# दिल्ली के यमुना घाट पर सुरेंद्र सिंह चौधरी ने सहयोगियों संग साढ़े चार घंटे में समेटा 585 किलो अपशिष्ट

> मध्य प्रदेश और कर्नाटक के बाद पर्यावरण कार्यकर्ता सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ बिट्टू तबाही ने दिल्ली में यमुना तट की सफाई शुरू की है, जहाँ पहले दिन 585 किलो कचरा हटाया गया।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/delhi-ke-yamuna-ghata-para-surender-singh-choudhary-ne-sahayogiyon-snga-sarhe-chara-ghnte-men-sameta-585-kilo-apashishta-36427 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुरेंद्र सिंह चौधरी, यमुना सफाई, बिट्टू तबाही, दिल्ली, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता अभियान, खेड़की दौला

पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को जनांदोलन बनाने का संकल्प लेकर निकले सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें लोग बिट्टू तबाही के नाम से भी जानते हैं, अब देश की राजधानी दिल्ली पहुंच चुके हैं। मध्य प्रदेश के जलस्रोतों और कर्नाटक के वनों में वृहद स्तर पर सफाई अभियान संचालित करने के बाद उन्होंने अब दिल्ली में यमुना तटों को गंदगी मुक्त करने का जिम्मा उठाया है। राष्ट्रीय राजधानी में तीन दिवसीय सफाई कार्यक्रम तय किया गया है, जिसके पहले ही दिन सुरेंद्र सिंह चौधरी और उनकी पूरी टीम ने घाटों पर सक्रिय रहकर लगभग साढ़े चार घंटे का गहन श्रमदान किया और किनारों से कुल 585 किलो अपशिष्ट एकत्रित कर उसे हटाया।

 यमुना नदी के किनारों पर स्वच्छता की यह पहल 20 सितंबर को प्रारंभ की गई थी। इस कार्य में अनेक उत्साही स्वयंसेवकों ने अपना योगदान दिया। अभियान के दौरान दल ने नदी के किनारों पर बिखरे प्लास्टिक कचरे, सड़ी-गली मालाओं, विसर्जित पूजा सामग्री, पुराने वस्त्रों और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल पदार्थों को एक-एक कर छांटा और बोरियों में भरा। सुरेंद्र सिंह चौधरी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इस पूरे अभियान का ब्योरा साझा करते हुए बताया कि लगभग साढ़े चार घंटे तक चली निरंतर मेहनत के फलस्वरूप 585 किलो कचरा जमा कर हटाया गया। उन्होंने रेखांकित किया कि जिस घाट पर कार्य शुरू किया गया, वहां धार्मिक आयोजनों और पूजा के पश्चात छोड़ी गई सामग्री, पॉलीथिन और सूखे फूल अत्यधिक तादाद में एकत्र थे।

 

## स्थानीय निवासियों का समर्थन और सामाजिक सहभागिता
 जब स्वयंसेवक घाट पर कचरा साफ करने में जुटे थे, तब आसपास रहने वाले कई नागरिक भी इस पहल को देखकर आगे आए। स्थानीय लोगों ने स्वयंसेवकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर गंदगी साफ करने में सहयोग दिया। नागरिकों के इस अभूतपूर्व जुड़ाव पर सुरेंद्र सिंह चौधरी ने सबका आभार व्यक्त किया। उनका मानना है कि जब आम लोग स्वयं जागरूक होकर फावड़ा और तगाड़ी उठाते हैं, तो उसका असर केवल एक नदी तट तक सीमित नहीं रहता। ऐसी सामुदायिक भागीदारी से पूरे समाज में पर्यावरण और स्वच्छता के प्रति गहरी चेतना जागृत होती है तथा अन्य नागरिकों को भी अपने आसपास के परिवेश को स्वच्छ रखने की प्रेरणा मिलती है।

 

## राजधानी के बाद गुरुग्राम का रुख
 यमुना किनारे निर्धारित तीन दिनों का यह विशेष स्वच्छता अभियान अभी दो दिन और लगातार जारी रहेगा। दल को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और भी बड़ी मात्रा में घाटों से कचरा निकाला जाएगा। दिल्ली में इस चरण को पूरा करने के बाद सुरेंद्र सिंह चौधरी का अगला गंतव्य हरियाणा के गुरुग्राम स्थित खेड़की दौला क्षेत्र तय किया गया है। इसका अर्थ यह है कि उनका यह अभियान दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अन्य संवेदनशील इलाकों में भी क्रमवार ढंग से आगे बढ़ेगा, जिससे पूरे एनसीआर में स्वच्छता का संदेश पहुंचे।

 

## अजनार नदी से तुराहल्ली जंगल तक का सफर
 सुरेंद्र सिंह चौधरी को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में पहली बड़ी पहचान मध्य प्रदेश की अजनार नदी की सफाई से मिली थी। उस समय उन्होंने लगभग 100 लोगों के एक बड़े दल को संगठित कर अजनार नदी के पुनरुद्धार का जमीनी बीड़ा उठाया था और भारी मात्रा में गंदगी हटाकर नदी के प्रवाह को स्वच्छ किया था। इसके पश्चात उन्होंने कर्नाटक का रुख किया, जहां बेंगलुरु से तकरीबन 20 किलोमीटर दूर स्थित तुराहल्ली वन क्षेत्र में विशेष अभियान चलाया गया। उस अभियान में भी उनकी टीम ने जंगलों में फेंका गया भारी प्लास्टिक और कचरा एकत्र कर जंगलों को प्रदूषण मुक्त बनाया था। मध्य प्रदेश की नदी से कर्नाटक के वन और अब दिल्ली की यमुना तक, वह लगातार अपने अभियान का दायरा बढ़ा रहे हैं।

 

## उद्योग जगत और वैश्विक स्तर पर सराहना
 जमीनी स्तर पर किए जा रहे इन ठोस अभियानों ने सोशल मीडिया जगत में भी जबरदस्त ध्यान आकर्षित किया है। प्रसिद्ध उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी उनके नदी सफाई के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए उनके अभियान से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। इस व्यापक प्रचार के बाद उनके कार्य को देश-विदेश के लाखों लोगों ने देखा और सराहा। अजनार नदी के कायाकल्प के बाद उनकी ख्याति सीमाओं से परे भी पहुंची। अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संस्था द ओशन क्लीनअप के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बोयन स्लैट ने भी उनके काम से प्रभावित होकर उन्हें नौकरी की पेशकश की थी।

 

## यमुना तट पर स्वच्छता अभियान का वास्तविक महत्व
 देश की राजधानी में बहने वाली यमुना नदी लंबे अर्से से अत्यधिक औद्योगिक प्रदूषण, अशोधित सीवेज और ठोस कचरे के गंभीर संकट से जूझ रही है। ऐसे जटिल हालात में सुरेंद्र सिंह चौधरी का यह प्रयास तटवर्ती कचरे को हटाने के साथ-साथ समाज को उसकी नैतिक जिम्मेदारियों का अहसास कराने पर केंद्रित है। यह सच है कि कुछ घंटों के सीमित श्रमदान से यमुना की दशकों पुरानी प्रदूषण समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो सकता, लेकिन ऐसे नागरिक अभियान आम जनमानस को नदियों के प्रति संवेदनशील बनाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। उनका स्पष्ट संदेश है कि जहाँ भी गंदगी दिखे, दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं आगे आकर सफाई की शुरुआत करनी चाहिए।

## इसका आप पर असर
यह अभियान दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के नदी घाटों पर कचरा प्रबंधन और जन-जागरूकता को सीधे प्रभावित करता है।

- **भारत में:** यह पहल नागरिकों को यह संदेश देती है कि जलस्रोतों में पूजा सामग्री और प्लास्टिक फेंकने से नदियां गंभीर रूप से प्रदूषित होती हैं। लोग अपने शहरों की नदियों और झीलों के संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर स्वयंसेवक बनकर ऐसे स्वच्छता प्रयासों से जुड़ सकते हैं।
- **दिल्ली-एनसीआर में:** यमुना किनारे रहने वाले और पूजा-पाठ के लिए घाटों पर जाने वाले नागरिकों को अब साफ-सुथरे तट देखने को मिलेंगे। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे नदी में प्लास्टिक और कचरा न फेंकें तथा आगामी खेड़की दौला अभियान में भाग लें।
- **स्वयंसेवकों के लिए:** पर्यावरण संरक्षण में रुचि रखने वाले युवाओं को सामाजिक पहलों में सीधे जमीनी अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलता है। इच्छुक नागरिक सोशल मीडिया और स्थानीय समूहों के माध्यम से इन अभियानों में श्रमदान कर सकते हैं।
- **सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए:** जलस्रोतों के किनारों पर सड़े हुए कचरे और प्लास्टिक के जमावड़े से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ता है। घाटों की नियमित सफाई से आसपास के रिहायशी इलाकों में स्वच्छता बनी रहती है और जलजनित रोगों के प्रसार में कमी आती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यमुना नदी के किनारों पर बड़े पैमाने पर प्लास्टिक, सूखे फूलों और पूजा सामग्री के लंबे समय तक जमा रहने के कारण यह सफाई अभियान आयोजित किया गया। धार्मिक गतिविधियों और नागरिक लापरवाही के चलते घाटों पर लगातार कचरे का अंबार लग रहा था।

- **सीधा कारण:** घाटों पर धार्मिक अनुष्ठानों के बाद विसर्जित की गई सामग्री, पॉलीथिन और सड़े-गले फूलों का ढेर नदी के किनारे जमा हो गया था। इस कचरे के कारण नदी का किनारा अत्यधिक गंदा हो चुका था, जिसे तत्काल साफ करने के लिए सुरेंद्र सिंह चौधरी ने यह पहल शुरू की।
- **पृष्ठभूमि और परिस्थितियां:** दिल्ली में यमुना नदी दशकों से सीवेज और ठोस अपशिष्ट के भारी दबाव से जूझ रही है। प्रशासनिक प्रयासों के बावजूद किनारों पर लगातार कचरा फेंके जाने से प्रदूषण की समस्या विकराल बनी हुई है।
- **पूर्व अनुभव:** सुरेंद्र सिंह चौधरी ने इससे पहले मध्य प्रदेश की अजनार नदी और कर्नाटक के तुराहल्ली जंगल में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाए थे। उन सफल अभियानों के अनुभव के आधार पर उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी के जलस्रोतों की ओर रुख करने का निर्णय लिया।
- **आगामी कदम:** दिल्ली में तीन दिवसीय सफाई पूरी करने के बाद यह दल हरियाणा के गुरुग्राम स्थित खेड़की दौला में अपना अगला अभियान शुरू करेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ बिट्टू तबाही ने दिल्ली में किस अभियान की शुरुआत की है?
उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर दिल्ली में यमुना नदी के घाटों से प्लास्टिक और कचरा हटाने के लिए तीन दिवसीय विशेष सफाई अभियान शुरू किया है।

### 2. अभियान के पहले दिन कुल कितना कचरा एकत्र किया गया?
20 सितंबर को शुरू हुए अभियान के पहले दिन लगभग साढ़े चार घंटे के श्रमदान में टीम ने 585 किलो कचरा नदी के किनारे से हटाया।

### 3. यमुना घाटों पर मुख्य रूप से किस प्रकार का कचरा मिला?
घाटों पर भारी मात्रा में विसर्जित पूजा सामग्री, सूखे फूल, मालाएं, पॉलीथिन और अन्य प्लास्टिक अपशिष्ट बिखरा हुआ मिला था।

### 4. दिल्ली के बाद बिट्टू तबाही का अगला पड़ाव कौन सा होगा?
दिल्ली में तीन दिवसीय अभियान संपन्न होने के बाद उनका अगला सफाई अभियान हरियाणा के गुरुग्राम स्थित खेड़की दौला में आयोजित होगा।

### 5. सुरेंद्र सिंह चौधरी को इससे पहले किन अभियानों से पहचान मिली थी?
उन्हें मध्य प्रदेश की अजनार नदी और कर्नाटक में बेंगलुरु के पास स्थित तुराहल्ली जंगल में चलाए गए व्यापक सफाई अभियानों से पहचान मिली थी।

### 6. किन प्रमुख हस्तियों और संस्थाओं ने उनके कार्य की सराहना की है?
उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया पर उनके काम की प्रशंसा की थी, जबकि द ओशन क्लीनअप के संस्थापक बोयन स्लैट ने उन्हें नौकरी का प्रस्ताव दिया था।

## प्रेरणा और सबक
सुरेंद्र सिंह चौधरी की यात्रा दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प और सामूहिक भागीदारी से किसी भी उपेक्षित स्थान का कायाकल्प किया जा सकता है।

- **खुद आगे बढ़कर पहल करें:** किसी व्यवस्था या प्रशासन की प्रतीक्षा करने के बजाय जहाँ भी समस्या दिखे, वहाँ स्वयं समाधान का हिस्सा बनना चाहिए।
- **सामुदायिक शक्ति को पहचानें:** जब एक व्यक्ति ईमानदारी से काम शुरू करता है, तो समाज और स्थानीय लोग अपने आप जुड़कर अभियान को बड़ा रूप दे देते हैं।
- **निरंतरता बनाए रखें:** मध्य प्रदेश से कर्नाटक और फिर दिल्ली तक का सफर यह सिखाता है कि पर्यावरण संरक्षण कोई एक दिन का काम नहीं बल्कि एक सतत मिशन है।
- **कचरे के प्रति जिम्मेदारी समझें:** अपने धार्मिक अनुष्ठानों या दैनिक जीवन में गैर-बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का उपयोग बंद करना ही जलस्रोतों को बचाने का सबसे ठोस उपाय है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._