# दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का कहर, पंजाब में खेतों में धड़ाधड़ जल रही पराली

> दिल्ली-एनसीआर की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है और दूसरी तरफ पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं तीन हजार का आंकड़ा पार कर चुकी हैं। सूबे में प्रशासन की सख्ती के बावजूद किसान खेतों में आग लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-11-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/delhi-ncr-men-pradushana-ka-kahara-punjab-men-kheton-men-dharadhara-jala-rahi-parali-57570 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिल्ली प्रदूषण, पराली, पंजाब प्रदूषण बोर्ड, वायु गुणवत्ता, तरनतारन, फसल अवशेष

राजधानी दिल्ली और उससे सटे इलाकों में हवा का दम घुट रहा है और इस बीच पड़ोसी राज्यों से उठने वाला धुआं हालात को और भी ज्यादा भयावह बना रहा है। हरियाणा और पंजाब के खेतों में धान की कटाई के बाद अवशेषों में आग लगाने का सिलसिला जोर पकड़ चुका है। पंजाब के भीतर पराली दहन के मामलों ने तीन हजार की सीमा को पार कर लिया है और अधिकारी इस पर लगाम कसने के लिए लगातार जुर्माना व कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं।

 

## अधिकारियों की रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े
 पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की ओर से साझा किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से 6 नवंबर के बीच राज्य भर में कुल 3144 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। खेतों में आग लगने की ये घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। यदि केवल एक दिन पहले की स्थिति देखें तो पांच नवंबर तक यह संख्या 2787 रिकॉर्ड की गई थी, जो महज चौबीस घंटे के भीतर उछलकर 3144 पर पहुंच गई। इन मामलों में सबसे आगे तरनतारन जिला चल रहा है, जहां से सबसे अधिक तस्वीरें और मामले सामने आए हैं।

 

## सबसे ज्यादा प्रभावित जिले
 पराली जलाने के मामलों में तरनतारन सबसे ऊपर बना हुआ है, जहां अकेले 611 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसके अलावा फिरोजपुर में 410 मामले, संगरूर में 281 मामले, बठिंडा में 262 मामले और अमृतसर में 231 मामले सामने आए हैं। इन तमाम इलाकों में खेतों से आसमान की तरफ उठता काला धुआं सीधे तौर पर वायुमंडल में घुल रहा है। जब दिल्ली-एनसीआर का मौसम पहले से ही प्रदूषण की मार झेल रहा होता है, तब उत्तर भारत के इन खेतों से आने वाला यह धुआं स्थिति को और अधिक गंभीर बना देता है।

 

## प्रशासन की सख्ती और जुर्माने की कार्रवाई
 खेतों में आग लगाने वालों के खिलाफ सरकारी महकमा लगातार सख्त कदम उठा रहा है। पीपीसीबी के रिकॉर्ड के मुताबिक, अभी तक 1077 मामलों में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के रूप में कुल 54.55 लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया है। इसमें से प्रशासनिक अमले ने 30.05 लाख रुपये की वसूली भी कर ली है। हालांकि कार्रवाई सिर्फ आर्थिक दंड तक सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि कानून का शिकंजा भी कसा जा रहा है।

 

## कानूनी शिकंजा और लाल एंट्री का प्रावधान
 पराली जलाने की इन घटनाओं पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत कुल 795 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। यह विशेष धारा किसी लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी किए गए आदेश की अवज्ञा करने के मामलों में लागू की जाती है। इसके साथ ही फसल अवशेष फूंकने वाले किसानों की जमीन के रिकॉर्ड में कुल 931 लाल एंट्री की गई हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 301 लाल एंट्री तरनतारन जिले में और 98 एंट्री फिरोजपुर जिले के किसानों के खातों में की गई हैं। लाल एंट्री होने का सीधा मतलब यह है कि संबंधित किसान अपनी उस कृषि भूमि के एवज में बैंक से कोई कर्ज नहीं ले सकेगा और न ही उस जमीन को आगे बेच पाएगा।

 

## पुराने वर्षों के आंकड़े और सीजन की चुनौती
 विशेषज्ञों और जानकारों के अनुसार, अक्टूबर और महीने के बाद नवंबर के दौरान धान की फसल कटने के बाद किसानों के पास गेहूं की अगली बुवाई के लिए बहुत कम वक्त बचता है। इसी तय समय के दबाव और जल्दबाजी के कारण कुछ किसान खेत खाली करने का आसान रास्ता चुनते हैं और पराली जला देते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो पंजाब में यह समस्या हर साल चुनौती बनती है। साल 2025 के धान कटाई सीजन में कुल 5114 मामले सामने आए थे, जबकि वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 10909 और साल 2023 में 36663 तक पहुंच गया था। मौजूदा सीजन में अभी तक 3144 मामले दर्ज हो चुके हैं और कटाई का दौर पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, जिससे आने वाले दिनों में इन आंकड़ों के और अधिक बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

## इसका आप पर असर
पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं और बिगड़ते वायु प्रदूषण का सीधा असर आम नागरिकों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर पड़ रहा है।

- **स्वास्थ्य पर असर:** जहरीली हवा के कारण दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में रहने वाले बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीजों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खुले में सांस लेने से गले में खराश और आंखों में जलन जैसी परेशानियां बढ़ जाती हैं।
- **किसानों पर असर:** जिन किसानों के खेतों में आगजनी पकड़ी गई है, उनके जमीन रिकॉर्ड में लाल एंट्री की गई है जिससे वे बैंक से कर्ज लेने या अपनी कृषि भूमि बेचने में असमर्थ हो गए हैं।
- **कार्रवाई का दायरा:** पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रशासन द्वारा लगातार भारी जुर्माना लगाया जा रहा है और अब तक लाखों रुपये वसूले जा चुके हैं।
- **कानूनी कार्रवाई:** पराली दहन के मामलों में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने से दोषी किसानों पर कानूनी शिकंजा भी कसता जा रहा है।

## ऐसा क्यों हुआ
उत्तर भारत में हर साल धान कटाई के मौसम में पराली जलाने की समस्या विकराल रूप धारण कर लेती है, जिसके पीछे कई प्रशासनिक और कृषिगत कारण जिम्मेदार होते हैं।

- **फसल चक्र का दबाव:** धान की कटाई और अगली गेहूं की बुवाई के बीच बहुत कम समय मिलने के कारण किसान खेतों को तुरंत साफ करने के लिए पराली में आग लगा देते हैं।
- **समय और लागत की कमी:** फसल अवशेषों के वैज्ञानिक और सुरक्षित प्रबंधन के लिए पर्याप्त आधुनिक मशीनरी या वित्तीय सहायता समय पर न मिल पाना भी इस प्रवृत्ति को बढ़ावा देता है।
- **हवा के पैटर्न:** सर्दियों की शुरुआत के साथ उत्तर-पश्चिम दिशा से चलने वाली हवाएं पंजाब और हरियाणा के खेतों से उठने वाले धुएं को सीधे दिल्ली-एनसीआर की तरफ धकेल देती हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. पंजाब में 15 सितंबर से 6 नवंबर के बीच पराली जलाने के कितने मामले दर्ज हुए हैं?
इस अवधि के दौरान पंजाब में पराली जलाने के कुल 3144 मामले दर्ज किए गए हैं।

### 2. प्रशासन द्वारा अब तक कितना जुर्माना वसूला जा चुका है?
पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के रूप में लगाए गए जुर्माने में से अब तक 30.05 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है।

### 3. किसानों की जमीन पर लाल एंट्री का क्या नुकसान है?
लाल एंट्री होने के बाद किसान अपनी कृषि भूमि के बदले कर्ज नहीं ले सकता और न ही उसे बेच सकता है।

### 4. पराली जलाने वालों के खिलाफ कौन सी कानूनी धारा लगाई जा रही है?
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत एफआईआर दर्ज की जा रही है।

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