# दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 45 पन्नों का घोषणापत्र पारित, भारत को मिली बड़ी कूटनीतिक बढ़त

> नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन के समापन पर सभी सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से 45 पृष्ठों का घोषणापत्र स्वीकार किया, जिसमें सीमा पार आतंकवाद और उसकी फंडिंग पर कड़ा रुख अपनाया गया है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/delhi-brics-shikhara-sammelana-men-45-pannon-ka-ghoshanapatra-parita-india-ko-mili-bari-kutanitika-barhata-31532 · **Language:** Hindi
**Tags:** ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, नई दिल्ली घोषणापत्र, आतंकवाद, पहलगाम हमला, विदेश नीति, भारत मंडपम

भारत की राजधानी नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में दो दिनों तक चले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन अवसर पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि हासिल हुई है। सम्मेलन में शामिल सभी सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से ब्रिक्स नई दिल्ली संयुक्त घोषणापत्र 2026 को अपनी स्वीकृति दे दी है। कुल 45 पृष्ठों में फैले इस ऐतिहासिक दस्तावेज में वैश्विक सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और विशेष रूप से आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया गया है। भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीमा पार आतंकवाद, आतंक की फंडिंग और आतंकवादियों को मिलने वाली पनाहगाहों का मुद्दा उठाता रहा है। इस घोषणापत्र में शामिल भाषा और बिंदु भारत के उन्हीं दीर्घकालिक रुख और सुरक्षा चिंताओं को प्रमुखता से रेखांकित करते हैं। हालांकि दस्तावेज में पड़ोसी देश पाकिस्तान का नाम सीधे तौर पर शामिल नहीं किया गया है, लेकिन इसके बावजूद जिस तरह से आतंकवादी नेटवर्क, फंडिंग और सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने की मांग की गई है, उसे वैश्विक मंच पर भारत की एक बड़ी और प्रभावशाली रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।

## सीमा पार आतंकवाद और पनाहगाहों के खिलाफ कड़ा रुख
ब्रिक्स के इस 45 पन्नों के घोषणापत्र में आतंकवादी गतिविधियों को लेकर किसी भी प्रकार की ढील न देने की बात कही गई है। सदस्य देशों ने एक स्वर में यह घोषणा की है कि आतंकवाद का कोई भी रूप या अभिव्यक्ति हो, वह पूरी तरह से आपराधिक और किसी भी स्थिति में अनुचित है। चाहे आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने के पीछे कोई भी तर्क दिया जाए, किसी भी स्थान पर इसे अंजाम दिया जाए या फिर इसे करने वाला कोई भी व्यक्ति या समूह हो, इसे किसी भी आधार पर जायज नहीं ठहराया जा सकता। घोषणापत्र में इस बात पर विशेष बल दिया गया है कि सभी सदस्य देश आतंकवाद के हर स्वरूप से मुकाबला करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।

घोषणापत्र का यह हिस्सा भारत के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। इसमें स्पष्ट रूप से सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकवाद, आतंकवादी संगठनों की वित्तीय सहायता यानी फंडिंग को रोकने और आतंकवादियों को दी जाने वाली सुरक्षित शरणस्थलियों तथा पनाहगाहों को पूरी तरह नष्ट करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। भारत वर्षों से यह बात दोहराता रहा है कि जब तक आतंकवादियों की फंडिंग लाइन और उनकी पनाहगाहों पर रोक नहीं लगाई जाएगी, तब तक इस खतरे का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इस संयुक्त दस्तावेज में इन सभी बिंदुओं का समावेश यह दर्शाता है कि ब्रिक्स के सभी सदस्य देश भारत की इन चिंताओं की गहराई को भली-भांति समझते हैं और इस पर एक साझा रणनीति बनाने के पक्षधर हैं।

## पहलगाम आतंकी हमले की निंदा का अंतरराष्ट्रीय संदेश
घोषणापत्र में शामिल सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहलुओं में से एक जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भयावह आतंकी हमले का स्पष्ट उल्लेख और उसकी कड़ी निंदा है। उल्लेख किया गया है कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए इस कायराना आतंकी हमले में 26 मासूम लोगों की मौत हो गई थी, जबकि अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस बर्बर हमले की ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय और शक्तिशाली संगठन द्वारा निंदा किया जाना एक बहुत बड़ा कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है।

भारत हमेशा से यह मांग करता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के खिलाफ बिना किसी पक्षपात या दोहरे मापदंड के एकजुट होकर कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसे में नई दिल्ली घोषणापत्र में पहलगाम हमले का विशेष रूप से उल्लेख किया जाना केवल एक औपचारिक या सांकेतिक बयान नहीं है। यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत पर होने वाले आतंकवादी हमलों की गंभीरता को स्वीकार कर रहा है। इससे भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को और अधिक मजबूती से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

## आतंकवाद को धर्म और राष्ट्रीयता से अलग करने पर जोर
ब्रिक्स के सदस्य राष्ट्रों ने आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से जोड़ने की कोशिशों को सिरे से खारिज कर दिया है। घोषणापत्र में कहा गया है कि किसी भी आपराधिक कृत्य को किसी विशेष धर्म या समुदाय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके साथ ही, आतंकवाद का समर्थन करने वाले, साजिश रचने वाले और उसे वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने वाले सभी तत्वों को जवाबदेह ठहराने की बात कही गई है। दस्तावेज में इस बात की ताकीद की गई है कि कानून के नियमों के तहत सभी दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।

घोषणापत्र में आतंकवाद से निपटने के मामले में वैश्विक स्तर पर अपनाए जाने वाले दोहरे मापदंडों की भी सख्त आलोचना की गई है। सदस्य देशों ने कहा है कि आतंकवाद के मुद्दे पर राजनीतिक या कूटनीतिक सहूलियत के हिसाब से रुख बदलना अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक है। इसके साथ ही, ब्रिक्स देशों ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक कन्वेंशन (CCIT) को बिना किसी देरी के जल्द से जल्द अंतिम रूप देने और उसे स्वीकार करने की दिशा में ठोस कदम उठाने का आह्वान किया है। भारत लंबे समय से CCIT को लागू करने का पक्षधर रहा है ताकि दुनिया भर में आतंकवाद के खिलाफ एक एकीकृत कानूनी ढांचा तैयार हो सके।

## पश्चिम एशिया संकट पर संयम और कूटनीति की अपील
केवल आतंकवाद ही नहीं, बल्कि इस 45 पृष्ठों के विस्तृत दस्तावेज में पश्चिम एशिया में जारी मौजूदा तनाव और हिंसा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। BRICS सदस्य देशों ने इस क्षेत्र में सक्रिय सभी पक्षों से अत्यधिक संयम बरतने की अपील की है। घोषणापत्र में चेतावनी दी गई है कि ऐसे किसी भी कदम या कार्रवाई से बचा जाना चाहिए, जिससे क्षेत्र की स्थिति और अधिक बिगड़ सकती हो या तनाव में बढ़ोतरी हो सकती हो।

सदस्य देशों ने आम नागरिकों, बच्चों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसके अलावा, सभी देशों की राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की बात कही गई है। ब्रिक्स का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का कोई भी सैन्य समाधान नहीं हो सकता। इस स्थिति का टिकाऊ और न्यायसंगत समाधान केवल निरंतर संवाद, कूटनीतिक वार्ताओं और राजनीतिक प्रयासों के जरिए ही निकाला जा सकता है, जिससे इस क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता बहाल की जा सके।

## परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानदंड
नई दिल्ली घोषणापत्र में एक और अत्यंत संवेदनशील मुद्दे को प्राथमिकता दी गई है, जो नागरिक बुनियादी ढांचे और परमाणु सुविधाओं पर बढ़ते खतरों से जुड़ा है। घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी और सुरक्षा के तहत आने वाले शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों तथा नागरिक ढांचों पर होने वाले जानबूझकर किए गए हमलों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई है।

ब्रिक्स देशों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार के सैन्य संघर्ष, युद्ध या तनावपूर्ण स्थिति में भी परमाणु सुरक्षा, सुरक्षा प्रोटोकॉल और सेफगार्ड्स से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बनाए गए परमाणु प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचने से न केवल व्यापक जनहानि हो सकती है, बल्कि इसके विनाशकारी परिणाम पर्यावरण पर भी लंबे समय तक रह सकते हैं। इसलिए, वैश्विक कूटनीति के माध्यम से ऐसे प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुदाय का सामूहिक कर्तव्य है।

## भारत के लिए इस घोषणापत्र के व्यापक कूटनीतिक अर्थ
यदि 45 पन्नों के इस पूरे नई दिल्ली घोषणापत्र का निष्पक्ष विश्लेषण किया जाए, तो यह बात पूरी तरह से स्पष्ट हो जाती है कि यद्यपि इसमें सीधे तौर पर पाकिस्तान शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है, लेकिन इसके भीतर निहित नीतियां और प्राथमिकताएं पूरी तरह से भारत की सुरक्षा रणनीति के अनुकूल हैं। सीमा पार आतंकवाद से लेकर आतंकवादियों को मिलने वाली वित्तीय मदद और सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने तक, घोषणापत्र उन सभी प्रमुख बिंदुओं पर प्रहार करता है जिन पर भारत वैश्विक मंचों पर लगातार आवाज उठाता आया है।

इस संयुक्त घोषणापत्र की सफलता इस बात में निहित है कि इसने एक तरफ आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता का कड़ा संदेश दिया है, तो दूसरी तरफ पश्चिम एशिया के नाजुक हालात और परमाणु सुरक्षा जैसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के अन्य विषयों पर भी अपनी संतुलित और जिम्मेदार भूमिका निभाई है। भारत के लिए नई दिल्ली सम्मेलन के दौरान इस व्यापक सर्वसम्मति को हासिल करना एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मील का पत्थर साबित हुआ है।

## इसका आप पर असर
**पाठकों के लिए इस कूटनीतिक निर्णय के मायने:** नई दिल्ली ब्रिक्स घोषणापत्र में आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर लिया गया कड़ा रुख भारत की आंतरिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर दीर्घकालिक प्रभाव डालेगा।

- **भारत में:** आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहमति बनने से देश की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया तंत्र को मजबूती मिलेगी। इससे सीमा पार से होने वाली आतंकवादी गतिविधियों और उनकी वित्तीय फंडिंग पर नकेल कसने में मदद मिलेगी।
- **वैश्विक स्तर पर:** अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की कूटनीतिक स्थिति और अधिक मजबूत होगी। इससे दुनिया भर के देशों के साथ सुरक्षा, व्यापार और द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा और स्थायित्व मिलेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
**यह घोषणापत्र क्यों और कैसे पारित हुआ:** नई दिल्ली में भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन में सदस्य देशों ने वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और आतंकवाद पर आम सहमति बनाई।

- **भारत की दीर्घकालिक मांग:** भारत लंबे समय से बहुपक्षीय मंचों पर सीमा पार आतंकवाद, आतंकी फंडिंग और सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ कठोर अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की वकालत करता रहा है।
- **पहलगाम आतंकी हमला:** 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान जाने के बाद आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता की आवश्यकता और बढ़ गई थी।
- **पश्चिम एशिया और परमाणु सुरक्षा:** पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमलों की आशंका ने सदस्य देशों को शांति और कूटनीति का साझा संदेश देने पर मजबूर किया।

## सवाल-जवाब

### 1. ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणापत्र कितने पन्नों का दस्तावेज है?
यह संयुक्त घोषणापत्र कुल 45 पृष्ठों का एक विस्तृत दस्तावेज है, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया है।

### 2. क्या घोषणापत्र में पाकिस्तान का नाम लिया गया है?
नहीं, इसमें पाकिस्तान का नाम सीधे तौर पर नहीं है, लेकिन सीमा पार आतंकवाद और आतंकी पनाहगाहों के खिलाफ कड़े प्रावधान शामिल हैं।

### 3. घोषणापत्र में पहलगाम हमले के बारे में क्या कहा गया है?
दस्तावेज में 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई है, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी।

### 4. पश्चिम एशिया संघर्ष पर ब्रिक्स देशों का क्या रुख है?
ब्रिक्स देशों ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और संवाद तथा कूटनीति के जरिए शांतिपूर्ण समाधान निकालने का आह्वान किया है।

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