बदलाव के आरोप: राहुल गांधी का दावा है कि नए मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा बदलाव किए गए हैं. कांग्रेस का कहना है कि यह फेरबदल निष्पक्षता को ताक पर रखकर सत्ताधारी दल को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया है. • संस्थागत निष्पक्षता पर सवाल: विपक्षी नेतृत्व का मानना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त स्वतंत्र नियामक की तरह काम करने के बजाय शीर्ष सरकारी नेतृत्व के दबाव में फैसले ले रहे हैं. इसी कारण पार्टी ने सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और बैलट पेपर की वापसी को अपनी प्राथमिक शर्त बनाया है. सवाल-जवाब 1. कांग्रेस पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कौन सा नारा दिया है? कांग्रेस ने इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन के लिए ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ का नारा दिया है. 2. कांग्रेस की तीन प्रमुख मांगें क्या हैं? पार्टी की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR प्रक्रिया को रद्द करना और चुनावों में बैलट पेपर की बहाली शामिल है. 3. चुनाव आयोग के घेराव का कार्यक्रम किस तारीख को तय किया गया है? कांग्रेस ने 6 अक्टूबर को संसद भवन से चुनाव आयोग तक मार्च निकालकर आयोग का घेराव करने का ऐलान किया है. 4. ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी किस नाम से अभियान चलाएगी? ग्रामीण इलाकों में 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक ‘वोट रक्षक’ नाम से चौपालें आयोजित की जाएंगी. 5. दिल्ली के रामलीला मैदान में महारैली कब आयोजित होगी? कांग्रेस 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में अपने अभियान की सबसे बड़ी महारैली आयोजित करेगी. 6. फॉर्म-6 को लेकर राहुल गांधी ने क्या आरोप लगाया है? राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा बदलाव करके सत्ताधारी बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए पद का दुरुपयोग किया गया है. https://trendkia.com/national/chunava-ayoga-ke-khilapha-congress-ka-rashtravyapi-andolana-mukhya-chunava-ayukta-gyanesh-kumar-ke-istiphe-aura-sir-radda-karane-k-43463 TrendKia — Har trend, sabse pehle.