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  "title": "चुनाव आयोग में आंतरिक मतभेद पर राज ठाकरे का तीखा वार, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और बैलेट पेपर की उठाई मांग",
  "summary": "महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतपत्र प्रणाली बहाल करने की जोरदार वकालत की है।",
  "content": "महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और स्वायत्तता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक विस्तृत बयान जारी करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता अब सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा व्यवस्था में संस्थागत फैसलों को एकतरफा रूप से प्रभावित किया जा रहा है, जिससे निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया की बुनियाद कमजोर हो रही है।\n\nआयोग के भीतर असहमति और दरकिनार किए जाने का आरोप\nराज ठाकरे ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि निर्वाचन सदन के भीतर तीन में से दो चुनाव आयुक्तों की चिंताओं को नजरअंदाज किया जाना बेहद गंभीर मामला है। उनका कहना था कि चुनाव आयुक्त संधू और जोशी द्वारा आधिकारिक फाइलों पर दर्ज की गई आपत्तियां साफ इशारा करती हैं कि महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों में पूरे आयोग की सहमति नहीं ली गई। ठाकरे के अनुसार, जब शीर्ष स्तर पर ही सदस्यों को अंधेरे में रखकर फैसले लिए जाते हैं, तो मतदाता सूचियों में मनमाने बदलाव और प्रबंधन की विश्वसनीयता पर स्वाभाविक रूप से गहरे संदेह खड़े होते हैं।\n\nपश्चिम बंगाल और गोवा के मामलों का हवाला\nविशिष्ट घटनाक्रमों को रेखांकित करते हुए मनसे प्रमुख ने मतदाता सूची सॉफ्टवेयर में फेरबदल और कानूनी प्रक्रियाओं में बदलाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि पश्चिम बंगाल से जुड़ी 16.1 लाख अपीलों जैसे भारी भरकम कानूनी मामलों और नियमों में संशोधन के निर्देश पूरे आयोग की आधिकारिक सहमति के बिना कैसे जारी किए गए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने गोवा का उदाहरण सामने रखा, जहां तकनीकी खराबी आने के कारण 97 प्रमाणित मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने से वंचित रह गए थे। ठाकरे ने इन उदाहरणों को केंद्रीकृत नियंत्रण और चुनावी तंत्र में हस्तक्षेप का प्रमाण बताया।\n\nविपक्ष से एकजुटता और बैलेट पेपर की वापसी की अपील\nआयोग की फाइलों पर अपनी असहमति दर्ज करने वाले दोनों आयुक्तों के कदम का स्वागत करते हुए ठाकरे ने देश के सभी विपक्षी दलों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर एकजुट हों। उनका कहना था कि चुनावी गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए एक राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन की आवश्यकता है। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के इस्तेमाल को बंद कर पारंपरिक मतपत्र यानी पेपर बैलेट व्यवस्था को फिर से लागू करने की मांग दोहराई।\n\nइस्तीफे और उच्चस्तरीय जांच की मांग\nमनसे नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल त्यागपत्र की मांग की। साथ ही, उन्होंने यह भी आग्रह किया कि आयोग के कामकाज को पर्दे के पीछे से निर्देशित करने वाले कथित तत्वों की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। ठाकरे ने कहा कि निष्पक्षता से समझौते के माहौल में चुनी गई सत्ता को भी पद छोड़ना चाहिए। उन्होंने टिप्पणी की कि किसी सरकार के निर्वाचन के बाद सड़कों पर जनता के बीच उत्साह या जश्न की कमी बहुत कुछ बयां करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक निर्वाचन आयोग पूरी तरह स्वायत्त नहीं होगा, लोकतांत्रिक प्रक्रिया की साख बहाल नहीं हो सकती।\n\nचुनावी नतीजों और लोकतांत्रिक चुनौती पर दो टूक\nसार्वजनिक सभाओं में भारी जनसमर्थन मिलने के बावजूद चुनावों में सीटें न जीत पाने के राजनीतिक विश्लेषकों के पुराने सवालों का उल्लेख करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि आयोग के भीतर से सामने आ रही बातें यह स्पष्ट करती हैं कि जनादेश कैसे प्रभावित होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संस्थागत निष्पक्षता को समय रहते पुनर्स्थापित नहीं किया गया, तो देश में लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धाओं का ढांचा स्थायी रूप से कमजोर हो जाएगा।\n\nइसका आप पर असर\nनिर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया और मतदाता सूची प्रबंधन पर उठे सवालों का सीधा असर आम नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा पर पड़ता है।\n\n• मतदाता सूची सत्यापन: नागरिक चुनाव से पहले मतदाता सूची में अपने नाम और विवरण की पुष्टि अनिवार्य रूप से कर लें। तकनीकी गड़बड़ियों या सूची संशोधन के दौरान नाम हटने की स्थिति में समय रहते सुधार की अपील की जा सकती है।\n• वोटिंग अधिकारों की सुरक्षा: मतदान केंद्र पर तकनीकी खराबी आने पर नागरिकों को तुरंत पीठासीन अधिकारी से शिकायत दर्ज करानी चाहिए। गोवा जैसे मामलों में 97 प्रमाणित वोटर मतदान से वंचित रह गए थे, इसलिए प्रक्रिया संबंधी जागरूकता आवश्यक है।\n• चुनावी सुधारों पर विमर्श: राजनीतिक दलों द्वारा बैलेट पेपर की वापसी की मांग भविष्य के चुनाव सुधारों और नियमों पर सार्वजनिक चर्चा को तेज करेगी। इससे आगामी चुनावों में मतदान प्रणाली को लेकर प्रशासनिक समीक्षा बढ़ सकती है।\n• पारदर्शिता की निगरानी: चुनाव आयोग की अंदरूनी कार्यशैली पर विपक्षी दलों की निगरानी बढ़ने से स्थानीय मतदान केंद्रों पर सतर्कता बढ़ेगी। मतदाता और राजनीतिक कार्यकर्ता पोलिंग बूथ स्तर पर नियमों के पालन को लेकर अधिक सजग रहेंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमहाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख द्वारा यह तीखा बयान चुनाव आयोग के आंतरिक कामकाज और फैसलों को लेकर सामने आई जानकारियों के बाद जारी किया गया है।\n\n• आयुक्तों के बीच असहमति: चुनाव आयुक्त संधू और जोशी द्वारा आधिकारिक फाइलों पर दर्ज की गई आपत्तियों के बाद यह विवाद खड़ा हुआ। आरोप है कि नीतिगत और प्रशासनिक निर्णय लेते समय पूरे तीन सदस्यीय आयोग की सहमति नहीं ली गई।\n• पश्चिम बंगाल और गोवा के मामले: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से संबंधित 16.1 लाख अपीलों और सॉफ्टवेयर बदलावों पर एकतरफा निर्देश जारी करने के आरोप सामने आए। इसके साथ ही गोवा में तकनीकी खामी के कारण 97 प्रमाणित मतदाताओं के वोट न डाल पाने की घटना ने नाराजगी बढ़ाई।\n• विपक्षी दलों की पुरानी आशंकाएं: महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में विपक्षी दल लंबे समय से चुनावी मशीनरी के पक्षपातपूर्ण रवैये का आरोप लगाते रहे हैं। आयोग के भीतर असहमति के विवरण सामने आने के बाद राज ठाकरे ने इसे अपने पुराने आरोपों की पुष्टि बताया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राज ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के बारे में क्या मांग रखी है?\nउन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे की मांग की है और आयोग के फैसलों को प्रभावित करने वाले कथित लोगों की स्वतंत्र जांच कराने को कहा है।\n\n2. चुनाव आयोग के किन सदस्यों की असहमति का जिक्र किया गया है?\nबयान में चुनाव आयुक्त संधू और जोशी का नाम लिया गया है, जिन्होंने महत्वपूर्ण प्रशासनिक मामलों पर अपनी असहमति दर्ज कराई थी।\n\n3. पश्चिम बंगाल और गोवा के किन मामलों का उल्लेख किया गया है?\nपश्चिम बंगाल में 16.1 लाख कानूनी अपीलों और नियमों में बदलाव का जिक्र है, जबकि गोवा में तकनीकी गड़बड़ी के कारण 97 प्रमाणित वोटरों के मतदान न कर पाने का मामला उठाया गया है।\n\n4. मतदान प्रणाली को लेकर मनसे प्रमुख ने क्या मांग की है?\nउन्होंने सभी आगामी चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को हटाकर पारंपरिक पेपर बैलेट यानी मतपत्रों के इस्तेमाल की वकालत की है।\n\n5. रैलियों में भीड़ और कम सीटों के सवाल पर ठाकरे ने क्या कहा?\nउन्होंने कहा कि आयोग के भीतर की गतिविधियों से साफ होता है कि जनादेश को किस तरह प्रभावित किया जाता है, जिसके कारण रैलियों का समर्थन सीटों में तब्दील नहीं हो पाया।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-09-24",
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