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  "type": "article",
  "title": "दिल्ली के जंतर-मंतर पर पुलिस की वर्दी पहनकर दंगा भड़काने की साजिश, जैश के संदिग्धों से हुआ बड़ा खुलासा",
  "summary": "पश्चिम बंगाल एसटीएफ की पूछताछ में जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्धों ने खुलासा किया है कि पाकिस्तानी आकाओं के इशारे पर जंतर-मंतर में पुलिस वर्दी में घुसपैठ और हिंसा भड़काने का प्लान तैयार किया गया था।",
  "content": "राष्ट्रीय राजधानी में जारी जन प्रदर्शनों को निशाना बनाने की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। पश्चिम बंगाल स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किए जाने के बाद यह बात सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियों की जांच में पता चला है कि पाकिस्तानी खुफिया तंत्र और आपराधिक नेटवर्क भारत के भीतर चल रहे छात्र आंदोलनों का फायदा उठाकर देश की आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने की योजना बना रहे थे। संदिग्धों को दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों में घुसपैठ करने और बड़े पैमाने पर दंगे भड़काने का जिम्मा सौंपा गया था।\n\nपुलिस यूनिफॉर्म पहनकर घुसपैठ की साजिश\nपश्चिम बंगाल एसटीएफ द्वारा की गई पूछताछ में यह खुलासा हुआ है कि सीमा पार बैठे आकाओं ने आरोपियों को असली पुलिस यूनिफॉर्म का इंतजाम करने के निर्देश दिए थे। इस पूरी योजना का मुख्य मकसद यह था कि आरोपी पुलिसकर्मी बनकर प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षाकर्मियों के बीच आसानी से घुल-मिल सकें। वर्दी पहनकर भीड़ में शामिल होने के बाद उनका काम आंदोलनकारियों की हर गतिविधि पर नजर रखना, पुलिस बल की तैनाती का आकलन करना और मौका मिलते ही हिंसा भड़काकर शांत प्रदर्शन को उग्र दंगों में बदलना था।\n\nपकड़े गए संदिग्ध और पाकिस्तानी नेटवर्क\nकार्रवाई के दौरान एसटीएफ ने दो मुख्य आरोपियों, मोहम्मद हमीम मंडल और उसकी महिला साथी अर्पिता सरकार को हिरासत में लिया। दोनों से लगातार की गई गहन पूछताछ में सामने आया कि वे सीमा पार बैठे कई आकाओं से सीधे निर्देश ले रहे थे। ये आका आबिद जट्ट 333, उजैर, राणा और हमद जैसे छद्म नामों का इस्तेमाल कर रहे थे। जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि ये सभी फर्जी नाम सीधे तौर पर पाकिस्तान की आईएसआई और खूंखार शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।\n\nएन्क्रिप्टेड ऐप्स और हनिट्रैप का इस्तेमाल\nगिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से बरामद डिजिटल उपकरणों और मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में सुरक्षा संबंधी अहम जानकारियां मिली हैं। आरोपी अपने आकाओं के साथ बातचीत करने और साजिश को अंजाम देने के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे थे। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचने के लिए वे मुख्य रूप से व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, एलिमेंट एक्स और सेशन जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे थे। इसके अलावा, यह नेटवर्क भारतीय राजनेताओं और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाने तथा संवेदनशील खुफिया डेटा हासिल करने के लिए हनिट्रैप की साजिशें भी रच रहा था।\n\nदीर्घकालिक रणनीति और सुरक्षा एजेंसियों की जांच\nएसटीएफ के आईजी गौरव शर्मा से मिली जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तानी आका अब भारत में होने वाले राजनीतिक प्रदर्शनों और जन आंदोलनों पर लगातार नजर रख रहे हैं। उनका मुख्य तात्कालिक उद्देश्य तुरंत बड़े हमले करने के बजाय धरातल पर अपना खुफिया ढांचा मजबूत करना और भविष्य के अभियानों के लिए आधार तैयार करना है। फिलहाल पश्चिम बंगाल एसटीएफ और केंद्रीय एजेंसियां इस पहलू की बारीकी से जांच कर रही हैं कि क्या इस साजिश को अंजाम देने के लिए कोई टीम दिल्ली पहुंची थी या राजधानी में किसी स्थानीय मददगार से संपर्क साधा गया था।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: संवेदनशील सार्वजनिक स्थलों पर सतर्कता बढ़ सकती है और जन आंदोलनों में पुलिस सुरक्षा जांच अधिक सख्त हो सकती है।\n\nदिल्ली में: जंतर-मंतर और आसपास के प्रदर्शन स्थलों पर अतिरिक्त नाकेबंदी और पहचान पत्रों का कड़ा सत्यापन देखने को मिल सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने किन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है?\nएसटीएफ ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े दो संदिग्धों, मोहम्मद हमीम मंडल और उसकी महिला साथी अर्पिता सरकार को गिरफ्तार किया है।\n\n2. जंतर-मंतर पर साजिश को अंजाम देने के लिए संदिग्धों को क्या जिम्मेदारी दी गई थी?\nआरोपियों को पुलिस की असली वर्दी पहनकर जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शन में शामिल होने, भीड़ की रेकी करने और हिंसा भड़काने का निर्देश मिला था।\n\n3. यह मॉड्यूल सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए किन ऐप्स का उपयोग कर रहा था?\nयह नेटवर्क एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स जैसे व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, एलिमेंट एक्स और सेशन का इस्तेमाल कर रहा था।\n\n4. संदिग्धों के पाकिस्तानी आका किन नामों से काम कर रहे थे?\nपाकिस्तानी आका आबिद जट्ट 333, उजैर, राणा और हमद जैसे छद्म नामों का उपयोग कर रहे थे, जिनका संबंध आईएसआई और शहजाद भट्टी नेटवर्क से माना जा रहा है।\n\n5. क्या यह नेटवर्क नेताओं या अधिकारियों की रेकी भी कर रहा था?\nहां, जांच के अनुसार यह नेटवर्क भारतीय राजनेताओं और पुलिस अधिकारियों से खुफिया जानकारी हासिल करने के लिए हनिट्रैप की साजिश रच रहा था।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-08-02",
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