दिल्ली में 23 अक्टूबर को बड़े विरोध प्रदर्शन की आशंका, बिना अनुमति के मार्च का ऐलान राजधानी दिल्ली में 23 अक्टूबर को एक बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया गया है, जिसके लिए पुलिस से कोई अनुमति नहीं ली गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग और एसआईआर के विरोध में होने वाले इस मार्च को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। राजधानी दिल्ली की सड़कों पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। आगामी 23 अक्टूबर को शहर में एक बड़े मार्च का ऐलान किया गया है, जिसके तहत हर गली और हर गांव को जंतर-मंतर बनाने की अपील की गई है। इस आंदोलन में छात्रों के साथ-साथ किसानों, मजदूरों, वकीलों, लेखकों और कलाकारों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इस बड़े आयोजन के लिए दिल्ली पुलिस से किसी भी तरह की औपचारिक अनुमति नहीं ली गई है। नया गठबंधन और प्रमुख मांगें इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन 'पीपल अगेंस्ट एसआईआर' नाम के एक नए गठबंधन द्वारा किया जा रहा है, जिसका गठन महज एक सप्ताह पहले ही हुआ है। इस मंच के बैनर तले छात्र, किसान, महिलाएं, आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधि एकजुट हो रहे हैं। इस गठबंधन की मुख्य मांग एसआईआर को पूरी तरह से रद्द करना और इसे अवैध घोषित करना है। इसके साथ ही उनकी मांग है कि मतदाता सूची को साल 2024 से पहले की स्थिति में बहाल किया जाए और एक व्यापक सामाजिक ऑडिट के जरिए इसे अपडेट किया जाए। प्रस्तावित मार्ग और संभावित हस्तियां सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस मार्च की शुरुआत कनॉट प्लेस के पास स्थित बंगला साहिब गुरुद्वारा से होगी और यह पटेल चौक के समीप चुनाव आयोग के दफ्तर तक जाएगा। आयोजकों का कहना है कि यदि पुलिस ने उनके रास्ते को रोका, तो वे सड़क पर ही 'पीपुल्स पार्लियामेंट' लगाएंगे और राष्ट्रगान गाकर वहां से हट जाएंगे। इस विरोध प्रदर्शन के लिए कई चर्चित चेहरों को आमंत्रित किए जाने का दावा किया जा रहा है, जिनमें अभिजीत दिपके, नेहा बोरा, आईशे घोष, प्रशांत भूषण, प्रकाश राज, राकेश टिकैत और तुषार गांधी के नाम शामिल हैं। हालांकि, इनमें से किसी भी व्यक्ति ने अभी तक इस मार्च में अपनी उपस्थिति या आमंत्रण मिलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कानूनी स्थिति और सुरक्षा के कड़े इंतजाम नई दिल्ली जिले में पहले से ही बीएनएसएस की धारा 163 लागू है, जिसके तहत बिना लिखित अनुमति के पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस निकालने, नारेबाजी करने या सार्वजनिक भाषण देने पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके बावजूद आयोजकों का साफ कहना है कि वे देश के किसी भी हिस्से में पुलिस की इजाजत नहीं लेंगे। गठबंधन ने पुलिस अधिकारियों, अर्धसैनिक बलों और जेल प्रशासन को चेतावनी दी है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी तरह के बल प्रयोग से बचें। दिल्ली के अलावा नोएडा और गाजियाबाद जैसे पड़ोसी शहरों में भी इस तरह के प्रदर्शन मार्च निकाले जाने की आशंका है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम करने की चुनौती खड़ी हो गई है। पूर्व की घटनाएं और छह प्रमुख मांगें यह विरोध प्रदर्शन अचानक सामने नहीं आया है, बल्कि इससे पहले भी इसी महीने कई ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। बीते 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर मार्च निकालने की कोशिश के दौरान अभिजीत दिपके, नेहा बोरा, आईशे घोष और प्रशांत भूषण समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया था। उस दिन सुरक्षा के भारी इंतजाम करते हुए करीब 41 हजार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था और लगभग 7 हजार लोगों को हिरासत में लिया गया था। इसके अलावा 6 अक्टूबर को संसद से चुनाव आयोग तक मार्च करते समय राहुल गांधी और विपक्षी दलों के कई सांसद भी हिरासत में लिए गए थे। ताजा प्रदर्शन के पीछे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने, उनके खिलाफ मुकदमा चलाने और चुनाव आयोग को प्राप्त कानूनी इम्यूनिटी को समाप्त करने जैसी छह तात्कालिक मांगें शामिल हैं। आयोजकों का तर्क है कि एसआईआर की प्रक्रिया से देश का लोकतंत्र खतरे में पड़ गया है और मतदाता सूचियों से लाखों नाम हटाए जा रहे हैं, जिसे वे बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसका आप पर असर दिल्ली और आसपास के इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों को इस बड़े विरोध प्रदर्शन के कारण यातायात में भारी बाधाओं और सुरक्षा जांच का सामना करना पड़ सकता है। • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में: 23 अक्टूबर को प्रस्तावित मार्च और संभावित रूट डायवर्जन के चलते कनॉट प्लेस, पटेल चौक और आसपास के मार्गों पर भयंकर ट्रैफिक जाम लग सकता है। यात्रियों को अपनी आवाजाही पहले से योजनाबद्ध करनी चाहिए ताकि असुविधा से बचा जा सके। • सुरक्षा और आवागमन: जगह-जगह भारी पुलिस बल की तैनाती और बेरिकेडिंग के कारण सार्वजनिक परिवहन और निजी वाहनों की गति धीमी हो सकती है। आम लोगों को सलाह दी जाती है कि वे मेट्रो का अधिक उपयोग करें और संवेदनशील क्षेत्रों की ओर जाने से बचें। ऐसा क्यों हुआ यह विरोध प्रदर्शन अचानक खड़े हुए असंतोष का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे चुनावी संस्थाओं की कार्यप्रणाली और मतदाता सूचियों में बदलाव को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद है। • बुनियादी कारण: गठबंधन का मुख्य उद्देश्य एसआईआर प्रक्रिया का विरोध करना है, जिसे वे अवैध मानते हैं और वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से जोड़कर देखते हैं। • संस्थागत विवाद: आयोजक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और चुनाव आयोग की कानूनी छूट को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं, जो पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे राजनीतिक तनाव की अगली कड़ी है। • अनुमति का अभाव: प्रदर्शनकारियों ने पूर्व में हुई कार्यवाहियों के बावजूद स्थानीय प्रशासन या पुलिस से अनुमति न लेने का निर्णय लिया है, जिससे टकराव की स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। सवाल-जवाब 1. दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कब आयोजित किया जाएगा? यह विरोध प्रदर्शन 23 अक्टूबर को आयोजित किया जाना तय किया गया है। 2. इस मार्च का आयोजन किसके द्वारा किया जा रहा है? इस मार्च का आयोजन 'पीपल अगेंस्ट एसआईआर' नामक एक नए गठबंधन द्वारा किया जा रहा है। 3. क्या इस प्रदर्शन के लिए पुलिस से अनुमति ली गई है? नहीं, आयोजकों ने इस मार्च के लिए दिल्ली पुलिस से कोई अनुमति नहीं ली है। 4. प्रदर्शनकारियों का मार्च कहां से कहां तक तय है? मार्च की शुरुआत बंगला साहिब गुरुद्वारा से होकर पटेल चौक स्थित चुनाव आयोग के दफ्तर तक तय की गई है। 5. इस आंदोलन की मुख्य मांग क्या है? मुख्य मांगों में एसआईआर को रद्द करना, वोटर लिस्ट को 2024 से पहले की स्थिति में लाना और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना शामिल है। https://trendkia.com/national/delhi-mein-23-october-ko-bade-virodh-pradarshan-ki-aashanka-50487 TrendKia — Har trend, sabse pehle.