वोटर लिस्ट में फिर जुड़ेंगे कटे हुए नाम, चुनाव आयोग ने 7 राज्यों के मतदाताओं को दिया बड़ा मौका भारत निर्वाचन आयोग ने उन मतदाताओं के लिए एक नया अवसर प्रदान किया है जिनके नाम अनुपस्थित, शिफ्टेड, मृत या डुप्लीकेट श्रेणी में हटा दिए गए थे। अब दिल्ली, महाराष्ट्र और हरियाणा समेत सात राज्यों के नागरिक अपनी पात्रता के अनुसार दोबारा प्रक्रिया पूरी कर सूची में नाम शामिल करवा सकते हैं। मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की चिंता अक्सर नागरिकों को परेशान करती है, लेकिन इस बार निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण राहत दी है। यदि आपका नाम भी गलती से अनुपस्थित, शिफ्टेड, मृत या डुप्लीकेट यानी एएसडीडी श्रेणी में डालकर सूची से बाहर कर दिया गया था, तो अब घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। भारत निर्वाचन आयोग ने दिल्ली, महाराष्ट्र और हरियाणा सहित कुल सात राज्यों के मतदाताओं को एक विशेष अवसर प्रदान किया है। इस प्रक्रिया के तहत नागरिक बिना किसी बड़ी बाधा के अपना नाम अंतिम मतदाता सूची में वापस जुड़वा सकते हैं। आयोग ने अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि तकनीक और बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ की सहायता से सीधे आम नागरिकों तक संपर्क साधा जाए। इसके लिए व्हाट्सएप, ईमेल और टेक्स्ट मैसेज के माध्यम से एन्यूमरेशन फॉर्म भेजे जा रहे हैं, ताकि कोई भी पात्र मतदाता अपने इस लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न रह जाए। अपनी स्थिति को सुरक्षित करने का यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है। चुनाव आयोग का नया निर्णय और सूचियों का प्रकाशन निर्वाचन आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिन नागरिकों के नाम एन्यूमरेशन फॉर्म समय पर वापस न मिलने के कारण ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो पाए थे, उनकी बूथवार सूचियां दोबारा से जारी की जाएंगी। यह सूची संबंधित मतदान केंद्रों, पंचायत भवनों, निकाय कार्यालयों और सीईओ की आधिकारिक वेबसाइट पर पढ़ने योग्य पीडीएफ प्रारूप में उपलब्ध कराई जाएगी। इस विशेष सूची में नाम न जुड़ पाने का स्पष्ट कारण भी दर्ज होगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। नाम दोबारा जुड़वाने की पूरी प्रक्रिया और माध्यम मतदाताओं को अपने संबंधित ईआरओ या एआरओ के पास अपने सामान्य निवास के आधार पर एन्यूमरेशन फॉर्म जमा करने की सुविधा दी जाएगी। ईसिनेट के ईआरओ डैशबोर्ड के माध्यम से आंशिक रूप से भरे गए फॉर्म फिर से तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा नागरिकों की सुविधा के लिए कई अन्य कदम उठाए गए हैं जिनके तहत संपर्क विवरण उपलब्ध होने पर व्हाट्सएप, ईमेल और एसएमएस के माध्यम से फॉर्म सीधे भेजे जाएंगे। नागरिक अपने पुराने एपिक नंबर का इस्तेमाल करके ईसिनेट ऐप या वेबसाइट से सीधे फॉर्म डाउनलोड भी कर सकते हैं। इसके अलावा बूथ लेवल अधिकारी राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों के साथ तालमेल बिठाकर घर-घर जाकर संपर्क स्थापित करेंगे। पता बदलने और न बदलने वाले मतदाताओं के लिए नियम जिन मतदाताओं का पता नहीं बदला है, वे अपना भरा हुआ और हस्ताक्षर किया हुआ एन्यूमरेशन फॉर्म एनेक्स्चर-बी में दिए गए बयान के साथ स्वयं या अपने परिवार के माध्यम से जमा करा सकते हैं। जिन लोगों का पता राज्य के भीतर ही बदला है, उन्हें नया फॉर्म-8 भरने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे नागरिक अपने नए पते की जानकारी के साथ एनेक्स्चर-सी में दिए गए बयान और निवास प्रमाण पत्र को जमा करवा सकते हैं। इसके अलावा जिन लोगों ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान नए पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 पहले ही जमा कर दिया है, उन्हें दोबारा फॉर्म भरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। प्राप्त होने वाले सभी आवेदनों का निस्तारण रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के नियम 21(1) के प्रावधानों के तहत किया जाएगा और जिन मतदाताओं के आवेदन स्वीकृत होंगे, उन्हें उनका पुराना एपिक नंबर ही वापस आवंटित कर दिया जाएगा। इसका आप पर असर वोटर लिस्ट में नाम जुड़ने या कटने की प्रक्रिया का सीधा असर नागरिकों के मतदान अधिकारों पर पड़ता है, जिससे आगामी चुनावों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होती है। • भारत में: देश के सात राज्यों के प्रभावित मतदाता अब बिना नए सिरे से लंबी कागजी प्रक्रिया के अपनी सूची में नाम वापस पा सकते हैं। यह नियम उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जिनके नाम तकनीकी त्रुटियों के कारण हटाए गए थे। • दिल्ली, महाराष्ट्र और हरियाणा में: इन प्रमुख राज्यों के स्थानीय निवासी अपने छूटे हुए नामों को बूथ स्तर पर प्रकाशित होने वाली सूचियों के जरिए आसानी से सत्यापित और दुरुस्त करवा सकेंगे। इससे स्थानीय चुनावों और आगामी मतदान प्रक्रियाओं में उनके मताधिकार की सुरक्षा होगी। ऐसा क्यों हुआ मतदाता सूचियों से नाम कटने और उनके पुनः सुधार की यह प्रक्रिया निर्वाचन आयोग द्वारा प्रशासनिक शुद्धता और तकनीकी समन्वय के तहत संचालित की जा रही है। • तकनीकी और फॉर्म संबंधी त्रुटियां: एन्यूमरेशन फॉर्म समय पर वापस न मिलने और एएसडीडी श्रेणी में नाम दर्ज होने के कारण कई पात्र मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हो गए थे। • डिजिटल माध्यमों का उपयोग: प्रक्रिया को पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए आयोग ने व्हाट्सएप, ईमेल, एसएमएस और ईसिनेट डैशबोर्ड जैसी डिजिटल तकनीकों का उपयोग करने का निर्णय लिया है। • कानूनी प्रावधान: प्राप्त सभी आवेदनों का निस्तारण रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के नियम 21(1) के अंतर्गत तय कानूनी प्रावधानों के तहत किया जा रहा है। सवाल-जवाब 1. किन राज्यों के मतदाताओं को वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने का मौका मिला है? दिल्ली, महाराष्ट्र और हरियाणा समेत कुल 7 राज्यों के मतदाताओं को यह मौका मिला है। 2. किन श्रेणियों में नाम कटने वाले लोग इस प्रक्रिया का लाभ उठा सकते हैं? जिनके नाम अनुपस्थित, शिफ्टेड, मृत या डुप्लीकेट यानी एएसडीडी श्रेणी में डालकर हटाए गए थे। 3. सूची में नाम न जुड़ने का कारण कहां देखा जा सकता है? यह जानकारी मतदान केंद्रों, पंचायत भवनों, निकाय कार्यालयों और सीईओ की वेबसाइट पर उपलब्ध पीडीएफ सूचियों में मिलेगी। 4. क्या राज्य के भीतर पता बदलने वाले लोगों को फॉर्म-8 भरना होगा? नहीं, ऐसे लोगों को फॉर्म-8 भरने की जरूरत नहीं है, वे एनेक्स्चर-सी में बयान और निवास प्रमाण दे सकते हैं। 5. आवेदन स्वीकार होने पर मतदाताओं को कौन सा एपिक नंबर मिलेगा? स्वीकृत मतदाताओं को उनका पुराना एपिक नंबर ही वापस आवंटित किया जाएगा। https://trendkia.com/national/deleted-names-to-be-restored-in-voter-lists-across-7-states-by-election-commission-57158 TrendKia — Har trend, sabse pehle.