# सीआईएसएफ जवानों के प्रशासनिक काम होंगे पेपरलेस, डीआईसी संग करार से एक प्लेटफॉर्म पर जुड़ेंगे सभी डिजिटल सिस्टम

> हवाई अड्डों और संवेदनशील ठिकानों पर तैनात जवानों की छुट्टी, शिकायत और ड्यूटी फेरबदल के लिए सीआईएसएफ ने डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के साथ हाथ मिलाया है। अगले दो साल में तीन चरणों के तहत 40 से अधिक ऐप्स और 30 मॉड्यूल्स को एकीकृत कर क्लाउड-रेडी और मोबाइल फ्रेंडली बनाया जाएगा।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/cisf-javanon-ke-prashasanika-kama-honge-peparalesa-dic-snga-karara-se-eka-pletaphorma-para-jurenge-sabhi-dijitala-sistama-55933 · **Language:** Hindi
**Tags:** सीआईएसएफ, डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन, प्रशासनिक सुधार, प्रवीर रंजन, सोनिया नारंग, ई-गवर्नेंस, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल

देश के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और प्रमुख संवेदनशील औद्योगिक प्रतिष्ठानों की हिफाजत में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों को अब छुट्टी की अर्जी देने, रोजमर्रा की शिकायतें दर्ज कराने या ड्यूटी रोस्टर में बदलाव के लिए दफ्तरों की चौखट नहीं नापनी होगी। सुरक्षा बल अपने सभी मौजूदा डिजिटल पोर्टल्स और स्वतंत्र सॉफ्टवेयर टूल्स को एक ही छत के नीचे जोड़ने की व्यापक योजना पर आगे बढ़ रहा है। प्रशासनिक कार्यों में लगने वाले समय को कम करने और पूरी कार्यप्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी व पेपरलेस बनाने के उद्देश्य से इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के उपक्रम डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के साथ एक अहम रणनीतिक साझेदारी की गई है। 3 नवंबर 2026 को हुए इस समझौते के जरिए सुरक्षा बल अपने समग्र सूचना प्रौद्योगिकी ढांचे को अत्याधुनिक स्वरूप देने जा रहा है ताकि प्रत्येक जवान अपनी व्यक्तिगत व सेवा संबंधी जरूरतें सीधे मोबाइल फोन के जरिए पूरी कर सके।

 

## अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स को जोड़कर बनेगा एकीकृत क्लाउड नेटवर्क

बल में पहले से ही कई आंतरिक सॉफ्टवेयर सक्रिय हैं, जिन्हें अलग-अलग समयावधि में जरूरत के हिसाब से विकसित किया गया था। यद्यपि ये प्रणालियां सुचारू रूप से कार्य कर रही थीं, लेकिन एक-दूसरे से पूर्ण रूप से न जुड़े होने के कारण कर्मियों को विभिन्न सेवाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार वही व्यक्तिगत विवरण दर्ज करना पड़ता था। वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारियों को भी अलग-अलग सर्वरों और मॉड्यूल्स से आंकड़े जुटाकर समग्र समीक्षा रिपोर्ट तैयार करने में अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ती थी। नए करार का केंद्रीय ध्येय इन सभी बिखरी हुई डिजिटल सेवाओं को एक सुरक्षित, क्लाउड-रेडी और एकल एकीकृत व्यवस्था में पिरोना है। बल की आंतरिक तकनीकी शाखाओं ने जिन प्रणालियों की मजबूत नींव रखी थी, वे अब एक समेकित ढांचे में तब्दील होंगी जिससे कागजी कार्यवाही समाप्त होगी और वरिष्ठ नेतृत्व को वास्तविक समय पर सटीक सूचनाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

 

## लाखों डिजिटल लेन-देन और शिकायतों के त्वरित निस्तारण का रिकॉर्ड

आंतरिक तकनीकी विकास के मामले में यह सुरक्षा बल पहले से ही एक मजबूत डिजिटल धरातल तैयार कर चुका है। जवानों की सुविधा और प्रशासनिक पारदर्शिता को ध्यान में रखकर अब तक 40 से अधिक इन-हाउस मोबाइल एप्लिकेशन्स और 30 से ज्यादा विशेष प्रशासनिक मॉड्यूल विकसित किए जा चुके हैं। ई-ग्रीवांस पोर्टल के आंकड़े बताते हैं कि सितंबर 2016 से अब तक कुल 55,046 शिकायतें ऑनलाइन दर्ज की गईं, जिनमें से 53,043 मामलों का सफलतापूर्वक समाधान निकाला जा चुका है। यह सिद्ध करता है कि शिकायतों के निराकरण के लिए बल में पहले से ही एक पारदर्शी तंत्र कार्यरत है।

इसके अतिरिक्त ई-रिक्वेस्ट और ई-सर्विस बुक की कार्यक्षमता इतनी विस्तृत है कि जवान साप्ताहिक अवकाश, सामान्य छुट्टी और ड्यूटी बदलाव जैसी 40 से 50 श्रेणियों के आवेदन अपने निजी स्मार्टफोन से ही प्रेषित करते हैं। वरिष्ठ स्तर पर फाइलों और आधिकारिक पत्राचार को गति देने के लिए ई-ऑफिस प्रणाली पहले से सक्रिय है, जिसके माध्यम से अधिकारी किसी भी स्थान से फाइलों का निस्तारण कर सकते हैं। आयुष्मान योजना, मेस फीडबैक, वेलफेयर लोन और डीजी स्कॉलरशिप जैसे समर्पित पोर्टल्स ने जवानों के रोजमर्रा के जीवन को डिजिटल रूप से सशक्त बनाया है। इस डिजिटल प्रभाव का सबसे बड़ा प्रमाण लीव मैनेजमेंट सिस्टम है, जिसके जरिए अब तक 95 लाख से ज्यादा डिजिटल ट्रांजैक्शन सफलता पूर्वक पूरे किए जा चुके हैं।

 

## दो साल में तीन चरणों में लागू होगा समग्र कायाकल्प

डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के साथ हुआ यह आधुनिकीकरण प्रोजेक्ट आगामी दो वर्षों में तीन सुनियोजित चरणों में क्रियान्वित किया जाएगा। इस अपग्रेडेशन के पूरा होने पर जवानों को बार-बार अपनी जानकारी दोहराने की मजबूरी से मुक्ति मिलेगी। वे अपनी ओर से भेजी गई किसी भी अर्जी, अवकाश आवेदन अथवा प्रशासनिक अनुरोध की वास्तविक स्थिति को लाइव ट्रैक कर सकेंगे। इसके साथ ही महत्वपूर्ण विभागीय सूचनाएं, व्यक्तिगत स्वीकृतियां और प्रशासनिक अलर्ट्स स्वचालित मैसेजिंग व नोटिफिकेशन के जरिए सीधे उनके मोबाइल पर प्राप्त होंगे।

प्रशासनिक स्तर पर इस एकीकरण का गहरा असर देखने को मिलेगा। वरिष्ठ कमांडरों को अपने नियंत्रण कक्ष के एकल डैशबोर्ड पर बल के उपलब्ध कार्यबल, आवश्यक प्रशिक्षण सत्रों और साजो-सामान के वितरण से जुड़ी संपूर्ण जानकारी एक नजर में मिलेगी। इस सटीक और अद्यतन आंकड़े के आधार पर जवानों की तैनाती, विशेष अभियानों की रूपरेखा और आंतरिक संसाधनों का आवंटन अधिक वैज्ञानिक व प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

 

## साइबर सुरक्षा का मजबूत घेरा और संपूर्ण डेटा संप्रभुता

इस तकनीकी करार में सुरक्षा और निजता के कड़े मानकों का विशेष ध्यान रखा गया है। डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन की भूमिका मुख्य रूप से तकनीकी परामर्शदाता, सिस्टम आर्किटेक्चर की मजबूती और संभावित साइबर हमलों से सुरक्षा कवच प्रदान करने तक केंद्रित रहेगी। समझौते के नियमों के तहत पूरे सिस्टम का प्राथमिक डेटा नियंत्रण और संप्रभुता पूरी तरह केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के पास ही सुरक्षित रहेगी।

इस परियोजना के क्रियान्वयन में सुरक्षा बल की अपनी समर्पित आंतरिक तकनीकी टीम अग्रिम मोर्चे पर कार्य करेगी, जबकि डीआईसी उन्हें उभरती तकनीकों, एडवांस्ड कोडिंग, आधुनिक आर्किटेक्चर और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में तकनीकी मार्गदर्शन तथा विशेष प्रशिक्षण सत्र मुहैया कराएगा। यह सहयोग सालाना लाखों डिजिटल लेन-देन संभालने वाले इस सुरक्षा बल को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए पूरी तरह सक्षम बनाएगा।

 

## एमओयू पर शीर्ष अधिकारियों की उपस्थिति में हुए हस्ताक्षर

मुख्यालय में आयोजित इस रणनीतिक सहमति पत्र के हस्ताक्षर समारोह के दौरान केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के महानिदेशक प्रवीर रंजन तथा डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक अखिल कुमार मुख्य रूप से उपस्थित रहे। समझौते के आधिकारिक दस्तावेजों पर सीआईएसएफ की ओर से आईजी (टेक्नोलॉजी) सोनिया नारंग और डीआईसी की तरफ से चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर देवव्रत नायक ने विधिवत हस्ताक्षर कर इस तकनीकी कायाकल्प की औपचारिक शुरुआत की।

## इसका आप पर असर
सीआईएसएफ में सेवारत कर्मियों और उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर आम जनता दोनों के लिए यह तकनीकी एकीकरण कई व्यावहारिक बदलाव लेकर आएगा।

- **सीआईएसएफ कर्मियों के लिए:** छुट्टी, ड्यूटी फेरबदल और शिकायत निवारण से जुड़े 40 से 50 तरह के प्रशासनिक आवेदन अब अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर काटे बिना सीधे एक मोबाइल ऐप से निपटाए जा सकेंगे। फाइलों के स्टेटस की लाइव ट्रैकिंग मिलने से स्वीकृति में होने वाली देरी खत्म होगी और अनावश्यक कागजी भागदौड़ से राहत मिलेगी।
- **पारदर्शिता और समय की बचत:** अलग-अलग पोर्टलों पर एक ही व्यक्तिगत जानकारी बार-बार भरने की झंझट समाप्त हो जाएगी। स्वचालित अलर्ट और नोटिफिकेशन के जरिए हर प्रशासनिक निर्णय की सूचना तुरंत जवान के मोबाइल पर पहुंचेगी।
- **संवेदनशील ठिकानों की सुरक्षा:** कागजी औपचारिकताओं में लगने वाला समय बचने से सुरक्षा बल अपनी प्राथमिक ड्यूटी यानी एयरपोर्ट और औद्योगिक प्रतिष्ठानों की चौकसी पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेगा। वरिष्ठ अधिकारियों को जवानों की तैनाती और रोटेशन का सटीक डेटा मिलने से सुरक्षा घेरा अधिक चुस्त होगा।
- **सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी:** साइबर हमलों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकी कवच तैयार होगा और जवानों का संवेदनशील सेवा रिकॉर्ड पूरी तरह सीआईएसएफ के अपने नियंत्रण में सुरक्षित रहेगा। डेटा लीक या अनाधिकृत पहुंच की आशंकाओं पर पूर्ण विराम लगेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
सीआईएसएफ द्वारा अलग-अलग समय पर तैयार किए गए दर्जनों स्वतंत्र ऐप्स और मॉड्यूल्स का बिखराव इस आधुनिकीकरण समझौते की मुख्य वजह बना। प्रशासनिक प्रक्रियाओं को कागजरहित बनाने और साइबर सुरक्षा को भविष्योन्मुखी रूप देने के लिए यह कदम उठाया गया है।

- **स्वतंत्र पोर्टल्स का बिखराव:** बल ने समय-समय पर जवानों की जरूरतों के मुताबिक 40 से अधिक ऐप्स और 30 प्रशासनिक मॉड्यूल विकसित किए थे, लेकिन उनके आपस में लिंक न होने से कर्मियों को बार-बार डाटा भरना पड़ता था। इस बिखरे हुए सिस्टम को एक केंद्रीकृत और क्लाउड-रेडी प्लेटफॉर्म पर लाना अनिवार्य हो गया था।
- **प्रशासनिक समीक्षा में जटिलता:** अलग-अलग डेटाबेस होने के कारण वरिष्ठ अधिकारियों को मैनपावर, ट्रेनिंग और संसाधनों से जुड़ी समेकित रिपोर्ट तैयार करने में काफी वक्त लगता था। एकल एकीकृत डैशबोर्ड की गैरमौजूदगी के चलते त्वरित रणनीतिक निर्णय लेने में बाधा आ रही थी।
- **डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन की विशेषज्ञता:** बल के पास पहले से 95 लाख से अधिक लीव ट्रांजैक्शन और 55 हजार से ज्यादा शिकायतों को संभालने का डिजिटल अनुभव था, परंतु इसे आधुनिक साइबर सुरक्षा और क्लाउड आर्किटेक्चर से लैस करने के लिए डीआईसी के तकनीकी मार्गदर्शन की आवश्यकता थी।

## सवाल-जवाब

### 1. सीआईएसएफ ने अपने सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए किसके साथ समझौता किया है?
सीआईएसएफ ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (डीआईसी) के साथ यह रणनीतिक समझौता किया है।

### 2. यह आधुनिकीकरण प्रोजेक्ट कितने समय में और कितने चरणों में पूरा होगा?
यह संपूर्ण अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट आगामी दो वर्षों की अवधि में कुल तीन सुनियोजित चरणों में पूरा किया जाएगा।

### 3. सीआईएसएफ के ई-ग्रीवांस पोर्टल पर अब तक कितनी शिकायतें सुलझाई गई हैं?
सितंबर 2016 से अब तक पोर्टल पर दर्ज कुल 55,046 शिकायतों में से 53,043 का सफलतापूर्वक समाधान किया जा चुका है।

### 4. बल के लीव मैनेजमेंट सिस्टम पर अब तक कितने डिजिटल लेन-देन दर्ज किए जा चुके हैं?
सीआईएसएफ के लीव मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए अब तक 95 लाख से अधिक डिजिटल ट्रांजैक्शन पूरे किए जा चुके हैं।

### 5. क्या इस समझौते के बाद जवानों के डेटा का नियंत्रण किसी बाहरी एजेंसी के पास जाएगा?
नहीं, समझौते के तहत तकनीकी विशेषज्ञता डीआईसी देगा, लेकिन सभी डेटा का पूरा नियंत्रण और स्वामित्व सीआईएसएफ के पास ही रहेगा।

### 6. इस समझौते पर किन वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए हैं?
सीआईएसएफ की ओर से आईजी (टेक्नोलॉजी) सोनिया नारंग और डीआईसी की ओर से सीटीओ देवव्रत नायक ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।

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