चुनाव आयोग मार्च रोके जाने पर भड़के राहुल गांधी, गृह मंत्री, आरएसएस प्रमुख और सीईसी पर लगाए गंभीर आरोप संसद के मकर द्वार से चुनाव आयोग मुख्यालय जा रहे करीब 300 विपक्षी सांसदों को पुलिस ने रास्ते में रोका, जिसके बाद आकाशवाणी भवन पर धरने पर बैठे राहुल गांधी ने वोट चोरी और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए। नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन के दौरान सियासी माहौल बेहद गरमा गया। संसद भवन के मकर द्वार से निर्वाचन आयोग मुख्यालय की तरफ बढ़ रहे विपक्षी सांसदों के पैदल मार्च को सुरक्षाबलों ने रास्ते में ही रोक दिया। इस कदम के विरोध में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपने साथी सांसदों के साथ आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठ गए। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लिया और आरोप लगाया कि इन लोगों ने देश के लोकतांत्रिक ढांचे को गहरी चोट पहुंचाई है। संसद से निर्वाचन आयोग मार्च को पुलिस ने रास्ते में रोका विपक्षी गठबंधन के दोनों सदनों के सांसद चुनाव प्रक्रिया, कथित वोट चोरी और निर्वाचन आयोग के रवैये के खिलाफ एकजुट होकर अपनी आवाज उठाने निकले थे। योजना के मुताबिक, जनप्रतिनिधियों का यह जत्था संसद परिसर के मकर द्वार से निकलकर सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त के दफ्तर तक जाने वाला था। विपक्षी नेता वहां पहुंचकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनके दोनों सहयोगी चुनाव आयुक्तों के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराना चाहते थे। हालांकि, संसद मार्ग के पास दिल्ली पुलिस ने अवरोधक लगाकर मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके चलते माहौल तनावपूर्ण हो गया और सभी सांसद सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। सैकड़ों सांसदों को रोके जाने पर राहुल गांधी ने उठाए सवाल आकाशवाणी भवन के बाहर धरने के दौरान 6 अक्टूबर को अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी ने प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि उनके साथ लोकसभा और राज्यसभा के करीब 300 सांसद मौजूद थे, जो देश की जनता और लोकतंत्र की आवाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। राहुल गांधी ने सवाल किया कि जनता के चुने हुए 300 प्रतिनिधियों को संवैधानिक संस्था के शीर्ष अधिकारियों से मिलने जाने से क्यों रोका जा रहा है और उन्हें बीच रास्ते में बैठाकर रखने के पीछे क्या वजह है। उन्होंने साफ किया कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी के बयानों में कोई रुचि नहीं है, क्योंकि उनका पूरा संघर्ष भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए है। वोट चोरी और जवाबदेही पर तीखे वार धरना स्थल से केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखे प्रहार करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि वोटों की हेराफेरी के जरिए व्यवस्था पर कब्जा किया गया है और इसमें आयोग के शीर्ष स्तर से मदद पहुंचाई गई। उन्होंने दावा किया कि देश की युवा पीढ़ी इस पूरी स्थिति को समझ रही है और प्रदर्शन रोकने के लिए तैनात किए गए पुलिसकर्मी भी अंदरूनी तौर पर इस सच्चाई से वाकिफ थे। राहुल गांधी ने कहा कि व्यवस्था के साथ जो कुछ किया गया है वह देशद्रोह के समान है और आने वाले समय में लोकतांत्रिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा, चाहे वह कितने भी ऊंचे पद पर क्यों न बैठा हो। इसका आप पर असर संसदीय विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच बढ़ा टकराव देश की चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर जनता के बीच बहस तेज करता है। • राष्ट्रीय स्तर पर: आगामी चुनावों में मतदाता सूची, मतदान प्रक्रिया और मतगणना की निगरानी को लेकर राजनीतिक दलों की सतर्कता काफी बढ़ जाएगी। नागरिकों के लिए चुनावी पारदर्शिता और मतदान केंद्रों की व्यवस्थाओं पर राजनीतिक दबाव देखने को मिल सकता है। • नई दिल्ली में: संसद भवन, निर्वाचन आयोग और आसपास के मध्य दिल्ली इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहेगी। आम राहगीरों और दफ्तर आने-जाने वाले लोगों को लुटियंस दिल्ली के मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन और बैरिकेडिंग का सामना करना पड़ सकता है। • मतदाताओं के लिए: चुनावी नियमों और मतदाता सत्यापन को लेकर विपक्षी दलों का अभियान तेज होगा। आम नागरिक अपने वोटर कार्ड, मतदाता सूची में नाम और बूथ स्तर के अधिकारों को लेकर अधिक जागरूक हो सकेंगे। • संसदीय राजनीति में: संसद के आगामी सत्रों में चुनावी सुधारों और चुनाव आयुक्तों की भूमिका को लेकर भारी गतिरोध बना रह सकता है। प्रमुख विधेयकों और नीतिगत चर्चाओं पर इस राजनीतिक टकराव का सीधा असर पड़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह टकराव तब शुरू हुआ जब विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर पक्षपात और चुनावी गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए आयोग मुख्यालय तक पैदल मार्च निकालने की कोशिश की, जिसे प्रशासन ने बीच रास्ते में रोक दिया। • मार्च रोके जाने की कार्रवाई: संसद के मकर द्वार से करीब 300 सांसदों का दल मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने जा रहा था, जिसे पुलिस ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा कारणों का हवाला देकर आकाशवाणी भवन के पास रोक दिया। • वोट चोरी और संस्थागत आरोप: विपक्ष का आरोप है कि निर्वाचन आयोग सत्तारूढ़ व्यवस्था के दबाव में काम कर रहा है और चुनाव प्रक्रियाओं में धांधली की शिकायतों की निष्पक्ष जांच नहीं कर रहा है। • शीर्ष नेतृत्व पर सीधा हमला: विपक्षी नेताओं का मानना है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय और राजनीतिक नेतृत्व के हस्तक्षेप के कारण लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता प्रभावित हो रही है, जिससे बात टकराव तक पहुंची। • प्रतिनिधिमंडल को मिलने का समय न मिलना: सांसदों का कहना है कि वे तीनों चुनाव आयुक्तों के समक्ष सीधे अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन अनुमति न मिलने पर उन्होंने धरने का रास्ता चुना। सवाल-जवाब 1. विपक्षी सांसद संसद से कहां की ओर मार्च कर रहे थे? विपक्षी सांसद संसद परिसर के मकर द्वार से निर्वाचन आयोग मुख्यालय की तरफ मार्च कर रहे थे। 2. इस विरोध प्रदर्शन में लगभग कितने सांसद शामिल थे? इस मार्च और धरने में लोकसभा और राज्यसभा के करीब 300 सांसद शामिल थे। 3. पुलिस ने सांसदों को किस जगह पर रोका? पुलिस ने सांसदों के जत्थे को निर्वाचन आयोग पहुंचने से पहले आकाशवाणी भवन के पास रोक दिया। 4. राहुल गांधी ने किन प्रमुख व्यक्तियों पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया? राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाए। 5. विपक्षी दल निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से क्यों मिलना चाहते थे? विपक्षी सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनके दो सहयोगी आयुक्तों के समक्ष वोट चोरी और चुनावी चिंताओं पर अपनी बात रखना चाहते थे। https://trendkia.com/national/chunava-ayoga-marcha-roke-jane-para-bharake-rahul-gandhi-amit-shah-mohan-bhagwat-aura-cec-gyanesh-kumar-para-lagae-gnbhira-aropa-43894 TrendKia — Har trend, sabse pehle.