हवाई अड्डों को अदृश्य डिजिटल हमलों से बचाने के लिए सीआईएसएफ के 40 कर्मियों को मिली उच्चस्तरीय साइबर सुरक्षा ट्रेनिंग दिल्ली के प्रतिष्ठित फॉरेंसिक संस्थानों में 84 दिनों का गहन पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद सीआईएसएफ के 40 सुरक्षाकर्मियों को संवेदनशील हवाई अड्डों पर आधुनिक साइबर चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। हवाई अड्डों और अति-संवेदनशील राष्ट्रीय परिसंपत्तियों की जमीनी सुरक्षा व्यवस्था संभालने के बाद अब केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने डिजिटल मोर्चे पर अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विभिन्न हवाई अड्डा सुरक्षा समूहों से चुने गए 40 सुरक्षाकर्मियों ने हाल ही में 84 दिनों का कड़ा तकनीकी प्रशिक्षण सफलता से पूरा किया है। सामान्य ड्यूटी पोस्ट और पहरेदारी से इतर इन कर्मियों ने कई सप्ताह कक्षाओं में बिताए, जहां आधुनिक डिजिटल युद्ध और जटिल तकनीकी तंत्र से जुड़े विषयों को गहराई से समझा गया। इस लंबी प्रक्रिया का मुख्य लक्ष्य देश के सबसे संवेदनशील विमानन केंद्रों को उन डिजिटल सेंधमारियों और तकनीकी खतरों से सुरक्षित रखना है, जो बिना किसी प्रत्यक्ष हलचल के गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। राष्ट्रीय फॉरेंसिक संस्थानों में आयोजित हुआ 84 दिनों का विशेष सत्र इस तकनीकी क्षमता निर्माण कार्यक्रम की रूपरेखा खास तौर पर उभरते खतरों को ध्यान में रखकर तैयार की गई थी। दिल्ली स्थित लोक नायक जयप्रकाश नारायण नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी एंड फॉरेंसिक साइंस तथा नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी के संयुक्त मार्गदर्शन में जवानों को 84 दिनों का कड़ा अभ्यास कराया गया। यह कार्यक्रम ‘साइबर सिक्योरिटी एंड इंसिडेंट रिस्पॉन्स’ शीर्षक के तहत 13 जुलाई 2026 को शुरू हुआ था, जिसका औपचारिक समापन 8 अक्टूबर को हुआ। इस पूरे सत्र में देश भर के अलग-अलग एयरपोर्ट सिक्योरिटी ग्रुप्स से जुड़े 40 कर्मियों ने भागीदारी की, ताकि वे जमीनी सुरक्षा के साथ-साथ डिजिटल बुनियादी ढांचे पर होने वाले खतरों से भी प्रभावी ढंग से निपट सकें। पहचान से लेकर त्वरित समाधान और डिजिटल फॉरेंसिक का गहन अभ्यास यह पाठ्यक्रम केवल सैद्धांतिक व्याख्यानों तक सीमित नहीं था, बल्कि जवानों को वास्तविक हमलों की स्थिति में काम करने के तौर-तरीके सिखाए गए। प्रशिक्षण के दौरान डिजिटल खतरों के बदलते परिदृश्य, नेटवर्क और सिस्टम सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र जैसे जटिल क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रतिभागियों को सिखाया गया कि किसी संदिग्ध नेटवर्क गतिविधि की पहचान समय रहते कैसे की जाए और यदि सिस्टम पर कोई अनधिकृत हमला होता है, तो किस तरह न्यूनतम समय में जवाबी कदम उठाकर नुकसान को रोका जाए। इसका प्राथमिक उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण सुरक्षा ढांचे को उन भावी तकनीकी खतरों से अभेद्य बनाना है, जो विमानन सेवाओं में बाधा डाल सकते हैं। महत्वपूर्ण तकनीकी प्रतिष्ठानों के दौरों से मिला व्यावहारिक अनुभव कक्षाओं में अध्ययन के साथ-साथ जवानों को वास्तविक कार्यप्रणाली समझाने के लिए कई प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों और तकनीकी केंद्रों का व्यावहारिक दौरा भी कराया गया। इनमें आईएफएसओ, सीएफएसएल, पावरग्रिड, डीएमआरसी और यूआईडीएआई जैसी प्रमुख संस्थाएं शामिल रहीं। इन विशेष दौरों के माध्यम से प्रतिभागियों ने देखा कि जटिल और संवेदनशील परिचालन वातावरण में डिजिटल फॉरेंसिक जांच, नेटवर्क सुरक्षा और इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम किस प्रकार चौबीसों घंटे सक्रिय रहते हैं। वास्तविक दुनिया के इन ऑपरेशंस को करीब से देखने से जवानों को यह समझने में मदद मिली कि उच्च जोखिम वाले सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में तकनीकी निगरानी कैसे काम करती है। बदलती चुनौतियों के बीच क्षमता संवर्धन पर जोर प्रशिक्षण सत्र के समापन पर आयोजित दीक्षांत समारोह में एनएफएसयू दिल्ली परिसर की उप निदेशक प्रो. (डॉ.) मीनाक्षी सिन्हा, प्रो. (कर्नल) निधिश भटनागर और सीआईएसएफ मुख्यालय के एआईजी सुब्रत झा समेत कई वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे। इस अवसर पर अधिकारियों ने रेखांकित किया कि साइबर खतरों के निरंतर जटिल होते परिवेश को देखते हुए बल की तकनीकी क्षमताओं का निरंतर नवीनीकरण आवश्यक है। समापन सत्र में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि प्रशिक्षण के दौरान हासिल की गई तकनीकी समझ और डिजिटल फॉरेंसिक कौशल को अब हवाई अड्डों के दैनिक सुरक्षा संचालन में पूरी मुस्तैदी के साथ लागू किया जाएगा। इसका आप पर असर संवेदनशील हवाई अड्डों पर साइबर प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती से यात्रियों के डेटा और उड़ान परिचालन प्रणाली की डिजिटल सुरक्षा काफी मजबूत होगी। • हवाई यात्रियों के लिए: हवाई अड्डों के डिजिटल सिस्टम सुरक्षित होने से टिकट, बैगेज ट्रैकिंग और चेक-इन नेटवर्क पर साइबर हमलों का खतरा कम होगा। इससे यात्रियों को उड़ानों में तकनीकी खराबी या सिस्टम ठप होने जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। • विमानन बुनियादी ढांचे पर: हवाई अड्डा सुरक्षा समूहों के पास त्वरित साइबर रिस्पॉन्स टीम मौजूद रहने से किसी भी नेटवर्क सेंधमारी का तुरंत पता लगाया जा सकेगा। परिणामस्वरूप महत्वपूर्ण संचार और नेविगेशन नेटवर्क अनधिकृत हस्तक्षेप से सुरक्षित रहेंगे। • डिजिटल डेटा सुरक्षा में: हवाई अड्डों से जुड़े संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा और पहचान प्रणालियों पर निगरानी और कड़ी होगी। इससे पहचान से जुड़े डेटा लीक या छेड़छाड़ की संभावनाओं पर समय रहते रोक लगेगी। • राष्ट्रीय सुरक्षा परिप्रेक्ष्य: संवेदनशील ठिकानों पर आधुनिक युद्ध के नए तरीकों से निपटने की क्षमता बढ़ने से समग्र सुरक्षा चक्र मजबूत होगा। इससे भविष्य के तकनीकी खतरों से निपटने के लिए सुरक्षा बलों की तैयारी और बेहतर होगी। ऐसा क्यों हुआ आधुनिक दौर में संवेदनशील सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर भौतिक हमलों के साथ-साथ अदृश्य साइबर हमलों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। • आधुनिक युद्ध का बदलता स्वरूप: वर्तमान समय में क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को बाधित करने के लिए डिजिटल सेंधमारी को प्रमुख हथियार बनाया जा रहा है। इसी कारण पारंपरिक पहरेदारी के साथ-साथ तकनीकी सुरक्षा को अनिवार्य माना गया। • विमानन नेटवर्क की तकनीकी निर्भरता: हवाई अड्डों का परिचालन पूरी तरह से इंटरकनेक्टेड डिजिटल सिस्टम, सर्वर और संचार नेटवर्क पर टिका है। किसी भी सिस्टम में गड़बड़ी हजारों यात्रियों और उड़ानों के संचालन को तुरंत प्रभावित कर सकती है। • विशेषज्ञता की आवश्यकता: साधारण सुरक्षा प्रक्रियाओं से डिजिटल हमलों का मुकाबला करना संभव नहीं होता, जिसके लिए विशेष फॉरेंसिक और इंसिडेंट रिस्पॉन्स कौशल की जरूरत होती है। इसी कमी को दूर करने के लिए शीर्ष फॉरेंसिक संस्थानों से जवानों को प्रशिक्षित कराया गया। सवाल-जवाब 1. सीआईएसएफ के कितने जवानों को यह विशेष साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण दिया गया है? इस विशेष कार्यक्रम के तहत विभिन्न एयरपोर्ट सिक्योरिटी ग्रुप्स से जुड़े 40 सीआईएसएफ जवानों को प्रशिक्षित किया गया है। 2. यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कितने समय तक चला और कब समाप्त हुआ? यह 84 दिनों का प्रशिक्षण कार्यक्रम था, जो 13 जुलाई 2026 को शुरू हुआ और 8 अक्टूबर को संपन्न हुआ। 3. यह ट्रेनिंग किन प्रमुख संस्थानों में आयोजित की गई थी? यह प्रशिक्षण दिल्ली स्थित लोक नायक जयप्रकाश नारायण नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी एंड फॉरेंसिक साइंस और नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी में आयोजित किया गया। 4. प्रशिक्षण के दौरान जवानों को किन विषयों की जानकारी दी गई? जवानों को साइबर अटैक की पहचान, नेटवर्क और सिस्टम सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक तथा इंसिडेंट रिस्पॉन्स जैसे अहम विषयों पर व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। 5. व्यावहारिक अनुभव के लिए जवानों ने किन प्रमुख संस्थानों का दौरा किया? जवानों ने आईएफएसओ, सीएफएसएल, पावरग्रिड, डीएमआरसी और यूआईडीएआई जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं का दौरा कर वास्तविक संचालन को समझा। https://trendkia.com/national/cisf-ne-40-javanon-ko-di-hai-teka-saibara-treninga-airports-para-snbhalenge-suraksha-44804 TrendKia — Har trend, sabse pehle.