# दिल्ली एनसीआर में लोकल ईएमयू ट्रेनों के महिला डिब्बों में पुरुषों की अवैध घुसपैठ से यात्री परेशान, रेलवे पुलिस से सख्त पहरेदारी की मांग

> दिल्ली, पलवल और गाजियाबाद मार्ग पर चलने वाली लोकल ईएमयू ट्रेनों के महिला कोच में पुरुषों के घुसने से दैनिक महिला यात्री बेहद परेशान हैं। रेलवे पुलिस की कार्रवाई के बावजूद पुरुष अगले स्टेशनों और चलती ट्रेनों से दोबारा डिब्बों में चढ़ जाते हैं।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-07-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/delhi-ncr-men-lokala-emu-trenon-ke-mahila-dibbon-men-purushon-ki-avaidha-ghusapaitha-se-yatri-pareshana-relave-pulisa-se-sakhta-pa-12342 · **Language:** Hindi
**Tags:** हरियाणा समाचार, फरीदाबाद न्यूज, दिल्ली एनसीआर, भारतीय रेलवे, लोकल ट्रेन, महिला सुरक्षा, ईएमयू ट्रेन, आरपीएफ

राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्र फरीदाबाद, पलवल और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद मार्ग पर रोजाना सफर करने वाली कामकाजी महिलाओं के लिए लोकल ट्रेन का सफर सिरदर्द साबित हो रहा है। केंद्र सरकार और रेल प्रशासन द्वारा महिला यात्रियों की सुगम व सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ईएमयू (EMU) ट्रेनों में विशेष महिला बोगी की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद, इन आरक्षित डिब्बों में पुरुष यात्रियों की लगातार घुसपैठ ने दैनिक महिला यात्रियों की सुरक्षा और सहूलियत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सफर के दौरान हर दिन होने वाली इस अव्यवस्था और असहज स्थिति से परेशान होकर अब महिला यात्रियों ने रेल प्रशासन और रेलवे पुलिस से केवल स्टेशनों पर ही नहीं, बल्कि पूरी यात्रा के दौरान लगातार निगरानी रखने की जोरदार मांग उठाई है।

## नियमों की अनदेखी और भीड़ का दिया जाता है बहाना
लोकल ट्रेनों में सफर करने वाली महिलाओं का कहना है कि यह समस्या किसी एक दिन की नहीं है, बल्कि हर रोज की दिनचर्या बन चुकी है। पलवल-दिल्ली, दिल्ली-पलवल और पलवल-गाजियाबाद रेल मार्ग पर चलने वाली लोकल ट्रेनों में हर सुबह और शाम हजारों महिलाएं अपने कार्यस्थल, कॉलेज और संस्थानों के लिए आवाजाही करती हैं। जब महिलाएं आरक्षित बोगी में जबरन घुसे पुरुषों को बाहर निकलने के लिए कहती हैं या नियम याद दिलाती हैं, तो उन्हें सहयोग मिलने के बजाय तीखी बहस का सामना करना पड़ता है। पुरुष अक्सर यह तर्क देते हैं कि सामान्य डिब्बों में अत्यधिक भीड़ है या उन्हें अपने गंतव्य पर पहुंचने की जल्दी है। इस तरह के बहाने बनाकर वे महिला बोगी में डटे रहते हैं, जिससे महिलाओं को पूरी यात्रा के दौरान अत्यंत असहज और असुरक्षित माहौल में सफर करना पड़ता है।

## पुलिस चेकिंग के हटते ही फिर डिब्बे में घुसते हैं यात्री
दैनिक रेल यात्रियों ने इस पूरी अव्यवस्था के पीछे रेलवे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। असावटी से बल्लभगढ़ स्थित अपने कार्यालय के लिए रोजाना ट्रेन से सफर करने वाली कामकाजी महिला रेणु बताती हैं कि महिला बोगी में पुरुषों का प्रवेश एक स्थाई समस्या का रूप ले चुका है। **"जब पुलिस तैनात रहती है तो कोई पुरुष नहीं चढ़ता, लेकिन उनके जाते ही अगले स्टेशन पर वही हाल हो जाता है।"** उनके अनुसार, जब स्टेशन पर रेलवे पुलिस के जवान तैनात रहते हैं, तब कोई भी पुरुष यात्री महिला कोच में चढ़ने की हिम्मत नहीं करता। लेकिन जैसे ही पुलिसकर्मी अपनी रूटीन जांच पूरी करके आगे बढ़ते हैं या ट्रेन स्टेशन छोड़ती है, अगले ही स्टेशन पर पुरुष दोबारा उसी डिब्बे में सवार हो जाते हैं। कई बार तो पुरुष चलती ट्रेन में ही चढ़ने का जोखिम उठा लेते हैं। इस वजह से पुलिस की मौजूदगी का असर केवल कुछ मिनटों तक ही सीमित रह जाता है।

## चलती ट्रेन में चढ़ने और कूदने के खतरनाक हथकंडे
महिला बोगी में घुसने के लिए पुरुष यात्री बेहद खतरनाक और चालाकी भरे तरीके भी अपना रहे हैं। नियमित रूप से ट्रेन से यात्रा करने वाली नीलम का कहना है कि बल्लभगढ़ और असावटी जैसे व्यस्त स्टेशनों पर पुरुष यात्री चलती ट्रेन के पिछले दरवाजे से महिला बोगी में दाखिल हो जाते हैं। **"कई पुरुष पकड़े जाने से बचने के लिए स्टेशन आने से पहले ही चलती ट्रेन से कूद जाते हैं।"** जब उन्हें किसी स्टेशन पर पुलिस के खड़े होने की भनक लगती है, तो वे पकड़े जाने और जुर्माना भरने के डर से स्टेशन आने से ठीक पहले ही चलती ट्रेन से नीचे कूद जाते हैं। यह स्थिति न केवल रेल यातायात सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है, बल्कि ट्रेन में बैठी महिलाओं के मन में डर का माहौल भी पैदा करती है। महिलाओं का स्पष्ट कहना है कि इस तरह के जानलेवा और गैर-कानूनी रवैये पर रेल प्रशासन को तुरंत कड़ा रुख अपनाना चाहिए।

## शुरुआती स्टेशन से ही कब्जा जमाने का सिलसिला
कुछ पुरुष यात्रियों की हिम्मत इतनी बढ़ चुकी है कि वे मुख्य स्टेशनों से ही आरक्षित डिब्बों पर कब्जा कर लेते हैं। दैनिक यात्री तनीषा के मुताबिक, **"पुलिस को देखकर उतरने वाले पुरुष उनके जाते ही फिर से उसी डिब्बे में वापस आ जाते हैं।"** कई पुरुष दिल्ली स्टेशन से ही महिला कोच में बैठ जाते हैं। जब रास्ते में कहीं पुलिस की चेकिंग होती है, तो वे पल भर के लिए नीचे उतर जाते हैं और जैसे ही जांच दस्ता हटता है, वे तुरंत उसी डिब्बे में वापस चढ़ जाते हैं। बुजुर्ग यात्री संतोष भी इस बात की तस्दीक करती हैं। **"अलग बोगी बनने के बाद भी पुरुषों के नियम न मानने से महिलाओं को ही परेशानी उठानी पड़ती है।"** उनका कहना है कि उम्रदराज महिलाओं के लिए इस माहौल में सफर करना और भी कठिन हो जाता है। जब पुरुषों को नियम समझाने की कोशिश की जाती है, तो वे उतरने से साफ मना कर देते हैं। आरक्षित डिब्बे की सुविधा होने के बाद भी महिलाओं को अधिकार के सफर से वंचित होना पड़ रहा है।

## रेलवे पुलिस से स्थाई और निरंतर गश्त की मांग
इन तमाम परिस्थितियों को देखते हुए महिला यात्रियों ने रेल मंत्रालय और रेलवे पुलिस (RPF व GRP) से मांग की है कि केवल दिखावे की चेकिंग से समस्या का समाधान नहीं होगा। यात्रियों का कहना है कि यदि रेलवे ने महिलाओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए अलग कोच बनाए हैं, तो उन नियमों का शत-प्रतिशत पालन कराना भी प्रशासन की ही जिम्मेदारी है। महिलाओं ने सुझाव दिया है कि रेलवे पुलिस के जवानों को केवल प्लेटफॉर्म पर खड़ा रहने के बजाय ट्रेन के भीतर रहकर लगातार गश्त करनी चाहिए। जब तक महिला बोगी में नियमित और सख्त निगरानी की व्यवस्था लागू नहीं की जाएगी, तब तक नियम तोड़ने वालों के हौसले पस्त नहीं होंगे और महिलाओं की सुरक्षा अधर में लटकी रहेगी।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** उपनगरीय और लोकल ट्रेनों में महिलाओं के लिए आरक्षित कोचों में सुरक्षा नियमों का सख्त पालन देश भर की महिला यात्रियों की यात्रा को सुरक्षित और तनावमुक्त बनाएगा।

**फरीदाबाद और पलवल में:** दिल्ली-एनसीआर मार्ग पर दैनिक रूप से नौकरी और पढ़ाई के लिए सफर करने वाली हजारों कामकाजी महिलाओं को पुरुषों की घुसपैठ से राहत मिलेगी और ईएमयू ट्रेनों में सुरक्षित माहौल सुनिश्चित होगा।

## सवाल-जवाब

### 1. किन रेल मार्गों पर चलने वाली ईएमयू ट्रेनों में महिला बोगी में पुरुषों की घुसपैठ की समस्या आ रही है?
यह समस्या मुख्य रूप से दिल्ली-पलवल, पलवल-दिल्ली और पलवल-गाजियाबाद मार्ग पर चलने वाली लोकल ईएमयू ट्रेनों में आ रही है।

### 2. पुरुष यात्री महिला कोच में चढ़ने के लिए क्या बहाने बनाते हैं?
महिला कोच में घुसने वाले पुरुष यात्री अक्सर सामान्य डिब्बों में अत्यधिक भीड़ होने या अपने गंतव्य पर जल्दी पहुंचने का बहाना बनाते हैं।

### 3. पुलिस कार्रवाई के बाद भी पुरुष दोबारा बोगी में कैसे चढ़ जाते हैं?
पुलिस चेकिंग के दौरान पुरुष उतर जाते हैं, लेकिन जैसे ही जांच दस्ता आगे बढ़ता है या ट्रेन रवाना होती है, वे अगले स्टेशन या चलती ट्रेन के पिछले दरवाजे से दोबारा चढ़ जाते हैं।

### 4. महिला यात्रियों ने सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए क्या मांग की है?
महिला यात्रियों ने मांग की है कि रेलवे पुलिस को केवल स्टेशनों पर जांच करने के बजाय पूरी यात्रा के दौरान ट्रेनों के भीतर रहकर लगातार गश्त करनी चाहिए।

### 5. असावटी और बल्लभगढ़ के पास पुरुष यात्री पकड़े जाने से बचने के लिए क्या करते हैं?
बल्लभगढ़ और असावटी के पास पुरुष यात्री पुलिस से बचने के लिए स्टेशन आने से ठीक पहले चलती ट्रेन से नीचे कूद जाते हैं।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._