{
  "type": "article",
  "title": "दिल्ली में चार पूर्व मुख्यमंत्रियों की हिरासत का मामला शीर्ष अदालत पहुंचा, रविवार को बैठेगी विशेष पीठ",
  "summary": "दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल समेत चार पूर्व मुख्यमंत्रियों को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय में रविवार को सुनवाई होगी।",
  "content": "देश की राजधानी में शनिवार को विपक्षी नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिए जाने की पुलिसिया कार्रवाई अब अदालत की चौखट पर पहुंच गई है। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने इस कदम के खिलाफ देश की शीर्ष अदालत में एक अर्जी दाखिल की है। हिरासत में लिए गए प्रमुख चेहरों में चार पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने याचिका को स्वीकार कर लिया है और रविवार के दिन एक विशेष पीठ इस पर सुनवाई करने वाली है।\n\nशांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार पर सवाल\nअदालत में दायर की गई अर्जी में पुलिस के इस कदम की वैधानिकता को सीधे तौर पर चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि नागरिकों और जन प्रतिनिधियों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के बुनियादी अधिकार को कुचलने के लिए एहतियातन हिरासत जैसे कड़े प्रावधानों का सहारा नहीं लिया जा सकता। अर्जी में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि हिरासत में लिए गए लोग विभिन्न राज्यों में मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इस कानूनी चुनौती में न केवल सड़कों से प्रदर्शनकारियों को पकड़े जाने का विरोध किया गया है, बल्कि विपक्षी नेताओं को उनके निजी आवासों से उठाए जाने पर भी गंभीर आपत्ति जताई गई है।\n\nजंतर-मंतर पर पसरा सन्नाटा और पुलिस की घेराबंदी\nशनिवार के इस घटनाक्रम के दौरान ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। प्रदर्शन के लिए सीजेपी से जुड़े हजारों कार्यकर्ता राजधानी के अलग-अलग हिस्सों से जंतर-मंतर की ओर बढ़े थे, मगर पुलिस की कड़ी नाकेबंदी के चलते एक भी कार्यकर्ता निर्धारित स्थल तक नहीं पहुंच सका। अभिजीत दिपके की ओर से बनाई गई रणनीति को नाकाम करते हुए सुरक्षाबलों ने इलाके में आने वाले प्रदर्शनकारियों को चुन-चुनकर हिरासत में ले लिया।\n\nममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल भी लिए गए हिरासत में\nइस आंदोलन को समर्थन देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी आगे आए, लेकिन वे भी धरना स्थल तक नहीं पहुंच सके। जैसे ही वे अपने घर से बाहर निकले, दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इसी तरह तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी मोर्चा खोला गया था। अपने सांसदों के साथ पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विरोध दर्ज कराने सड़क पर उतरीं। उन्होंने अपने मुंह पर काली पट्टी अथवा टेप लगाकर सांकेतिक विरोध जताया, लेकिन पुलिस ने उन्हें भी अपने साथ गाड़ी में बैठा लिया। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और माणिक सरकार को भी हिरासत में लिया गया।\n\nतीस हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और सख्त निगरानी\nपुलिस प्रशासन ने इस बार किसी भी तरह की अव्यवस्था रोकने के लिए बेहद व्यापक इंतजाम किए थे। सुरक्षा महकमे ने 20 जुलाई को हुए पिछले प्रदर्शन से सबक लेते हुए व्यापक सुरक्षा खाका तैयार किया था। राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए पुलिस, अर्धसैनिक बलों और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के करीब 30 हजार जवानों को तैनात किया गया था। चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए ड्रोन उड़ाए गए और केंद्रीय कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी रखी गई। जंतर-मंतर की तरफ जाने वाले सभी रास्तों को पूरी तरह सील कर दिया गया था, जबकि राजधानी की सीमाओं पर बैरिकेड लगाकर आने-जाने वाले सभी वाहनों की गहन तलाशी ली गई।\n\nइसका आप पर असर\nइस घटनाक्रम और शीर्ष अदालत की रविवार की सुनवाई से राजधानी में आवागमन और जनजीवन पर सीधा असर पड़ा है।\n\n• भारत में: राजनीतिक प्रदर्शनों और संवैधानिक अधिकारों को लेकर अदालत के रुख पर देश भर के राजनीतिक कार्यकर्ताओं की निगाहें टिकी रहेंगी। विशेष पीठ का यह फैसला भविष्य में विरोध प्रदर्शनों के दौरान एहतियातन हिरासत के नियमों को प्रभावित कर सकता है।\n• दिल्ली में: मध्य दिल्ली और सीमाओं पर कड़ी बैरिकेडिंग के चलते राजधानी में यात्रा करने वाले आम लोगों को ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ रहा है। जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के आसपास कई मार्ग पूरी तरह सील रहने से सामान्य यातायात प्रभावित रहेगा।\n• यात्रियों के लिए: दिल्ली की सीमाओं पर वाहनों की सघन तलाशी ली जा रही है, जिससे आवाजाही में अधिक समय लग सकता है। एनसीआर से राजधानी में प्रवेश करने वाले दैनिक यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह है।\n• सुरक्षा व्यवस्था: तीस हजार सुरक्षाकर्मियों और ड्रोन निगरानी के चलते संवेदनशील इलाकों में पुलिस की मौजूदगी बनी रहेगी। आम नागरिकों को प्रदर्शन स्थलों के आसपास जाने से बचने की आवश्यकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह घटनाक्रम सीजेपी के बैनर तले आयोजित विरोध प्रदर्शन और पिछली घटनाओं के मद्देनजर सुरक्षाबलों की पूर्व-तैयारी के कारण उत्पन्न हुआ।\n\n• विरोध प्रदर्शन का आह्वान: सीजेपी के बैनर तले हजारों प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर एकत्र होने की योजना बनाई थी। विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भी इस प्रदर्शन में शामिल होकर आंदोलन का समर्थन करने का फैसला किया था।\n• पिछली घटनाओं का असर: दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई को हुए पूर्ववर्ती प्रदर्शन के अनुभवों को देखते हुए किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या हिंसा को रोकने के लिए यह सख्त कदम उठाया। इसी रणनीति के तहत प्रदर्शनकारियों को उनके गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया।\n• एहतियातन कार्रवाई: सुरक्षा एजेंसियों ने भीड़ को जुटने से रोकने के लिए नेताओं को उनके घरों पर ही हिरासत में लेने और सड़कों को सील करने का रास्ता चुना। इसके परिणामस्वरूप मामला सीधे अदालत में चुनौती के रूप में पहुंच गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुप्रीम कोर्ट में याचिका किसने दायर की है?\nवरिष्ठ अधिवक्ता और टीएमसी की राज्यसभा सांसद मेनका गुरुस्वामी ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है।\n\n2. इस मामले पर अदालत में सुनवाई कब होगी?\nयाचिका पर सुनवाई के लिए रविवार को विशेष पीठ बैठेगी।\n\n3. किन पूर्व मुख्यमंत्रियों को हिरासत में लिया गया है?\nममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, पिनराई विजयन और माणिक सरकार को हिरासत में लिया गया है।\n\n4. प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में कितने सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं?\nसुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस, अर्धसैनिक बलों और बीएसएफ के करीब 30 हजार जवानों को तैनात किया गया है।\n\n5. याचिका में मुख्य कानूनी तर्क क्या दिया गया है?\nयाचिका में कहा गया है कि शांतिपूर्ण विरोध के बुनियादी अधिकार को दबाने के लिए एहतियातन हिरासत का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।",
  "url": "https://trendkia.com/national/delhi-men-chara-purva-mukhyamntriyon-ki-hirasata-ka-mamala-supreme-court-pahuncha-ravivara-ko-baithegi-vishesha-pitha-46085",
  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-10-10",
  "tags": [
    "सुप्रीम कोर्ट",
    "अरविंद केजरीवाल",
    "ममता बनर्जी",
    "मेनका गुरुस्वामी",
    "जंतर मंतर",
    "दिल्ली पुलिस",
    "विपक्षी नेता"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}