# कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को एसईएम कोर्ट से सशर्त जमानत मिली

> दिल्ली की एक अदालत ने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दिपके को शांति बनाए रखने और बॉन्ड भरने की शर्त पर जमानत दे दी है। उन्हें हाल ही में कनॉट प्लेस में प्रस्तावित रैली से पहले हिरासत में लिया गया था।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/cockroach-janata-party-chief-abhijit-dipke-ko-sem-court-seconditional-bail-48682 · **Language:** Hindi
**Tags:** अभिजीत दिपके, कॉकरोच जनता पार्टी, दिल्ली पुलिस, कनॉट प्लेस, एसईएम कोर्ट, तिरंगा रैली, जमानत

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और प्रमुख अभिजीत दिपके को स्थानीय अदालत से बड़ी राहत मिली है। सब-डिविजनल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट अदालत ने उन्हें कुछ विशेष शर्तों के आधार पर जमानत मंजूर कर ली है। अदालत के निर्देशानुसार उन्हें जमानती बॉन्ड के साथ ही शांति बनाए रखने का मुचलका भी भरना होगा। इस कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि वे भविष्य में ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल न हों जिससे क्षेत्र की शांति व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा पैदा हो। सभी आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा किए जाने के बाद उन्हें रिहाई मिल जाएगी।

## कनॉट प्लेस में प्रस्तावित रैली के दौरान हुई थी कार्रवाई
अभिजीत दिपके को शुक्रवार को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क इलाके से हिरासत में लिया गया था। उस समय उनकी पार्टी द्वारा वहां 'लहरा दो तिरंगा' रैली आयोजित करने की योजना बनाई गई थी। इसके अगले दिन यानी शनिवार को उन्हें मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से सुनवाई के बाद उन्हें शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश जारी हुआ।

## पार्टी की ओर से गिरफ्तारी पर उठाए गए थे गंभीर सवाल
इस पूरी कार्रवाई के दौरान राजनीतिक दल की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया था कि उनके नेता को हिरासत में ले लिया गया है। उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया था कि शुरुआती घंटों में अभिजीत दिपके की सही लोकेशन की जानकारी नहीं मिल पा रही थी और वकीलों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।

## अन्य सह-संयोजकों पर भी हो चुकी है कानूनी कार्रवाई
इससे पहले इसी राजनीतिक दल के दो अन्य सह-संयोजकों, सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ भी पुलिस ने सख्त कदम उठाए थे। दोनों को 13 अक्टूबर के दिन जंतर-मंतर परिसर में चुपचाप प्रवेश करने और वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराने के आरोप में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया था जब प्रदर्शन के लिए अधिकृत माने जाने वाले जंतर-मंतर स्थल को एक दिन पहले ही आधिकारिक अधिसूचना के जरिए प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया गया था।

## एक हफ्ते के भीतर दूसरी बार हुई हिरासत की घटना
पिछले सात दिनों के भीतर यह दूसरा अवसर था जब दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके को अपनी हिरासत में लिया। इससे पहले जब वे मुंबई से यात्रा करके राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे थे, तभी उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया गया था। उस समय मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ वोटर लिस्ट में कथित धांधली को लेकर 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' यानी एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में प्रदर्शन आयोजित किया जाना था।

## पुलिस की ओर से पहले ही जारी किया गया था आधिकारिक नोटिस
शुक्रवार को निर्धारित रैली से ठीक पहले पुलिस प्रशासन ने कॉकरोच जनता पार्टी प्रमुख को एक चेतावनी नोटिस भेजा था। इस नोटिस में स्पष्ट किया गया था कि कनॉट प्लेस किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन के लिए अधिकृत स्थान नहीं है। इसके अलावा नई दिल्ली नगर परिषद यानी एनडीएमसी ने भी इस प्रस्तावित तिरंगा यात्रा के लिए किसी तरह की अनुमति जारी नहीं की थी।

## भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों का हवाला
प्रशासन द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के अंतर्गत यह नोटिस जारी करते हुए साफ चेतावनी दी गई थी कि क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू है और ऐसे में मार्च निकालना या भीड़ जुटाना नियमों का सीधा उल्लंघन होगा। पुलिसकर्मियों के साथ अपने आवास पर बातचीत के दौरान अभिजीत दिपके ने इस कार्रवाई के आधार पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन पर किस तरह का आरोप लगाया गया है।

## ध्वज संहिता और नियमों को लेकर दी गई थी स्पष्टता
जब पुलिस अधिकारियों ने उन्हें यह बताया कि वे नई दिल्ली इलाके में आगे नहीं बढ़ सकते और उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है, तब उन्होंने यह भी सवाल किया था कि क्या वे किसी अन्य स्थान पर जा सकते हैं और उन्होंने कौन सा कानून तोड़ा है। इस दौरान पुलिस ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन बिना किसी वैध अनुमति के जुलूस निकालना और पाबंदियों के बीच भीड़ इकट्ठा करना कानूनी कार्रवाई को आमंत्रित करता है। साथ ही उन्हें राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से जुड़े फ्लैग कोड के नियमों का पालन करने की बात भी याद दिलाई गई।

## इसका आप पर असर
यह कानूनी घटनाक्रम उन राजनीतिक कार्यकर्ताओं और समूहों के लिए सीधे तौर पर महत्वपूर्ण है जो राजधानी में सार्वजनिक प्रदर्शन या रैलियों की योजना बनाते हैं।

- **भारत में:** स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा निषेधाज्ञा लागू होने पर बिना अनुमति भीड़ जुटाने या मार्च निकालने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- **दिल्ली में:** कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर बिना प्रशासनिक अनुमति के किसी भी तरह का जुलूस निकालने पर पुलिस तुरंत प्रिवेंटिव एक्शन लेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पूरी कार्रवाई दिल्ली पुलिस द्वारा निषेधाज्ञा के उल्लंघन और बिना अनुमति के सार्वजनिक प्रदर्शन आयोजित करने की कोशिशों के कारण की गई। अधिकारियों ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया।

- **निषेधाज्ञा का उल्लंघन:** पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत कनॉट प्लेस में धारा लागू होने का हवाला देते हुए मार्च की अनुमति नहीं दी थी।
- **पूर्व घटनाएं:** इससे पहले इसी पार्टी के सदस्यों द्वारा जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रवेश और वोटर लिस्ट के मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन किए जाने के कारण पुलिस पहले से ही सतर्क थी।
- **न्यायालय की शर्तें:** एसईएम अदालत ने भविष्य में शांति बनाए रखने और दोबारा इस तरह की गतिविधियों में शामिल न होने के मुचलके पर ही जमानत प्रदान की है।

## सवाल-जवाब

### 1. अभिजीत दिपके कौन हैं?
अभिजीत दिपके कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और प्रमुख हैं।

### 2. उन्हें किस अदालत से जमानत मिली है?
उन्हें दिल्ली की सब-डिविजनल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट अदालत से जमानत मिली है।

### 3. उन्हें क्यों हिरासत में लिया गया था?
कनॉट प्लेस में प्रस्तावित 'लहरा दो तिरंगा' रैली से पहले निषेधाज्ञा के उल्लंघन के आरोप में उन्हें हिरासत में लिया गया था।

### 4. अभिजीत दिपके को जमानत के साथ क्या शर्तें दी गईं?
उन्हें जमानती बॉन्ड भरने के साथ शांति बनाए रखने का बांड भरने की शर्त दी गई है।

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