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  "title": "दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण रोकने को CAQM का सख्त कदम, पराली जलाने पर नकेल कसने 4 राज्यों में तैनात होंगे ड्रोन",
  "summary": "दिल्ली-एनसीआर में शीतकालीन वायु प्रदूषण से निपटने के लिए CAQM ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को धान कटाई के दौरान ड्रोन निगरानी के निर्देश दिए हैं। सैटेलाइट ट्रैकिंग से बचने के लिए शाम व रात में पराली जलाने वाले किसानों पर अब हाई-टेक कैमरों और जियो-टैगिंग की मदद से कार्रवाई होगी।",
  "content": "राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में हर साल सर्दियों की शुरुआत के साथ ही हवा की गुणवत्ता बेहद खराब स्तर पर पहुंच जाती है। इस गंभीर समस्या का एक मुख्य कारण पड़ोसी राज्यों में धान की कटाई के बाद खेतों में जलाई जाने वाली पराली को माना जाता है। इसी वायु प्रदूषण पर लगाम कसने के उद्देश्य से वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एक बड़ा और कड़ा तकनीकी कदम उठाया है। आयोग ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारों को निर्देश दिया है कि इस बार धान कटाई के दौरान खेतों पर ड्रोन के माध्यम से रियल-टाइम निगरानी रखी जाए। यह फैसला विशेष रूप से उन मामलों को ध्यान में रखकर लिया गया है जहां किसान निगरानी तंत्र को चकमा देने के लिए शाम या रात के समय खेतों में आग लगा देते थे। अब हवा में तैरते ड्रोन सीधे खेतों के ऊपर पहुंचकर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।\n\nसैटेलाइट ट्रैकिंग की सीमाओं को दूर करेगी ड्रोन तकनीक\nअब तक पराली जलाने की घटनाओं का पता लगाने के लिए प्राथमिक रूप से अंतरिक्ष में स्थित सैटेलाइट डेटा पर भरोसा किया जाता था। हालांकि, जमीनी अधिकारियों की समीक्षा में यह बात सामने आई कि केवल सैटेलाइट निगरानी प्रदूषण रोकने के लिए पूरी तरह पर्याप्त नहीं है। सैटेलाइट अपने पूर्व-निर्धारित समय और कक्षा के अनुसार ही तस्वीरें खींचते हैं। अधिकांश सैटेलाइट दिन के समय ही उड़ान पूरी कर लेते हैं। इसका फायदा उठाकर कई क्षेत्रों में किसान दोपहर 3 बजे के बाद या फिर देर रात के अंधेरे में खेतों में आग लगा देते थे। जब तक सैटेलाइट की अगली तस्वीर आती या संबंधित अधिकारियों तक सूचना पहुंचती, तब तक खेत में लगी आग बुझ चुकी होती थी और सबूत नष्ट हो चुके होते थे। ड्रोन निगरानी प्रणाली इसी बड़ी तकनीकी कमी को पूरा करने के लिए तैयार की गई है। ड्रोन न केवल धुएं और आग के गुबार को तुरंत पकड़ेंगे, बल्कि संबंधित खेत की सटीक जियो-टैगिंग करेंगे, उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करेंगे और प्रशासनिक अधिकारियों को लाइव फीड भेजेंगे, जिससे मौके पर तैनात टीमें बिना किसी देरी के पहुंच सकेंगी।\n\nराज्यों के लिए कड़े निर्देश और 14 अगस्त तक की समयसीमा\nवायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने इस संबंध में 28 जुलाई 2026 को एक विस्तृत आदेश जारी किया है। यह निर्देश पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के मुख्य सचिवों को भेजे गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि आगामी धान कटाई सीजन के दौरान पराली जलाने के संवेदनशील इलाकों और हॉटस्पॉट गांवों पर कड़ी नजर रखने के लिए ड्रोन का व्यापक प्रसार किया जाए। इसके साथ ही, प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा के लिए आयोग ने सभी चारों राज्यों को 14 अगस्त 2026 तक अपनी अनुपालन और एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) सौंपने का अंतिम निर्देश दिया है। राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ड्रोन का पूरा संचालन केंद्र सरकार के Drone Rules, 2021 के तय मानकों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप ही किया जाए।\n\nपटियाला जिले में सफल पायलट प्रोजेक्ट से मिली प्रेरणा\nक्षेत्रीय स्तर पर ड्रोन निगरानी लागू करने का यह निर्णय बिना किसी व्यावहारिक परीक्षण के नहीं लिया गया है। इस रणनीति की सफलता का आधार इसी वर्ष मई 2026 में आयोजित किया गया एक पायलट परीक्षण है। पंजाब के पटियाला जिले में चलाए गए इस प्रायोगिक प्रोजेक्ट के दौरान ड्रोन के जरिए खेतों की बेहद स्पष्ट और सटीक तस्वीरें प्राप्त की गई थीं। ड्रोन कैमरों ने पराली जलाने वाले विशिष्ट खेतों और उनके भू-स्वामियों की पहचान करने में अधिकारियों की मदद की थी। इस त्वरित पहचान के कारण प्रवर्तन टीमें तुरंत मौके पर पहुंचकर चालान और कानूनी प्रक्रिया शुरू करने में सफल रही थीं। पटियाला में मिले इस सकारात्मक परिणाम और उच्च सफलता दर के बाद ही वायु आयोग ने इसे चारों राज्यों के सभी प्रमुख कृषि क्षेत्रों में विस्तारित करने का निर्णय लिया।\n\nड्रोन की अनिवार्य तकनीकी विशेषताएं और केंद्रीकृत निगरानी\nआयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में ड्रोन के लिए कई आधुनिक तकनीकी मानक अनिवार्य किए गए हैं। निगरानी में इस्तेमाल होने वाले सभी ड्रोन में GNSS आधारित सटीक पोजिशनिंग प्रणाली, जियोफेंसिंग तकनीक, उच्च रिजॉल्यूशन वाले कैमरे और लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग की सुविधा होना अनिवार्य है। इसके अलावा, साक्ष्य की कानूनी वैधता बनाए रखने के लिए ड्रोन द्वारा रिकॉर्ड किए गए सभी फोटो और वीडियो फुटेज को कम से कम तीन महीने तक सुरक्षित डिजिटल आर्काइव में रखा जाएगा। डेटा विश्लेषण और निगरानी को सुचारू बनाने के लिए सभी राज्य स्तर पर एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड बनाएंगे। यह पूरा तंत्र आयोग के Integrated Command and Control Centre (ICCC) से जुड़ा रहेगा, जहां से दिल्ली में बैठे उच्च अधिकारी सीधे लाइव फीड देख सकेंगे और स्थिति का जायजा ले सकेंगे।\n\nकार्रवाई के साथ-साथ किसान जागरूकता और मशीनरी पर जोर\nप्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, पराली की समस्या का स्थायी समाधान केवल दंडात्मक कार्रवाई से संभव नहीं है, बल्कि किसानों के बीच बने भ्रम को दूर करना भी उतना ही आवश्यक है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसानों के बीच यह गलतफहमी बनी हुई है कि फसल कटाई के बाद डंठल में कीट और कीटनाशकों के अंश बचे रहते हैं, जिन्हें नष्ट करने के लिए खेत में आग लगाना ही एकमात्र उपाय है। सरकार इस भ्रांति को समाप्त करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाएगी। इसके साथ ही किसानों को पराली प्रबंधन वाली आधुनिक कृषि मशीनों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। बीते कुछ वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि इन मशीनों की उपलब्धता और उपयोग से पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय गिरावट आई है, और प्रशासन इस सकारात्मक बदलाव को और आगे बढ़ाना चाहता है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: उत्तरी भारत और दिल्ली-एनसीआर के निवासियों को सर्दियों में जहरीले धुंध और गंभीर श्वसन समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।\n• पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में: धान उत्पादक क्षेत्रों के किसानों को पराली जलाने के बजाय फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तुरंत चालान और कानूनी कार्रवाई होगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. CAQM ने पराली जलाने पर निगरानी के लिए क्या नए निर्देश जारी किए हैं?\nआयोग ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को आगामी धान कटाई सीजन के दौरान खेतों पर ड्रोन के जरिए रियल-टाइम निगरानी रखने का आदेश दिया है।\n\n2. सैटेलाइट निगरानी के बावजूद ड्रोन का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है?\nसैटेलाइट दिन में सीमित समय तस्वीरें लेते हैं, जिससे दोपहर 3 बजे के बाद या रात में पराली जलाने वाली घटनाएं रिकॉर्ड नहीं हो पाती थीं। ड्रोन इस कमी को दूर करेंगे।\n\n3. राज्यों को Action Taken Report (ATR) कब तक जमा करनी होगी?\nचारों राज्यों के मुख्य सचिवों को 14 अगस्त 2026 तक आयोग को अपनी विस्तृत अनुपालन और एक्शन टेकन रिपोर्ट सौंपनी अनिवार्य है।\n\n4. निगरानी के दौरान ड्रोन में कौन-सी आधुनिक तकनीकें होंगी?\nड्रोन में GNSS आधारित पोजिशनिंग, जियोफेंसिंग, हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और लाइव स्ट्रीमिंग जैसी सुविधाएं होंगी, जिनका डेटा CAQM के Integrated Command and Control Centre से जुड़ा रहेगा।\n\n5. क्या इससे पहले कहीं ड्रोन निगरानी का सफल परीक्षण हुआ है?\nहां, मई 2026 में पंजाब के पटियाला जिले में एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था, जहां स्पष्ट तस्वीरों और त्वरित कार्रवाई की सफलता के बाद इसे पूरे क्षेत्र में लागू किया गया।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-07-30",
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    "पराली दहन",
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    "कृषि प्रदूषण"
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